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आजादी की कहानी ब्लाग चौपाल की जुबानी-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, August 14, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
आजादी की दास्तानों से आज सारे ब्लाग अटे पड़े हैं, ऐसे में हमने उन्हीं ब्लागों को लिया है जिनमें आजादी के किस्से हैं....
शहर की महज औपचारिक दिशा की और निरंतर अग्रसर होती स्वत्रंत्रता दिवस की एक दिवसीय चकाचौध के बीच बचपन में गाँव के स्कूल में मनाये जाने वाले स्वत्रंत्रता दिवस की याद रह रह कर आ जाती है. जब गाँव की टेढ़ी-मेढ़ी...
 
प्रेमपत्र जारी है। प्रात:काल है और इस महान पुरातन देश के जीवन में आए एक महत्त्वपूर्ण दिन की वर्षगाँठ का उत्सव चल रहा है। दिन भर चलेगा। उठा हूँ और पाया हूँ कि घाव हरे हो गए हैं। उदासी के साथ अपनी पुरानी डा...
 
नमस्कार! सबसे पहले स्वतन्त्रता दिवस की अनंत मंगल कामनाएं आप सभी को ! *जैसा कि आप सभी को विदित है कि आज ही के दिन अपना यह मधुमय देश आज़ाद हुआ था, जिसका जश्न हम विगत छ: दशकों से मनाते आ रहे हैं, किन्तु प्रश्न...
 
आज़ादी क्या तीन थके रंगों का नाम है? जिसे एक पहिया ढोता है? या इसका कोई और मतलब होता है? सुदामा पांडे 'धूमिल' स्‍वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनांए 
 
कुछ कूट विषैले सर्प यदि फुँकार करें तो करने दो... ये है स्वाभाव उनका तुम उनके विष की सरिता बहने दो... किंतु यदि तुम मूढ़ बने वो विष धमनी मे घोलोगे... वर्षों का सम्मान अगर यूँ खड़े खड़े ही खो दोगे... ये ...
 
हम फ़िर आज़ादी का पर्व मना रहे है।सारा देश जश्न मे डूब जायेगा और एक दिन की राष्ट्रभक्ति का भूत दूसरे दिन ही उतर जायेगा और लोग तीन-तेरह के जुगाड मे लग जायेंगे और राष्ट्रभक्ति का जिन्न साल भर के लिये किसी बोतल...
 
स्वतंत्रता-दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ* कौम के खादिम की है, जागीर वन्दे मातरम्, मुल्क के है वास्ते अकसीर वन्दे मातरम्. जालिमों को है उधर, बन्दूक अपनी पे गुरूर, है इधर हम बेकसों का, ...
 
आजादी एक महान शब्द है. गुलामी से मुक्ति की चाहत तो मूक पशुओं में भी होती है. फिर हम तो मनुष्य है. बलिदानों के बाद यह देश आज़ाद हुआ.लेकिन आज अपनी हालात क्या है, यह किसी से छिपी नहीं है. आज भी सरकार विरोधी...
 
स्वाधीनता दिवस पर …. आप सभी को हर्दिक शुभकामनाएं और बधाई! आज हम दिन भर प्रस्तुति करेंगे। सबसे पहले प्रस्तुत है डॉ. रमेश मोहन झा की प्रस्तुति भारतीय आत्‍मा का सबसे बड़ा पर्व ! ...
 
अशोक बजाज कहते हैं- सांस्कृतिक राष्ट्रवाद ही अंतिम विकल्प
15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर विशेष* *आ*ज हम आजादी की 63 वी वर्षगांठ मना रहे हैं। किसी भी देश के विकास के लिए 63 वर्ष कोई कम नहीं है। वर्षों की गुलामी के बाद 15 अगस्त 1947 को आजाद मातृभूमि पर जब सूरज की पह...
 
व्यंग्यलोक पर पढ़े व्यंग्य - पन्द्रह अगस्त का पोरोग्राम और नेताजी का भासड़ आपकी प्रतिक्रिया आलोचना समालोचना का इन्तज़ार रहेगा 
 
वन्दे मातरम कहते जाओ आस्तीनों में साँप पाले जाओ ए खुदा के नामुराद बन्दों देश को लूट - खसोटे जाओ कल की फिक्र तुम ना करना बस आज जेबें भरते जाओ जनता मरती है मरने दो बस तुम अमरता को पा जाओ शहीद की कुर्बान...
 
