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"एक शहर जो हर शहर में बसता है" और बिहार, आपकी कसम हम बिहार में ताजमहल बना देंगे.....- ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Wednesday, July 14, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

और सीधे खोलता है ब्लाग की पोस्टों का राज 
पीडी कहते हैं- "एक शहर जो हर शहर में बसता है" और बिहार
2003 में पहली बार घर से बाहर पाँव रखा और दिल्ली कि और निकल पड़ा.. मुनिरका में अपना आसरा बनाया.. हर शहर में एक ही शहर बसता है.. मैंने पाया कि हर शहर में एक ही जैसे मोहल्ले, विद्यार्थियों और बैचलर के रहने के ...
शादी से पहले.....* पतिः देर किस बात की है। पत्नीः क्या तुम चाहते हो मैं चली जाऊँ? पतिः नहीं, ऐसा तो मैं सोच भी नहीं सकता। पत्नीः क्या तुम मुझे प्यार करते हो? पतिः अवश्य! एक नहीं अनेकों बार!! पत्नीः...
अब महिलाएं बिशप भी बन सकेंगी। चर्च आफ इंग्लैंड ने यह फैसला सुनाया है। इस फैसले से ब्रिटेन के परंपरावादी खेमे में निराशा और नाराजगी का माहौल है। दुनिया भर की महिलाओँ के लिए यह सुकून की खबर है। सेवा के सारे ...
आज हमारा समाज विभिन्न जातियों में, वर्गों में बंटा हुआ है. समाज बना कैसे? जाती बनी कैसे? सभी जानते हैं. वर्ण व्यवस्था अभी की नहीं है, सदियों पुरानी है. चार आश्रम, चार वर्ण कौन नहीं जानता. वर्ण व्यवस्था क...
खो चुकी हूँ आज अपने आपका अपनत्व री सखि ! आज प्राणों में कसक है, ह्रदय में पीड़ा घनेरी, नयन वारिद उमड़ आये, भर निराशा की अँधेरी, धुल चुके अरमान सारे जल चुका है ममत्व री सखि ! खो चुकी हूँ आज अपने आपका अपनत्व ...
 
नवभारत टाइम्स के १४-७-२०१० के अंक पर भी नज़र डालें। शेफील्ड और वारविक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों नें जो दावा किया है वह कितना सच है ? लंदन । पहले अंडा आया या मुर्गी ? यह प्रश्न हजारों वर्षों से लोगों को 
वन विभाग का अमला भले ही यह बात मानने को तैयार नहीं होगा लेकिन हकीकत यही है कि छत्तीसगढ़ के जंगलों में जंगली भैंसों का दिखना कम हो गया है। वन विभाग की उदासीनता, अवैध शिकार और जंगलों की अवैध कटाई के कारण यह.....
कल एक ट्रक सड़क में धसा तो आज मुखर्जी नगर में एक स्कूली बस के पहिये जमीन में धस गए...जिसे करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद निकला गया... इन दोनों ही घटनाओं में कोई हताहत तो नहीं हुआ--- लेकिन ये हादसे विकास क...
'कितना कमजोर है गुब्बारा * *चाँद साँसों में फूल जाता है* *जरा सा आसमां क्या मिला* *अपनी औक...
(जनगणना से जात हटाओ) रविवार को उपवास और धरना देश भर में फैले अपने सभी साथियों से मैं अनुरोध करता हूं कि आप कृपया रविवार (18 जुलाई 2010) को अपने शहर या गांव में सार्वजनिक उपवास और धरने का आयोजन करें| य...
तू पागल है उसे ऐसा मै हर बार कहता हूँ मगर फिर भी न जाने क्यूँ मुझी से प्यार करता है मुझे देखे इसी हसरत से छत पे रोज आता है वहां आकर न जाने क्यूँ वो नजरें भी चुराता है वो ज़माने याद है मुझको वो नखरे याद...
11 जुलाई को ललित शर्मा जी ने एक पोस्‍ट लगायी थी , जिसमें एक चित्र दिखाकर पूछा था कि *हमने इस तारे की फ़ोटो ली, आप देख कर बताईए कि
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 

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बच्चे हैं या बाप रे बाप.., डांटा तो बच्चे छलांग लगा देंगे या फिर.-ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Tuesday, July 13, 2010

 
 सभी को नमस्कार करता है आपका राज

आज ब्लाग चर्चा करने बैठे तो देखा कि बच्चों पर बहुत कुछ लिखा गया है, ऐसे में हमने सोचा कि आज की चर्चा में इसी को महत्व दिया जाए। हमारी कोशिश रहती है कि कम से कम दो ऐसी पोस्ट हों जिसका विषय एक जैसा हो ते उसे मिलाकर शुरुआत की जाए। चलिए देखे कौन क्या लिखता है....


