Powered by Blogger.

गुजरात में एक क्रांतिकारी कदम, हमारी बेटिओं को ‘सेनेटरी नेपकिन’ नहीं, स्कूल-अस्पताल चाहिए - ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Thursday, June 17, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज   


स्कूल खुल गए हैं, तो ब्लाग जगत में भी इसकी गूंज मालूम हो रही हैं। स्कूल पर कौन क्या कह रहा है, यह भी पढ़ने को मिल रहा है। एक तरफ स्कूल की गूंज तो दूसरी तरफ गुजरात में एक क्रांतिकारी कदम की बात पढ़ने को मिली है। देखें हमारे ब्लागर मित्र हमें किस दुनिया में ले जा रहे हैं- 

गिरिजेश राव बता रहे हैं- गुजरात में एक क्रांतिकारी कदम
गुजरात में इस वर्ष निगम के 6 वार्डों के चुनावों में ई-मतदान का देश में पहली बार प्रयोग होगा। GSWAN (गुजरात राज्य वाइड एरिया नेटवर्क) के द्वारा यह सम्पन्न की जाएगी। लोग घर बैठे अपने कम्प्यूटर और अंतर्जाल के...
भारत में आरएसएस सबसे बड़ा फासीवादी संगठन है। कहने को यह संगठन अपने को सांस्कृतिक संगठन कहता है लेकिन इसका बुनियादी लक्ष्य है भारत को हिन्दू राष्ट्र में तब्दील करना। कांग्रेस पार्टी समय-समय पर संघ प...
कल्‍पना करें * *करें कल्‍पना * *पर बंद करें * *कलपना* *और शुरू करें * *हंसना और * *तिलमिलाना। * जी हां, इसकी पूरी गारंटी दी जा रही है कि प्रेम जनमेजय विरचित सीता अपहरण कांड की विनय वर्मा द्वारा निर्देश...
बिगुल फूंका गया, "मुडा-तुडा नोट " की महिमा बखान का मेरा दिमाग भी कुलबुलाया, सोचा कर दूं बयां लफ्ज़ "नोट" की आन बान और शान का. "नोट" वोट की है चिंगारी "नोट" की जरूरत है सभी को चाहे वह अमीर हो या भिख...
उसे पता था कि मेरा फोन रोमिंग पर है, मगर फिर भी हम फोन पर लगे हुये थे.. चलो, इस सरकार में चावल दाल की कीमते भले ही आसमान छू रही हों, मगर कम से कम मोबाईल बिल रोमिंग पर भी कम ही आता है.. शायद सरकार बातों से ...
कभी कोई आया था ज़िंदगी मे... तो चिढन सी थी की मेरे हिस्से का प्यार कम हो गया.... माँ की गोद मुझसे छिन किसी और को मिल गयी.... पिताजी की नज़रो मे कोई और चेहरा चढ़ गया.... नाराज़ था मैं उससे क्यूँ आई वो... छ...
 
एक मशहूर चुटकुला है:एक बार एक व्यक्ति कपड़े की दुकान पर पहुंचा और बढ़िया सी टाई दिखाने को कहा.दुकानदार ने कई टाईयां दिखाई.ग्राहक को एक टाई पसंद आ गई.कीमत पूछने पर दुकानदार ने कहा-५४० रूपए,तो वह व्यक्ति बोला ...
हरीश प्रकाश गुप्त के हाइकु * -- करण समस्तीपुरी हाइकु हिंदी साहित्य में अभिनव आयातित पद्य विधा है। यह जापान से बरास्ते अंग्रेजी भारत आयी है। हाइकु का उद्गम स्थल जापान है। जापान में सतरहवी शताब्दी मे...
उपदेश सक्सेना कहते हैं- दुर्गा-काली से लेडी डान बनती महिलायें
एक हल्का-फुल्का जोक है- पत्नि की परिभाषा, पत्नि वह जो पति के पतन में सहायक हो, अब सच का आवरण ओढता जा रहा है. ...
स्कुल की छड़ी तब ऐसी थी पड़ी अब की घडी आये याद वो सुहानी घडी , चलो आज अकेले में बच्चे की बेग उठाकर देखे , उसकी किताबों में अपने बचपन को ढूंढकर देख 
  
हमारे ब्लाग राजतंत्र के साथ खेलगढ़   को मिलाकर हमारी पोस्ट का आंकड़ा कब का 1400 पार कर गया है। इसी के साथ खेलगढ़ का आंकड़ा 900 के पार हो गया है। बहुत दिनों से सोच रहे थे कि इस पर लिखे लेकिन दूसरे विषयों के कारण इस पर लिखना ही नहीं हो रहा था। वैसे अब
  
