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झुलसता बचपन ....आप बच्चों को ज़हर तो नहीं दे रहे-, ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Tuesday, August 3, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
बचपन के सुहाने दिन सबको याद रहते हैं। लेकिन आज का बचपन कहा जा रहा है, यह एक चिंता का विषय है। इस पर चिंता करते दो ब्लाग दिखे और हमने हमेशा की तरह जोड़ा बना दिया चर्चा में उसे। देखे बाकी ब्लाग क्या लिखते हैं.... 
वो ! ट्राफिक लाईट पर मिला प्रचंड धूप में कोयला मैला कुचैला भगवान् ने मानो चेहरे पर एक ही भाव चिपका दिया हो याचना !! बिसूर कर बोला था मैडम, ले लो न ... बहुत बढ़िया है मैडम, भूखा हूँ रोटी खा लूँगा कित...
डॉ टी एस दराल ने हाल में खाने-पीने के मामले में साफ़-सफ़ाई पर बड़ी सार्थक पोस्ट लिखी थी...उसी पोस्ट में मैंने अपनी टिप्पणी में साफ़-सफ़ाई पर हद से ज़्यादा तवज्जो देने वाली एक परिचित मीनिएक महिला का भी ज़िक...
  
"बाग़ लगवले.... बगिचबा लगवले..... बेकल जिया रहलो न जाई.... पिरितिया काहे ना लगवले... !!" जैसे-जैसे बड़की पोखर तक लाउडिस्पीकर का गीत पहुँच रहा था, झुरुखन सिंघ का गाय-गोरु चारा रहा धनुआ ...
प्रिय ब्लॉगर मित्रो , प्रणाम ! बिना आपका समय बर्बाद किये हुए सीधे मुद्दे की बात करता हूँ और आपके लिए *ब्लॉग 4 वार्ता* के इस मंच से एक और ब्लॉग वार्ता पेश करता हूँ ! आशा है आपको आज की ब्लॉग वार्ता पसंद...
सुबह जागने पर पाया कि वही रेल जो रात चाँद के साथ कदमताल मिला कर चल रहा था, सुबह दूर खड़े पेड़ के साथ रिले रेस लगा रहा था.. जो कुछ दूर साथ-साथ दौड़ते हैं और अचानक कुछ निश्चित दूरी तय करने के बाद किसी और पेड़ को...
राष्‍ट्रीय सहारा से जुड़ी वरिष्‍ठ पत्रकार। महिला मुद्दों पर लगातार लेखन। सहारा के सभी फीचर पन्‍नों – संडे उमंग, मूवी मसाला, जेन एक्स, आधी दुनिया का संपादन। manisha.sahara@ gmail.com पर उनसे संपर्क किया ज..

मीडिया के द्वारा फ्रेंडशिप डे पर संस्कृति के कथित ठेकेदार घोषित हो चुके बजरंगियों की हरकतों और उनको पकड़ने की घटनाओं को बड़े जोर-शोर से प्रचार सा किया गया। यह भी प्रचारित किया गया कि समाज के ऐसे लोग प्रेम...
ब्लाँग कि दुनिया भी अजीब है कोई बन्दा दिन रात एक करके अपनी रचनाएँ बना रहाँ है और कोई चोरी करने का काम कर रहाँ है ,पिछले दिनो नेट सर्फिँग के दौरान एक गजलो के ब्लाँग पर गया तो पता चला कि उनकी सारी गजलेँ किसी.

जब मैंने ब्लॉगिंग शुरू की थी , तब वो ब्लैक एंड व्हाईट पिक्चर की तरह नहीं भी तो भी थ्री डी डायमेंशन वाली भी नहीं थी । हालांकि तब हमें खुद इस बात की सुध नहीं थी कि ब्लॉगिंग में घुस कर हम कोई तीर मारने जा 
गिरीश पंकज कहते हैं- ऊपर वाला देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है...
कहावत है, कि ऊपर वाला देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है. मेरे साथ यही हुआ. पहले ''ईटिप्स'' ब्लॉग के मित्रों ने मुझे सम्मानित किया और कल ''परिकल्पना''के रविन्द्र प्रभात भाई और उनकी टीम ने मुझे सम्मानित कर दि...
ये कैसा प्रेम एक व्यक्ति के चारों और का माहौल बस प्यार और प्यार से आच्छादित फ़िल्में देखता है तो बस प्यार से भरी साहित्य पढ़ता है तो वही प्रेम की बातें प्रेम कथाओं का इतना बड़ा समुन्दर अखबार इन्हीं खबरों 
भ्रष्ठाचार और मक्कारी तो मानो हमारी रग-रग में रची बसी है ! सार्वजनिक धन की चोरी को हम अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते है, और ऊपर से सीना जोरी भी ! शरमो-हया और दुनिया की लोक-लाज तो जयचंद के कुटुंबी वंशजों ने तभ..
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दूरियों की ना परवाह कीजिये जब दिल पुकारे बुला लीजिये बहुत दूर नहीं हूँ आपसे पलकों को बंद कर याद कर लीजिये. ००००००० दोस्ती फूलों से न करो जो कुछ समय बाद मुरझा जाते हैं दोस्ती करनी है काँटों से करो चुभ... 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
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5 comments:

मनोज कुमार August 4, 2010 at 12:46 AM  

अच्छी जमी है चौपाल!

वन्दना August 4, 2010 at 3:23 AM  

बहुत सुन्दर चौपाल्।

'अदा' August 6, 2010 at 3:21 PM  

rajkumar ji,
bahut bahut shukriya..aapne meri pravishthi ko sammilit kiya ..
bahut hi acchi charcha rahi aapki..
aabhaar..!

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