स्पाइडरमैन...* *सारे घर के बदल डालूंगा..*. *चॉकलेट की बच्ची तू छिपी है कहां...* *छलकाए जाम, आइए आपकी आंखों के नाम..
 
पता नहीं ये मेरा दिल है या कोई सच जो मुझे कुछ बता रहा है एक पुल नाज़ुक से दिल का बेरहमी से जला कर आई हूँ तुम्हारे पास... मगर यहाँ कुछ पराये से साए क्यूँ नज़र आते हैं जिन्हें तुम अपना नहीं कहते हो.......
 
अफगानिस्तान के तालिबान आतंकी गिरोह ने अमेरिका से लड़ने के लिए बंदरों को आतंकी प्रशिक्षण देना आरंभ कर दिया है। इस तरह की रिपोर्ट चीन,अमेरिका और ब्रिटिश मीडिया में छपी हैं। कुछ पत्रकारों ने बंदरो...
 
मन बेचैन है बेहद्।पता नही कल अख़बार की सुर्खियां क्या होगी?शाम ढलते ही खबर मिली की बस्तर मे आधा दर्ज़न जगहों पर पुलिस और नक्सलियों के बीच फ़ायरिंग शुरू है।अब भला बताईये ये भी भला कोई खबर है,कि फ़लाना जवान मारे...
 
ओ अध्यापक, अब तुम्हारे दिन चले गये। अरे जब बच्चों को जन्मने वाले माता-पिता की कोई औकात नहीं रही तो मास्टर की क्या बिसात? चुपचाप स्कूल में आओ, पढ़ाओ और अपने घर जाओ। बच्चे स्कूल में क्या कर रहे हैं, पढ़ रहे है...
 
बिना किसी भूमिका के फिर एक बिल्कुल नई ग़ज़ल. मैं जो कहना चाहता हूँ, शेर तो कह रहे है. शुभकामनाएं चाहिए, दुवाओं में याद करते रहें, बस....* पद क्या पाया मद है भाई वैसे बौना कद है भाई हँसना भूल गया बेचारा ...
 
साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा शताब्दी की कालजयी कहानियों का चयन किया गया है। चयनित कहानियां किताब घर प्रकाशन से ४ खण्डों में प्रकाशित हुई है। विगत सौ वर्षों से कथा लेखकों में छत्तीसगढ़ के गांव लिमतरा से ...
 
तुम्हारा साथ पाने की उद्विग्नता ... हड्डियों के ढांचे से चिपके मांस में छिपी रक्त धमनियों को उकसा देती है . चाहतें परछाइयाँ बन कर पीछा नहीं छोडती... मानो तिल की तरह शरीर पर पड कर या..

दिल रोता है में- अस्मत दो, तो ही छोड़ेंगे तुम्हारे बाप को'
महिला से प्राप्त जानकारी के अनुसार उसका पति किसी प्रकरण में पिछले डेढ़ साल से जेल में बंद है शुक्रवार को उक्त महिला के भाई को पुलिस बिजली बिल न देने के कारण घर से उठाकर ले गई थी जिसके संबंध में वह महिला अप...
 
हिंदी ब्लॉगजगत के पास एक ऐसी उत्कृष्ट लेखिका हैं , जिनकी कथा-कहानियों में परिस्थितियों से उत्पन्न विविध प्रकार के भौन्जालों के बीच विवशताभरी छटपटाहट का खुला दस्तावेज सम सम्मुख आता है , साथ ही जन-समुदाय के ...
 
मनोज कुमार के खुली आँखों के सपने
 
प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पन्त ने कविता की परिभाषा देते हुए कहा है, *"कविता परिपूर्ण क्षणों की वाणी है।"* मतलब कविता काप्रस्फुटन तब तक नहीं हो पाता जब तक कि आपके मनः-मष्तिष्क का विचार-घट पु...
 
पहली कहानी काफी पुरानी है। सबने पढी-सुनी होगी। एक राजकुमारी को उसकी सौतेली माँ बहुत तंग करती थी। एक दिन हैरान परेशान राजकुमारी अपने बागीचे में घूम रही थी कि उसे वहां एक मेढक दिखाए पड़ा। मेढक ने राजकुमारी से...
 

*जब आपके घर कोई खास मेहमान आए और आपने उनसे पूछा ‘क्या लेंगें ?’ और मेहमान ने कहा कि ‘कुछ नहीं’ तो आप लगते हैं झुंझलाने कि आखिर कहां से लाउं ‘कुछ नहीं’ .... आखिरकार अब इस समस्या का भी हल मिल ही गया...आप खुद...
 
