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बात बात में ढेर-कैसे हैं ये शेर- ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Monday, August 16, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
आज सीधे चर्चा करते हैं....
 
समझने वालो की समझदारी का सम्मान करना चाहिए............ हम तो भैय्या...... सब कुछ सीखा हमने न सीखी हुशियारी सच है दुनिया वालों के हम हैं अनाड़ी खैर ......... वायदानुसार ४ दोहे प्रस्तुत हैं कि पीठ दिखा कर 
 
१५ अगस्त से जारी है लगातार यह परिचर्चा : आपके लिए आज़ादी के क्या मायने है ? आपने अभी तक कई महत्वपूर्ण चिट्ठाकारों के विचार से रूबरू हुए ! उसी क्रम में आईये पूछते हैं अविनाश जी से कि उनके लिए आज़ादी के क्या ...
 
आजाद भारत में, अपनी आजादी के अर्थ खोजते रहे। मानव के भीतर से मानव की पहचान को खोजते रहे। हाथों में जिनके सजने थे खिलौने, उनके हाथ भीख माँगने को उठते देखते रहे। सबकी अपनी किस्मत है सबका है अपना भा...
 
जीवन के उतार-चढ़ाव को लेकर कई बार कुछ लोगों को निराशा होती है, लेकिन जो सच है, उसका सामनाकरना ही चाहिए. सफलता-असफलता आगे-पीछे होती रहती है. कभी कोई जीवन के केंद्र मे रहता है तो कभी हाशिये पर भी चला जात...
 
बॉलीवुड में फेशन फोटोग्राफी करने वाले हिम्मत सिंह शेखावत में आज हिंदी ब्लॉग जगत में अपना पहला कदम रखते हुए ज्ञान दर्पण पर एक शानदार रचना प्रस्तुत की | जो आप यहाँ चटका लगाकर पढ़िए व हिम्मत सिंह शेखावत का हिं...
 
आखिर पूरे 21 दिन और कुछ घंटों के पश्चात सरकारी फोन में जान आ ही गयी। बड़ी गरीब सी चीज हो गया है यह बेचारा। हो क्या गया है बना दिया गया है इसे। नहीं तो सारी कंपनियों को मिलाने के बाद भी जिसके, चाहे मजबूरी मे...
 
विभूति नारायण राय कोई इकलौते पुलिस वाले तो है नहीं, जिन्होंने महिलाओं को छिनाल कहा हो / हिंदी भाषी क्षेत्र के किसी भी थाने में आप चले जाइए, थानेदार , मुंशी, हवलदार या फिर सिपाही दिन में कई बार कई महिलाओं क...
 
उसका चेहरा मेरी सुबह है , उसकी आवाज़ मेरी आजान है .... उसकी मुस्कान मेरी आरती है ... उसका वजूद मेरी जान है .... बस उस जान का ओज़ल हो जाना पलकोंसे मुझे कर देता बेजान है .... 
 
मेरे सीने में आग न सही तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी लेकिन आग जलना ही चाहिए . 00000 अपनी खातिर तो सभी जीते हैं दुनिया में मगर आदमी वो है जो जीता है जमाने के लिए . 00000* मेरी पसंद -
 
 
चिट्ठा संकलक चिट्ठाप्रहरी ने एक खास विजेट उन ब्लाँगरोँ के लिये जारी किया है जिनके ब्लाँग्स चिट्ठाप्रहरी पर रजिस्टर्ड हैँ या होना चाहते हैँ । काँपीराइट नियमो के चलते विस्तृत जानकारी देने मे हिचकिचाहट हो रही...
 
पी.सी.गोदियाल कहते हैं- मर्यादा का पालन !
 
राजनीति में मर्यादा का भी पालन होना चाहिए : मनमोहन सिंह * एक और !! *रहम करो माई बाप !* *माया-ममता का पालन करते-करते* *तो हम सड़क पर आ गए और आप है* *कि.......!!!! * *छवि गुगुल से साभार* 
 
कल आजादी का पर्व था और सुबह-सुबह ही धर्म-संकट उपस्थित हो गया। 15 अगस्‍त होने के साथ कल रविवार भी था तो पिकनिक का दिन भी था। सुबह से ही लोग अपने घरों से निकल पड़े थे। हमारे घर के सामने भी बस आकर खड़ी थी और हम...
 
 
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 

7 comments:

Udan Tashtari August 16, 2010 at 9:04 PM  

शानदार चर्चा!

girish pankaj August 16, 2010 at 10:10 PM  

rajkumar, tumhari mehanat k aage mai natmashtak hoo. badhai...

संगीता स्वरुप ( गीत ) August 17, 2010 at 12:06 AM  

बहुत अच्छे लिंक्स से सजी चौपाल ...आभार

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