'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटता रावेन्द्र कुमार रवि जी का एक प्रेम-गीत 'ओ मेरे मनमीत'. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... सोच रहा-तुम पर ही रच दूँ मैं कोई नवगीत! शब्द-शब्द में यौवन भर दूँ, पंक्ति-पंक्ति में प्रीत! हर पद
  
बच्चो, रसगुल्ले का नाम सुनकर सभी के मुँह में पानी भर आता है। रसगुल्ले को मिठाइयों का राजा कहा जा सकता है। यह तो आप जानते ही होवोगे कि रसगुल्ला एक बंगाली मिठाई है। आज आपको इस के जन्म की रोचक कथा सुनाती हूँ।बात सन् 1858 ई. की है। कोलकाता (उन दिनों-कलकत्ता)
   
सर्वोच्च न्यायालय भारत का अंतिम और उच्चतम न्यायिक निकाय है। यही कारण है कि उसे संविधान के अनुच्छेद 136 के अंतर्गत विशेष अनुमति से अपील सुनने का प्राधिकार दिया गया है। इस अनुच्छेद के उपबंधों के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय भारत के राज्यक्षेत्र में किसी भी
  
जा री प्यारी हवा तू जा बादल से तू पूछ के आना धरती पर कब बरसेगा वो जल्दी से आ के बतलाना। धीरे धीरे मत जाना तुम सर्र सर्र करती उड़ जाना इधर उधर मत राह भटकना बात बता के जल्दी आना। प्यार से कहना बादल भइया प्यासी धरती तड़प रही सूरज भी है आग उगलता कब तक है
  
काले मेघा आओ नागर्मी दूर भगाओ ना।गगरी खाली गांव पियासानदिया से ना कोई आशा।सूख गये सब ताल तलैयाकैसे गायें छम्मक छैयां।धरती को सरसाओ नाकाले मेघा आओ ना॥सुबह सुबह ही सूरज दादागुस्सा जाते इतना ज्यादा।कष्टों की ना कोई गिनतीसुनते नहीं हमारी विनती।कुछ उनको समझाओ
   
वित्तीय लक्ष्य को कैसे प्राप्त करें -     वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करने से कुछ नहीं होता, उन्हें प्राप्त करना भी एक चुनौती है। सबसे बड़ा प्रश्न है कि वित्तीय लक्ष्य कैसे प्राप्त करें ?     इसके लिये हमें विभिन्न वित्तीय
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 

Read more...

संभालो अपने दिल को, सभी खूबसूरत चेहरे होते नहीं बेवफा-ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Wednesday, June 16, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
आज हमने भी अपने ब्लाग राजतंत्र में एक कविता लिखी है। इधर जब चर्चा करने बैठे तो ब्लागों को भी कवितामय पाया। ऐसे में सोचा आज की चर्चा को भी कवितामय कर दिया जाए। एक कोशिश की है, देखे कहां तक सफल हुए हैं, ये तो आप लोग ही बताएंगे।...
जख्म जो दिए, वो रखे है मैंने ज़िंदा खरोंचकर ! ऐ जिन्दगी ! मैं संवारूं भी तुझे तो क्या सोचकर !!* * मुरादें बही सब धार में, फंसा ही रहा मझधार में, अब लाभ है क्या, सैलाब के अवशेषों को पोंछकर ! ऐ जिन्दगी !...
दिल मानव शरीर का एक मात्र ऐसा अंग है जिसकी सबसे ज़्यादा पूछपरख होती है, चाहे फ़िल्मी गानों में हो या फिर गज़ल-शायरी में. दिल बड़ा ही आवारा किस्म का अंग होता है, यह कब-कहाँ फिसल जाये, ... 
  
आज मुझे जी भर रोने दो
आज मुझे जी भर रोने दो !बीते मधुर क्षणों को मुझकोविस्मृति सागर में खोने दो ,आज मुझे जी भर रोने दो !छुओ न उर के दुखते छाले,मेरी साधों के हैं पाले,बढ़ने दो प्रतिपल पर पीड़ाउसमें स्मृतियाँ खोने दो !आज मुझे जी भर रोने दो !मत छीनो मेरी उर वीणा,भर देगी प्राणों
  
यूँ तेरा नाम.........
यूँ तेरा नाम ज़माने से छिपाया हमने, सी लिए होंठ, हर इक लफ्ज़ मिटाया हमने। हैं तलबगार मगर तुझको ना चुरायेंगे, ऐसे पाया भी तो सच कहिये क्या पाया हमने। बदली बदली सी है बहती हवा ज़माने की, इसमें देखा नहीं अपना कहीं साया हमने। अब भी है प्यार मुहब्बत, बढ़के
  
सभी खूबसूरत चेहरे होते नहीं बेवफा
गम की शाम ढ़ल ही जाती हैजख्म दिल के मिटा ही जाती है।।खुले रखो दिल के दरवाजे तो फिर नई मंजिल मिल ही जाती है।।सभी खूबसूरत चेहरे होते नहीं बेवफामिल ही जाती है तलाशने से वफा।।चलता रहता है यूं ही ये सिलसिलाजब तक रहता है जिदंगी का कारवां।। 
  