सुसज्जित कर दो * *संसार की * *इस चित्रशाला को * *अपने शौर्य से !* * * *जो शूर हैं * *वही...* *सदियों तक * *अमर रहे * *इतिहास में..!* * * *राजा, धनि और महाजन * *क्या रह पाए कोई अमर ?* * * *शौर्य ग...
 
 
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 

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बैटन के खेल का पुलिस अधिकारी ने निकाला तेल, मैने भी किया क्वीन्स बैटन का स्वागत-ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Friday, August 13, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
अपने राज्य में बैटन का ऐतिहासिक स्वागत तो जरूर हुआ, लेकिन एक पुलिस वाले के कारण हुए हादसों की वजह से हम लोगों को शर्मसार भी होना पड़ा। ....
 
 
कामनवेल्थ गेम्स अच्छी कम खराब बातों को लेकर चर्चा मे हैं।इस पर देश की राजनीति गर्माई हुई है और सारे देश मे इस पर बहस भी चल रही है।सबकी अपनी-अपनी ढपली है और सबका अपना-अपना राग है।कोई इसे गुलामी का प्रतीक कह..
 
बैटन रिले के लिए खेल विभाग ने जिस तरह से लगातार कई महीनों से योजना बनाई थी उसके बाद भी ये सोचने वाली बात है कि आखिर बैटन का खेल क्यों फेल हो गया। इसके कारणों की जब पड़ताल की गई तो मालूम हुआ कि ऐन समय पर प...
 
अपने आप पास घटित होने वाली छोटी-छोटी साधारण घटनाओं व बातों से उषा राठौड़ बड़ी गंभीर बात निकाल लाती है और उस साधारण सी बात की हमारी आदतों से तुलना कर एक बहुत बड़ा सन्देश दे जाती है | एसा ही एक सन्देश उन्होंने
 
आज दो दोहे, कल तीन, परसों चार, दस तक होने के बाद ग़ज़ल प्रारंभ करूंगा. तब तक मेरा टायपिंग का आपका पढ़ने का अभ्यास हो जायेगा . इस बीच कोई विशेष व्यस्तता नहीं है सो टिपियाना भी जारी रहेगा (लेन-देन के 
 
 
क्या आप कैंसर से युद्ध में आलोक तोमर को सही राय दे सकते हैं? *- (डॉ.)कविता वाचक्नवी  हिन्दी पत्रकारिता व लेखन से जुड़े लोग आलोक तोमर जी से परिचित ही हैं, जो नए लोग इस नाम...
 
भारत की विश्व को देन* भारत की आत्मा को समझना है तो उसे राजनीति अथवा अर्थ-नीति के चश्मे से न देखकर सांस्कृतिक दृष्टिकोण से ही देखना होगा। भारतीयता की अभिव्यक्ति राजनीति के द्वारा न होकर उसकी संस्कृति के...
 
गाँधी जी' भी नहीं रहे....'सुभाष जी' भी चल बसे...और 'जवाहर लाल जी' भी कब के ऊपर पहुँच गए...अब तो मेरी भी तबियत कुछ ठीक नहीं रहती...ना जाने कब लुढक जाऊँ?…पता नहीं इस देश का क्या
 
मेरे घर की दीवालों ने बातें करना सीख लिया है गूंगे कमरे के आलों ने कुछ-कुछ कहना सीख लिया है अब उतना भी ना तन्हा होता जब मैं तन्हा होता हूँ.. तन्हाई ने मेरी मुझसे चुहलें करना सीख लिया है अंधियारे कमरे ...
 
पान वैसे ही लबों की शान माना जाता है . राजा से लेकर गरीब आमजन भी पान का स्वाद लेने से नहीं चूकते हैं . हमारे देश में पान के शौकीन हर जगह मिल जाते हैं . कुछ पान में तम्बाखू डालकर पान का स्वाद लेते हैं तो कु...
 
कुछ पल का मिलना फिर बिछड़ जाना क्या जरूरी है ? कुछ देर रुके होते दो बात की होती कुछ अपनी कही होती कुछ मेरी सुनी होती कुछ दर्द लिया होता कुछ दर्द दिया होता कुछ अपनी बेचैनियों का कोई राज़ दिया होता कुछ वाद...
 
