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लो मैं आ गया .., लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, August 7, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
आज छुट्टी का दिन है, देर तक सोते रहे। उठते ही चर्चा करने बैठ गए हैं। चलिए देखते हैं छुट्टी के दिन कौन किस रंग में है....... 
 
सभी मित्रों को प्रणाम विंडो करप्ट और हार्ड डिस्क खल्लास लेकिन हार्ड डिस्क कम्बक्त गारंटी में थी सो कम्प्यूटर वाले ने बदलने भेज दी लगभग दो महीने बाद मिली है अभ्यास छूट गया है लेकिन एक दोहे के साथ अपनी उप...
 
रात के सन्नाटे में बरसते पानी की टिपिर-टिपिर ध्वनि! आंगन में लगी रातरानी के फूलों की भीनी-भीनी सुवास! पड़ोस के घर में चलती हुई टीवी से सुनाई देता गीत - "मनमोर हुआ मतवाऽऽला ये किसने जादू डाला रे..."! दामिनी ...
 
रेक्टर कथूरिया (पंजाब स्क्रीन पर *ब्लॉग से* नामक विषय पर रेक्टर कथूरिया द्वारा बढ़िया ब्लॉग चर्चाएँ हुई हैं. आज की चिट्ठा चर्चा साभार पंजाब स्क्रीन) चर्चा ब्लागों की डाक्टर हरदीप कौर संधू...
 
 
काव्यशास्त्र-27 :: आचार्य पण्डितराज जगन्नाथ* आचार्य परशुराम राय आचार्य पण्डितराज जगन्नाथ आचार्य अप्यय्यदीक्षित के समकालीन थे और दोनों एक-दूसरे के प्रतिद्वन्दी थे। आचार्य अप्यय्यदीक्षित की भाँति ये ...
 
जाति मिटे तो गरीबी हटे* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* * * * * * * * * * * जातीय गणना के इरादे को देश सफल चुनौती दे रहा है| जबसे 'सबल भारत' ने 'मेरी जाति हिंदुस्तानी' आंदोलन छेड़ा है, इसका समर्थन बढ़ता ही...
 
आज, 8 अगस्त को - अमीर धरती गरीब लोग वाले अनिल पुसदकर - मीडिया व्यूह, नीशू के अल्फाज़ वाले नीशू तिवारी - अजब अनोखी दुनिया के चित्र वाले शुभम आर्य का जनमदिन है बधाई व शुभकामनाएँ *आने वाले **जन...
 
लेह लद्दाख में बादल फटने की विनाशकारी घटना ने वहां के निवासियों पर कहर ढाया है.टी वी पर खबरें देख देख कर मन द्रवित हो जाता है. जान -माल का भारी नुकसान होने के बाद वहां के पीड़ित लोगों की दुश्वारी और भी बढ .. 
 
महंगाई डायन और छत्तीसगढ़ इन दिनों फिल्म "पिपली लाईव" की चर्चा जोरों पर है। पत्र-पत्रिकाओं में तो पिपली लाईव पर तरह-तरह के समाचार आ रहे हैं। इलेक्ट्रानिक मिडिया का प्रत्येक चैनल इस पर खबरें बना रहा है।...
 
कई दिनों से बीवी की तबियत दुरुस्त नहीं थी…कई बार उसने मुझसे कहा भी कि… “डॉक्टर के पास ले चलो”…लेकिन मुझे अपने काम-धंधे से फुरसत हो तब ना।हर बार किसी न किसी बहाने से टाल देता| एक दिन बीवी ने...
 
चलो अच्छा हुआ हँसा दिया आज सुबह से हँसी ही नहीं ना जाने कहाँ काफूर हो गयी थी किस कोने में दुबकी पड़ी थी क्या करूँ हँसी आती ही नहीं दिल के गहरे सन्नाटों में खो जाती पता नहीं कौन से सन्नाटे हैं जो ...
 
लिमटी खरे कहते हैं- हिटलरशाही पर उतारू हो गई है कांग्रेस
खेल खेल में अरबों का खेल * *कामन वेल्थ में बह रहा पैसा पानी की तरह * *शिक्षा और अन्य मदों में है नहीं पैसा पर खेल के नाम पर खुल रही पोटलियां * *मनमानी के लिए कर रही है जबरिया अत्याचार
 
गुरूजी गंगा के किनारे बैठकर ध्यान कर रहे थे . आरती होने में काफी समय था तभी दो चार उनके शिष्य आपस में बैठकर व्यर्थ की बकबास कर रहे थे . वे दूसरों की हंसी उड़ा रहे थे और जोर शोर से अन्य लोगों की निंदा कर र...
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 

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कैसे कहूँ , इफ़ बास इज़ रांग?-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Friday, August 6, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज


सुनाए मित्रों क्या है हाल
सज गयी है आज की चौपाल....