गीत मेरे ........
मेरे घर की खुली खिड़की सेअलसुबहजगाता है मुझेचिड़ियों का कलरव गान.....ठिठोली कर जाती हैरवि की प्रथम किरणअंगडाई लेते कई बार.....पूरनमासी का चाँद भीझेंपता हुआ साझांक लेता है बार -बार....झर-झर झरते पीले फूलदेते हैं दस्तकखिडकियों पर कई बार.....मीठी तान छेड़
  
छंद प्रसंग
धार पर हम -2 : लोकार्पण और विमर्श(प्रस्तुति:विनोद श्रीवास्तव,कानपुर)11 मई,कानपुर,जुहारीदेवी महिला महाविद्यालय के प्रांगण में गीतकार वीरेन्द्र आस्तिक द्वारा सम्पादित धार पर हम-2 का लोकार्पण सम्पन्न हुआ। इस समारोह का आयोजन काव्यायन ,जनसंवाद तथा बैसवारा शोध
  
एक नन्हां सा दिया
दीपक नें पूछा पतंगे से ,मुझ मैं ऐसा क्या देखा तुमने ,जो मुझ पर मरते मिटते हो ,जाने कहां छुपे रहते हो ,पर पा कर सानिध्य मेरा ,तुम आत्महत्या क्यूं करते हो ,भागीदार पाप का ,या साक्षी आत्मदाह का ,मुझे बनाते जाते हो ,जब भी मेरे पास आते हो |जब तक तेल और बाती
  
कहते हैं -- अतिथि देवो भव: । हमारे देश में अतिथि का आदर सत्कार करना परम कर्तव्य माना जाता है । लेकिन ऐसा लगता है कि बदलते ज़माने के साथ यह सोच भी बदल रही हैं ।बोर्ड रूम में मीटिंग चल रही थी । अस्पताल की गर्म समस्याओं पर गर्मागर्म बहस चल ही थी । बाहर भी 
स्टेज पर मोहम्मद रफ़ी साहब को गाते हुये सुनिये और नौशाद साहब भी साथ में हैं
एक बहुत सुन्दर गाना है "मधुबन में राधिका नाचे रे". स्वयं रफी साहब को गाते हुये देखिये, नौशाद साहब साथ में खड़े हैं.  एक divine feeling है इस गीत में. object width="500" height="405"> रफी साहब के सबसे छोटे सुपुत्र शाहिद रफी रफिनी नाम से गोरेगांव
 श्यामल सुमन दिखा कहे हैं- बचपन
याद बहुत आती बचपन की। जब करीब पहुँचा पचपन की।। बरगद, पीपल, छोटा पाखर। जहाँ बैठकर सीखा आखर।। संभव न था बिजली मिलना। बहुत सुखद पत्तों का हिलना।। नहीं बेंच था फर्श भी कच्चा। खुशी खुशी पढ़ता था बच्चा।। खेल क...
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

Read more...

माफी नहीं, सर चाहिये , हर शहर में एक बदनाम औरत होती है-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Tuesday, June 15, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

 कहने को कुछ खास नहीं है, ऐसे में सोचतो हैं कि क्यों कर समय खराब किया जाए, सीधे चर्चा पर ही चला जाए.....
 
पी एम् कार्यालय में पढ़ी जाने वालीं पत्रिकाओं और समाचार पत्रों की स्थिति के बारे में आज एक ब्लॉग में देखा साथ में हिन्दी भाषा की पत्र पत्रिकाओं की हालत( संख्या के आधार पर) देखी तो सोचा कि आपके साथ इस स्थिति
 
अंग्रेजी के शब्द और उच्चारण * मैं आज बैठे बैठे सोच रहा था विदेशी भाषा अंग्रेजी, जो आज हमारी मातृभाषा से भी ज्यादा लोकप्रिय और प्रतिष्ठा कि वस्तु बन गई है, उसका उच्चारण हम किस तरह से करते हैं. जिव्हा सही
 
 
रविवार का दिन था ! और हम लोगों का उस दिन अचानक ही सांता क्रूज बीच पर जाने का प्रोग्राम बन गया ! प्रशांत महासागर का एक बहुत ही प्रसिद्धऔर रंगीन बीच जहां गुज़ारा हर लम्हा न केवल मन मस्तिष्क में मधुर यादों की ...
 
गाय... कहने को मनुष्येतर जीव है. लेकिन देखा जाये तो वह अपनी माँ से बढ़कर है. माँ का दूध हम दो साल तक पीते हैं लेकिन गाय कादूध जीवन भर. गाय से बनी चीज़ें भी हमारे साथ जीबव भी चलती है,. दही, मठा, छाछ, खीर, म...
 
