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चौपाल का दोहरा शतक: आगे जारी रखें या बंद कर दें? ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, January 1, 2011

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 

आज हमारी इस चौपाल का दोहरा शतक पूरा हो गया है। लेकिन अब सोच रहे हैं कि इस चौपाल को आगे जारी रखा जाए या फिर बंद कर दिया जाए। हम देख रहे हैं कि ब्लाग जगत में कोई तो एक ऐसा इंसान  है जो लगातार बार-बार नाम बदलकर फर्जी नाम से हमें परेशान करने का काम कर रहा है। कारण साफ है जबसे हमने ब्लाग चौपाल का आगाज किया है, यह किसी एक को रास नहीं आ रही है। हमारे ब्लाग राजतंत्र में भी लगातार फर्जी नाम से टिप्पणियां करके परेशान करने का काम किया जा रहा है। एक तो हमारे पास ऐसे भी समय कम रहता है, उस समय में से समय निकाल कर सोचा था कि एक अच्छा काम किया जाए लेकिन लगता है कि अच्छा काम करने वालों की ब्लाग जगत को जरूरत नहीं है। अब आगे जरूर सोचना पड़ेगा कि क्या किया जाए।
मार्क्सवादी क्यों नहीं **?* उत्तर आधुनिकतावादी प्रवृत्तियों की उत्पत्ति की व्याख्या करने के लिए हमें 1950 और 1960 के दशकों में पूंजीवाद की सफलताओं ( उपभोक्ता पूंजीवाद या तथाकथित समृध्द समाज के अभ्युदय) ...
 
उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकात शर्मा ने विभाग में शिक्षकों, क्रीड़ा अधिकारियों, ग्रंथपालों एवं कर्मचारियों को पदोन्नति और समयमान वेतनमान देने में विलम्ब को गंभीरता से लेते हुए अगले एक माह के भीतर पदोन्नति स...
 
जिन राज्यों ने मैनेजमेंट एस्पिरेंट्स को उनके ग्रेजुएशन के मार्क्स के आधार पर एडमीशन दिया है, एआईसीटीई ने उन्हें आड़े हाथों लेते हुए यह तय किया है कि बिना एंट्रेंस एग्जाम के मार्क्स के कोई भी स्टूडेंट पोस्ट...
 
 
विश्व भर में आर्थिक तंगी और भुखमरी के दोर से गुजर रहे चीन ने चाइना मेड उत्पाद विश्वभर में सस्ते दामों में उपलब्ध कराकर खुद अपने देश की आर्थिक स्थिति मजबूत कर ली हे और चप्पे चप्पे पर सस्ते दामों पर बेहतरीन ...
 
नमस्कार, आज वार्ता में विलंब हो गया। फ़टा फ़ट चलते हैं कुछ उम्दा लिंक्स पर। राहुल सिंग कह रहे हैं नया-पुराना साल बड़ा पक्षपाती है, यह काल का पहिया, जिसे चाहे अल्पावधि में उन्नति के शिखर पर ले जाकर बिठा दे और...
 
एक बार फिर से भारत में सब्जियों खासतौर पर प्याज, टमाटर और लहसुन की कीमतें आम आदमी की जेब में छेद करती दिख रही हैं. हालांकि केंद्र सरकार कोशिशों में लगी हुई है कि कीमतों को अर्श से वापस फर्श पर ना सही तो क...
 
रंग बिरंगे फूल चुने , चुन चुन कर माला बना , रोली चावल और नैवेध से , थाली खूब सजाई है , यह नहीं केवल आकर्षण , प्रवल भावना है मेरी , माला में गूथे गए फूल , कई बागों से चुन चुन , नाजुक हाथों से , सुई से धागे मे...
 
भारत की आजादी की लड़ाई में पत्रकारिता क्षेत्र का अहम योगदान रहा है.२०वीं शताब्दी की शुरुआत से ही जब स्वतंत्रता आन्दोलन जोर पकड़ने लगा था स्वतंत्रता प्राप्ति तक आन्दोलन का सक्रिय समर्थन करने के लिए पत्रकार...
 
पौष का महीना था, कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। घर के लोग अलाव जला कर खुद को गर्म रख रहे थे। तभी साथ के कमरे से बालक के रोने की आवाज आई। आवाज सुनकर सारा घर खुशी से झूम उठा। तभी दाई ने खबर दी– “गुरुजी लड़का हुआ है...
 
सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...जल्दी ही आप सभी को पढ़ भी पाऊँगा... जीने की कुछ उम्मीदें दो, और कहाँ कुछ माँगा था... थोड़ी सी अपनी साँसें दो, और कहाँ कुछ माँगा था... गंगा जमुना छुपी रहें पर, लब ये च...
 
आज जाना है की तड़प क्या होती हैं , किसी से बिछड़ने की कसक क्या होती हैं जितना करीब जाना था उसके वो उतना परे खिंच जाता हैं जब भी डूबना चाहा मैने उसमे, वो खुद सूखता जाता हैं कब समझेगा वो पागलपन मेरा , खुद ह...
 
आज वर्ष 2011 का पहला दिन, औरों का तो पता नहीं पर अपना दिन बहुत ही सुख के साथ गुजरा। कल रात से ही फोन और मोबाइल ने घनघनाना शुरू कर दिया था। लगातार आते बधाई और शुभकामना संदेश बता रहे थे कि लोग हमें याद भी...
 
स्कूल जाते वक्त हाथ थाम रखा था अपने बाबा का, इक छोटी सी बच्ची ने, कितना रोई थी वो स्कूल पहुँच कर, मत जाओ बाबा मुझे नहीं रहना यहाँ, क्या आप मेरे साथ नहीं रह सकते ? नहीं बेटा अभी मुझे जाना बहुत सारे...
 
कुछ जलते दिये हैं पास में, हर रात राह खोजता हूँ- पगडण्डियों के जाल में। चमकते वजूदों से है राजपथ रोशन, सहमता हूँ फटकते वहाँ, जहाँ पैरों के निशान न रहे। ...हाँ, मैं महत्वाकांक्षी नहीं, पर सपने खूब देखता हू...
 
किए फोन भेजे संदेश बसे हैं देश अथवा विदेश शुक्रिया धन्‍यवाद नहीं कहूंगा मन से दूंगा शुभ मंगलकामनायें सब सार्थक रचें सार्थक पढ़ें सार्थक बनें इ... 
 
हे प्रभु उन्हें सद्बुद्धि देना
हे प्रभु, नववर्ष, हिन्दू नहीं अंग्रेजी नववर्ष पर आपसे यह प्रार्थना है कि छत्तीसगढ के बारे में कुछ भी नहीं जानने वाले, विदेशों में रहने वाले अज्ञानियों को सद्बुद्धि देना। हो सके तो उन्हें क्षमा भी कर देना ...
 
सभी ब्लाँग जगत के साथियोँ को नये दशक के पहले वर्ष 2011 के लिये मेरी तरफ से ढेर सारी बधाईयाँ और शुभकामनाएँ ,दोस्तोँ मै उन लोगो से माँफी चाहूँगा जिन्होने मुझे मेल ,मैसेज किया और मैने उन्हे रिप्लाई नही किया ,..

द फ़र्स्ट डे प्रोमो ऑफ़ २०११ , पोस्ट झलकियां ….भईया जी ..इश्माईल
आप सबको वर्ष २०११ के शुभआगमन पर बहुत बहुत शुभकामनाएं WEDNESDAY, DECEMBER 29, 2010 'ईश्क का मंजन' गीत का भावार्थ प्रस्तुत मादक गीत हिन्दी सिनेमा जगत की आने वाली बहुचर्चित फिल्म 'यमला पगला ...
 