साधना वैद्य कहती हैं- कैसे कहूँ *

कैसे कहूँ सखी मैं तुमसे अपने उर की मौन व्यथा, उमड़-उमड़ कर कहते आँसू इस जीवन की करुण कथा ! आज याद आती बचपन की कैसा था वह प्यारा काल, खाना, हँसना और खेलना अल्हड़पन से मालामाल ! मैं भोली थी, लेशमात्र भी दुःख का...
एक और छोटी सी पोस्ट।कल की पोस्ट पर मेरे ब्लागिंग के गूरू पर पत्रकारिता के चेले आवारा बंज़ारा यानी संजीत त्रिपाठी ने कमेण्ट किया था कि यदि आफ़िस मे बास ही गेम खेलने लगे तो वो बाकी लोगों को कैसे मना करेगा?
अशोक बजाज बता रहे हैं- बेमौसम शादी ?
बेमौसम शादी* *?* अभी शादी का कोई मुहूर्त नहीं है, देव-उठनी से पहले तो शादी का सवाल ही नहीं.सावन मास में तो बिलकुल भी नहीं.क्योकि इसके पीछे अनेक सारी किवदंतियां हैं ,लेकिन शहर में इन दिनों बे-मौसम ...
गंदगी पैदा करने के मामले में राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों ने यमुना को भी पीछे छोड़ दिया है। सुरेश कलमाडी और उनकी टीम चाहे तो उजागर हुई राष्ट्रीय शर्म के लिए बारिश को कोस सकती है। अगर बारिश ..
मैं कई बार * *खुद को * *गफलत में डालता हूँ* *कि मैं तुझसे * *मुहोब्बत नहीं करता* *मगर जब भी * *तेरी नज़रों से * *दूर होता हूँ * *खुद की * *आँखों की कोरों में * *नमी पाता हूँ.* * * *कई...
अभी इस ब्लाग पर एक पोस्ट चर्चा में चल ही रही है एक आपातकालीन पोस्ट करने की जरूरत आ पडी है ...*मैं लखनऊ ब्लॉगर अशोसिएशन से हटने की घोषणा करता हूँ -*मैं इसके उद्येश्यों को लेकर शुरू से ही संशय में था मगर अन...
http://baithak.hindyugm.com/2010/08/haan-ji-haan-ham-chhinal-hain.html http://www.janatantra.com/news/2010/08/06/vibha-rani-on-chhinal-vibhuti-kand/ लोग बहुत दुखी हैं. एक पुलिसवाले लेखक ने हम लेखिकाओं को...

पहचानिए इन्हें, ये हैं हिंदी ब्लॉग-जगत के दो ऐसे धुरंधर * *जिन्हें महारत हासिल है अपने फ़न में * *एक अपनी तकनीकी कार्यशैली के लिए मशहूर हैं तो दूसरे सम सामयिक गतिविधियों * *पर चुटीली टिप्पणियों के लिए...
शरद कोकास बता रहे हैं- माँ के हाथों बने खाने का स्वाद ।
रश्मि जी ने अपने ब्लॉग 'अपनी उनकी सबकी बातें' पर जब कहा कि " काश रोहन के द्वारा पढ़ी गई कविता की पंक्तियाँ मुझे याद रह जातीं " तो मुझे अपने हॉस्टल के दिनों में लिखी कवितायें याद आ गईं…और पढ़ाई के दिनों की ...
हे रूप वती इठलाओ नहीं ॥
 
हे रूप वती इठलाओ नहीं ॥ यौवन के गर्दे झड जायेगे॥ दो साल के अन्दर ३ बच्चे॥ मम्मी मम्मी बुलायेगे॥ जो आँख पे कजली चमक रही है॥ तब ये सूखी पड़ जायेगी॥ ये खिलती मुस्कान तुम्हारी॥ बिलकुल माध्यम पड़ जायेगी॥ ...
मौलिक विज्ञानलेखन * * * **** ** * गतांक से आगे प्रकाश सूर्य से पृथ्वी तक कितने समय में और कैसे पहुँचता है? विश्वमोहन तिवारी (भू.पू. एयर वाईस मार्शल) प्रकाश का वेग अनंत नहीं है जैसा कि प्राची...
पिछले सप्ताह कुछ मित्रों के साथ हमारे यहाँ से ११० मील की दूरी पर स्थित वारेन ड्यून *‘बीच’* पर जाना हुआ। पहले सब कुछ सामान्य सा था – शहर, सडकें और दुकानें - जैसे ही स्टेट पार्क में प्रवेश किया - एक व...
डॉ. मोनिका शर्मा कहती हैं- पिता यानि बेटी के जीवन का शक्ति स्तंभ
भावनात्मक पलों में आंसू छिपाने के लिए मुंह फेरकर खड़े हो जाने वाले परिवार के पुरुष सदस्यों से जुड़े स्नेही रिश्तों की बातें ज़रा कम ही की जाती हैं। ऐसे में आज बात मनोबल और मार्गदर्शन के उस रिश्ते की जिसमें 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