प्रिय बन्‍धु संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या का तीसरा अभ्‍यास आज प्रकाशित किया है इसका लिंक नीचे दे रहा हूँ । संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या - तृतीय: अभ्‍यास: आपलोगों की संस्‍कृत में श्रद्धा यूँ ही बनी रहे इ...
 
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 

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आक्टोपस बाबा ने भी खोला भविष्यवाणी का ढाबा- ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Monday, July 12, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

विश्व कप फुटबाल तो समाप्त हो गया, पर इस बार का यह महाकुंभ एक ऐसा नाम  आक्टोपस बाबा का दे गया जिसे सभी बरसों याद रखेंगे। आक्टोपस बाबा की चर्चा ब्लाग जगत में खूब हो रही है, हम अपनी चर्चा में भी कुछ ऐसे ब्लागों को लेकर आए हैं, देखें कौन क्या कहता है-
डॉ अरुणा कपूर* आप एक व्यक्ति को देख रहे हैं, यह व्यक्ति कमर से आधा झुका हुआ है । आप कयास लगाते हैं कि या तो अब वह बैठने वाला है, या तो सीधा खडा होने वाला है! लेकिन वह आगे कोई भी हरकत नहीं करता, वैसा ही आ...
विश्व कप के भविष्यवक्ता पॉल बाबा स्वंय का भविष्य तो बतायें......* फूटबाल के विश्व कप फाईनल में स्पेन ने नीदरलैण्ड को एक गोल से हराकर विश्वकप हासिल कर लिया। फाईनल मैच के साथ ही विश्व भर के खेलप्रेमियों पर...
फुटबाल की आंधी में भी जब आक्टोपस पाल की तूती बोलने लगी तो इस पेशे से जुड़े बाकी मौकापरस्त लोगों को भी होश आया। तब तक काम भी बहुत आसान हो चुका था। दो ही टीमें मैदान में रह गयीं थीं। एक तरफ सिंगापुर का तोता द...
 
मिडिल स्कूल के फील्ड में रानी का डंडा आने वाला था। गाँव भर जोशो खरोश में होश खो तैयार हो रहा था। सोनमतिया बेटी के केश सँवार रही थी। उसने बेटी को एक धौल लगाया,” मोछिउखरनी, कहेलीं कि साबुन नाहीं बा त रोज का...
कल शहर अंधा था कल शहर बहरा था कल शहर गूंगा था* * लेकिन कल के पहले शहर अंधा नहीं था* * हर बात पर राम-राम कहने वाले कुछ बुढ़ऊ शहर की गंदी बस्तियों को लेकर व्यक्त कर ही दिया करते थे अपनी गहरी चिन्ता* * कल के...
  हरी थी मन भरी थी * *राजा जी के बाग़ में * *दुशाला ओढ़े खड़ी थी" * पहेली बुझाते थे, बुझाते हैं, बुझाते रहेंगे बच्चों को रिझाते थे, रिझाते हैं, रिझाते रहेंगे इस मुल्क के गरीब आग में सेंक ये भुट्टे, ..

धर्मशाला में कुछ देर आराम फरमाने के बाद जब नाश्ते-खाने के वक़्त वीडिओ कैमरे की हैलोजन लाईट के लिए जनवासे के जनरेटर मालिक से कनेक्शन देने के लिए कहा तो वो ऐसे नखरे दिखाने लगा के जैसे मन्नू बाबा(मनमोहन सिंह)...
बदल गया अब दौर पुराना, देखो आया नया जमाना। बेटी को रस्ते की ठोकर, कुत्तों को कंधे पे उठाना। वक्त ने बदसूरत कर डाला, मां का चेहरा बहुत सुहाना। जान निछावर अब पशुओं पर, संतानों को सजा दिलाना। दुश्मन जानी ब...
 मैं ही क्या, बहुत-से लोग हैं जो अक्सर हताशा से दो-चार होते रहते है.यह जीवन है, यहाँ कदम-कदम पर छल है, धोखा-दिखावा है. पाखंड है. नकलीपन है. खुद्दारों का जीना कठिन है. उसे घुट-घुट कर जीना पड़ता है. जो लो...
स्त्री पर पुरातन काल से कवियों की कूची चलती रही है.हर कवि/कवियत्री ने स्त्री को अपनी-अपनी आँखों से देखा है और बदलते काल और दौर के साथ स्त्रियों को लेकर अभिव्यक्तियाँ बदलती रही हैं.शायद इसलिए हमें विभिन्न स...
संगीता स्वरुप ( गीत ) की- हसीन उदासी
 
उदासी के पैरहन पर टांक दिए हैं मैंने खुशियों के सलमे सितारे अब उदासी भी हसीन लगती है | 
दोस्तों , आज की पोस्ट में हम सबकी साथी कुसुम ठाकुर जी को समर्पित कर रही हूँ क्यूंकि आज उनका जन्मदिन है और कल उनकी शादी की सालगिरह ..........इसमें उनके भावों को शब्दों में पिरोने की कोशिश कर रही हूँ और उन...
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

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आपके घर. , सपनों की शहजादी-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Sunday, July 11, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका > राज

 
 आज हमारे पास समय है कम
चलिए देखे किस पोस्ट में कितना है दम 


मकान का आहता जुड़ा है अकरम भाई के मकान से* * मेरी बकरी खा जाती है अकरम भाई के बरामदे में सूखाया गया गेहूं, पापड़* * मेरा लड़का गालियां बकते हुए थूक देता है अकरम भाई के लड़के पर* * मेरी बीवी हर रोज मोहल्ले ...
 