काँपता सा वर्ष नूतन आ रहा, पग डगमगाएँ साल जाता है पुराना सौंप कर घायल दुआएँ आरती है अधमरी सी रोज बम की चोट खाकर मंदिरों के गर्भगृह में छुप गए भगवान जाकर काम ने निज पाश डाला सब युवा बजरंगियों पर साहसों को जक...
 
किसी धर्मग्रंथ या शोध में लिखा तो नहीं, मगर सच है... प्यार जितनी बार किया जाए, चांद, तितली और प्रेमिकाओं का मुंह टेढ़ा कर देता है.. एक दर्शन हर बार बेवकूफी पर जाकर खत्म होता है... आप पाव भर हरी सब्ज़ी ...
 
समय दौड़ रहा है। आज सूरज ने भी अपनी रजाई फेंक दी है। किरणों ने वातायन पर दस्‍तक दी है। हमने भी खिड़की के पर्दे हटा दिए हैं। दरवाजे भी खोल दिए हैं। सुबह की धूप कक्ष में प्रवेश कर चुकी है। फोन की घण्‍टी चहकन...
 
बड़ा पक्षपाती है, यह काल का पहिया, जिसे चाहे अल्पावधि में उन्नति के शिखर पर ले जाकर बिठा दे और जिसे चाहे, पतन के गर्त में गिराकर नेस्तनाबूद कर दे, किन्तु इसकी निर्लिप्तता भी प्रशंसनीय है, इसके नीचे चाहे को...
 
 आप सोच रहे होंगे कि ये 'मुबारकबाद' के साथ 'मगर'? पर मैं भी क्या करूँ? जहाँ आपको मुबारकबाद देते हुए मुझे खुशी हो रही है वहीं यह सोचकर मेरे हृदय में पीड़ा भी हो रही है किः - हमने कैसे अपने स्वयं के साल को...
 
आज मै दस की हो ली अब ग्यारहवें वर्ष में प्रवेश किया है चाहती हूँ आप सभी इस आने वाले मेरे दशक में मेरे साथी बनें ये मेरे जीवन का एक बहुत ही उन्नत काल है यहीं से तो मुझे दिशा मिलेगी और इसी में मोहब्...
 
आज संकल्प लेना ही होगा की हम चुप नहीं रहेंगे चाहे इसके लिए हमें कोई सी भी क़ुरबानी देनी पड़े क्योकि हमारी ख़ामोशी से गलत प्रोत्साहित होता है और सही हतोत्साहित होता है . हमारी चुप्पी तोड़ने का मतलब हमारी और हम...
 
प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों आप सबको शनिवार की घणी राम राम और साथ ही आज नये साल 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं. साल 2011 की प्रथम और ताऊ पहेली के *अंक 107 *में आपका हार्दिक स्वागत है. अब फ़टाफ़ट...
 
टेस्ट क्रिकेट में भारत के सबसे सफल कप्तान बनने की तरफ बढ़ रहे महेंद्र सिंह धोनी को भले ही भाग्य का धनी कहा जाता हो, लेकिन जब टॉस की बात आती है तो अधिकतर मौकों पर सिक्का उनका पक्ष नहीं लेता है। भारत ने ...
 
२०११ मे , मै अपनी हर संभव कोशिश करुँगी की हिंदी ब्लॉग मे किसी भी प्रकार के अश्लील चित्र देखूं तो आपत्ति जाता दू और नारी ब्लॉग पर उस लिंक को देकर लोगो को भी आपत्ति जताने का एक सार्थक मौका दूँ । २०११ मे , मै...
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 

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बैटन के खेल का पुलिस अधिकारी ने निकाला तेल, मैने भी किया क्वीन्स बैटन का स्वागत-ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Friday, August 13, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
अपने राज्य में बैटन का ऐतिहासिक स्वागत तो जरूर हुआ, लेकिन एक पुलिस वाले के कारण हुए हादसों की वजह से हम लोगों को शर्मसार भी होना पड़ा। ....
 
 
कामनवेल्थ गेम्स अच्छी कम खराब बातों को लेकर चर्चा मे हैं।इस पर देश की राजनीति गर्माई हुई है और सारे देश मे इस पर बहस भी चल रही है।सबकी अपनी-अपनी ढपली है और सबका अपना-अपना राग है।कोई इसे गुलामी का प्रतीक कह..
 
बैटन रिले के लिए खेल विभाग ने जिस तरह से लगातार कई महीनों से योजना बनाई थी उसके बाद भी ये सोचने वाली बात है कि आखिर बैटन का खेल क्यों फेल हो गया। इसके कारणों की जब पड़ताल की गई तो मालूम हुआ कि ऐन समय पर प...
 
अपने आप पास घटित होने वाली छोटी-छोटी साधारण घटनाओं व बातों से उषा राठौड़ बड़ी गंभीर बात निकाल लाती है और उस साधारण सी बात की हमारी आदतों से तुलना कर एक बहुत बड़ा सन्देश दे जाती है | एसा ही एक सन्देश उन्होंने
 
आज दो दोहे, कल तीन, परसों चार, दस तक होने के बाद ग़ज़ल प्रारंभ करूंगा. तब तक मेरा टायपिंग का आपका पढ़ने का अभ्यास हो जायेगा . इस बीच कोई विशेष व्यस्तता नहीं है सो टिपियाना भी जारी रहेगा (लेन-देन के 
 
 
क्या आप कैंसर से युद्ध में आलोक तोमर को सही राय दे सकते हैं? *- (डॉ.)कविता वाचक्नवी  हिन्दी पत्रकारिता व लेखन से जुड़े लोग आलोक तोमर जी से परिचित ही हैं, जो नए लोग इस नाम...
 
भारत की विश्व को देन* भारत की आत्मा को समझना है तो उसे राजनीति अथवा अर्थ-नीति के चश्मे से न देखकर सांस्कृतिक दृष्टिकोण से ही देखना होगा। भारतीयता की अभिव्यक्ति राजनीति के द्वारा न होकर उसकी संस्कृति के...
 
गाँधी जी' भी नहीं रहे....'सुभाष जी' भी चल बसे...और 'जवाहर लाल जी' भी कब के ऊपर पहुँच गए...अब तो मेरी भी तबियत कुछ ठीक नहीं रहती...ना जाने कब लुढक जाऊँ?…पता नहीं इस देश का क्या
 
मेरे घर की दीवालों ने बातें करना सीख लिया है गूंगे कमरे के आलों ने कुछ-कुछ कहना सीख लिया है अब उतना भी ना तन्हा होता जब मैं तन्हा होता हूँ.. तन्हाई ने मेरी मुझसे चुहलें करना सीख लिया है अंधियारे कमरे ...
 
पान वैसे ही लबों की शान माना जाता है . राजा से लेकर गरीब आमजन भी पान का स्वाद लेने से नहीं चूकते हैं . हमारे देश में पान के शौकीन हर जगह मिल जाते हैं . कुछ पान में तम्बाखू डालकर पान का स्वाद लेते हैं तो कु...
 
कुछ पल का मिलना फिर बिछड़ जाना क्या जरूरी है ? कुछ देर रुके होते दो बात की होती कुछ अपनी कही होती कुछ मेरी सुनी होती कुछ दर्द लिया होता कुछ दर्द दिया होता कुछ अपनी बेचैनियों का कोई राज़ दिया होता कुछ वाद...
 