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लो अब तो मशीन भी करप्ट होने लगी, ये भरोसा ना टूटे-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Thursday, August 5, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज  
 
कल मित्र ने टिप्पणी की थी कि हम चंद ब्लागों को लेते हैं। हम बता दें कि हमने यह चर्चा इसलिए शुरू की है, ताकी ब्लाग जगत में तेरा-मेरा समाप्त हो। हम जानते हैं, यह इतना आसान नहीं है। गुटबाजी करने वाले हमसे खफा हैं। भले वे खफा रहे, लेकिन हम अपना काम जारी रखेंगे। हम जो भी ब्लाग दिखते हैं चाहे वे किसी के भी हो हम उनकी चर्चा जरूर करते हैं। टिपप्णी करने वाले मित्र का ब्लाग जून के बाद से अपडेट ही नहीं हुआ है तो उनके ब्लाग की चर्चा कैसे हो सकती है। बहरहाल आज देखें कौन क्या कहता है- ....
 
एक छोटी सी पोस्ट।आज आफ़िस देर से पंहुचा।दोपहर को ला मेग्नस स्कूल आफ़ बिज़नेस मैनेजमैंट के कामन रूम के उद्घाटन मे ही देर हो गई थी।आफ़िस पंहुचते ही मैने अपने डेस्क टाप का हाल-चाल पूछा।मेरे सहयोगी गौरव और ॠषी ने ...
 
प्रीतीश नंदी* हर आदमी धीरे-धीरे इसीलिए अकेला होता जा रहा है, क्योंकि उसने अब अपने आसपास के लोगों पर भरोसा करना छोड़ दिया है। यह सच है कि अब दुनिया उतनी सरल नहीं रही, जैसी वह कभी हुआ करती थी। लेकिन जैसे ह.. 
 
ख़्वाबों से मिट्ठी करके फिर सजा लिया है मैंने उनको अपनी पलकों पर , ख्वाब ना हों तो आँखें पथरा सी जाती हैं.......
 

पाप वृत्ति का उन्मूलन पापमयी वृत्ति के उन्मूलन के लिए प्रार्थना ऋग्वेद से ऋ1/97 ध्रुव पंक्ति ..... अप न:शोशुचदधम् ओम् अप न: शोशुचदमग्ने शुशुग्ध्यारयिम् ! अप न: शोशुचदधम् !! ऋ/1/97/1 हे प्रभ...
 
कल ही एक ब्लोगर मित्र ने फ़ोन पर एक साईट का नाम बताकर उसके जैसी साईट बनाने की इच्छा जाहिर कर जानना चाहा कि ऐसी साईट कैसे बनाई जा सकती है | उनके द्वारा बताई गयी साईट देखने पर पता चला कि वह वेब साईट मिडिया व...
 
खिल रहे हैं चमन में हजारों सुमन,* *भाग्य कब जाने किस का बदल जायेगा! * * कोई श्रृंगार देवों का बन जायेगा,* *कोई जाकर के माटी मिल जायेगा!! * ** *कोई यौवन में भरकर हँसेगा कहीं,* *कोई खिलने से पहले ही ढल ज...
 
हाथ जोड़कर पहले कहे देता हूँ, ज्यादा नहीं लिखूंगा, क्योंकि इन जड़-बुद्धि स्वदेशियों की समझ में ख़ास कुछ नहीं घुसने वाला ! मगर क्या करू कहना, लिखना, उपदेश देना अपना पैदाइसी डिस-ऑर्डर है, इसलिए खाली-पीली मगर ...
 
ज्‍योतिष शास्‍त्र मानता है कि ग्रहों के हिसाब से किसी के लिए कोई वर्ष , कोई दिन और कोई घंटा खुशियों भरा होता है , तो किसी के लिए वही वर्ष , वही दिन और वही घंटा तनावपूर्ण भी। पर आसमान में कभी कभी ग्रहों की ...
 
 
कारीडोर से रेल लाईन की अनुमति कैसे दी वन विभाग ने! * *पेंच कान्हा कारीडोर से गुजरने वाले ब्राडगेज को अनुमति देना आश्चर्यजनक * *क्या वन एवं पर्यावरण विभाग का बैर सिर्फ सिवनी से ही है?
अजीब लग रहा है तकनीकी ब्लॉग में यात्रा विवरण !! फिर भी शुरू करते हैं । खरोरा से रायपुर बस और रायपुर से दिल्ली के निजामुद्दीन स्टेशन तक छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति से २० घंटों की यात्रा के बाद हरिद्वार जाने के ...
 
