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कैसे कहूँ , इफ़ बास इज़ रांग?-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Friday, August 6, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज


सुनाए मित्रों क्या है हाल
सज गयी है आज की चौपाल....

साधना वैद्य कहती हैं- कैसे कहूँ *

कैसे कहूँ सखी मैं तुमसे अपने उर की मौन व्यथा, उमड़-उमड़ कर कहते आँसू इस जीवन की करुण कथा ! आज याद आती बचपन की कैसा था वह प्यारा काल, खाना, हँसना और खेलना अल्हड़पन से मालामाल ! मैं भोली थी, लेशमात्र भी दुःख का...
एक और छोटी सी पोस्ट।कल की पोस्ट पर मेरे ब्लागिंग के गूरू पर पत्रकारिता के चेले आवारा बंज़ारा यानी संजीत त्रिपाठी ने कमेण्ट किया था कि यदि आफ़िस मे बास ही गेम खेलने लगे तो वो बाकी लोगों को कैसे मना करेगा?
अशोक बजाज बता रहे हैं- बेमौसम शादी ?
बेमौसम शादी* *?* अभी शादी का कोई मुहूर्त नहीं है, देव-उठनी से पहले तो शादी का सवाल ही नहीं.सावन मास में तो बिलकुल भी नहीं.क्योकि इसके पीछे अनेक सारी किवदंतियां हैं ,लेकिन शहर में इन दिनों बे-मौसम ...
गंदगी पैदा करने के मामले में राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों ने यमुना को भी पीछे छोड़ दिया है। सुरेश कलमाडी और उनकी टीम चाहे तो उजागर हुई राष्ट्रीय शर्म के लिए बारिश को कोस सकती है। अगर बारिश ..
मैं कई बार * *खुद को * *गफलत में डालता हूँ* *कि मैं तुझसे * *मुहोब्बत नहीं करता* *मगर जब भी * *तेरी नज़रों से * *दूर होता हूँ * *खुद की * *आँखों की कोरों में * *नमी पाता हूँ.* * * *कई...
अभी इस ब्लाग पर एक पोस्ट चर्चा में चल ही रही है एक आपातकालीन पोस्ट करने की जरूरत आ पडी है ...*मैं लखनऊ ब्लॉगर अशोसिएशन से हटने की घोषणा करता हूँ -*मैं इसके उद्येश्यों को लेकर शुरू से ही संशय में था मगर अन...
http://baithak.hindyugm.com/2010/08/haan-ji-haan-ham-chhinal-hain.html http://www.janatantra.com/news/2010/08/06/vibha-rani-on-chhinal-vibhuti-kand/ लोग बहुत दुखी हैं. एक पुलिसवाले लेखक ने हम लेखिकाओं को...

पहचानिए इन्हें, ये हैं हिंदी ब्लॉग-जगत के दो ऐसे धुरंधर * *जिन्हें महारत हासिल है अपने फ़न में * *एक अपनी तकनीकी कार्यशैली के लिए मशहूर हैं तो दूसरे सम सामयिक गतिविधियों * *पर चुटीली टिप्पणियों के लिए...
शरद कोकास बता रहे हैं- माँ के हाथों बने खाने का स्वाद ।
रश्मि जी ने अपने ब्लॉग 'अपनी उनकी सबकी बातें' पर जब कहा कि " काश रोहन के द्वारा पढ़ी गई कविता की पंक्तियाँ मुझे याद रह जातीं " तो मुझे अपने हॉस्टल के दिनों में लिखी कवितायें याद आ गईं…और पढ़ाई के दिनों की ...
हे रूप वती इठलाओ नहीं ॥
 
हे रूप वती इठलाओ नहीं ॥ यौवन के गर्दे झड जायेगे॥ दो साल के अन्दर ३ बच्चे॥ मम्मी मम्मी बुलायेगे॥ जो आँख पे कजली चमक रही है॥ तब ये सूखी पड़ जायेगी॥ ये खिलती मुस्कान तुम्हारी॥ बिलकुल माध्यम पड़ जायेगी॥ ...
मौलिक विज्ञानलेखन * * * **** ** * गतांक से आगे प्रकाश सूर्य से पृथ्वी तक कितने समय में और कैसे पहुँचता है? विश्वमोहन तिवारी (भू.पू. एयर वाईस मार्शल) प्रकाश का वेग अनंत नहीं है जैसा कि प्राची...
पिछले सप्ताह कुछ मित्रों के साथ हमारे यहाँ से ११० मील की दूरी पर स्थित वारेन ड्यून *‘बीच’* पर जाना हुआ। पहले सब कुछ सामान्य सा था – शहर, सडकें और दुकानें - जैसे ही स्टेट पार्क में प्रवेश किया - एक व...
डॉ. मोनिका शर्मा कहती हैं- पिता यानि बेटी के जीवन का शक्ति स्तंभ
भावनात्मक पलों में आंसू छिपाने के लिए मुंह फेरकर खड़े हो जाने वाले परिवार के पुरुष सदस्यों से जुड़े स्नेही रिश्तों की बातें ज़रा कम ही की जाती हैं। ऐसे में आज बात मनोबल और मार्गदर्शन के उस रिश्ते की जिसमें 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

5 comments:

मनोज कुमार August 6, 2010 at 8:18 PM  

सदा की तरह आज का भी अंक बहुत अच्छा लगा।

Sadhana Vaid August 6, 2010 at 8:56 PM  

बहुत सुन्दर चौपाल ! सभी सार्थक और अच्छी लिंक्स के संकलन के लिये बधाई एवं आभार ! "कैसे कहूँ" को चौपाल में सम्मिलित करने के लिये आभारी हूँ ! एक बात आपके समक्ष स्पष्ट करना चाहती हूँ 'उन्मना' में जो रचनायें आप देखते हैं वे सभी मेरी माँ श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना जी के द्वारा रचित हैं ! वे 'किरण' के उपनाम से लिखती थीं ! वे अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन मैं उनकी अनमोल रचनाओं को आप सभी तक पहुँचाना चाहती थी इसलिए यह ब्लॉग खोला ! अपनी रचनायें मैं अपने दूसरे ब्लॉग 'सुधीनामा' में पकाशित करती हूँ ! आपसे विनम्र निवेदन है कि यदि आप 'उन्मना' से किसी रचना का चयन करते हैं तो लेखिका के नाम के लिये मेरी माँ के उपनाम 'किरण' का उल्लेख करेंगे तो मुझे हार्दिक प्रसन्नता होगी ! सधन्यवाद !

वन्दना August 7, 2010 at 5:18 AM  

बहुत सुन्दर चौपाल सजाई है।

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