 
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 

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बैटन की धूम-सब गए झूम-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Thursday, August 12, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
अपने शहर रायपुर में कल बैटन रिले का आयोजन किया गया, इसमें शामिल हुए नेता, मंत्रियों से लेकर सभी छत्तीसगढ़वासी झूम गए। पत्रकार भी बैटन को हाथ लगाने के लिए बेताब नजर आए। सभी पर बैटन का नशा हावी रहा....
शहीद भगत सिंह चौक से जैसे ही मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बैटन को रवाना किया, प्रारंभ हो गया उसका ६ किलोमीटर का सफर इस सफर में रास्ते में जिस तरह ही दीवानगी खिलाडिय़ों और लोगों में देखने को मिली, वैसी दीवानगी..
आशंका सच साबित हुई -प्रकाशन विभाग से पुस्तक छप के आ गयी -इस समय मेरे सामने है ..*विकासवाद के जनक चार्ल्स डार्विन .*मेरा नाम गायब है ...जबकि लगभग पूरी किताब ही मेरे पूर्व प्रकाशित लेखों और दूसरे लेखकों के 
 
देवी प्रसाद मिश्र* *आलोचना* के अंक 91 में युवा कवि *देवीप्रसाद मिश्र* की * ‘मुसलमान’* नामक कविता छपी है जिसकी कुछ खास स्थापनाओं पर आपत्ति करके *शानी*ने *नवभारत टाइम्स* में उसे राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना 
बहनों और भाईयो, कुख्यात टीवी चैनल यानि *ताऊ टीवी* के लोकप्रिय "पति पीटो रियलिटी शो" के दुसरे भाग में मैं रमलू सियार आपका हार्दिक स्वागत करता हुं. हमने पिछले एपिसोड मे आपको बताया था कि मिस. समीरा टेढी को 
हम आपके हैं कौन टिप्‍पणी न मिले तो कैसा लगता है समझ रहे हैं आप बिल्‍कुल ऐसा लगता है। हमने ब्‍लॉग नहीं बनाए हैं टिप्‍पणी न मिलने पर हमारे चेहरे हैं सामने पर लटकियाये हैं। पर बेपर हुए जाते हैं हम बे...
डॉ.कविता वाचक्नवी कहती हैं- इक्कीसवीं सदी आम लोगों की ?
इक्कीसवीं सदी आम लोगों की **?* * - डॉ. ओम विकास* *dr.omvikas@gmail.com* Mobile : 098 6840 4129 20वीं सदी में मशीनीकरण से मानव-शक्ति के परे सुनियोजित ढंग से अभिनव जटिल कार्य करना संभव हुआ । कुछ ...
अर्जुन सिंह ने राज को और गहरा दिया ?* भोपाल गैस त्रासदी के मुख्य आरोपी यूनियन कार्बाईड के प्रमुख वारेन एंडरसन को भारत से सुरक्षित व बाईज्जत भगाने के मामले में ...
आज कोई दोहा याद नहीं आ रहा एक मतला और एक शेर देखें कि बातें झूठी, मन भी झूठा, दुनिया झूठी बाबू जी फिर भी जाने क्या है ससुरी लगे अनूठी बाबू जी राजनीत का खेल खेलने वाले हैं दुष्यंत यहाँ किस्मत देखो शक...
पी.सी.गोदियाल कहते हैं- मनमोहन सिंह जी की जय बोलिए क्योंकि वे भी आज २२७३ दिन के प्रधानमंत्री हो गए !
आज जब एक दैनिक अंगरेजी अखबार की वेब-साईट पर उसकी न्यूज हेडिंग पर नजर गई तो पता चला कि मनमोहनसिंह जी इस देश के प्रधानमन्त्री की कुर्सी को लम्बे समय तक सुशोभित करने वाले तीसरे प्रधानमंत्री बन गए है ! नि:संद...
महेन्द्र मिश्र कहते हैं- हमारे देश में लुप्त होती प्राचीन परम्परागत मुगदर कला ....
नागपंचमी का पर्व निकट ही है और इस पर्व को लेकर मन फिर से बचपन की और लौट पड़ा है . इस पर्व पर शहर में काफी धूमधाम का माहौल रहता था . कहीं कुश्ती कला का तो कहीं अस्त्र शस्त्रों का प्रदर्शन भारी तादाद में देख..

सर्वत जमाल- हमारा सब्र तोला जा रहा है। मुसल्सल झूठ बोला जा रहा है। अभी कब्जा़ नहीं है उसके तन पर, अभी तो मन टटोला जा रहा है। यकी़नन हो चुकी है डील पक्की, बड़े साहब का झोला जा रहा है। मुझे पैसा मिला तो ...
यह परेशानी बहुत ही साधारण है, ब्लोग्वानी के साथ भी कई बार हो चुकी है -------- हमारीवाणी
यह एक साधारण प्रॉब्लम है और अक्सर सभी तरह की वेब साईट में आतीं रहती है. अब से पहले यह परेशानी ब्लोग्वानी में भी कई बार आ चुकी है. इसका एक उदहारण आप निम्न लिंक पर जा कर देख सकते हैं.
दिल्ली , नॉएडा , गुडगांव और आस पास के ब्लॉगर बंधू ध्यान दें .................आपकी मदद की जरूरत है |* *ख़ास कर *गुडगांव के लोगो की सब से ज्यादा जरूरत होगी | *दी ग्रेट इण्डियन लाफ़्टर चैम्पियन फेम हास्य कला...
तब हमारे पास फोन नहीं था, बूथ या दफ्तर से फोन करके तय करते थे- मिलना-जुलना पहुंच भी जाते थे, बगैर धीरज खोए नियत जगह पर अंगूठे को कष्ट पहुंचाए बिना. घरवालों को फोन करना तो और भी था मंहगा चिट्ठी ही पूरी ...
अभी उदयपुर में रिमझिम का दौर जारी है। मन करता है कि बचपन की तरह ही किसी बरसाती नदी के किनारे जाकर बालू रेत पर पैरों से कूदूं और जब पैर अन्‍दर धसने लगे तो चारों तरफ बिखरी खिलखिलाहट को जीवन भर के लिए समेट लू...
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 

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क्वींस बैटन आई, दिलों में छाई, तू जहाँ जहाँ चलेगा , वोनेज साथ देगा,- ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Wednesday, August 11, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

 
क्वींस बैटन अपने शहर में है और सुबह से ही बहुत काम है ऐसे में लगा था कि आज शायद चर्चा करना संभव नहीं होगा, लेकिन मन में चाह थी तो वक्त निकल ही गया.... 
 
कामनवेल्थ की क्वींस बैटन का बुधवार की रात को रायपुर आगमन हुआ। बैटन दल के कमांडर वीएन सिंह ने बैटन खेलमंत्री लता उसेंडी और महापौर किरणमयी नायक को सौंपी। गुरुवार को राजधानी में दोपहर दो बजे बैटन रिले का आयो...
 
 
आपको कैसा लगेगा यदि आपके घर के फोन से ६०-७० देशों में फ्री में बात हो सके ? और आपका फोन नंबर एक ही रहे, कहीं भी किसी भी देश में उठाकर घूमो उस फोन को ? अमेरिका की एक कंपनी इस तरह की फोन सेवाएं देती हैं ...
 
यह करतूत गूगल दादा की नहीं, हमारीवाणी की है। उसकी कारगुजारी से बचिए। ब्‍लॉगजगत पर आतंकवादी हमला इस हमले की जद में आने से बचें और सभी को बचाएं। तुरंत इस पोस्‍ट को सबके पास पहुंचाएं। आप सभी जिनके ब्‍लॉग ...
 
मेरे पति (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") ने* * स्वाधीनता-दिवस पर यह * *गीत लिखा था।* *इसे मैं अपनी आवाज में * *प्रस्तुत कर रही हूँ-* *श्रीमती अमर भारती * ** *मेरे प्यारे वतन, जग से न्यारे वतन। मेरे प्यार...
 
ऑंच – 30 अरुण राय की कविता 'कील पर टंगी बाबू जी की कमीज' **** हरीश प्रकाश गुप्त प्रयोगवाद के अनन्य समर्थक अज्ञेय ने अपने चिंतन से स्वातन्त्रयोत्तरी कविता को नई दिशा दी। उन्होंने परम्परागत प्रतीकों और ..

अंत्योदय * *- पं. दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन* पं.दीनदयाल उपाध्याय महान राष्ट्रभक्त गरीबों के मसीहा,अंत्योदय के जनक तथा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रणेता थे उन्होने देश की राजनैतिक एंव आर्थिक दशा व दिशा ...
 
जब चाहतें थीं तो हर हसरतें फ़ना हो गयी अब चाहतें नहीं तो हर हसरत जवाँ हो गयी कल जब बुलाते थे तो दूर छिटक जाते थे आज बिन बुलाये चले आते हैं ये कैसे हसरतों के साये हैं बंद किवड़िया खडकाए हैं खुशियों के दर...
 
संगीता पुरी बता रही हैं- शुक्र की सितंबर से दिसंबर 2010 तक की खास स्थिति का आपपर कैसा प्रभाव पडेगा ??
पिछले आलेख में 13 अगस्‍त को आसमान में दिखाई देने वाले शुक्र चंद्र युति कीमैने चर्चा की है। सिर्फ 13 अगस्‍त को ही नहीं , आने वाले दिनों में लगभग पांच महीनों तक यानि 11 सितंबर , 9 अक्‍तूबर , 2 दिसंबर , 31 दिस...
 
प्रिय बन्‍धु संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या का नौवां अध्‍याय प्रस्तुत कर रहा हूँ । संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या - नवमो अभ्‍यास: आप सब के सहयोग के लिये बहुत आभार एवं धन्‍यवाद ।। 
 
शानू शुक्ला कहते हैं- वो आज फिर से
वो आज फिर से * * पनघट पर उदास बैठी है, * * तेरा इंतज़ार करके,* * कि तू आज फिर से नही आया * * खाली किश्तियों ने * * गवाही दी उसको..!!* 
 
शनिवार रात...कोई डेढ़ बजे का समय...कुछ लोग जिंदगी पर बात करते करते अचानक सेंटी हो जाते हैं...और समंदर देखने की इच्छा होती है. बंगलोरे चेन्नई एक्सप्रेस वे के बारे में गूगल बताता है कि कुछ दो सौ किलोमीटर है......
 
कृषि मंत्नी शरद पवार ने कहा है कि देश में अनाज भंडारण की समस्या से निपटने के लिए अगले दो तीन वर्षो में व्यापक कदम उठाए जायेंगे और गोदामों में सड़ रहे खाद्यान्न के संबंध में उच्चतम न्यायालय को सरकार ...
 
निकली वो घर से कॉलेज के लिए थी रास्ते में बजी सिटी उड़ी फब्ती नजर तक ना उठा सकी चुनरी संभालती तेज क़दमों से पहुंची सिटी बस स्टैंड एक कागज की पुड़िया टकराई उस से और गिरी पैरों में डरते हुए उठाई खुलते ही पुड...
 
दम ब दम दिल धड़कने लगा , दम ब दम मैं खोने लगा , दम ब दम मूंदी आँखोंमें तेरा चेहरा दिखने लगा , दम ब दम मैं रातोंकी नींदों में भी जागने लगा ..... ================================ सितारोंमें देखते देखते खोने लगे...
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 

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पहियों पर दौडती जिंदगी, रेल के डिब्बों में देखा खेल संसार-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Tuesday, August 10, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
काम ज्यादा है समय कम 
फिऱ भी चर्चा करने से बाज नहीं आते हम ....
न न .........न तो मेरी टूर एंड ट्रेवेल्स टाईप की कोई नौकरी है...........और न ही मैं बस या ट्रक चलाता हूं ...आप्स सोच रहे होंगे कि तो आखिर फ़िर क्यों लिखा मैंने कि पहियों पर दौडती जिंदगी ......। जो कुछ चंद...
कामनवेल्थ एक्सप्रेस के जैसे ही राजधानी में होने की जानकारी यहां के खेल प्रेमियों को हुई, राजधानी से खेल प्रेमियों का कारवां चल पड़ा स्टेशन की ओर। सुबह से लेकर रात तक खेल प्रेमी रेल के डिब्बों में खेल के ...
(1) * *गौतम, गांधी, बोस की, हैं सच्ची तस्वीर।* *नन्हे सुमन जगायेंगे, भारत की तकदीर।।* *(2) * *बेरंग होने में सदा, आता है आनन्द।* *झंझावातो में भला, किसे सुहाते रंग।। * *(3) * *हँसने से कट जायंगे, सारे द.

देसिल बयना-42 अरब न दरब झूठ का गौरब करण समस्तीपुरी एंह... गाँव-घर के रमन-चमन का एगो अलगे मजा है। ई रंग-रहस, उ अलमस्ती, हे उ अपनापन... गालियो दे तो लगे फूले बरसता है। ससुर डांट-डपट में भी छुर-छुरा के ह...
माँ को अर्पित चौपदे: संजीव 'सलिल' बारिश में आँचल को छतरी, बना बचाती थी मुझको माँ. जाड़े में दुबका गोदी में, मुझे सुलाती थी गाकर माँ.. गर्मी में आँचल का पंखा, झलती कहती ...
यह ग़ज़ल उन मित्रों के लिये हैं जो बहुत अच्छे इनसान है मगर तथाकथित लोगों से हैरान-परेशान है. आज हम यही देख रहे है हर कहीं तथाकथित लोग ही नायक बने हुए है. फिर भी....मैं मानता हूँ कि एक दिन सच जीतता है. प्रति...
 
खामोशियों की पैरहन को आँखों की बारिश ने भिगो दिया है इतना कि चिपक कर रह गयी है जेहन से इसे उतारने की कोशिश भी नाकाम हो चली है .. . 
अभी भी थोड़ी दिक्कत है काबू नहीं आ रहा हिंदी टंकण के टूल्स नहीं मिल रहे यह टाइपिंग याने पहले रोमन में लिख स्पेस दबा कर काम चला रहा हूँ फिलहाल एक दोहा और देखें कि संबंधों कि व्याकरण, निजता के अनुबंध. जीव...
अनामिका की सदायें में देखें- खामोशियाँ
कई बार * *खामोशियाँ भी * *कितने झन्झावात ले आती हैं .* *खामोशियाँ ...* *खामोशियाँ ना रह कर * *विचारों की * *उठा -पटक करती हैं * *मानस पटल पर.* * * *मैं ख़ामोशी की * *चादर ओढ़ * *अपने...
कॉलेज में एक आल्‍हादित साथी ने प्रसन्‍नमुख बताया कि आज विष्‍णु खरे ने जनसत्‍ता में खूब खरी खरी (खरी खोटी) सुनाई है हिन्‍दी के पाखंडियों को। मैं तो सहम गया क्‍योंकि जब भी हिन्‍दी के पाखंडियों, हिन्‍दीखोर...
सर्वत जमाल- अमीर कहता है इक जलतरंग है दुनिया। गरीब कहते हैं क्यों हम पे तंग है दुनिया। घना अँधेरा, कोई दर न कोई रोशनदान, हमारे वास्ते शायद सुरंग है दुनिया । बस एक हम हैं जो तन्हाई के सहारे हैं, तुम्हारा...
अविनाश वाचस्पति बता रहे हैं- करप्‍शनवेल्‍थ गेम्‍स और आंखिन कर : 10 अगस्‍त 2010 के डीएलए में पढि़ए
करप्‍शनवेल्‍थ गेम्‍स और आंखिन कर 
आज से ठीक चार दिन बाद हम अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहे होंगे.. ब्लोगर नीरज भदवार ठीक कहते है कि दरअसल हमें आज़ादी मिल तो गयी पर अब हमें पता ही नहीं कि इसका करे क्या? कश्मीर में उठती लपटों के बारे में सोचने ...
आप सभी को हरियाली की बहुत बहुत शुभकामनाएं* *जादू टोना मन्त्र-तंत्र, कलजुग के सारे यंत्र-तंत्र * *रख सद्भाव करें जागृत, आवें काम सर्वदा जनहित * *आपदाओं को दूर करे, आतंकी अत्याचारी डरे * *विश्व-शांति मिशन ...
आज भी बच्चों के जन्म पर छठी के दिन पन्डित से पूजा-पाठ और यज्ञ आदि करवा कर कुण्डली बनवाने और राशि,नक्षत्र आदि से नाम निकलवाने की रीत है। बिटिया का नाम 'उ या ऊ' से निकला तो मैनें बिटिया का नाम उर्वशी रखा। घर... 
आज प्रस्तुत है ग़ालिब साहब की यह गज़ल जो मुझे बेहद पसंद है * *न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता * *डुबोया मुझको होने ने , न होता मैं तो क्या होता * *हुआ जब ग़म से यों बेहिस, तो ग़म क्या सर के क...
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

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ब्लाग जगत को लगी है किसकी नजर-जब देखो बज जाता है विवाद का बजर-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Monday, August 9, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
ब्लाग जगत में लगता है विवादों का अंत कभी नहीं होगा एक समाप्त होता नहीं है कि दूसरा सामने आ जाता है। आखिर इससे किसका भला कर रहे हैं हम...जरा सोचे सब मिलकर हम----
 
पापा को गए हुए आज पूरे उन्नीस साल हो गए लेकिन उनके दिए संस्कार और आचरण सब कुछ तो मेरे साथ हैं. आज नहीं अगर हम ४० साल पहले की मानसिकता पर विचार करें तो निश्चय ही लड़का और लड़कियों में बहुत...
 
पिछली पोस्ट से आरम्भ हुई 'त्रयी ' ने दिमाग पर इतना जोर डाला कि मन हो आया आपसे कुछ हल्का फुल्का ही फिलहाल साझा कर लिया जाय .इन दिनों ब्लॉग जगत में शेरो शायरी की बहार आई हुई है -ताज्जुब होता है कि लोग बाग...
 
लेह बाजार के स्‍वागत द्वार में मित्र ऋषि तिवारी खारदुंगला रोड में थम से गए झरने पर मेरे मित्र हजारों किलोमीटर दूर, दुनिया के सबसे उंचे मोटरेबल रोड पर काम करते मजदूरों के मुह से गुरतुर गोठ छत्‍तीसगढ़ी सुन...
 
नमस्कार , साप्ताहिक काव्य मंच पर आप सभी का स्वागत है ….रचनाकार के लिए पाठक ईश्वर समान है ..जिस प्रकार ईश्वर को श्रद्धा से पुष्पांजलि भेंट की जाती है मैंने भी काव्य-प्रसून भेंट कर दिए हैं …ईश्वर में आस्था...
 
प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,* *प्रणाम !* भारतीय स्वाधीनता संग्राम में काकोरी कांड एक ऐसी घटना है जिसने अंग्रेजों की नींव झकझोर कर रख दी थी। अंग्रेजों ने आजादी के दीवानों द्वारा अंजाम दी गई इस घटना को काकोरी 
 
क्या कहा जाए भैया, अब तो समय ऐसा आ गया है की बड़े-बड़े पत्रकार बड़े अखबारों में, अपने लिए नौकरी भी आईएएस के मार्फ़त तलाशते हैं, इस से ज्यादा पत्रकारों का पतन और क्या होगा. अखबारों के पतन की बात तो बाद में ...
 
एक और छोटी सी पोस्ट बड़ी बात कहती हुई!होना क्या चाहिये और हो क्या रहा है इसको बयान करती है ये पोस्ट्।प्यार दिल मे होना चाहिये ना कि लफ़्ज़ों मे और नाराज़गी लफ़्ज़ों में होनी चाहिये नाकि दिल में।मगर हक़ीक़त मे हो 
 
पिछले तीन-चार दिनों की विश्वव्यापी घटनाओं पर नजर दौड़ायें तो आसानी से दिख रहा है कि प्राकृतिक प्रकोप लगभग समूचे विश्व पर छाया है। इस जगह पर घटनाओं का विस्तार और विश्लेषण मायने नहीं रखता क्योंकि सभी कुछ म...
 
बोल-बम* आज सावन सोमवार होने के कारण वातावरण भगवामय हो गया है। चारो तरफ भगवा वस्त्र धारण किये कावड़िये नजर आ रहे । जगह जगह बोल बम के नारे गूंज रहे है। रायपुर से राजिम की दूरी 45 कि. मी. है। रास्ते भर का...
 
बी एस पाबला बता रहे हैं- स्वतंत्रता दिवस पर एक अनूठा राष्ट्रीय ध्वज विज़ेट, आपके ब्लॉग के लिए
भारत के स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ चंद दिन ही दूर रह गई है। याद करने का समय आया है राष्ट्रभक्त आजादी के दीवानों की कुर्बानियां, उनके द्वारा संजोये गए देश के स्वरुप की वो कल्पना, जिसके मूर्त रूप लेने में अ...
 
मुम्बई की बारिश तो मशहूर हो चली है. बाहर से आकर बसे लोग भी नही डरते तो यहाँ की आबोहवा में पले-बढे बच्चे क्या डरेंगे. मेरी बिल्डिंग में एक लड़का है जॉनमैथ्यू . बहुत ही एडवेंचरस.आम मुम्बईया लड़कों से बहुत ...
 
मेरे एक स्वनामधन्य मित्र की टिप्पणी है कि मैं अब बूढ़ा हो चला हूं कि मेरी लगभग सभी रचनाओं में कोई न कोई स्मृति अवश्य रहती है। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि मित्र ने मेरी निंदा की है या तारीफ। वैसे वृद्ध कहे जा...
 
धीरे-धीरे ही लगता घून एक दिन खत्म हो जाता है लकड़ी का वजूद उम्र के साथ बहुत मोटी हो जाती है बचपन की कोमल चमड़ी धीरे-धीरे बढ़ती है बेशर्मी झरकल (जले हुए) चेहरे भी हो जाते हैं नुमाइशी फेंक दिये जाते हैं ओट उतर जा...
 