अविनाश वाचस्पति कहते हैं- इसे ब्‍लॉगचर्चा न समझें : यह पोस्‍टचर्चा है ब्‍लॉगर भाईयों
पोस्‍ट संख्‍या है 201 : देख ब्‍लॉगर देख : सिर्फ झांकने से काम नहीं चलेगा : यहां पर बहुत कुछ मिलेगा 
 
मैं जब कभी अपना नाम रेत पर लिखता हूँ रेत पर लिखा गया मेरा नाम मिट जाता है. वे अपनी जुबान से मुझे पत्थर दिल कहते हैं पर पत्थर पर लिखें गए नाम मिटते नहीं हैं. ००००० अपने हाथों से समेटो सारे सितारों को बस दूर...
 
अनिल अतरी कहते हैं- उत्तरी दिल्ली के नथुपुरा का दुकानदार कल शाम यमुना मैं गिर गया और अब तक भी नही मिल पाया हैं
उत्तरी दिल्ली के नथुपुरा का दुकानदार कल शाम यमुना मैं गिर गया और अब तक भी नही मिल पाया हैं ....प्रशाशन दुड़ने में लगा हैं .. दरअसल कल शाम करीब पञ्च बजे घनश्याम उर्फ घांसी राम लाईट जाने पर बाजार से ल...
 
हमेशा की तरह आज भी मित्र से मिलने ही जा रहा था, फर्क सिर्फ इतना कि सायकिल के बजाय पैदल था | अचानक अंकल-अंकल की आवाज़ लगाता एक लड़का बदहवास मेरी और दौडा आ रहा था | मैं कुछ डर सा गया | वो संथाली-हिंदी मिला क...
 
ये सीने में कैद ज्वार- भाटे उफन कर बाहर आने को आतुर जब होते हैं अपने साथ विनाश को भी दावत देते हैं कहीं अरमानो के मकानों को धराशायी कर जाते हैं कहीं हसरतों के वृक्ष उखड जाते हैं तमन्नाओं की सुनामी म...  
मेरे को  इस ब्रह्माण्ड के लौकिक और अलौकिक रहस्यों की जिज्ञासा सदेव रही है, पड़ाई तो विज्ञान की की है, भौतिक शास्त्र, रासयन शास्त्र और कुछ सीमा तक जीव और वनस्पति विज्ञान, स्नातक का अध्यन किया ट
 
 हम वो हैं जो हम है नहीं --
हमहमवोहैं,जोखेलकरवासकते हैं,खेलकरसकते हैं,परखेलसकते नहीं।देसकते हैंपरमेडल,लेसकते नहीं।बन सकते हैंकिरायेदार,परखरीदारहो सकते नहीं।हमवो हैं,जोहम हैंनहीं,औरहोसकते नहीं।..          
 
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 
 

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पुरुषों के लिए ''छिनाला'' शब्द..., कब सुधरेंगे हमारे माननीय.-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Wednesday, August 4, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज  

क्यों करें समय का खर्चा 
सीधे करते हैं चर्चा
 
साहित्य में इन दिनों ''छिनालवाद'' का सहसा नव-उदय हुआ है. इसके आविष्कर्ता है वर्धा के अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति विभूतिनारायण राय. यह ''छिनालवाद'' इस वक्त सुर्ख़ियों में है और लम्बे समय तक रहे...
 
देश के जनप्रतिनिधि अपनी कारगुजारियों के लिये कम बदनाम नहीं हैं.कभी पैसा लेकर सवाल पूछने को लेकर तो कभी संसद में लात-घूंसे चलने को लेकर वे चर्चा में बने रहते हैं.संसद से गायब रहना तो अधिकतर जन्प्रतिनिधियों ...
 
प्रिय बन्‍धु संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या - अष्‍टम: अभ्‍यास: संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या -अष्‍टम: अभ्‍यास: सहयोग के लिये धन्‍यवाद 
 
मित्रों, पिछले सप्‍ताह कुछ दिनों के लिए ब्‍लॉग सक्रियता से अवकाश लेकर हम अपने काशी काबा में धूनी रमाये बैठे रहे। इस धूनी यज्ञ में हम इस कदर व्‍यस्‍त रहे कि मित्र अजय झा एवं राजीव तनेजा जी के स्‍नेह निमंत...
 
"आय हाय!....आज फिर कबाड़ उठा लाए?” बीवी D.V.D भरे लिफ़ाफे को गुस्से से पलंग पे पटकते हुए बोली "कुछ अक्ल-वक्ल भी है कि नहीं?...अभी पिछ्ली वाली तो देखी नहीं गयी ढंग से...ऊपर से और...
 