दिलीप  कहते हैं-आसमान से टूटा तारा...आँख से टूटी पलक....और इंसान की फितरत...
अक्सर सोचता हूँ जब भी तारा टूटता है या पलक का बाल टूट कर गिरता है...तो हम कुछ मांगते क्यूँ है...उसी सवाल का जवाब जो सोच पाया वही है ये रचना...पुरानी है...थोड़े संपादन के साथ... नभ के दामन से कल इक सिता...
 
नहीं, इस बार माफी से काम नहीं चलेगा. दोषी चाहे कोई भी हो, गिरफ्तारी हो, समयबद्ध मुक़दमा चले और सज़ा होनी चाहिये . हम चाहते हैं कि न केवल दोषियों को सज़ा मिले बल्कि पीड़ित परिवारों को प्रति पीड़ित व्यक्ति द...
 
विष्णु खरे- कोई ठीक-ठीक नहीं बता पाता उसके बारे में वह कुँआरी ही रही आई है या उसका ब्याह कब और किससे हुआ था और उसके तथाकथित पति ने उसे या उसने उसको कब क्यों और कहाँ छोड़ा और अब वह जिसके साथ रह रही है या न...
 
मेरे पापा - कुछ कहूं तो अतिश्योक्ति लगेगी , लेकिन वे थे ऐसे ही साधू प्रकृति के व्यक्ति. किसका भला किस तरह से हो सकता है सबका समाधान उनके पास रहता था. अगर उनके पास जेब में पैसे ह...
 
स्वप्निल बता रही हैं- सोनू भी हो गया पास
अपना सोनू बाबा भी पास हो गया है। उसको अपनी शरारत के कारण पूरक परीक्षा देनी पड़ी थी। परीक्षा के समय मस्ती करते हुए उसने झूले से कूद कर अपना हाथ तोड़ लिया था। ऐसे में उसे पूरक परीक्षा देनी पड़ी। पूरक परीक्षा
  
ग्वालियर में रहने वाले हमारे कबाड़ी मित्र अशोक कुमार पाण्डेय ने अपनी यह लम्बी कविता मुझे कुछ दिन पूर्व भेजी थी. एक बड़े फलक पर फैली यह कविता हमारी इस इक्कीसवीं सदी पर काफ़ी धारदार और ज़रूरी टिप्पणी है. कविता लम्बी है और ध्यान से पढ़े जाने की दरकार रखती
  
जब तक नया कुछ लिख नही पाती तब तक अपनी पुस्तक मे से कहानियां  ही पोस्ट कर रही हूँ। ये कहानी मेरी पुस्तक  वीर्बहुटी मे से है और दैनिक जागरण समाचार पत्र मे भी छप चुकी है।कर्ज़दार--कहानी"माँ मैने तुम्हारे साम्राज्य पर किसी का भी अधिकार नही होने दिया
 
 राम त्यागी बता रहे हैं- दो मासूम आतंकी और मेरा सूप बनाने का प्रयोग ....
कुछ चीजों में मन को सही और गलत का पता करने में बड़ी मुश्किल होती है, कुछ चीजें गलत होने पर भी मन को सुख देती हैं, इधर मेरे यहाँ भी एक अजीब सी उलझन है, दो ऐसे लोग है जो हद से ज्यादा नुकसान कर रहे हैं, पर फ...
   
देश में भ्रष्टाचार ने किस तरह से अपने पाँव पसार रखे हैं और किसी भी अच्छे काम को किस तरह से पलीता लगाया जाना है इसका ताज़ा उदाहरण सीतापुर जनपद मुख्यालय पर स्थापित महिला थाने में देखने को मिला. जनवरी माह में लहरपुर में पढ़ने गयी एक लड़की अगवा की जाती है और
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 
 
 

Read more...

जोश में होश नहीं रहता , झप्पी से जुड़ते हैं दिल-ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Monday, June 14, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज  
 
आज की चर्चा शुरू करने से पहले हम एयरटेल के उन बंदों को धन्यवाद देना चाहते हैं जिनके कारण हम नेट पांच घंटे में ठीक हो गया और हम आज की चर्चा करने में सफल हुए। वरना कल जह हमारा नेट खराब हुआ था तो लगा था कि आज हम चर्चा ही नहीं कर पाएंगे। बहरहाल हम चलते हैं आज की चर्चा की तरफ- 
 
 
 
जोश में होश नहीं रहता * होश में जोश नहीं रहता मानुस तन है, बुद्धि है, विवेक है, गूंगा भी खामोश नहीं रहता कहा गया है, "जल्दी में लद्दी (कीचड) औ धीर में खीर अपने ही लोग, और अपनों के कारण, पहुँचती है/पहुंचाते 
 
नमस्कार , आज मंगलवार का दिन और हाज़िर है कविताओं से भरी ये पोटली….एक एक कर निकालते जाइये .. और पढ़ कर आनंद उठाते जाइये…. मेरा प्रयास रहता है कि सप्ताह की बेहतरीन कविताएँ आप तक पहुंचा सकूँ…और साथ ही कुछ..

