ब्लाग जगत को लगी है किसकी नजर-जब देखो बज जाता है विवाद का बजर-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी
>> Monday, August 9, 2010
सभी को नमस्कार करता है आपका राज
ब्लाग जगत में लगता है विवादों का अंत कभी नहीं होगा एक समाप्त होता नहीं है कि दूसरा सामने आ जाता है। आखिर इससे किसका भला कर रहे हैं हम...जरा सोचे सब मिलकर हम----
पापा को गए हुए आज पूरे उन्नीस साल हो गए लेकिन उनके दिए संस्कार और आचरण सब कुछ तो मेरे साथ हैं. आज नहीं अगर हम ४० साल पहले की मानसिकता पर विचार करें तो निश्चय ही लड़का और लड़कियों में बहुत...
पिछली पोस्ट से आरम्भ हुई 'त्रयी ' ने दिमाग पर इतना जोर डाला कि मन हो आया आपसे कुछ हल्का फुल्का ही फिलहाल साझा कर लिया जाय .इन दिनों ब्लॉग जगत में शेरो शायरी की बहार आई हुई है -ताज्जुब होता है कि लोग बाग...

नमस्कार , साप्ताहिक काव्य मंच पर आप सभी का स्वागत है ….रचनाकार के लिए पाठक ईश्वर समान है ..जिस प्रकार ईश्वर को श्रद्धा से पुष्पांजलि भेंट की जाती है मैंने भी काव्य-प्रसून भेंट कर दिए हैं …ईश्वर में आस्था...
प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,* *प्रणाम !* भारतीय स्वाधीनता संग्राम में काकोरी कांड एक ऐसी घटना है जिसने अंग्रेजों की नींव झकझोर कर रख दी थी। अंग्रेजों ने आजादी के दीवानों द्वारा अंजाम दी गई इस घटना को काकोरी
क्या कहा जाए भैया, अब तो समय ऐसा आ गया है की बड़े-बड़े पत्रकार बड़े अखबारों में, अपने लिए नौकरी भी आईएएस के मार्फ़त तलाशते हैं, इस से ज्यादा पत्रकारों का पतन और क्या होगा. अखबारों के पतन की बात तो बाद में ...
एक और छोटी सी पोस्ट बड़ी बात कहती हुई!होना क्या चाहिये और हो क्या रहा है इसको बयान करती है ये पोस्ट्।प्यार दिल मे होना चाहिये ना कि लफ़्ज़ों मे और नाराज़गी लफ़्ज़ों में होनी चाहिये नाकि दिल में।मगर हक़ीक़त मे हो
पिछले तीन-चार दिनों की विश्वव्यापी घटनाओं पर नजर दौड़ायें तो आसानी से दिख रहा है कि प्राकृतिक प्रकोप लगभग समूचे विश्व पर छाया है। इस जगह पर घटनाओं का विस्तार और विश्लेषण मायने नहीं रखता क्योंकि सभी कुछ म...
बी एस पाबला बता रहे हैं- स्वतंत्रता दिवस पर एक अनूठा राष्ट्रीय ध्वज विज़ेट, आपके ब्लॉग के लिए
भारत के स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ चंद दिन ही दूर रह गई है। याद करने का समय आया है राष्ट्रभक्त आजादी के दीवानों की कुर्बानियां, उनके द्वारा संजोये गए देश के स्वरुप की वो कल्पना, जिसके मूर्त रूप लेने में अ...

मुम्बई की बारिश तो मशहूर हो चली है. बाहर से आकर बसे लोग भी नही डरते तो यहाँ की आबोहवा में पले-बढे बच्चे क्या डरेंगे. मेरी बिल्डिंग में एक लड़का है जॉनमैथ्यू . बहुत ही एडवेंचरस.आम मुम्बईया लड़कों से बहुत ...
मेरे एक स्वनामधन्य मित्र की टिप्पणी है कि मैं अब बूढ़ा हो चला हूं कि मेरी लगभग सभी रचनाओं में कोई न कोई स्मृति अवश्य रहती है। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि मित्र ने मेरी निंदा की है या तारीफ। वैसे वृद्ध कहे जा...
धीरे-धीरे ही लगता घून एक दिन खत्म हो जाता है लकड़ी का वजूद उम्र के साथ बहुत मोटी हो जाती है बचपन की कोमल चमड़ी धीरे-धीरे बढ़ती है बेशर्मी झरकल (जले हुए) चेहरे भी हो जाते हैं नुमाइशी फेंक दिये जाते हैं ओट उतर जा...
कल फिर मिलेंगे
5 comments:
बाहर बढ़िया चौपाल ....साप्ताहिक काव्य मंच को शामिल कराने के लिए आभार ..
सुन्दर चुअपाल सजाई है।
माफ़ कीजिये गलत टाईप हो गया है ---------चौपाल पढियेगा।
iss baar chaupaal-charchaa bhi-hameshaa ki tarah- dhaansoo hai.
बढ़िया चौपाल के लिये आभार् .
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