अपन शुरू से ही मस्तमौला टाईप के प्राणी रहे हैं .......जहां बैठे वहीं धूनी शूनी जमा ली ....ये नहीं देखा कि ....कंपनी देने के इंसान साथ बैठेंगे या भूत प्रेतों की टोली ............जो जैसा मिला ..उसीसे ...
 
(1) * *जाति-पाँति के जाल में, जकड़ा अपना देश।* *आरक्षण की आड़ में, बिगड़ रहा परिवेश।।* * * *(2) * *जूता केवल पाँव में, पाता है सम्मान।* *जूता जब सिर पर चढ़े, कर देता अपमान।।* * * *(3) * *दूल्हा-दुल्हिन म...
 
मैं नास्तिक हूँ। मैं हिन्दू हूँ। मैं किसी विचारधारा से नहीं बँधा हूँ। मैं हिन्दू हूँ। रामजन्मभूमि विवाद पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और न्यायालय के आदेश के आने के पहले धर्मान्ध, मतान्ध देशद्रोहियों द्वा...
 
लीजिये ललितजी किल्कीपाड रागनी जैसा कि मैनें आपसे वादा किया था। अब इसमें श्रोताओं को थोडी शालीनता की कमी लगे तो दोष मेरा नहीं है। हरियाणा में जब उपरां-तली रागनी कॉम्पटीशन होते हैं तो थोडा-बहुत द्विअर्थी संव...
 
अदम गोंडवी- जिस्म क्या है रूह तक सब कुछ ख़ुलासा देखिये। आप भी इस भीड़ में घुस कर तमाशा देखिये। जो बदल सकती है इस पुलिया के मौसम का मिजाज़, उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिये । जल रहा है देश यह बहला ...
 
श्याम बिन ज़िन्दगी गुजरती नहीं है राधे नाम बिन ये सँवरती नहीं है श्याम बिन ..................................... १) पीले पड़ गए हैं ये शाखों के पत्ते -२- उजड़ गया है ये मधुबन सारा -२- गोविन्द बिन कु...
 
मुस्कुरा के निकल गये...
लगा के दाग दामन में॥ मुस्करा के निकल गए॥ हमें छोड़ कर अकेले॥ गम ये दर्दे पिला गए॥ किस्मत में यही लिखा था॥ ओढ़ ली सफ़ेद साडी॥ अब रही न मै अकेली॥ गोद भी नहीं है खाली॥ जाते जाते अपनी निशानी॥ पेट में छु...
 
आज आसमांके आंसू की भाषा समजी बेबस थे वह भी ,ना जाने वो संदेस जो भेजा था किसी बावरीने पियाको अपने , बूंदोंके साथ कहीं फिसल गया बस एक चाह बन गयी है तुम्हे भूल जाऊं सब कु...
 
 
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 

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झुलसता बचपन ....आप बच्चों को ज़हर तो नहीं दे रहे-, ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Tuesday, August 3, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
बचपन के सुहाने दिन सबको याद रहते हैं। लेकिन आज का बचपन कहा जा रहा है, यह एक चिंता का विषय है। इस पर चिंता करते दो ब्लाग दिखे और हमने हमेशा की तरह जोड़ा बना दिया चर्चा में उसे। देखे बाकी ब्लाग क्या लिखते हैं.... 
वो ! ट्राफिक लाईट पर मिला प्रचंड धूप में कोयला मैला कुचैला भगवान् ने मानो चेहरे पर एक ही भाव चिपका दिया हो याचना !! बिसूर कर बोला था मैडम, ले लो न ... बहुत बढ़िया है मैडम, भूखा हूँ रोटी खा लूँगा कित...
डॉ टी एस दराल ने हाल में खाने-पीने के मामले में साफ़-सफ़ाई पर बड़ी सार्थक पोस्ट लिखी थी...उसी पोस्ट में मैंने अपनी टिप्पणी में साफ़-सफ़ाई पर हद से ज़्यादा तवज्जो देने वाली एक परिचित मीनिएक महिला का भी ज़िक...
  
"बाग़ लगवले.... बगिचबा लगवले..... बेकल जिया रहलो न जाई.... पिरितिया काहे ना लगवले... !!" जैसे-जैसे बड़की पोखर तक लाउडिस्पीकर का गीत पहुँच रहा था, झुरुखन सिंघ का गाय-गोरु चारा रहा धनुआ ...
प्रिय ब्लॉगर मित्रो , प्रणाम ! बिना आपका समय बर्बाद किये हुए सीधे मुद्दे की बात करता हूँ और आपके लिए *ब्लॉग 4 वार्ता* के इस मंच से एक और ब्लॉग वार्ता पेश करता हूँ ! आशा है आपको आज की ब्लॉग वार्ता पसंद...
सुबह जागने पर पाया कि वही रेल जो रात चाँद के साथ कदमताल मिला कर चल रहा था, सुबह दूर खड़े पेड़ के साथ रिले रेस लगा रहा था.. जो कुछ दूर साथ-साथ दौड़ते हैं और अचानक कुछ निश्चित दूरी तय करने के बाद किसी और पेड़ को...
राष्‍ट्रीय सहारा से जुड़ी वरिष्‍ठ पत्रकार। महिला मुद्दों पर लगातार लेखन। सहारा के सभी फीचर पन्‍नों – संडे उमंग, मूवी मसाला, जेन एक्स, आधी दुनिया का संपादन। manisha.sahara@ gmail.com पर उनसे संपर्क किया ज..

मीडिया के द्वारा फ्रेंडशिप डे पर संस्कृति के कथित ठेकेदार घोषित हो चुके बजरंगियों की हरकतों और उनको पकड़ने की घटनाओं को बड़े जोर-शोर से प्रचार सा किया गया। यह भी प्रचारित किया गया कि समाज के ऐसे लोग प्रेम...
ब्लाँग कि दुनिया भी अजीब है कोई बन्दा दिन रात एक करके अपनी रचनाएँ बना रहाँ है और कोई चोरी करने का काम कर रहाँ है ,पिछले दिनो नेट सर्फिँग के दौरान एक गजलो के ब्लाँग पर गया तो पता चला कि उनकी सारी गजलेँ किसी.

जब मैंने ब्लॉगिंग शुरू की थी , तब वो ब्लैक एंड व्हाईट पिक्चर की तरह नहीं भी तो भी थ्री डी डायमेंशन वाली भी नहीं थी । हालांकि तब हमें खुद इस बात की सुध नहीं थी कि ब्लॉगिंग में घुस कर हम कोई तीर मारने जा 
गिरीश पंकज कहते हैं- ऊपर वाला देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है...
कहावत है, कि ऊपर वाला देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है. मेरे साथ यही हुआ. पहले ''ईटिप्स'' ब्लॉग के मित्रों ने मुझे सम्मानित किया और कल ''परिकल्पना''के रविन्द्र प्रभात भाई और उनकी टीम ने मुझे सम्मानित कर दि...
ये कैसा प्रेम एक व्यक्ति के चारों और का माहौल बस प्यार और प्यार से आच्छादित फ़िल्में देखता है तो बस प्यार से भरी साहित्य पढ़ता है तो वही प्रेम की बातें प्रेम कथाओं का इतना बड़ा समुन्दर अखबार इन्हीं खबरों 
भ्रष्ठाचार और मक्कारी तो मानो हमारी रग-रग में रची बसी है ! सार्वजनिक धन की चोरी को हम अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते है, और ऊपर से सीना जोरी भी ! शरमो-हया और दुनिया की लोक-लाज तो जयचंद के कुटुंबी वंशजों ने तभ..
मनीषा‘लेखिकाओं को छिनाल’ बताकर विभूतिनारायण ने अपने सारे किये-कराये पर खुद ही तेजाब डाल दिया। क्या पता ये बैंक ऑफ-द-माइंड पड़े सड़ांध मार रहे उनके घिनौने विचार हों या अपनी गुस्ताखियों का पुलिंदा खुलने से भयभ...
दूरियों की ना परवाह कीजिये जब दिल पुकारे बुला लीजिये बहुत दूर नहीं हूँ आपसे पलकों को बंद कर याद कर लीजिये. ००००००० दोस्ती फूलों से न करो जो कुछ समय बाद मुरझा जाते हैं दोस्ती करनी है काँटों से करो चुभ... 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
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बेवफा ,छिनाल ,कामुक कुतिया , क्या उनके घर में मां-बहनें नहीं हैं?-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Monday, August 2, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज  
 
आज एक अच्छी खबर यह है कि रायपुर में  फ्रेडशिप डे के दिन धर्मसेना और बजरंग दल के युवाओं ने शहर की युवतियों और युवकों के साथ जो नंगा खेल खेला उसकी उनको सजा मिल गयी है। बाकी और किस ब्लागर ने क्या लिखा है चलिए देखते हैं....
 
वर्धा अन्तर्ऱाष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति श्री वी एन राय पर इस बार का हमला ज्यादा घातक है .अपने ज़माने की मशहूर पत्रिका ज्ञानोदय के नए समकालीन रूप -*नया ज्ञानोदय* के ताजे अंक में उनका एक इंटर...
 
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में फ्रेडशिप डे के दिन धर्मसेना और बजरंग दल के युवाओं ने शहर की युवतियों और युवकों के साथ जो किया उसको लेकर पूरे शहर के साथ विधानसभा में भी बवाल मच गया। हर तरफ से बस एक ही सवाल...
 
अभी कल या परसों दोस्ती दिवस था, वैसे तो आजकल हर एक चीज का दिवस हो गया है, लगता है कि कोई दिन खाली छोड़ा ही नहीं हो; पर कहीं न कहीं ये दिन सूचना तकनीक के जरिये आपको एक अहसास सा दे जाते हैं कि उठो प्यार...
 
मैं ढूंढता हूं एक राज़दार शहर में हर दोस्त मेरा बन गया अखबार शहर में. जिस शख्स का इतिहास भी थाने में दर्ज़ था, वो आज बन गया है असरदार शहर में. अपने मुनाफे के लिये भगवान बेच दे , ऐसे हैं धर्म के अलमबरदार ...
 
 
तेरा जूता तेरे सर (लघुकथा) -- सत्येन्द्र झा उस गाँव में सभी लोग धोती कुरता पहनते थे। एक दिन एक पैंट-शर्ट वाला आदमी आया। वो उसी गाँव में सभ्य की तरह रहने लगा। अब सभी लोग पैंट शर्ट पहने लगे। नए आद...
 
अगस्त यानि क्रांतिकारी महीना* अगस्त का महिना क्रांति का महीना माना जाता है विशेषकर भारत के लिए तो यह "क्रांतिकारी"महीना है। वैसे तो देश का इतिहास ही त्याग और बलिदान से भरा पड़ा है लेकिन अगस्त का महीना अन...
 
यहाँ नफ़रत है,धोखा है,झूठ है ख़ौफ़ और आतंक के साये भी है दूर तलक चलो चलें , एक नया जहाँ ढूंढते है हम तुम दोनो मिलकर...!! 
 
 दो दिन पहले शाम को अचानक कानपुर से गिरिराज किशोर जी का फोन आया। वे विभूतिनारायण के साक्षात्कार पर बेहद कुपित थे. जैसे पूरा महिला समाज है. उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री को पत्र लिखने जा रहे है. वे चाहते कि ...
 
लगता है पागल हो जाऊँगा मैं-------->>>दीपक 'मशाल'
क्या है... क्या है ये.. लोग चिल्लाये पड़े हैं की कॉमनवेल्थ खेल हमारे देश की आन-बान-शान हैं.. आखिर क्यों और कब तक हम हर चीज को देश की आन-बान-शान से जोड़ कर लोगों को गुमराह करते रहेंगे.. कब वास्तविकता के धर...
 
ब्लॉग जगत में मची है धूम....हो रही है इनकी चर्चाएँ खूब * *पहचानिए ये हैं क्रमश: वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग विचारक और वर्ष के श्रेष्ठ विचारक , * *जिनकी हो रही है चर्चाएँ -* *आईये आप भी दीजिये इन्हें शुभकामना... 
 
नए दर्द की कोई गुंजाईश नहीं जो थे अब तक कम ना थे कभी , बस ये दर्द को घूंट कर दवाई बना लूँगा तब शायद दिल का मर्ज़ मिटा पाउँगा ...... ============================================ हंसती आँखेमें कभी गम सैलाब बनकर...
 
छिनाल माने ??
इस देश का सबसे तेज चैनल ब्रेकिंग न्यूज़ बार बार फ्लेश कर रहा है .के राहुल महाज़न ओर डिम्पी फलां मंदिर में देखे गए....सुबह हिन्दुतान टाइम्स में देखा हुआ चित्र याद करता हूँ जिसमे कश्मीर में एक औरत ...
 
प्रेम कुमार मणि *नमक का दारोगा* सुप्रसिद्ध कथाकार* प्रेमचंद* की एक कहानी है, जिससे हिंदी समाज का मामूली पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी परिचित है। जब मैंने साहित्य की दुनिया में आंखें खोलीं,तो यही सुना कि यह एक आदर्श...
 
इक सौंदर्य का बीज रोपा धरती के सीने में जग नियंता ने और सौंदर्य की महकती फसल लहलहा उठी फिर उसने मानव नाम का प्राणी धरती पर उतारा और चाहा ये उसकी फुलवारी को और निखारे उसकी बगिया के हर फूल को गुलज़ार करे...
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 

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संस्कृति के नाम पर होती रही गुंडागर्दी-तमाशा देखती रही खाकी वर्दी- ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Sunday, August 1, 2010

  सभी को नमस्कार करता है आपका राज

कल छुट्टी थी सो अखबार की दुनिया से एक तरह से कटे रहे। घर पर रहकर आराम किया। सुबह अखबार देखा तो मालूम हुआ कि अपने शहर में धर्मसेना के धर्म के ठेकेदारों ने क्या किया है। संस्कृति को बचाने के नाम पर जो काम धर्म के ठेकेदारों ने किया वह वास्तव में बहुत ही शर्मनाक है। क्या ऐसा करने से ही संस्कृति बचेगी, ये सोचने वाली बात है.....
 