इस सादगी पे कौन ना मर जाये ए खुदा लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं जी हां ,ये ज़ुबानी ज़मा-खर्च की लड़ाई किसे दिखा रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ? भाजपा के साथ गल्बहियां भी हैं और आंखों के ...
 
 
कल मेरे बेटे के मित्र ( voltak) के पुत्र का जन्मदिन था। इमेल से निमंत्रण मिला कि जन्मदिन पर आना है। सेनोजे (san jose) से आधा घण्टे की दूरी पर वर्सोना पार्क है, जहाँ एक झील है और बच्चों के खेलने के लिए बह.
 
इस वक़्त देश में जातीय आधारित जनगणना को लेकर खूब चर्चा हो रही है. मैंने अपने एक लेख में पिछले दिनों लिखा था-''जाति न पूछो साधु की''. कबीर छः सौ साल पहले कह गए है. मैंने भी तीन दशक पहले -जब होश संभल रहा था,...
 
शिवम मिश्रा जी ने एक मुहिम शुरू की....आप सभी का सहयोग चाहिए...ये लिंक्स पढ़े....पहली बरसी पर विशेष :- अश्रुपूरित श्रद्धांजलि और मेरी वह मुराद ............बिन मांगे जो पूरी हुयी !! यह एक सार्थक और भावनात्मक...
 

 
राजकुमार सोनी बता रहे हैं- आटो वाले अमीन सायानी
मैंने पिछले कुछ सालों में आटो वाले अमीन सायानी के दर्शन नहीं किए। शायद आपने भी नहीं किए होंगे। नई फिल्म के लगते ही अमीन सायानी अपनी गे-गो-गे गो करने वाली आटो में बैठकर मोहल्ले के कम से कम चार चक्कर यह कह...
 
मैं शशि सिन्घल उत्तर प्रदेश के अपनी लाजवाब व सुन्दर धरोहर के लिए समूचे विश्व में प्रसिद्ध शहर आगरा में पली - बढ़ी हूं । यदि हम आज से पन्द्रह - सोलह बरस पीछे जाएं तो पाएंगे कि उस दुर में लड़कियों का घर से बाह...
 
 फिल्म गोपी का एक गीत "रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा,हंस चुनेगा दाना और कौवा मोती खायेगा..." आज भी लोकप्रिय है और मौजूदा परिस्थितियों पर बिलकुल सटीक लगता है क्योंकि जब गाय ही घास की जगह मांस और
 
 
आपके इंटरनेट ब्राउजर में इंस्टाल अनचाहे टूलबार्स को हटाने के लिए एक आसान औजार । इसके उपयोग से आप बस एक क्लिक करके किसी टूलबार को हटा पायेंगे । इसमें आप * Google Toolbar and QuickSearchBox * Yahoo! Toolba...
 
 
सीनियर ब्लोगर, जूनियर ब्लोगर, बड़े ब्लोगर, छोटे ब्लोगर, महान ब्लोगर .... आखिर क्या है यह? ब्लोगर महान होता है या उसका पोस्ट उसे महान बनाता है? हमारा तो मानना है कि सिर्फ रचना ही छोटी, बड़ी या महान होती है जो...

संजय दत्त ने मुन्नाभाई एमबीबीएस में हिंदुस्तानियों को कुछ नए शब्द दिये हैं. एक है-जादू की झप्पी, हमारे यहाँ किसी के स्वागत में उससे गले मिलने की रवायत पुरानी है, अब विज्ञान ने इस... 
 
मिनी नोटबुक या कहें लैपटाप अधिक क्‍या लिखूं जिनके पास है वे अनुभव बतलायें जिनके पास नहीं है वे अनुभव लें यदि आप में से कोई डैल में हैं तो वे भी सुझायें शायद उनका वहां होने का लाभ मिल जाए या मॉडल, ब्रांड औ...
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 

Read more...

चवन्नी जानेमन-अठन्नी दिलरूबा, अम्मा, पैसे भेज दिए हैं-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Sunday, June 13, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

 आज सीधे चर्चा करते हैं-
 
चवन्नी जानेमन-अठन्नी दिलरूबा चवन्नी जानेमन-अठन्नी दिलरूबा बेचारा दो का नोट बीमार पड़ गया बीमार पड़ गया डॉक्टर आ गया डाक्टर आ गया, सुई लगा गया सुई थी गलत ,बेचारा मर गया बेचारा मर गया, भूत बन गया भूत बन गया, स...
 