मेरी कल्पना में मेरे सपनों की शहजादी सुंदरता की ऐसी देवी जो सौन्दर्य को भी लजा दे गोरे मुखड़े पर उभरने वाली आभा मानो शीशे पर भास्कर का धीमा प्रकाश साथ में माथे पर चांद सी चमकती बिंदियां नयन ऐसे मानो..

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 82 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है Son gufa/ Swarna Gufa-Rajgir, [Nalanda district] Bihar औ..
 
(१) हे श्रृष्टि के रचयिता जगत के आधार सगुण रूप साकार हो ना निर्गुण रूप निराकार कहते हैं, आपके द्वारा ही बना दी गई होती है पति पत्नी की जोडी ताज्जुब होता है आपकी अदालत में कराये गए इस करार में फिर क्यो...
 
ऑफिस का बहुत सारा काम अटका पड़ा है, रात भी अधूरी, ठिठकी खड़ी है...और कितने चित्र, कितने वादे आँखों में ठहरे हैं, गुजरते ही नहीं. हाथ का दर्द हद से जियादा बढ़ता जा रहा है, लिखना भी अजीब मजबूरी होती है. पढ़...
 
दूरसंचार के क्षेत्र में निजी कंपनियों की बाढ़, गलाकाटू प्रतिस्पर्द्धा एवं सरकारी नियंत्रण व हस्तक्षेप की कमी की वजह से आम जन का जीवन काफी मुश्किल हो गया है। भोले ग्राहकों को लुभाने के लिए ये अपनी कॉल-दरें त...
 
हफ्ते भर पहले आपसे बोल कर गया था कि आपको बीहड़ की शादी के बारे में बताऊंगा कुछ.. लेकिन अंतर्जाल की अनुपलब्धता और काम के जाल में ऐसा फंसा कि लिखने-पढ़ने का समय ही नहीं मिल पाया.. आज किसी तरह लिख रहा हूँ तो...
 
दिन ढले जा रहे है, बिना कुछ बोले एकदम चुपचाप अपने समय पर नियत, दिनों के तो पैर भी नहीं होते, सो वो बढे जा रहे है बिना अपने निशान छोड़े दिनों के तो पर भी नहीं होते, इसीलिए वो उड़े जा रहे है बिना टूटे...
 
पिताजी की घुमक्कडी नौकरी ने हमें जाने कितने ही शहरों से रूबरू कराती गई ........न सिर्फ़ रूबरू बल्कि कहूं कि ..उन शहरों में हमारी यादों की निशानियां छपती रहीं ....और सोचता हूं कि इन शहरों से ..उनमें बि...
 
उनकी आँखों को देखकर इन आँखों की रोशनी बढ़ जाती है प्यारी आँखों की नज़रों से दीवाने की जिंदगी बदल जाती है. 
 
अजय सक्सेना पूछ रहे हैं- पहचानें इन्हें ..ये हैं कौन ..?
आप में से शायद कोई कहे ...अरे ये तो गुरूदत्त साहब हैं!!! कोई कह सकता है कि आलोक नाथ हैं.. सज्जनों भले ही यह चित्र पुराने हैं, लेकिन इनका महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह एक ऐसे साहित्यकार का चित्र हैं जो लग...
 
मैं अपनी बड़ाई नहीं कर रहा , आप खुद देख लीजिये. नक्सलियों के खिलाफ सरकारें कई कदम उठ रही है. नक्सलियों ने ग्रामीणों को अपनी ओर आकृष्ट करने के लिए कई वीडियो फ़िल्में भी जारी की हैं. मैंने खुद होकर ये फि...
 
रचना दीक्षित का- मैनेक़ुइन
मैनेक़ुइन" मैनेक़ुइन हूँ , तो क्या हुआ मैं भी इंसानों सा दिल रखती हूँ हर दिन मेरा पूनम होता रात अमावस होती है आधे कपड़े, पूरे कपड़े ऐसे कपड़े, वैसे कपड़े जाने कैसे, कैसे कपड़े कभी दुल्हन ब...
 
आज विश्व जनसँख्या दिवस मनाया जा रहा है । जनसँख्या के मामले में विकसित और विकासशील देशों मेंकितना फर्क है , आइये देखते हैं , इस कविता के माध्यम से । पता चला है कि --- इंग्लैण्ड के आदमी और कुत्ते , काम में ...
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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जेब खर्च के लिए ‘बाप’ बन रहे छात्र, क्यों मेरी आदत बिगाड़ना चाहती हो ?-ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, July 10, 2010

 सभी को नमस्कार करता है आपका राज

आज रविवार है छुट्टी का दिन। सोचा था आज जरा देर तक सोते हैं, पर क्या करे एक फोन के कारण उठाना पड़ा। जब उठ ही गए तो सोचा यार चलो आज की चर्चा को कुछ लंबा किया जाए। ऐसे में हमने आज 21 चिट्ठों को ले लिया है। चलिए देखे कौन क्या कहता है-...... 
 
आज एक लेख पर मेरी नजर पड़ी समझ नहीं आया की आखिर समाज इतना आगे निकल चूका है या मैं ही कुछ पीछे चल रहा है हूँ,विज्ञान तो आगे बाधा ही है साथ ही साथ युवाओं की मानसिकता में भी काफी बदलाब आया है..जरा गौर फरमाइ...
 
रश्मि जी के ब्लॉग 'अपनी ,उनकी, सबकी बातें 'पर जावेद अख़्तर साहब की एक खूबसूरत नज़्म " वो कमरा " पढ़ी । मुझे याद आई कुछ कवितायें जो कवियों ने कमरों पर लिखी है । अज्ञेय की एक कविता भी याद आई ..." वहाँ विदेशों म...
 
स्त्री और पुरूष दोनों किस्म के लेखन में संरक्षक का बड़ा महत्व है। वर्जीनिया वुल्फ ने संरक्षक के सवाल पर विचार करते हुए लिखा है कि आम तौर पर स्त्री पुरूष दोनों ही अव्यावहारिक सलाह के आधार पर लिखते ...
 
 
मैने जब से ब्‍लॉग लिखना शुरू किया है , हर चर्चित मुद्दे पर , चाहे वो मौसम हो या राजनीति , खेल हो या कोई बीमारी , कुछ न कुछ भविष्‍यवाणियां करती आ रही हूं । आकलन में कितनी सत्‍यता होती है , वो तो हमारे पाठक ...
 
ओह!…श्श…शिट ट…ट…निकल गई”…. * *चींssssssचींssss…..धडाम….* “अरे!….तनेजा जी…गाड़ी काहे रोक दिए?..इत्ता मजा आ रहा था"… “उधर नहीं गुप्ता जी….इहाँ….साम...
 
सायकिल पर पूरे जोर से पैडल मार मार कर दोस्त के घर जा रहा था, किन्हीं ख्यालों में उन्मुक्त था मन और पैर पैडलों को गति दिए जा रहे थे और तभी एक गति अवरोधक आया, जोर से आगे वाली ब्रेक लगाई …हम कहाँ और साईक...
 
एक छोटी सी पोस्ट बहुत कुछ कह्ती हुई।दोस्तों की रोज़ाना की मह्फ़िल मे एक सवाल सामने आया फ़िश ज़मीन पर क्यों नही रह सकती?उसके जितने जवाब हो सकते थे सब सामने आये मगर सवाल पूछ्नए वाले का सिर सिर्फ़ और सिर्फ़ ना मे ह...
 
राजू रंजनकहते हैं- ..जैसे मुझे ही सम्मान मिला हो
आज ‘प्रभात खबर’ (पटना संस्करण) के मुख पृष्ठ पर हिन्दी के, और अव्वल तो बिहार के एक सुपरिचित-सुपठित कथाकार सुलभ जी की तस्वीर छपी है। तस्वीर यूके कथा सम्मान के अवसर की है। तस्वीर के नीचे लिखा है-
 
उपदेश या नसीहत देना बहुत आसान होता है। जरा सा कुछ अप्रिय घटा नहीं, कुछ उल्टा-सीधा हुआ नहीं कि बरसाती मेढकों की टर्राहट की तरह चारों ओर से नसीहतें बरसने लगती हैं। पचीस किलो का आदमी भी मोटे होने के गुर बताने...
 
By Dinesh Kumar Mishra Rampur Kanth, with only 90 families, was a small village located on the right bank of the Bagmati in Bairgania block of Sitamarhi district of Bihar in early1970s. In order to...
 
नवीन प्रकाश बता रहे हैं- मुफ्त छोटा ऑडियो सीडी रिपर
ऑडियो सीडी को अन्य ऑडियो फोर्मेट्स जैसे MP3, Ogg Vorbis, WMA में बदलने का का छोटा आसान और तेज औजार । इसमें आप ऑडियो सीडी को 16kbps से 256kbps तक की Mp3 फाइल के रूप में सुरक्षित कर सकते हैं । वैसे ये काम...
 
वीरेंद्र सेंगर की कलम से जाति, धर्म व खापों की संकीर्ण लक्ष्मण रेखाएं तोड़ने वाले युवा जोड़ों को इधर लगातार मौत के घाट उतारा जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में भी खापों का खौफ दस्तक दे चुका है। हाल के महीनो...
 
अमेरिका में रहते हुए थोड़ी तबियत खराब हो गयी, सोचा गया कि डॉक्‍टर को दिखा दिया जाए। भारत से चले थे तब इन्‍शोयरेन्‍स भी करा लिया था लेकिन अमेरिका आने के बाद पता लगा कि इस इन्‍श्‍योरेन्‍स का कोई मतलब नहीं, बे...
 
कविता : संजीव 'सलिल' * * जिसने कविता को स्वीकारा, कविता ने उसको उपकारा. शब्द्ब्रम्ह को नमन करे जो, उसका है हरदम पौ बारा.. हो राकेश दिनेश सलिल वह, प्रतिभा उसकी परखी जाती- होम करे पल-पल...
 
जब बिजली कम समय रहेगी तो आप अपने मोबाइल फोन को चार्ज नहीं कर पायेंगे। इससे भी आपको लाभ ही होने वाला है क्‍योंकि आजकल मोबाइल फोन पर काल दरें तो बहुत सस्‍ती कर दी गई हैं और सेम नेटवर्कों पर तो बिल्‍कुल फ्री,...
 
तुम
मित्रों, आज अपने विवाह की १०वी वर्षगांठ पर अपनी प्राण-प्रिया के लिए चंद पंक्तियाँ लिख रहा हूँ...मेरी हिंदी की डाक्टर साहिबा पत्नी को हो सकता है यें कविता काव्य-शास्त्रों के मापदंडों पर खरी न उतरती हुई
 
 
लिमटी खरे बता रहे हैं- भ्रष्‍टाचार का घालमपेल है राष्‍ट्रमण्‍डल खेल में
राष्ट्रमण्डल खेल बनाम भ्रष्टाचार का महाकुंभ* *कमर तोड मंहगाई फिर भी कामन वेल्थ के लिए खजाना उगल रहा धन* *13 दिनी आयोजन पर होंगे बीस हजार कारोड रूपए से अधिक खर्च* *(लिमटी खरे)* * आजादी के बासठ सालो... 
 
आज, 11 जुलाई को Zeal वालीं दिव्या श्रीवास्तव का जनमदिन है। बधाई व शुभकामनाएं आने वाले जनमदिन आदि की जानकारी, अपने ईमेल में प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें। अपने मोबाईल फोन पर SMS के द्वारा जनमदिनों...
 
आप इक बार ठोकर से छू लो हमें, * *हम कमल हैं चरण-रज से खिल जायेगें! * *प्यार की ऊर्मियाँ तो दिखाओ जरा, * *संग-ए-दिल मोम बन कर पिघल जायेंगे!!* * * *फूल और शूल दोनों करें जब नमन,* *खूब महकेगा तब जिन्दगी का चम...
 
 
(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में शिक्षक थे. बड़ी दो बेटियों की शादी हो गयी थी. बड़ा बेटा ...
 
महेन्द्र मिश्र बता रहे हैं- भारत देश को सांप और नागिनों का देश बताने वाले यूरोपीय देश भी अब खुद अंधविश्वास के शिकार .... अब फी भविष्यवाणी को लेकर आक्टोपस और तोता आमने - सामने ...
कभी *यूरोपीय देश* हमारे देश को सांप और नागिनों का देश कहकर खिल्लियाँ उड़ाया करते थे अब फीफा फुटबाल मैच में जीतने की भविष्यवाणी को लेकर खुद रूढ़ीवाद और अंधविश्वास के मायाजाल में उलझ गए है . *फीफा वर्ल्ड कप २...
 
 
 
 
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 
 
 

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ब्लॉगर का शिशु-गीत... , मैं कुछ पल का ब्लॉगर हूँ -ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Friday, July 9, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
हम मनाते है हमेशा सबकी खैर
कराते हैं आपको नए पोस्ट वाले ब्लागों की सैर
 
ब्लॉग की दुनिया एक महान दुनिया का नवसृजन-सा है. यह वैश्विक-लोकतंत्र का जीवंत उदाहरण भी है. हर कोई अपना **ब्लॉग ** बनाकर मन की बात लिख सकता है. लेकिन इस सहज-अधिकारवाद के चलते क्या लोग कुछ भी लिखने के लिये ...
 
मैं कुछ पल का ब्लॉगर हूँ कुछ पल की मेरी पोस्टें हैं कुछ पल की मेरी हस्ती है कुछ पल की मेरी ब्लॉगिंग है मैं कुछ पल ........................... मुझसे पहले कितने ब्लॉगर आये और आकर चले गए ,चले गए कुछ झंडे गा...
 
 
नींद में तैयार करती है खुद को* *जागती है नींद में** * * और नींद में ही* * अम्मा.. अभी आई कहकर निकल जाती है घर से * *चटख लाल रंग लाने वाली मेहन्दी इत्र, नेलपालिश की शीशियां और चमकदार कागजों की तलाश के ब...
 
भारत के हिन्दी टीवी समाचार चैनलों ने जो रास्ता पकड़ा है वह इस बात का संकेत है कि टीवी चैनलों में समाचार और संपादन के मानकों की विदाई हो गयी है। संपादन और समाचार प्रस्तुति के नाम पर बेईमानी हो रही है...
 
नमस्कार, मित्रो! आज की इस चर्चा में आप सबका हार्दिक स्वागत है! 

कालजयी साहित्यकार और छत्तीसगढ की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पह्चान बनाने वाले गजानन माधव मुक्तिबोध की पत्नी देवलोक सिधार गईं।वे लम्बे समय से बीमार थी और उनका ये संघर्ष कल रात खत्म हो गया।वे 88 वर्ष की थी और मु...
 
खोखली दिवारों के खाली मकान में रहती हूँ मैं. खाली बर्तन की तेज़ आवाज़ सी झूठी हंसी में .. खनकती हूँ मैं . भीतर के दर्द का लावा बनती हूँ जब .. तब आँखों की कोरो से गिरती हूँ मैं . लोग क...
 
 
आजकल पाठक ही मुझसे एक कहानी लिखवाए जा रहें हैं....हाँ , सच...जिस कहानी को दो कड़ियों में समेटने की सोची थी...पाठकों को इतनी अच्छी लग रही है कि मैं भी बस लिखती जा रही हूँ...पर उसकी वजह से इस ब्लॉग पर कुछ न...
 
वीरेंद्र सेंगर की कलम से मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की तैयारी है। ऐसे में सुगबुगाहट है कि इसमें मंत्रियों के ‘रिपोर्ट कार्ड’ की भूमिका होगी या नहीं। अगर वाकई में ‘रिपोर्ट कार्ड’ की कसौटी बनी, तो कई स्वन...
 
इन दिनों लगता है मैं *राइटर्स ब्लाक *जैसी स्थिति से गुजर रहा हूँ और यह इसी ब्लॉग जीवन की देन है जो जुमा जुमा कुल तीन साल की ही तो है -मगर इसी में कई वे गहन अनुभव हो गए जो बीते जीवन में हुए नहीं ..प्रेम...
 
गगन शर्मा बता रहे हैं- यह "जबुलानी बाल" का दोष है या हमारे दृष्टि तंत्र की कमजोरी ?
इस बार का विश्वकप फुटबाल जितना अपने सफल आयोजन, उल्टफेर, आक्टोपस को लेकर चर्चा में रहा वहीं खेल में प्रयुक्त बाल के कारण भी खबरों में छाया रहा। इस बार उपयोग में लाई गयी जबुलानी बाल के खांचों की वजह से अच्छे ...
 
 
साहिबा कुरैशी का- महंगाई और मध्य वर्ग
हिंदुस्तान का मध्य वर्ग महंगाई के खिलाफ बंद में हिस्सा लेने के प्रति इतना उदासीन क्यों है? जिन मुंबईवासियों ने 26/11 के हमले के बाद अपना आक्रोश जाहिर किया था, वे महंगाई के खिलाफ भारत बंद में शामिल
 
कवि रामेश्वर शर्मा का एक गीत *देख क्रुरता फ़ूलों की हम दंग हो गये* जीवन है या जटिल समस्या तंग हो गये। आदर्शों के रंग गिरगिट के रंग हो गये। कपटी भावों में डूबे जग मुंह बोले संबंध हुये विश्वासों के रुपक पछता...
 
 
 
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 

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साहित्य के रंग में रंगे हैं ब्लाग-हम खोल रहे हैं इनका राज-ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Thursday, July 8, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

आज हमने भी अपने ब्लाग राजतंत्र में एक छोटी सी कविता लिखी है। अब जब हम ब्लाग चौपाल सजाने बैठे हैं तो देखा कि ब्लाग जगत भी बहुत ज्यादा कवितामय है। ऐसे में हमने कविता वाले ब्लाग के साथ साहित्य से जुड़ी पोस्टों का इस चर्चा में समावेश किया है, आशा है यह चर्चा सबके मन भाएगी। 
रात रूठती रही मिलन की दिवस विरह के मुस्काये, अनगाये रह गये गीत संध्या के केश बिखर आये ! शून्य ह्रदय, मंदिर के दीपक बिना स्नेह के सिसक उठे, चले गए जब देव, लाज तज प्रिय दर्शन को पलक उठे ! छंद प्यार के रहे ...
सभी को मन भाती है खुशबू फूलों की फिजा को महका देती है खुशबू फूलों की किसी से भेदभाव नहीं करती खुशबू फूलों की सभी को समान प्यार देती है खुशबू फूलों की 
(१)* *ब्लॉग लेखन से क्या जुड़े, नित उमड़त रहत विचार* *जब तब फुरसत पाइके, लिख डारत आखर चार* *(२)* *ड्यूटी के लिये निकल पड़े, पहुंचे रेल्वे स्टेशन * *गाड़ी की लेट लतीफ़ी, लावे दिमाग मे टेंशन* *(३)* *प्लेट फ़..

(१)- दरीचे खुले हवा के साथ आयी तेरी खुशुबू | (२)- कह भी तो दो कहना है जो,वर्ना रोना है क्या? (३)- उडी चिड़िया पंखों को फैलाकर दाना लेकर | 
अदम गोंडवी- घर में ठंडे चूल्हे पर अगर खाली पतीली है। बताओ कैसे लिख दूँ धूप फाल्गुन की नशीली है? भटकती है हमारे गाँव में गूँगी भिखारन-सी, सुबह से फरवरी बीमार पत्नी से भी पीली है।। बग़ावत के कमल खिलते हैं.. 
यह गीतालेख प्रवक्ता में भी प्रकाशित है. मुझे लगा, हो सकता है, कुछ पाठक वहां न पहुंचे हों, यही सोच कर अपने ब्लॉग में देने की गुस्ताखी कर रहा हूँ. ”गीतालेख”. यानी एक गीत मगर आलेख के साथ. गाय की व्यथा-कथा...
संस्‍कृति विभाग छत्‍तीसगढ़ की वेब साईट में पिछले कुछ महीनों से कुछ महत्‍वपूर्ण जानकारियॉं पुरातत्‍व एवं संस्‍कृति विभाग के उच्‍च अधिकारी व सिंहावलोकन ब्‍लॉग वाले आदरणीय बड़े भाई राहुल सिंह जी के 
ई-साहित्‍य और हिन्‍दी ब्‍लॉग : सार्थक अभिव्‍यक्ति का एक झरोखा - वशिनी शर्मा
हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत पर एक विहंगम दृष्टि वशिनी शर्मा की। घबराइये मत कि इतना बड़ा लेख है, जब आप इसे पढ़ेंगे तो आप सबके मन में हिन्‍दी ब्‍लॉग तरंगे हिलोरें लेंगी और यही इस लेख की सार्थकता है। आप इसे अवश्‍य पढ...
कल मैट्रो से कहीं जाना था। रास्ते में एक लडकी को देखा। नीचे जींस और ऊपर केवल आंखें ही नजर आ रही थी, सॉरी मेरा मतलब है, उसने दुपट्टे को इस तरह से लपेटा हुआ था कि केवल आंखें ही दिख रही थी। एकदम बुर्कापोश टाई...
मित्रों इन दिनों पोस्टर कविताएं कम ही लिखी जा रही है। पता नहीं ऐसा क्यों है लेकिन लगता है शायद लेखकों और कवियों ने मान लिया है कि अब जनता के बीच जाने की जरूरत नहीं रह गई है. कविता-कहानी को लेकर सारी ब... 
"ले अभाव का घाव ह्रदय का तेज मोम सा गला अश्रु बन ढला सुबह जो हुई सभी ने देख कहा --- शबनम है !" - सरस्वती प्रसाद *** ज़िन्दगी के दर्द ह्रदय से निकलकर बन जाते हैं कभी गीत, कभी कहानी, कोई नज़्म, कोई याद ....
ललित शर्मा बता रहे हैं- सुनिए--“कविता क्या, कविता क्यों ?” विषय पर व्याख्यान
 
राज्य की पहली वेब पत्रिका तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित, साहित्य, संस्कृति, विचार और भाषा की मासिक पोर्टल सृजनगाथा डॉट कॉम के चार वर्ष पूर्ण होने पर चौंथे सृजनगाथा व्याख्यानमाला का आयोजन 6 जुलाई, 2...
पानी का कुछ भी रंग नहीं होता पर जब पानी उतरता है तो बड़ों-बड़ों का रंग उतर जाता है। एक समय था जब पानीदार लोगों की इज्जत हुआ करती थी पर जमाने के फेर ने सबकुछ बदल कर रख दिया और आज पानीदार लोगों की कुछ भी पूछ न...

अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

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