दोस्ती के दिन जो कुछ हमारे शहर में हुआ, वह वास्तव में बहुत दुखद है। धर्मसेना के गुंड़ों ने संस्कृति के नाम पर जिस तरह की गुड़ागर्दी की उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। क्या फ्रेडशिप डे पर भी उसी तरह से लगाम क...
 
दोस्तों, आज तो दोस्ती के रंगों में सजी पोस्टों से रु-ब-रु हो जाइये और कुछ अलग - अलग रंग ज़माने के भी देखिये ……………उम्मीद है ये रंग आपको पसंद आयेंगे और दिल मे आपके उतर जायेंगे…………… दोस्ती के जज़्बे को ...
 
 मुझे तो पता भी नहीं था कि आज मित्र दिवस है ......क्योंकि आजकल तो सबकुछ , मतलब अपने घर के दिन दिवस के अलावा ..सब कुछ वाया ...इस अंतर्जाल की दुनिया के ही पता चलता है ..। और पिछले दिनों की भारी ब्लॉ...
 
चार दिन की जिंदगानी जिसमें ढाई आखर प्‍यार के
 
पगड़ी का इस्तेमाल हमारे देश में सदियों से होता आया है | प्राचीन काल से ही हमारे यहाँ पगड़ी को व्यक्तित्व,आन,बान,शान और हैसियत का प्रतीक माना जाता रहा है | पगड़ी हमारे देश में चाहे हिन्दू शासक रहें हों या मुस्...
 
प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 85 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है Jagannath Temple Puri [Orissa] और इसके बारे मे संक्षिप्त..

संबंध-विच्छेद* मनोज कुमार* पिछले दिनों एक समाचार पत्र में पढ़ रहा था कि लंदन के समाचार पत्र डेली मेल के एक सर्वेक्षण के अनुसार प्रत्‍येक पांचवे व्‍यक्ति का दिल अपने साथी के लिए नहीं बल्कि किसी और के लि...
 
विचार तत्व - कोई व्यक्ति कितना ही महान क्यों न हो,आंखे मूंदकर उसके पीछे न चलिए। यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा होती तो वह हर प्राणी को आंख, नाक, कान, मुंह, मस्तिष्क आदि क्यों देता ? *-स्वामी विवेकानन्...
 
आज कई दिनों बाद ब्लॉग संसार में या कहें कि इंटरनेट पर लौटना हुआ। कुछ बिजली के कारण और कुछ अन्य दूसरी व्यस्तताएँ। इधर कई दिनों से समाचार-पत्रों में, इलैक्ट्रॉनिक चैनलों के द्वारा कॉमनवेल्थ गेम्स की तैया...
 
आज मन बहुत उदास है ! अपनी एक पुरानी कविता बहुत उद्वेलित कर रही है ! इसे आपके साथ बाँटना चाहती हूँ शायद मेरी पीड़ा कुछ कम हो जाये ! सागर का तट मैं एकाकी और उदासी शाम ढलता सूरज देख रही हूँ अपलक और अविराम । जि...
 
नालायकी और लायकी के बीच घिरती, घूमती एक गुफ़्तगू.. ज़रा ज़िंदगी की टेक, थोड़ा साहित्‍य के महीन अनुराग, कुछ अपने को कहते, सुनते, समझने के आह, आह्लादकारी सुख.. और हां, वही प्रत्‍यक्षा बी और पिरमोद सिं बोलते ...
 
संजय सेन सागर बता रहे हैं- लेखिकाओं को‍ “छिनाल” कहने पर हंगामा, इस्‍तीफे की मांग
बड़ा पेज खोलने के लिए दोनों इमेज पर क्लिक करें* *♦ आशुतोष भारद्वाज* *नयी दिल्ली, 31 जुलाई।*महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति और भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी वीएन राय ने हिं... 
 
आनन्‍द पाण्‍डेय कहते हैं- संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या -सप्‍तम: अभ्‍यास:
प्रिय बन्‍धु संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या का सप्‍तम अभ्‍यास प्रस्‍तुत कर रहा हूँ । संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या -सप्‍तम: अभ्‍यास: आपके संस्‍कृतविषयक प्रेम के लिये धन्‍यवाद ।
 
ख्वाब यूँ ही दफ़न हो जाते हैं ज़िम्मेदारी की किताबों में परत दर परत.. पन्ने पलटो तो झर जाते हैं सूखे फूल की तरह... 
 
सिद्धार्थ जोशी बता रहे हैं- सतत क्रांति के दौर में...
एक जगह ओशो ने लिखा कि भारत सतत क्रांति के दौर से गुजर रहा है। मैं भी क्रांति करने के मूड में आ गया। कई तरह की क्रांतियां की। जिस जमाने में बच्‍चों को साइकिल भी नहीं दी जाती थी, उन दिनों में एम-80 चलाई। यान...
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 

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