एक अकेला चाँद बिचारा, इतने टूटे हारे दिल...सबकी तन्हाई का बोझ थोड़ा भारी नहीं हो जाता है उसके लिए. सदियों सदियों इश्क की बातें सुनता, लोग उसे सब कुछ बताते, दिल के गहरे सारे राज. चाँद एक बहुत बड़ा किस्सागो है...
 
जब मन उदास होता है ख़याल के पास होता है जो दिल में दर्द उठता है लब पे उच्छ्वास होता है पहुँचेंगे शिखर पर वो जिन्हें विश्वास होता है सच्चा प्रेम मिल जाए फिर मधुमास होता है सुधि सा जो साथी हो जीवन ख...
 
एक साथ ऊपर उठकर हवा में छलकते पैमाने, मदयम 'टन्न' की स्वर लहरी, चेहरे पे मंद-मंद बिखरती सारे दुःख-दर्द , ग़मों पर मानो कोई विजयी मुस्कराहट , और मटकती आँखों का वो नशीला अंदाज ! मुद्दत से, सोचता हूँ पता नहीं 
  
बहुत सुन्दर कालोनी है. करीब ८० मकान. अधिकतर लोग, जिन्होंने यह मकान बनवाये थे रिटायर हो गये हैं. कुछ के बेटे बहु साथ ही रहते हैं तो कुछ अकेले. कौशलेश बाबू की बहु बहुत मिलनसार, मृदुभाषी एवं सामाजिक कार्यों में बहुत रुचि लेती है. कालोनी में रह रहे बुजुर्गों
  
एक और आँखों देखा सच तथा उससे बुना शब्द जाल , शायद आपको पसंद आए :- जब तुम उसे इशारे करते हो ,शायद कुछ कहना चाहते हो ,कहीं उसकी सूरत पर तो नहीं जाते ,वह इतनी सुंदर भी नहीं ,जो उसे देख मुस्कराते हो ,उसे किस निगाह से देखते हो ,यह तो खुद ही जानते हो ,पर जब
  
तुम संग नेह की जोत जगा केहमने जीते जीवन के तम  ..!********************धीरज अरु  व्याकुलता  पल केद्वन्द मचाते जीवन पथ में ,तुमसे मिल के  शांत सहज सबमन बैठा विजयी सा रथ में !!कितने  पावन हो तुम प्रियतम
 
'आप इनसे कोई भी निजी सवाल नहीं पूछ सकते, परिवार, बच्चे किसी के भी बारे में नहीं""अगर ये खुद कुछ बताएं तो?""तो इनकी बातें बहुत ध्यान पूर्वक सुने और उनका ध्यान बांटने की कोशिश करें क्यूंकि आपलोग तो थोड़े देर में यहाँ से चले जायेंगे और इनकी यादें इन्हें
 
आग की लपटों के बीचगुब्बारे की तरह फूलती रोटियांऔर उस आंच की तपन सेलाल होता माँ का चेहरादोनों ही आग में तपकर निखरे हैंदोनों ही चूमने लायक हैक्योंकि रोटियों में स्वाद है माँ के प्यार काऔर माँ में स्वाद है उसकी ममता का
  
तुषार धवल कवि और चित्रकार हैं। उनका पहला काव्य-संग्रह ‘यह पहर बेपहर का’ सद्यःप्रकाशित हुआ है। जिन कवियों की कविताओं ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापक चर्चा पाई है उनमें उनका नाम प्रमुख है। वो कालेज के दिनों से कविताएं लिखते रहे हैं। उसके बाद कुछ दिनों तक
 
मैंने शिकार नहीं शिकारा ही लिखा है। दरअसल पति और पत्‍नी शादी के तुरंत बाद गृह‍स्‍थी के शिकारे पर आ गिरते हैं। कश्‍मीर की वादियों जैसी खूबसूरत लगने वाली दुनिया में घर एक डल झील बन जाता है और पति और पत्‍नी...
 
अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे* हमें क्या मालूम था, लोगों के आशीर्वाद मिल रहते थे वे थे सब "छद्म" और थे हम आँख मीचे अब न रहेगा बांस ना रहेगी बांसुरी "*घुरुवा" *हट जाएगा हम तो लेते हैं विदा इस ब्लॉग की दुनिया से, ...
 
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

Read more...