 
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 

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प्रेमचंद के साथ रफी को भी कर लो यादः- ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Friday, July 30, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

 
 
एक तरफ जहां आज मुंशी प्रेमचंद की जयंती है तो दूसरी तरफ महान गायक मो. रफी साहब की पुन्यतिथि है। हमने ब्लाग जगत में प्रेमचंद को याद करते कुछ ब्लागरों को देखा है, पर रफी साहब को किसी ने याद नहीं किया है। चलिए हम ही उनकी याद दिला देते हैं।
 
 
मनोज कुमार आज का सारा दिन हम मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर समर्पित कई पोस्ट इस ब्लॉग पर प्रस्तुत करेंगे! इसी श्रृंखला की प...
 
 
मुंशी प्रेमचन्द जयन्ती पर विशेष* मुंशी प्रेमचन्द एक अच्छे साहित्यकार थे उन्होनें हिन्दी,अंग्रेजी एवं उर्दू तीनों भाषाओँ में अच्छी रचनाएं प्रस्तुत की। उन्होंने अपनी रचनाओं में गरीबों क...
 
  *शून्य* !! विचारों की आँधी अगर शून्य हो जाए तो ? मन की उद्वेलना शून्य हो जाए तो ? या फिर भारत में नेताओं कि संख्या शून्य हो जाए … शून्यमय संसार में क्या होगा …शांति ? या फिर...
 
शुक्र है ! मेरे घर की दीवारें विश्वास के फौलाद से बनीं हैं, वर्ना ये कल के बच्चे बतकही के पत्थर फेंकने से बाज़ नहीं आते कितने मासूम हैं ये ! इतना भी नहीं समझते ! मेरा घर शीशे का नहीं है जो टूट जाएगा....!! 
राहुल महाजन एक बार फिर अपनी हरकतों की वजह से विवादों के बवंडर में फंस गये हैं। उनकी पत्नी डिंपी गांगुली ने मारपीट और गाली-गलौज करने का आरोप लगाते हुए उनका वरली स्थित घर छोड़ अपने पिता के यहां चली गई हैं। ...
 
यही सही: सप्तक: "मेरे जीवन में एक बड़ा विस्फोट था बेटी का मेरे जीवन में आना और उससे भी बड़ा उसके काफी अरसे बाद मां-बाबूजी की जीवन में वापसी इस प्रकार खत्म ह..." सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ 
टमाटर अब वे टमाटर नहीं रहे जो खुद होते थे लाल अब वे कर रहे हैं खरीदने वालों को लाल देखिए गिफ्ट करने का बन गए हैं माल सावन आया झूम के लेकर आया है सम्‍मान युवा कवि है कौन बतलाएगा अभी रहेगा मौन लिखावट...
 
आज फेसबुक पर विचरण करते हुए एक मित्र के फेसबुक एल्बम में एक विज्ञापन पट्ट का चित्र मिला जो यहाँ प्रस्तुत है आप भी इस विज्ञापन पट्ट को देखिये और सोचिये इसकी भाषा के बारें में मेरी शेखावाटी: ब्लोगिंग के दु...
 
 ये स्साला!…कम्प्यूटर भी गज़ब की चीज़ है ....गज़ब की क्या?..बिमारी है स्साला…बिमारी| एक बार इसकी लत पड गयी तो समझो कि..बन्दा गया काम से|कुछ होश ही नहीं रहता किसी बात का..ना काम-धन्धे... 
 
एक लम्बा अरसा हो गया तेरा दीदार किया था , एक मुद्दत तक मेरे दिलने तुझे चाहा था , उस बेकरारी में भी एक करार था .... वो हकीकत थी या सिर्फ मेरे मन का वहम था ??? पर जो भी था बड़ा ही लाजवाब था .... वो गली के नुक्...
 
 
 
 
  अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 

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तू भी मान उड़न तश्तरी का अभियान-तभी बचेगी सबकी जान- ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Monday, July 19, 2010

  सभी को नमस्कार करता है आपका राज

आज इस बात की बहुत जरूरत है कि पर्यावरण को सुरिक्षत रखा जाए। इसके लिए पेड़ लगाने होंगे। अपने राज्य छत्तीसगढ़ में तो इसका आगाज हो चुका है, अब सभी को इसके बारे में सोचना चाहिए। ...
 
 
परसों ज्ञात हुआ कि पत्रिका सोपानStep के जुलाई २०१० के अंक में नारदवाणी कॉलम में, जिसे भाई अविनाश वाचस्पति जी नियमित लिख रहे हैं, में एक आलेख छपा, जिसका शीर्षक था ’ जुलाई भी बन गयी जून,सखी री आया न मानसून’...
 
निष्कपट निश्छल चेहरा * **हिलते हैं, ओष्ठ अधर दोनों न बोल पाते हुए भी *अपनी प्यारी सूरत औ **आँखों के भावों ..
 
पल क्षणों में क्षण घंटों में और घंटे दिन-रात में परिणित होते जाते हैं और समय अबाध गति से बीतते जाता है। काल का पहिया ज्यों-ज्यों घूमता है उम्र तिल-तिल करके घटते जाता है। शैशवकाल लड़कपन में लड़कपन किशोरावस्था..

एक ठेकेदार ने जबलपुर में विभाग के कर्मचारियों की सुरक्षा की चिंता किये वगैर एक विद्युत ट्रांसफारमर पोल क्रमांक - पी. ८ ई पर कुंए के ऊपर डी.पी. खड़ी कर कुंए के ऊपर २०० के.व्ही.ए० का ट्रांसफारमर लगा दिया है 
 
क्या करूँ मेरी कल्पना की उड़ान तो मुक्त आकाश में बहुत ऊँचाई तक उड़ना चाहती है लेकिन मेरे पंखों में इतनी ताकत ही नहीं है और मैं सिर्फ पंख फड़फड़ा कर ही रह जाती हूँ ! क्या करूँ मेरे ह्रदय में सम्वेदनाओं का...
 
तू सामने हो तो दिल बहक जाता है ! तेरे हाथ में परिंदा भी हो तो दिल जल जाता है ! तेरे होटों के रस को महसूस करने से ही मुझ पर मदहोशी तारी होती है ! 
 
मूलवासी* (लघुकथा) -- सत्येन्द्र झा [image: J0145810] "आपका नाम ?" "संतोष।" "पिता का नाम ?" "जी आत्मबल" "घर का पता ?" "घर नहीं है, साहब ! किराए के मकान में रहता हूँ। पता उसी दिन बदल ज...
 
प्राचीन काल से ही हमारे पूरे देश में लोक कथाओं, गीतों, पहेलियों तथा लोकोक्तियों इत्यादि द्वारा गूढ से गूढ बातों को सरलता से समझाने की परंपरा रही है। खासकर कथा-कहानियां सदा से रोचक, भावप्रद तथा शिक्षापूर्ण ...
 
मै प्रेम नगर की rअहने वाली॥ प्रेम की प्रेम दीवानी हूँ,। वह तो मेरा प्रेम दीवाना॥ मै उसकी घरवाली हूँ॥ सात साल पर बात हुयी थी॥ तेरह साल में हुयी मुलाक़ात॥ सोलह साल की भइल उमारिया॥ सूझे लाग उल्का पात॥ ..

जो लोग रंगकर्म से जुड़े हैं वे इस बात को बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि नाटक में अभिनय के लिये स्त्री पात्र जुटाना कितना कठिन काम है । निर्देशक को बहुत नाक रगड़नी पड़ती है तब कहीं जाकर नाटक में काम करने के लि...
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 

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बच्चे हैं या बाप रे बाप.., डांटा तो बच्चे छलांग लगा देंगे या फिर.-ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Tuesday, July 13, 2010

 
 सभी को नमस्कार करता है आपका राज

आज ब्लाग चर्चा करने बैठे तो देखा कि बच्चों पर बहुत कुछ लिखा गया है, ऐसे में हमने सोचा कि आज की चर्चा में इसी को महत्व दिया जाए। हमारी कोशिश रहती है कि कम से कम दो ऐसी पोस्ट हों जिसका विषय एक जैसा हो ते उसे मिलाकर शुरुआत की जाए। चलिए देखे कौन क्या लिखता है....


स्पाइडरमैन...* *सारे घर के बदल डालूंगा..*. *चॉकलेट की बच्ची तू छिपी है कहां...* *छलकाए जाम, आइए आपकी आंखों के नाम..
 
पता नहीं ये मेरा दिल है या कोई सच जो मुझे कुछ बता रहा है एक पुल नाज़ुक से दिल का बेरहमी से जला कर आई हूँ तुम्हारे पास... मगर यहाँ कुछ पराये से साए क्यूँ नज़र आते हैं जिन्हें तुम अपना नहीं कहते हो.......
 
अफगानिस्तान के तालिबान आतंकी गिरोह ने अमेरिका से लड़ने के लिए बंदरों को आतंकी प्रशिक्षण देना आरंभ कर दिया है। इस तरह की रिपोर्ट चीन,अमेरिका और ब्रिटिश मीडिया में छपी हैं। कुछ पत्रकारों ने बंदरो...
 
मन बेचैन है बेहद्।पता नही कल अख़बार की सुर्खियां क्या होगी?शाम ढलते ही खबर मिली की बस्तर मे आधा दर्ज़न जगहों पर पुलिस और नक्सलियों के बीच फ़ायरिंग शुरू है।अब भला बताईये ये भी भला कोई खबर है,कि फ़लाना जवान मारे...
 
ओ अध्यापक, अब तुम्हारे दिन चले गये। अरे जब बच्चों को जन्मने वाले माता-पिता की कोई औकात नहीं रही तो मास्टर की क्या बिसात? चुपचाप स्कूल में आओ, पढ़ाओ और अपने घर जाओ। बच्चे स्कूल में क्या कर रहे हैं, पढ़ रहे है...
 
बिना किसी भूमिका के फिर एक बिल्कुल नई ग़ज़ल. मैं जो कहना चाहता हूँ, शेर तो कह रहे है. शुभकामनाएं चाहिए, दुवाओं में याद करते रहें, बस....* पद क्या पाया मद है भाई वैसे बौना कद है भाई हँसना भूल गया बेचारा ...
 
साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा शताब्दी की कालजयी कहानियों का चयन किया गया है। चयनित कहानियां किताब घर प्रकाशन से ४ खण्डों में प्रकाशित हुई है। विगत सौ वर्षों से कथा लेखकों में छत्तीसगढ़ के गांव लिमतरा से ...
 
तुम्हारा साथ पाने की उद्विग्नता ... हड्डियों के ढांचे से चिपके मांस में छिपी रक्त धमनियों को उकसा देती है . चाहतें परछाइयाँ बन कर पीछा नहीं छोडती... मानो तिल की तरह शरीर पर पड कर या..

दिल रोता है में- अस्मत दो, तो ही छोड़ेंगे तुम्हारे बाप को'
महिला से प्राप्त जानकारी के अनुसार उसका पति किसी प्रकरण में पिछले डेढ़ साल से जेल में बंद है शुक्रवार को उक्त महिला के भाई को पुलिस बिजली बिल न देने के कारण घर से उठाकर ले गई थी जिसके संबंध में वह महिला अप...
 
हिंदी ब्लॉगजगत के पास एक ऐसी उत्कृष्ट लेखिका हैं , जिनकी कथा-कहानियों में परिस्थितियों से उत्पन्न विविध प्रकार के भौन्जालों के बीच विवशताभरी छटपटाहट का खुला दस्तावेज सम सम्मुख आता है , साथ ही जन-समुदाय के ...
 
मनोज कुमार के खुली आँखों के सपने
 
प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पन्त ने कविता की परिभाषा देते हुए कहा है, *"कविता परिपूर्ण क्षणों की वाणी है।"* मतलब कविता काप्रस्फुटन तब तक नहीं हो पाता जब तक कि आपके मनः-मष्तिष्क का विचार-घट पु...
 
पहली कहानी काफी पुरानी है। सबने पढी-सुनी होगी। एक राजकुमारी को उसकी सौतेली माँ बहुत तंग करती थी। एक दिन हैरान परेशान राजकुमारी अपने बागीचे में घूम रही थी कि उसे वहां एक मेढक दिखाए पड़ा। मेढक ने राजकुमारी से...
 

*जब आपके घर कोई खास मेहमान आए और आपने उनसे पूछा ‘क्या लेंगें ?’ और मेहमान ने कहा कि ‘कुछ नहीं’ तो आप लगते हैं झुंझलाने कि आखिर कहां से लाउं ‘कुछ नहीं’ .... आखिरकार अब इस समस्या का भी हल मिल ही गया...आप खुद...
 
प्रिय बन्‍धु संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या का तीसरा अभ्‍यास आज प्रकाशित किया है इसका लिंक नीचे दे रहा हूँ । संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या - तृतीय: अभ्‍यास: आपलोगों की संस्‍कृत में श्रद्धा यूँ ही बनी रहे इ...
 
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 

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जेब खर्च के लिए ‘बाप’ बन रहे छात्र, क्यों मेरी आदत बिगाड़ना चाहती हो ?-ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, July 10, 2010

 सभी को नमस्कार करता है आपका राज

आज रविवार है छुट्टी का दिन। सोचा था आज जरा देर तक सोते हैं, पर क्या करे एक फोन के कारण उठाना पड़ा। जब उठ ही गए तो सोचा यार चलो आज की चर्चा को कुछ लंबा किया जाए। ऐसे में हमने आज 21 चिट्ठों को ले लिया है। चलिए देखे कौन क्या कहता है-...... 
 
आज एक लेख पर मेरी नजर पड़ी समझ नहीं आया की आखिर समाज इतना आगे निकल चूका है या मैं ही कुछ पीछे चल रहा है हूँ,विज्ञान तो आगे बाधा ही है साथ ही साथ युवाओं की मानसिकता में भी काफी बदलाब आया है..जरा गौर फरमाइ...
 
रश्मि जी के ब्लॉग 'अपनी ,उनकी, सबकी बातें 'पर जावेद अख़्तर साहब की एक खूबसूरत नज़्म " वो कमरा " पढ़ी । मुझे याद आई कुछ कवितायें जो कवियों ने कमरों पर लिखी है । अज्ञेय की एक कविता भी याद आई ..." वहाँ विदेशों म...
 
स्त्री और पुरूष दोनों किस्म के लेखन में संरक्षक का बड़ा महत्व है। वर्जीनिया वुल्फ ने संरक्षक के सवाल पर विचार करते हुए लिखा है कि आम तौर पर स्त्री पुरूष दोनों ही अव्यावहारिक सलाह के आधार पर लिखते ...
 
 
मैने जब से ब्‍लॉग लिखना शुरू किया है , हर चर्चित मुद्दे पर , चाहे वो मौसम हो या राजनीति , खेल हो या कोई बीमारी , कुछ न कुछ भविष्‍यवाणियां करती आ रही हूं । आकलन में कितनी सत्‍यता होती है , वो तो हमारे पाठक ...
 
ओह!…श्श…शिट ट…ट…निकल गई”…. * *चींssssssचींssss…..धडाम….* “अरे!….तनेजा जी…गाड़ी काहे रोक दिए?..इत्ता मजा आ रहा था"… “उधर नहीं गुप्ता जी….इहाँ….साम...
 
सायकिल पर पूरे जोर से पैडल मार मार कर दोस्त के घर जा रहा था, किन्हीं ख्यालों में उन्मुक्त था मन और पैर पैडलों को गति दिए जा रहे थे और तभी एक गति अवरोधक आया, जोर से आगे वाली ब्रेक लगाई …हम कहाँ और साईक...
 
एक छोटी सी पोस्ट बहुत कुछ कह्ती हुई।दोस्तों की रोज़ाना की मह्फ़िल मे एक सवाल सामने आया फ़िश ज़मीन पर क्यों नही रह सकती?उसके जितने जवाब हो सकते थे सब सामने आये मगर सवाल पूछ्नए वाले का सिर सिर्फ़ और सिर्फ़ ना मे ह...
 
राजू रंजनकहते हैं- ..जैसे मुझे ही सम्मान मिला हो
आज ‘प्रभात खबर’ (पटना संस्करण) के मुख पृष्ठ पर हिन्दी के, और अव्वल तो बिहार के एक सुपरिचित-सुपठित कथाकार सुलभ जी की तस्वीर छपी है। तस्वीर यूके कथा सम्मान के अवसर की है। तस्वीर के नीचे लिखा है-
 
उपदेश या नसीहत देना बहुत आसान होता है। जरा सा कुछ अप्रिय घटा नहीं, कुछ उल्टा-सीधा हुआ नहीं कि बरसाती मेढकों की टर्राहट की तरह चारों ओर से नसीहतें बरसने लगती हैं। पचीस किलो का आदमी भी मोटे होने के गुर बताने...
 
By Dinesh Kumar Mishra Rampur Kanth, with only 90 families, was a small village located on the right bank of the Bagmati in Bairgania block of Sitamarhi district of Bihar in early1970s. In order to...
 
नवीन प्रकाश बता रहे हैं- मुफ्त छोटा ऑडियो सीडी रिपर
ऑडियो सीडी को अन्य ऑडियो फोर्मेट्स जैसे MP3, Ogg Vorbis, WMA में बदलने का का छोटा आसान और तेज औजार । इसमें आप ऑडियो सीडी को 16kbps से 256kbps तक की Mp3 फाइल के रूप में सुरक्षित कर सकते हैं । वैसे ये काम...
 
वीरेंद्र सेंगर की कलम से जाति, धर्म व खापों की संकीर्ण लक्ष्मण रेखाएं तोड़ने वाले युवा जोड़ों को इधर लगातार मौत के घाट उतारा जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में भी खापों का खौफ दस्तक दे चुका है। हाल के महीनो...
 
अमेरिका में रहते हुए थोड़ी तबियत खराब हो गयी, सोचा गया कि डॉक्‍टर को दिखा दिया जाए। भारत से चले थे तब इन्‍शोयरेन्‍स भी करा लिया था लेकिन अमेरिका आने के बाद पता लगा कि इस इन्‍श्‍योरेन्‍स का कोई मतलब नहीं, बे...
 
कविता : संजीव 'सलिल' * * जिसने कविता को स्वीकारा, कविता ने उसको उपकारा. शब्द्ब्रम्ह को नमन करे जो, उसका है हरदम पौ बारा.. हो राकेश दिनेश सलिल वह, प्रतिभा उसकी परखी जाती- होम करे पल-पल...
 
जब बिजली कम समय रहेगी तो आप अपने मोबाइल फोन को चार्ज नहीं कर पायेंगे। इससे भी आपको लाभ ही होने वाला है क्‍योंकि आजकल मोबाइल फोन पर काल दरें तो बहुत सस्‍ती कर दी गई हैं और सेम नेटवर्कों पर तो बिल्‍कुल फ्री,...
 
तुम
मित्रों, आज अपने विवाह की १०वी वर्षगांठ पर अपनी प्राण-प्रिया के लिए चंद पंक्तियाँ लिख रहा हूँ...मेरी हिंदी की डाक्टर साहिबा पत्नी को हो सकता है यें कविता काव्य-शास्त्रों के मापदंडों पर खरी न उतरती हुई
 
 
लिमटी खरे बता रहे हैं- भ्रष्‍टाचार का घालमपेल है राष्‍ट्रमण्‍डल खेल में
राष्ट्रमण्डल खेल बनाम भ्रष्टाचार का महाकुंभ* *कमर तोड मंहगाई फिर भी कामन वेल्थ के लिए खजाना उगल रहा धन* *13 दिनी आयोजन पर होंगे बीस हजार कारोड रूपए से अधिक खर्च* *(लिमटी खरे)* * आजादी के बासठ सालो... 
 
आज, 11 जुलाई को Zeal वालीं दिव्या श्रीवास्तव का जनमदिन है। बधाई व शुभकामनाएं आने वाले जनमदिन आदि की जानकारी, अपने ईमेल में प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें। अपने मोबाईल फोन पर SMS के द्वारा जनमदिनों...
 
आप इक बार ठोकर से छू लो हमें, * *हम कमल हैं चरण-रज से खिल जायेगें! * *प्यार की ऊर्मियाँ तो दिखाओ जरा, * *संग-ए-दिल मोम बन कर पिघल जायेंगे!!* * * *फूल और शूल दोनों करें जब नमन,* *खूब महकेगा तब जिन्दगी का चम...
 
 
(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में शिक्षक थे. बड़ी दो बेटियों की शादी हो गयी थी. बड़ा बेटा ...
 
महेन्द्र मिश्र बता रहे हैं- भारत देश को सांप और नागिनों का देश बताने वाले यूरोपीय देश भी अब खुद अंधविश्वास के शिकार .... अब फी भविष्यवाणी को लेकर आक्टोपस और तोता आमने - सामने ...
कभी *यूरोपीय देश* हमारे देश को सांप और नागिनों का देश कहकर खिल्लियाँ उड़ाया करते थे अब फीफा फुटबाल मैच में जीतने की भविष्यवाणी को लेकर खुद रूढ़ीवाद और अंधविश्वास के मायाजाल में उलझ गए है . *फीफा वर्ल्ड कप २...
 
 
 
 
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 
 
 

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ब्लॉगर का शिशु-गीत... , मैं कुछ पल का ब्लॉगर हूँ -ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Friday, July 9, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
हम मनाते है हमेशा सबकी खैर
कराते हैं आपको नए पोस्ट वाले ब्लागों की सैर
 
ब्लॉग की दुनिया एक महान दुनिया का नवसृजन-सा है. यह वैश्विक-लोकतंत्र का जीवंत उदाहरण भी है. हर कोई अपना **ब्लॉग ** बनाकर मन की बात लिख सकता है. लेकिन इस सहज-अधिकारवाद के चलते क्या लोग कुछ भी लिखने के लिये ...
 
मैं कुछ पल का ब्लॉगर हूँ कुछ पल की मेरी पोस्टें हैं कुछ पल की मेरी हस्ती है कुछ पल की मेरी ब्लॉगिंग है मैं कुछ पल ........................... मुझसे पहले कितने ब्लॉगर आये और आकर चले गए ,चले गए कुछ झंडे गा...
 
 
नींद में तैयार करती है खुद को* *जागती है नींद में** * * और नींद में ही* * अम्मा.. अभी आई कहकर निकल जाती है घर से * *चटख लाल रंग लाने वाली मेहन्दी इत्र, नेलपालिश की शीशियां और चमकदार कागजों की तलाश के ब...
 
भारत के हिन्दी टीवी समाचार चैनलों ने जो रास्ता पकड़ा है वह इस बात का संकेत है कि टीवी चैनलों में समाचार और संपादन के मानकों की विदाई हो गयी है। संपादन और समाचार प्रस्तुति के नाम पर बेईमानी हो रही है...
 
नमस्कार, मित्रो! आज की इस चर्चा में आप सबका हार्दिक स्वागत है! 

कालजयी साहित्यकार और छत्तीसगढ की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पह्चान बनाने वाले गजानन माधव मुक्तिबोध की पत्नी देवलोक सिधार गईं।वे लम्बे समय से बीमार थी और उनका ये संघर्ष कल रात खत्म हो गया।वे 88 वर्ष की थी और मु...
 
खोखली दिवारों के खाली मकान में रहती हूँ मैं. खाली बर्तन की तेज़ आवाज़ सी झूठी हंसी में .. खनकती हूँ मैं . भीतर के दर्द का लावा बनती हूँ जब .. तब आँखों की कोरो से गिरती हूँ मैं . लोग क...
 
 
आजकल पाठक ही मुझसे एक कहानी लिखवाए जा रहें हैं....हाँ , सच...जिस कहानी को दो कड़ियों में समेटने की सोची थी...पाठकों को इतनी अच्छी लग रही है कि मैं भी बस लिखती जा रही हूँ...पर उसकी वजह से इस ब्लॉग पर कुछ न...
 
वीरेंद्र सेंगर की कलम से मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की तैयारी है। ऐसे में सुगबुगाहट है कि इसमें मंत्रियों के ‘रिपोर्ट कार्ड’ की भूमिका होगी या नहीं। अगर वाकई में ‘रिपोर्ट कार्ड’ की कसौटी बनी, तो कई स्वन...
 
इन दिनों लगता है मैं *राइटर्स ब्लाक *जैसी स्थिति से गुजर रहा हूँ और यह इसी ब्लॉग जीवन की देन है जो जुमा जुमा कुल तीन साल की ही तो है -मगर इसी में कई वे गहन अनुभव हो गए जो बीते जीवन में हुए नहीं ..प्रेम...
 
गगन शर्मा बता रहे हैं- यह "जबुलानी बाल" का दोष है या हमारे दृष्टि तंत्र की कमजोरी ?
इस बार का विश्वकप फुटबाल जितना अपने सफल आयोजन, उल्टफेर, आक्टोपस को लेकर चर्चा में रहा वहीं खेल में प्रयुक्त बाल के कारण भी खबरों में छाया रहा। इस बार उपयोग में लाई गयी जबुलानी बाल के खांचों की वजह से अच्छे ...
 
 
साहिबा कुरैशी का- महंगाई और मध्य वर्ग
हिंदुस्तान का मध्य वर्ग महंगाई के खिलाफ बंद में हिस्सा लेने के प्रति इतना उदासीन क्यों है? जिन मुंबईवासियों ने 26/11 के हमले के बाद अपना आक्रोश जाहिर किया था, वे महंगाई के खिलाफ भारत बंद में शामिल
 
कवि रामेश्वर शर्मा का एक गीत *देख क्रुरता फ़ूलों की हम दंग हो गये* जीवन है या जटिल समस्या तंग हो गये। आदर्शों के रंग गिरगिट के रंग हो गये। कपटी भावों में डूबे जग मुंह बोले संबंध हुये विश्वासों के रुपक पछता...
 
 
 
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 

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साहित्य के रंग में रंगे हैं ब्लाग-हम खोल रहे हैं इनका राज-ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Thursday, July 8, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

आज हमने भी अपने ब्लाग राजतंत्र में एक छोटी सी कविता लिखी है। अब जब हम ब्लाग चौपाल सजाने बैठे हैं तो देखा कि ब्लाग जगत भी बहुत ज्यादा कवितामय है। ऐसे में हमने कविता वाले ब्लाग के साथ साहित्य से जुड़ी पोस्टों का इस चर्चा में समावेश किया है, आशा है यह चर्चा सबके मन भाएगी। 
रात रूठती रही मिलन की दिवस विरह के मुस्काये, अनगाये रह गये गीत संध्या के केश बिखर आये ! शून्य ह्रदय, मंदिर के दीपक बिना स्नेह के सिसक उठे, चले गए जब देव, लाज तज प्रिय दर्शन को पलक उठे ! छंद प्यार के रहे ...
सभी को मन भाती है खुशबू फूलों की फिजा को महका देती है खुशबू फूलों की किसी से भेदभाव नहीं करती खुशबू फूलों की सभी को समान प्यार देती है खुशबू फूलों की 
(१)* *ब्लॉग लेखन से क्या जुड़े, नित उमड़त रहत विचार* *जब तब फुरसत पाइके, लिख डारत आखर चार* *(२)* *ड्यूटी के लिये निकल पड़े, पहुंचे रेल्वे स्टेशन * *गाड़ी की लेट लतीफ़ी, लावे दिमाग मे टेंशन* *(३)* *प्लेट फ़..

(१)- दरीचे खुले हवा के साथ आयी तेरी खुशुबू | (२)- कह भी तो दो कहना है जो,वर्ना रोना है क्या? (३)- उडी चिड़िया पंखों को फैलाकर दाना लेकर | 
अदम गोंडवी- घर में ठंडे चूल्हे पर अगर खाली पतीली है। बताओ कैसे लिख दूँ धूप फाल्गुन की नशीली है? भटकती है हमारे गाँव में गूँगी भिखारन-सी, सुबह से फरवरी बीमार पत्नी से भी पीली है।। बग़ावत के कमल खिलते हैं.. 
यह गीतालेख प्रवक्ता में भी प्रकाशित है. मुझे लगा, हो सकता है, कुछ पाठक वहां न पहुंचे हों, यही सोच कर अपने ब्लॉग में देने की गुस्ताखी कर रहा हूँ. ”गीतालेख”. यानी एक गीत मगर आलेख के साथ. गाय की व्यथा-कथा...
संस्‍कृति विभाग छत्‍तीसगढ़ की वेब साईट में पिछले कुछ महीनों से कुछ महत्‍वपूर्ण जानकारियॉं पुरातत्‍व एवं संस्‍कृति विभाग के उच्‍च अधिकारी व सिंहावलोकन ब्‍लॉग वाले आदरणीय बड़े भाई राहुल सिंह जी के 
ई-साहित्‍य और हिन्‍दी ब्‍लॉग : सार्थक अभिव्‍यक्ति का एक झरोखा - वशिनी शर्मा
हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत पर एक विहंगम दृष्टि वशिनी शर्मा की। घबराइये मत कि इतना बड़ा लेख है, जब आप इसे पढ़ेंगे तो आप सबके मन में हिन्‍दी ब्‍लॉग तरंगे हिलोरें लेंगी और यही इस लेख की सार्थकता है। आप इसे अवश्‍य पढ...
कल मैट्रो से कहीं जाना था। रास्ते में एक लडकी को देखा। नीचे जींस और ऊपर केवल आंखें ही नजर आ रही थी, सॉरी मेरा मतलब है, उसने दुपट्टे को इस तरह से लपेटा हुआ था कि केवल आंखें ही दिख रही थी। एकदम बुर्कापोश टाई...
मित्रों इन दिनों पोस्टर कविताएं कम ही लिखी जा रही है। पता नहीं ऐसा क्यों है लेकिन लगता है शायद लेखकों और कवियों ने मान लिया है कि अब जनता के बीच जाने की जरूरत नहीं रह गई है. कविता-कहानी को लेकर सारी ब... 
"ले अभाव का घाव ह्रदय का तेज मोम सा गला अश्रु बन ढला सुबह जो हुई सभी ने देख कहा --- शबनम है !" - सरस्वती प्रसाद *** ज़िन्दगी के दर्द ह्रदय से निकलकर बन जाते हैं कभी गीत, कभी कहानी, कोई नज़्म, कोई याद ....
ललित शर्मा बता रहे हैं- सुनिए--“कविता क्या, कविता क्यों ?” विषय पर व्याख्यान
 
राज्य की पहली वेब पत्रिका तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित, साहित्य, संस्कृति, विचार और भाषा की मासिक पोर्टल सृजनगाथा डॉट कॉम के चार वर्ष पूर्ण होने पर चौंथे सृजनगाथा व्याख्यानमाला का आयोजन 6 जुलाई, 2...
पानी का कुछ भी रंग नहीं होता पर जब पानी उतरता है तो बड़ों-बड़ों का रंग उतर जाता है। एक समय था जब पानीदार लोगों की इज्जत हुआ करती थी पर जमाने के फेर ने सबकुछ बदल कर रख दिया और आज पानीदार लोगों की कुछ भी पूछ न...

अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

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इन आंखों से कैसे बचेंगे आप?, कुछ-कुछ होता है-ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, July 3, 2010

 सभी को नमस्कार करता है आपका राज
और खोलता है रविवार के चिट्ठों का राज
 
उन आंखों ने मुझे परेशान कर रखा है मेरे वजूद को हिला कर रख दिया है तमाम जगह मेरा पीछा करती हैं वो आंखें कुछ ख़ास जगहों पर ज़्यादा ही घूरती हैं मैं जब भी दोस्तों के साथ ख़ुशी के कुछ लम्हे बांट रहा होता हूं जा...

“.. ..कुछ-कुछ होता है!” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
दिल में कुछ-कुछ होता है, जब याद किसी की आती है। मन सब सुध-बुध खोता है, जब याद किसी की आती है। गुलशन वीराना लगता है, पागल परवाना लगता है, भँवरा दीवाना लगता है, दिल में कुछ-कुछ होता है, जब याद किसी की...
 
पीडी कहते हैं तबे एकला चलो रे।
यह लड़ाई किससे है? कैसा है यह अंतर्द्वंद? लग रहा है जैसे हारी हुई बाजी को सजा रहा हूँ फिर से हारने के लिए । अंतर्द्वंद में कोई भी मैच टाई नहीं होता है, खुद ही हारता भी हूँ और खुद ही जीतता भी! अक्सर हम जीती ...
 
मित्रों, उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने अमेठी को जिला बनाकर उसका नाम बदल दिया है. कुछ और जगहों के नाम भी उन्होंने बदले है. इस राजनीतिक फैसले के निहितार्थ समझने की कोशिश की है वरिष्ठ पत्रकार वीरेन्द...
 
शानू शुक्ला कहते हैं तुम्हारी याद के बादल
अरे देखो तो इन पर्वतों के कन्धों पर लदे है ये शरारती बच्चों क़ि तरह शरारत करते हुए खेलते उमड़ते घुमड़ते बादल| ठीक वैसे ही जैसे क़ि मेरे दिमाग पर मेरी याददाश्त पर लदे हों बरस जाने को एक दम आतुर तुम्हा...


बैंकाक में एक किसान ने अदालत में अपनी बीवी को तलाक देने के लिए अर्जी दी। जानते हैं कब, अपनी शादी की 73वीं सालगिरह पर। और कारण बताया कि हम दोनों का स्वभाव मेल नहीं खाता। जापान के एक पति महोदय अपनी पत्नी से...
 
 
आओ रानी, हम ढोयेंगे पालकी,* ** *यही हुई है राय जवाहरलाल की,* *ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय* तो कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान अक्टूबर में भारत नहीं आ रही हैं...लेकिन उनके बेटे प्रिंस चार्ल्स उनकी नुमाइंद...
 
ब्लागवाणी का बंद होना, मानो सभी सम्पर्को पर ताले लग जाने जैसा है। जब तक कुछ ताजा पढ़ा-लिखी ना कर ले तब तक खाना भी हजम नही होता। ऐसा बहुतों का हाल है। ब्लागवाणी का बंद होना अब अखरने की हद तक आ पहुंचा है। इतन...
 
कई ब्लॉग पर लोगों के गाँव के संस्मरण और गाँव की तस्वीरें देख मुझे अपना गाँव याद आ गया. पंद्रह साल पहले दो दिन के लिए बस चाचा की बेटी की शादी में शामिल होने गयी थी उसके बाद से बस गाँव यादों में ही बसा है...
 
आज ‘वाल स्ट्रीट जरनल’ ने खबर दी है कि चीन के जनमुक्ति सैनिकों पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की कड़ी नजर है। इधर कई सालों से यह देखा गया कि चीन के सैनिक इंटरनेट के माध्यम से डेटिंग वगैरह कर रहे थे। वे नेट...
 
डॉ महेश सिन्हा बता रहे हैं- जियो लाइफ प्रतियोगिता इंडिब्लागर द्वारा
आखरी तारीख 8 जुलाई http://www.indiblogger.in/topic.php?topic=22 
 
हमारे देश की छबि अन्तराष्ट्रीय स्तर पर उदारवादी देश की है इसके फलस्वरूप हमारे देश को आन्तरिक मामला हो अंतररष्ट्रीय मामला हो अन्तराष्ट्रीय दबाब का सामना करना पड़ता है . हर मुद्दे पर हमारे देश का द्रष्टिकोण ..

राजकुमार सोनी बता रहे हैं- गैरजरूरी प्रार्थनाएं
आकाश और धरती में विराजमान करोड़ो देवताओं से मां करती है प्रार्थना हे प्रभु टिमटिमाता रहे लाल तारा माथे पर सुहाग अमर रहे मेरा फटी हुई बनियान को पीठ पर रगड़ते हुए पिता बड़बड़ाते हैं हे नीली छतरी वाले रख लेन...
 
 
  अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 

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एक और एक बराबर दो रोटियां, ख्वाब और ख्वाहिश- ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Thursday, July 1, 2010

 सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 और करते हैं आज की चर्चा की आगाज 


शानू शुक्ला बता रहे हैं- एक और एक बराबर दो रोटियां
वहां एक क्लास में एक अध्यापक महोदय पूछ रहे थे प्रश्न पढाये हुए पाठ में से अपने क्लास में उपस्थित छात्रों से इसी क्रम में उन अध्यापक महोदय ने सामने बैठे एक छात्र से पूछा क़ि बताओ बेटा एक और एक होते
लबों पर मुस्कान और आँखों में नमी है ख़्वाबों के अम्बार पर ख्वाहिशों की कमी है . 
अपनी पुरानी साड़ियों और इधर-उधर की चिन्दियों को जोड़कर मां ने इसलिए नहीं बनाई थी कथरी कि हम गरीब थे.* * जब कभी भी हम पांच भाई लड़-झगड़कर जमा लेते थे पूरे बिस्तरों पर कब्जा तब मां अपनी कथरी निकालकर लेट जाया...
सार्वजनिक स्थानों पर लगे कम्प्यूटरों से पोर्नोग्राफी देखना अपराध है। उसी तरह हमारे बीच में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो पोर्न के बारे में यह तर्क देते हैं कि .यह तो महज फोटोग्राफी है। पोर्नोग्राफी महज 
जब तक बहारे आती रहेंगी, तब तक फूल खिलते रहेंगें तेरी यादे जेहन में रहेंगी, जब तक ये दिल जिन्दा रहेगा. 00000 तेरे नफ़रत भरे अंदाजों को देख कर मैं कविताएं उकेरता हूँ तू ही बता दे इस कलम की अदा क्या किसी से कम...
मैंने तुम्हारे लिए एक खिड़की खोल दी है ताकि तुम स्वच्छंद हवा में, अनंत आकाश में, अपने नयनों में भरपूर उजाला भर कर , अपने पंखों को नयी ऊर्जा से सक्षम बना कर क्षितिज के उस पार इतनी ऊँची उड़ान भर सको कि सार...
यह सर्वविदित तथ्य है कि छत्तीसगढ़ की लोकगाथा पंडवानी महाभारत कथाओं का लोक स्वरूप है। वैदिक महाभारत के नायक अर्जुन रहे हैं जबकि पंडवानी के नायक भीम हैं। पिछले पोस्ट में पंडवानी की तथाकथित शाखा और शैली के 
(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में शिक्षक थे.बड़ी बेटी ममता की शादी ससुर जी ने पति की इच...
 यह ब्लागवाणी को क्या हो गया है? बीस-पच्चीस दिन दूर रहने के बाद अब जब भी इसे खोलता हूं तो वही 14जून का ही प्रवचन सुनने (देखने) को मिल रहा है। वहीं पर अटकी हुई मिलती है। कुछ ज्यादा ही गड़बड़ है या कोई और कारण ..

विजय विद्रोही* स्टार न्यूज के कार्यकारी संपादक हैं।विजय जी से vijay.vidrohi@hotmail.com पर संपर्क किया जा सकता है मनमोहन सिंह सरकार आम आदमी के लिए जिन योजनाओं को शुरू कर रही है, उन पर हर साल करीब सवा ...
काजू भुने प्लेट में विह्स्की गिलास में। उतरा है रामराज विधायक निवास में। पक्के समाजवादी हैं तस्कर हों या डकैत, इतना असर है खादी के उजले लिबास में।आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह, जो आ गए फुटपाथ पर घर की ...
यह रचना (हरियाणवी रागिनी) मेरे मित्र "कृष्ण टाया" जी की है। पसन्द आये तो साधुवाद जरूर दीजियेगा। *कवि ने पुराने समय और आज के जमाने की तुलना की है। बीते समय में रिश्तों की क्या अहमियत होती थी और आज के रिश्ते...
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 

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हिंदी ब्लॉगरों के जनमदिन, उफ़ ब्लागिरी.कॉम ने तो पसीना छुडवा दिया.- ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Wednesday, June 30, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज


हमने सोचा था कि अपनी ब्लाग चौपाल को कभी विराम नहीं देंगे, लेकिन क्या करें कंप्यूटर की खराबी के कारण एक दिन का इसमें विराम लग गया। इसके बाद हुआ यह कि सीधे हिन्दी में लिखने वाला की-बोर्ड गायब हो गया है। ऐसे में परेशानी बढ़ गई, फिर भी आज की चर्चा कर रहे हैं। चलिए देखे कौन क्या हता रहा है-


स्वप्निल संसार में- आज मेरे पापा राजकुमार ग्वालानी का जन्म दिन है

आज मेरे पापा राजकुमार ग्वालानी का जन्म दिन है। मैंने जहां सुबह उठते साथ उनको बधाई दी, वहीं मैंने तो उनको दो दिन पहले ही गिफ्ट दे दिया था। क्या करती गिफ्ट लाने के बाद रहा नहीं गया तो मैंने ऐसा किया। आप भी ..
 
आज अंजली सहाय, हिमांशु तथा मोहन वशिष्ठ का जनमदिन है >> बुधवार, ३० जून २०१० [image: image] 30 जून 2010 30 June 2010 आज का दिन मेरे लिये विशेष है । आज माँ सेवा-निवृत्त हो रही है...
पता नहीं किस सर्वर से चलती है ये साईट ...डायल अप दिनों की याद ताज़ा कर दी इसने, इससे धीमी साईट पर गए ज़माना हो गया था मुझे. पहले तो ये ही नहीं पता चला की url कैसे जमा कराएं. माथा पच्ची करने दे बाद तुक्का लगा...
 
आज 1 जुलाई को - अनहद नाद वाले प्रियंकर, - राजतन्त्र व खेलगढ़ वाले राजकुमार ग्वालानी, - राजेश त्रिपाठी - नया घर वाले विनोद पाराशर का जनमदिन है बधाई व शुभकामनाएँ आने वाले जनमदिन आदि की जानकार...
नारीवादी-बहस में प्राचीन भारत में नारी
प्राचीन भारत में स्त्रियों की दशा के विषय में इतिहासकारों के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं. स्थूल रूप में इन ऐतिहासिक दृष्टिकोणों को चार श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है - 1. राष्ट्रवादी दृष्टिकोण 2. व...
सूर्यकान्त गुप्ता बता रहे- सब्र का इम्तिहान न लो,
(1) हे नक्सली, असली है या नकली! साक्षात तू नर पिशाच है कौन है तेरा उपासक "कायराना हरकत" कह करते इति श्री, तुम्हे देते सह, तभी तंदूरी बना रहा तू मानव की बेशक (2) क्या उसूल है, क्यों करता तू यह सब, इस...
 
*पिछले भागों 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 से जारी * दिन के दस से उपर हो चुके हैं। दु:खद यादें बीत चुके कई सालों की शहरी औपचारिकता सी होली की टीसों से जुड़ कर और भारी हो चली हैं। बैठा नहीं जाता। कनखी से संजय को दे...
America में रहते हुए दो माह बीत चले हैं और अब दो दिन बाद वापसी है। मन बहुत चंचल हो रहा है, अपने देश की जमीन को छूने के लिए। उस हवा को अपने अन्दर भर लेने को, जिस हवा से मेरा निर्माण हुआ था। आपका जन्मनस्थ‍ल...
( लहू- लुहान घटना स्थल पर जवानों के रक्त और जूते..) ( घटना -स्थल से ट्रैक्टर और बाद में सेना के विमान से भेजे गये शव) ( इसी रास्ते के उपयोग से जवानों को मदद मिली) ...
दिल्ली की कुतुबमीनार तो खैर दिल्ली की पहचान ही बन गयी है। परन्तु इसको भी पीछे छोड़ने की कोशिश की गयी थी बीते जमाने मे। जहां कुतुबमीनार खड़ी हो आकाश से बातें कर रही है उसी प्रांगण मे और भी बहुत से बने-अधबने 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 

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