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 

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"मैं "का कोई अस्तित्व नहीं, चिडि़या नहीं हूं मैं-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Sunday, August 8, 2010

 सभी को नमस्कार करता है आपका राज  
 
शुरू करते हैं आज की चर्चा 
बिना किए समय का खर्चा
 
चिडि़या नहीं हूं मैं - प्रतिभा कटियार
पढि़ए और बतलाइये दैनिक हिन्‍दुस्‍तान में आज 8 अगस्‍त 2010 को प्रकाशित यह कविता आपको कैसी लगी ? प्रतिभा कटियार जी से आप यहां पर मिल सकते हैं। इमेज पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं ।
 
मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं ब्रह्मांड में घूमते एक कण के सिवा कुछ भी तो नहीं अकेले किसी कण की सार्थकता नहीं जब तक अणु परमाणु ना बने जब तक उसके जीवन का कोई प्रयोजन ना हो उद्देश्यहीन सफ़र को मंजिल नही...
 
शायद इस बात को मैं पहले भी कई बार कह चुका हूं कि स्कूली दिनों में, मैं कभी भी एक मेधावी छात्र ,नहीं रहा , हां ऐसा भी नहीं रहा कि अभिभावकों को इस बात की चिंता भी नहीं रहती थी कि कहीं फ़ेल तो नहीं हो जाएगा 
 
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में काकोरी कांड एक ऐसी घटना है जिसने अंग्रेजों की नींव झकझोर कर रख दी थी। अंग्रेजों ने आजादी के दीवानों द्वारा 09/08/1925 को अंजाम दी गई इस घटना को काकोरी डकैती का नाम दिया और ...
 
20 अगस्त को अ . भा . रेडियो श्रोता सम्मेलन* छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ रायपुर एवं ओल्ड लिस्नर्स ग्रुप आफ इंडिया के सयुक्त तत्वाधान में आगामी 20 अगस्त को रायपुर में आयोजित अ . भा . रेडियो श्रोता सम्...
 
 
 मेरी पिछली पोस्ट *कौन और क्यूं हैं राम* पर अली सा ने टिप्पणी की है कि मैं कबीर ,तुलसी और /के राम पर कुछ क्रमबद्ध लिखूं जो यहाँ ब्लॉग पर चल रहे ईशनिंदा के माहौल से अलग हो ....मैंने इस विषय पर उन्हें अपने ...
 
 
वैसे तो पूरे ब्रह्मांड में अक्‍सर ही कई प्रकार की दृश्‍यावलि बनती है , पर हम उन्‍हे अपनी आंखो से नहीं देख पाते हैं। प्रतिदिन दूरदर्शी यंत्र की सहायता से नासा द्वारा खींची गयी आसमान की वैसी कोई न कोई तस्‍वीर
 
शबनम खान का- एक "प्रयास"
कौन कहता है आसमाँ में छेद नहीं हो सकता,एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों **”**।इन्हीं पंक्तियों को यथार्थ में बदलने की कोशिश में लगा है दिल्ली का **“ **प्रयास बाल निरीक्षण गृह**”**।इस बालगृह में 18 वर्...
 
एक बहुत छोटी सी पोस्ट जिसमे बहुत बड़ा सवाल भी है।मोबाईल फ़ोन जितना सुविधाजनक है उतना ही वो अपनी एसएमएस सेवा के कारण परेशानी का सबब भी बनता जा रहा है।टेलीमार्केटिंग ने तो और परेशानी बढा दी है ऐसे मे बिना पढे ...
 
भोपाल में इन दिनों पढ़े-लिखे प्रबुद्ध लोग एक दिगम्बर मुनि के कड़वे प्रवचनों का आनन्द ले रहे हैं। वे दिगम्बर मुनि जब बैंडबाजे के साथ सड़क से गुज़रते हैं तो उनके अनुयाई महिला पुरुष तो श्रद्धा से स... 
 
रचना दीक्षित का- जल प्रपात
जल प्रपात" मेरे नैनों के जल प्रपात से, किंचित,गंधक के सोते सा पवित्र औषधीय जल बहता है कितना व्यथित किया सबने, मुझे ये पावन नीर बहाने को कोई निहारे खुश हो जाये कोई डिबिया भर घर ले जाये कोई पा...
 
कविता रावत की मनभावन वर्षा!!
मुरझाये पौधे भी खिल उठते जब उमड़- घुमड़ बरसे पानी, आह! इन काली घटाओं की दिखती हरदम अजब- गजब की मनमानी। देख बरसते बादलों को ऊपर मलिन पौधे प्रफुल्लित हो जाते हैं, ज्यों बरसाये बादल बूंद- बूंद त्यों नित ये..
 
 
 
 
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 

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