दीवानों की नींद उड़ गयी- छोरियां क्या से क्या हो गयी.- ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, June 12, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज  
 
हर जमाने में छोरियां क्या से क्या हो जाती हैं, लेकिन यह भी तय है कि दीवानों की नींद जरूर उड़ जाती है। लेकिन सोचने वाली बात तो यह है कि आज के जमाने में ऐसे दीवाने हैं जिनकी नींद उड़ जाती है, हां यह तो जरूर है कि छोरियां आज भी क्या से क्या से हो गयी हैं- तो चलिए देखे कि अपने ब्लाग भी क्या से क्या हो गए हैं और कौन से रंगों में खो गए हैं- 
 
 
ज़िन्दगी इक व्यथा हो गयी. प्रीत की दुर्दशा हो गयी. देखते, देखते, देखते... ज़िन्दगी क्या से क्या हो गयी. आया तूफ़ान महंगाई का, सारी खुशियां हवा हो गयी. पीड़ा इतनी बढ़ी अंततः, कुल दिनों की दवा
 
 
मै उजियारा बाँट रहा था मगर हवा को रास न आया * *उसने आँधी को भेजा और मेरा जलता दीप बुझाया* *एक दीप बुझ जाने पर भी हार नहीं मानी मैंने * *फिर से दीप जलाकर मैंने बस आँधी को सबक सिखाया 
 
 
थी कभी छत पर मेरे कुछ धूप आकर तैरती... और नीचे छाँव भी थी सुस्त थोड़ी सी थकी... छाँव के कालीन पर नन्हा खिलौना रेंगता... कुछ उछलती कूदती साँसों को मुझपे फेंकता... हाँ वो बचपन था कभी कुछ झूमता कुछ डोलता......
 
एक चीनी कहावत है-यदि आपको एक दिन की खुशी चाहिए तो एक घंटा ज्यादा सोएं. यदि एक हफ्ते की खुशी चाहिए तो एक दिन पिकनिक पर अवश्य जाएँ.यदि एक माह की खुशी चाहिए तो अपने लोगों से मिलें.यदि एक साल के लिए खुशियाँ चा...
 
मौलिक विज्ञान लेखन* *झूम रहे थे जुगनू नाना* *विश्वमोहन तिवारी*, एयर वाइस मार्शल, (से.नि.) जुगनू का नाम लेते ही मन में एक खुशी की लहर दौड़ जाती है। बरसात की नहाई संध्या की इन्द्रधनुषी मुस्कान या...
 

संगीता पुरी बता रही हैं- खेल खेल में ज्‍योतिष की जानकारी देने का प्रयास - 2
कल के ही लेख को आगे बढाने का प्रयास कर रही हूं , पर एक टिप्‍प्‍णी के कारण शीर्षक में से वैज्ञानिक दृष्टिकोण हटा दिया जा रहा है। जब भी मैं ज्‍योतिष को विज्ञान कहती हूं , उनलोगों को कष्‍ट पहुंचता है , जो मोट...
 
कुछ दिनों पहले मुझे किसी ने एक चुटकुला भेजा जिसे पढ़कर मैं अपनी हंसी रोक ही नहीं पा रही थी भिखारी : बेटी दो दिन से कुछ नहीं खाया, कुछ खाने को दे दे. लड़की: बाबा अभी खाना नहीं बना है. भिखारी:कोई बात नहीं मेर...
 
लटके झटके वाली पोस्ट इक झलक मे भा जाती है* *अब जरूरत क्या है, हो गए हैं हम आज़ाद,* *बलिदानी शहीदों की जरा भी याद नहीं आती है * *गवाह है कल की चली हुई हमारी लेखनी * *जिसने याद किया था उस शहीद को, नाम है करत...
  
बहुत ..बीमार... है ..माँ....आज माँ के पास बैठा ..हूँ.बहुत निकट, उससे एकदम सट कर.तो क्या एक दिन माँ मर जायेगी?क्या माँ फिर नजर नहीं आएगी?ना जाने कैसे मन की बात सुन लिया?वह धीरे ..से ...फुसफुसाई..........,बहुत धीमी मंद आवाज आई.....-"माँ मरती नहीं, कभी मरती
  
जिंदगी एक गधे के साथ भगावन की प्रेमिका के पिता ने भगावन को समझाया, “मैं नही चाहता कि मेरी बेटी पूरी जिंदगी एक गधे के साथ बिताए।” भगावन ने बड़े इतमिनान से जवाब दिया, “बस इसीलिए तो मैं उसे यहां से ले जाने आया हूँ।”
  
सय्यद शहरोज़ कमर, एक बेहतरीन देशभक्त, लेख़क, सम्पादक, का हाल का उनके ताज़ा लेख से लगता है हर कलाकार,लेख़क की कहानी कह रहा है ! प्रकाशकों के अन्याय, आम जनता,और खुद मीडिया की उपेक्षा के शिकार ये कलम के धनी लोग क्या काम करें कि दो जून इज्ज़त के साथ रहना
  
अबे पानी पूरी का का भाव है बे..... आज शाम को गोल गप्पे खाने का मन हुआ तो भाई दो प्लेट गोल गप्पे का ऑर्डर दे दिया गया..... रेट सुन के दिमाग ख़राब..... लो आप भी रेट देख लो और फिर बताओ....अबे हमको याद है बरेली और बनारस का दिन जब एक रुपैया के बारह गोल गप्पे
 
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 
 

Read more...

हे, ईश्वर कहाँ हो तुम-देखों दुनिया कहां हो रही है गुम-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Friday, June 11, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज 

आज की चर्चा का आगाज एक कविता से कर रहे हैं-

मकान के नाम पर 
टूटे-झोपड़े
बदन ढ़कने के नाम पर 
फटे-पुराने कपड़े
भीख मांगते इंसान 
प्यासी आंखे, भूखी आंते
नजर आती है चारों तरफ
बेबसी, लाचारी, गरीबी और भूख
लगती है आज सारी दुनिया 
बघिर और मूक 
 ---------------------
(सुनील) * चल ऐ मन इस शहर से दूर चल थक चुका है तन इस शहर से दूर चल क्या कहें, किसको कहें, कैसे करें दर्द बयां महंगाई ने इस कदर मारा है मुझको अब तो रोटी का भी हमसे नाता टूट चुका है बड़े अरमां से आये थे इस 
स्वामी विवेकानंद ने सलाह दी थी कि हमारी युवा पीढ़ी को गीता पढ़ने की बजाय फुटबाल खेलना चाहिए.उनका कहना था कि देश के युवा वर्ग को सबल बनना होगा,धर्म की बारी तो इसके बाद आती है. उन्होंने कहा था कि यह मेरी सलाह ...
मोहिनी माया के चंगुल मे फँसा, बिखरा, बँटा, मूल कर्तव्यों की रेखा से कभी का तू हटा, अनवरत संघर्ष का क्रम है सतत बस चल रहा, भाग्य पर सब छोड़ के तू क्यूँ स्वयं को छल रहा, तू स्वयं की सोच से भीषण कोई संग्रा...
ये तो पूरी मिट्टी हो गयी है ...दूसरी बेटी है ना तुम्हारी , ले जाओ घर " उस एक महीने की नन्ही सी बच्ची के लगभग नीले पड़ते से चेहरे को देखते हुए चिकित्सक ने पिता को कहा । फक्क चेहरा लिए सीढियां उतरते पिता...
आज के सांध्‍य दैनिक में इस समाचार को पढ़कर मैं सकते में आ गया अभी दो दिन पहले ही हबीब तनवीर जी की पुण्‍यतिथि पर साथी ब्‍लॉगरों नें पोस्‍ट लगाया और भाइयों नें टिप्‍पणियां भी की और ताने भी मारे कि हबीब जी की...
जिन दिनों पोस्टरों पर कविताएं लिखी जा रही थी उन दिनों कम शब्दों में सीधी बात कहने की एक परम्परा सी चल पड़ी थी। ऐसा नहीं है कि लेखकों के एक बड़े वर्ग ने या यूं कहें काफी हाउस में काली काफी पर सिगरेट की राख ...
-सहर लखनवी- कि जैसे आग का शोला सा लपक जाता है। या कि बंगाल का जादू सा कोई छाता है। कहीं पड़ जाए न इस सब्र के बंधे में दरार, तुम्हारा जिस्म मुझे गुनह को उकसाता है। अगर आपको *'हमराही'* का यह प्रयास पसंद आया...
बारिश का इंतजार वैसे तो सबको होता है पर सबसे ज्यादा उसे होता है जिसे बारिश और बारिश का मौसम दोनों ही पसंद हो । मुझे भी बारिश बेहद पसंद है बारिश में भीगना फुहारों के साथ मस्ती करना उन फुहारों से खुद को भीगा...
शरद कोकास कहते हैं- विवाह समारोहों में क्या कभी आपने इन्हे देखा है ?
यह विवाहों का मौसम है । जहाँ से गुज़रो शहनाई बजती सुनाई देती है । जिनका विवाह हो रहा है वे भी प्रसन्न हैं और साथ ही उनके माता पिता भी ,कि चलो एक ज़िम्मेदारी पूरी हो गई । पता नहीं कब तक हमारे यहाँ बच्चों के...
  
ब्रेकिंग न्यूज ... गुप्त ब्लागर मीट की संभावना !!!
अभी अभी गुप्त सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार ब्लागजगत में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सरगर्मियां तेज हो गई हैं ... यह जानकारी मिल रही हैं कि ब्लागजगत में जूनियर एसोशियेशन के गठन को लेकर मचे घमासान तथा युवा ब्लागरों के बगावती तेवर को देखते हुये ...
  
आओ प्रियवर स्नेह तलैया में मिल कर स्नान करे
आओ प्रियवर स्नेह तलैया में मिल कर स्नान करे एकाकीपन की घड़ियों में, इक दूजे का ध्यान करें देंखे स्वप्न सलोने सुन्दर, नीड़ बनायें इक अनुपममधुर चांदनी में बन  जाएँ,  इक दूजे के हम शबनम अंतर्मन के अहसासों का, आओ हम पहचान

अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 

Read more...

  © Blogger template Webnolia by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP