Powered by Blogger.

तू भी मान उड़न तश्तरी का अभियान-तभी बचेगी सबकी जान- ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Monday, July 19, 2010

  सभी को नमस्कार करता है आपका राज

आज इस बात की बहुत जरूरत है कि पर्यावरण को सुरिक्षत रखा जाए। इसके लिए पेड़ लगाने होंगे। अपने राज्य छत्तीसगढ़ में तो इसका आगाज हो चुका है, अब सभी को इसके बारे में सोचना चाहिए। ...
 
 
परसों ज्ञात हुआ कि पत्रिका सोपानStep के जुलाई २०१० के अंक में नारदवाणी कॉलम में, जिसे भाई अविनाश वाचस्पति जी नियमित लिख रहे हैं, में एक आलेख छपा, जिसका शीर्षक था ’ जुलाई भी बन गयी जून,सखी री आया न मानसून’...
 
निष्कपट निश्छल चेहरा * **हिलते हैं, ओष्ठ अधर दोनों न बोल पाते हुए भी *अपनी प्यारी सूरत औ **आँखों के भावों ..
 
पल क्षणों में क्षण घंटों में और घंटे दिन-रात में परिणित होते जाते हैं और समय अबाध गति से बीतते जाता है। काल का पहिया ज्यों-ज्यों घूमता है उम्र तिल-तिल करके घटते जाता है। शैशवकाल लड़कपन में लड़कपन किशोरावस्था..

एक ठेकेदार ने जबलपुर में विभाग के कर्मचारियों की सुरक्षा की चिंता किये वगैर एक विद्युत ट्रांसफारमर पोल क्रमांक - पी. ८ ई पर कुंए के ऊपर डी.पी. खड़ी कर कुंए के ऊपर २०० के.व्ही.ए० का ट्रांसफारमर लगा दिया है 
 
क्या करूँ मेरी कल्पना की उड़ान तो मुक्त आकाश में बहुत ऊँचाई तक उड़ना चाहती है लेकिन मेरे पंखों में इतनी ताकत ही नहीं है और मैं सिर्फ पंख फड़फड़ा कर ही रह जाती हूँ ! क्या करूँ मेरे ह्रदय में सम्वेदनाओं का...
 
तू सामने हो तो दिल बहक जाता है ! तेरे हाथ में परिंदा भी हो तो दिल जल जाता है ! तेरे होटों के रस को महसूस करने से ही मुझ पर मदहोशी तारी होती है ! 
 
मूलवासी* (लघुकथा) -- सत्येन्द्र झा [image: J0145810] "आपका नाम ?" "संतोष।" "पिता का नाम ?" "जी आत्मबल" "घर का पता ?" "घर नहीं है, साहब ! किराए के मकान में रहता हूँ। पता उसी दिन बदल ज...
 
प्राचीन काल से ही हमारे पूरे देश में लोक कथाओं, गीतों, पहेलियों तथा लोकोक्तियों इत्यादि द्वारा गूढ से गूढ बातों को सरलता से समझाने की परंपरा रही है। खासकर कथा-कहानियां सदा से रोचक, भावप्रद तथा शिक्षापूर्ण ...
 
मै प्रेम नगर की rअहने वाली॥ प्रेम की प्रेम दीवानी हूँ,। वह तो मेरा प्रेम दीवाना॥ मै उसकी घरवाली हूँ॥ सात साल पर बात हुयी थी॥ तेरह साल में हुयी मुलाक़ात॥ सोलह साल की भइल उमारिया॥ सूझे लाग उल्का पात॥ ..

जो लोग रंगकर्म से जुड़े हैं वे इस बात को बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि नाटक में अभिनय के लिये स्त्री पात्र जुटाना कितना कठिन काम है । निर्देशक को बहुत नाक रगड़नी पड़ती है तब कहीं जाकर नाटक में काम करने के लि...
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 

Read more...

लौट आये फिर मुद्दतों के बाद , कुछ ही.....ही, हा......हा, हो जाए-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Sunday, July 18, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

 
आज सीधे चर्चा की तरफ चलते हैं-.....
 
ला में जुड़ जाती है एक और कड़ी. *(२)* रिश्तों में खटास पैदा होने में नहीं लगती देर लगा दिए जाते हैं सगे सम्बन्धियों पर आरोप कही सुनी बात...
 
ये थका-थका सा है जोश मेरा, ये ढला-ढला सा शबाब है तेरे होश फिर भी उड़ गए, मेरा हुस्न क़ामयाब है ये शहर, ये दश्त, ये ज़मीन तेरी, हवा सरीखी मैं बह चली तू ग़ुरेज न कर मुझे छूने की, मेरा मन महकता गुलाब है ...
 
उन पत्थर के पशुओं पर लाहनत है, जो दूसरों के दुःख को कोमलता से अपनाकर द्रवीभूत नहीं हो जाते *-हिल * डूबने वाले के प्रति सहानुभूति का मतलब उसके साथ डूबना नहीं है बल्कि ख़ुद तैर कर उसको बचने ...
 
बार-कोड मेरी पलकों के बार-कोड ने कल जब बहुत शोर मचाया था अपने बार-कोड रीडर से तुमने, फ़ौरन मुझे पढ़वाया था एक्सपायरी डेट पास जान जश्न खूब मनाया था एक्सपायरी डेट निकल गयी तो क्या, मैं नयी पैक...
 
कब कहाँ कैसे हम उलजकर रह चले थे जिंदगी की राहमें , जब आया होश तो तनहा ही चल रहे थे एक सुनी सड़क पर , कारवां छुट चूका था कहीं दूर और हम बेखबरसे चल पड़े , बस तब ये हो गया हमें तुम्हारी यादने सताया यूँ जी भर के म...
 
 रविवार का दिन है, आईए कुछ ही..ही.., हा..हा.. हो जाए @ भाषण चल रहा था। नेताजी बार-बार कह रहे थे कि हमें अपने पैरों पर खड़े होना है। तभी भीड़ के पीछे से कोई चिल्लाया, अरे साहब हम तो कब से कोशिश कर रहे हैं पर...
 
राजकुमार सोनी कहते हैं- हाथियों ने मचाया हाहाकार
छत्तीसगढ़ में केवल नक्सली ही हाहाकार नहीं मचाते। नक्सलवाद की चुनौती का सामना करने वाला यह राज्य हाथियों की समस्या से भी बुरी तरह जूझ रहा है। कैप्टन जे फारसाइथ के अनुसार छत्तीसगढ़ में हाथियों की उपस्थिति क...
 
 
सियासत खून पीती है हमारा तो ग़लत क्या है दरख्ते ज़िन्दगी पर बेल हमने ख़ुद चढ़ाई है कभी ये शेर कहने वाले कवि और शायर डा.त्रिमोहन तरल की गजलें साखी पर 
 
शबनम खान की- दौर-ए-उलझन
दौर उलझनों का* *सुलझता ही नहीं...* *वक़्त की रफ़्तार* *बढ़ती भी नहीं...* *धुंध में लिपटी* *ख्वाहिशें सभी...* *ज़िन्दग़ी का सफ़र* *काटे कटता नहीं...* *चन्द रोज़ पहले* *ख़ामोश जज़्बात हुए...* *पर ...
 
 
(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता)* वज्र से भी कठोर, फूल से भी कोमल, क्या केवल भगवान ही है? नहीं, इसी स्वभाव का एक सभ्य प्राणी- मेरे घर में भी है; जिसकी आवाज ऐसी है जैसे चल रही हो बन्दूक दुनाली, आप शौ...
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

Read more...

हरी होगी अपनी धरा-तभी फूटेगा प्रदूषण का धड़ा -ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, July 17, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
हमारे राज्य की नई राजधानी को संवारने का काम शुरू हो गया है। इसको इस तरह से संवारा जा रहा है कि यहां पर हर तरफ हरियाली की चादर होगी। यहां एक ही दिन में कल एक लाख पौधे रोप कर नया इतिहास रचा गया। इसी के साथ नई राजधानी को देश में नंबर वन बनाने का संकल्प छत्तीसगढ़ की सरकार ने लिया है। बहरहाल आज रविवार है देखे कौन क्या लाया है अपने ब्लाग में.....
 
अशोक बजाज बता रहे हैं- प्रदूषण के खिलाफ जंग-- हरियर अभियान
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 20 कि. मी. दूर रायपुर में आज एक लाख पौधे रोप कर नया इतिहास रचा है। छत्तीसगढ़ के गर्वनर शेखरदत्त, मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह, उनके मंत्रीमंडल के सदस्य, जनप्रतिनि...
 
छत्तीसगढ़ की नई राजधानी को देश में नंबर वन बनाने का संकल्प छत्तीसगढ़ की सरकार ने लिया है। इस बारे में यह बात तब सामने आई जब वहां पर एक लाख पौधे लगाने का काम किया गया। हम इस कार्यक्रम का कवरेज करने गए थे। ...
 
शराब पीने के लिए बनाई जाती है लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि शराब पहनी भी जा सकती है | आज अंतरजाल पर भटकते हुए मैं josh18 के न्यूज़ पोर्टल पर 3 अप्रेल 2007 को छपी खबर पर पहुँच गया जहाँ पता चला कि आस्ट्रेलि...
 
 
साब जी अभी हाल में एक टूटी-फूटी रचना लिखी थी.. अब उसमे कुछ सुधार किया और गाने की गलती कर बैठा.. सोचा आपको भी सुना ही दूँ.. दिन अच्छा रहा होगा तो ख़राब हो जाएगा सुनने के बाद.. इस प्रयोग के लिए समीर सर का व...
 
इधर-उधर कि बात किये बिना मैं सीधे प्वाइंट पर मतलब कहानी पर आता हूँ.. एक धोबी के पास एक गधा और दो कुत्ते थे.. गधा गधामजूरी करता था और दोनों कुत्ते घर कि रखवाली.. गधा कपडे धोकर धोबी घाट ले जाता था, एक कुत्ता...
 
पीपली लाइव एक काल्‍पनिक कहानी है दो भाइयों की, जो किसान हैं। फिल्‍म की शुरुआत में कर्ज न चुकाने की वजह से वे अपनी जमीन खोने वाले हैं। इसी दौरान उन्‍हें पता चलता है एक सरकारी य... 
 
हम सबका जीवन विविधताओं से भरा हुआ है. अनुभव, स्थितियां सबके अनेक रंग हैं. दुःख है तो सुख भी है. दुःख आया है तो सुख की संभावना भी बनी हुई है. कई बार मै भी घबरा जाता हूँ, लेकिन मुझे अपनी ही पंक्तियाँ समझ...
 
धर्म डेस्क. उज्जैन* *आं*तकवाद यानि ऐसा वाद जिसे दिल और दिमाग से नहीं बल्कि बम और बंदूकों के दम पर फेलाया जाता है। धर्म कोई भी क्यों न हो वह आतंकवाद यानि कि दहशतगर्दी को इजाजत नहीं देता। किसी धर्म...
 
आ…लौट के आ जा मेरे मीत रे….तुझे मेरे गीत बुलाते हैं"… * “क्या बात तनेजा जी…आज बड़े खुश हो…मस्ती में खुशी के गीत गए जा रहे हैं?"… “कान पे झापड़ मारूंगा एक"… “काहे को?”… “मेरी ये रोनी सूरत आपको खुशी और हर्ष...
 
ज़ख्म-ए-ज़िन्दगी को भरम में बहला भी ना सके हंसी से खुद के घाव सहला भी ना सके ! रातों की तन्हाइयाँ जिन्दगी को चाटती गयी, खुद के शव पे आंसू बहा भी ना सके ! बिस्तर की चादर में लिपट खुद को कफ़...
 
शनिवार को हम फ़ुरसत में होते हैं। और इस ब्लॉग के लिए हमारे स्तंभ फ़ुरसत में के लिए कुछ लिखने की ज़िम्मेदारी भी होती है। तो आज सुबह-सुबह क्या लिखूं की उधेरबुन में डायरी के पन्ने पलटने लगा। सहसा अपनी लिखी ...
 
रशीम रवीजा पूछ रही हैं- कितने युग और लगेंगे इस मानसिकता को बदलने में??
कोई भी घटना जब अपने चरम पर पहुंचती है तभी अखबारों की सुर्खियाँ बनती है. > लेकिन उन सुर्ख़ियों तक पहुँचने की नीचे वाली पायदानों तक भी बहुत कुछ घटित > होता रहता है, समाज में. हम, अपनी रोजमर्रा की ज़िन...
 
अन्जू ने आम काटते वक्त सरोते से अंगुली ही कटवा ली। मम्मीजी अपने भतीजे की शादी में गई हैं, दो-तीन दिन में लौटेंगीं तो अन्जू ने खुद ही अचार डालना चाहा। अब हर पांच मिनट में अंगुली के दुखने की बात कहती है (श...
 
 
 
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 
 

Read more...

कृपया सावधान रहें, महंगाई डायन खाय जात है...-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Friday, July 16, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

बस अब से कुछ समय बाद ही हमें नयी राजधानी में बनने वाले खेलगांव में खेल संघों के साथ वृक्षारोपण करने जाना है। सोचा जानने से पहले आज की चर्चा को अंजाम दे दिया जाए। देखे कौन क्या कहता है... 
 
महंगाई डायन खाय जात है ....... * इन दिनो फिल्म “ पिपली (लाईव) ” का यह गीत खूब चल पड़ा है ठीक वैसे ही जैसे कि पिछले एक दो वर्षो से “ सास गारी देवे ...... ” वाला ...
 
देखिए क्या बदमाशी है, गधे के बच्चे मेरे नाम से मुझे ही फर्जी मेल भेज रहे हैं। एक फोटो में मेरा स्पेम फोल्डर दिख रहा है जिसमें 1 new photo on my Daily Flog और check out this photo on MyDailyFlog लिखा दिख ...
 
जितने दुःख, जितनी विपत्तियाँ हमें प्राप्त होती हैं, उनका कारण यही है कि अनन्त ऐश्वर्य युक्त सर्वशक्तिमान ईश्वर की ओर से हम भिन्नता का भाव रखते हैं मनुष्य तब तक अपनी शक्ति को ठीक ठीक प्राप्त नहीं 
 
परिवर्तन शब्द अपने आप में कितना कुछ समाहित करके रखता है, एक युग से दूसरे युग का परिवर्तन हो, या फिर एक सदी से दूसरी सदी का परिवर्तन, एक देश से दूसरे देश में जाने का, या फिर एक संस्कृति से दूसरी संस...
 
आज, 17 जुलाई को महाजाल पर ... वाले सुरेश चिपलूनकर, तलाश वाले सुशील सिंह छौक्कर का जनमदिन है। बधाई व शुभकामनाएं आने वाले जनमदिन आदि की जानकारी, अपने ईमेल में प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें। अपने म...
 
सियासत खून पीती है हमारा तो ग़लत क्या है दरख्ते ज़िन्दगी पर बेल हमने ख़ुद चढ़ाई है कभी ये शेर कहने वाले कवि और शायर डा.त्रिमोहन तरल की गजलें *साखी पर 
रायपुर । द्वितीय प्रमोद वर्मा स्मृति आलोचना सम्मान से प्रतिष्ठित कथा आलोचक मधुरेश और युवा आलोचक ज्योतिष जोशी को सम्मानित किया जायेगा । यह सम्मान उन्हें 31 जुलाई, प्रेमचंद जयंती के दिन रायपुर, छत्तीसगढ़ ...
 
ललित जी की उम्दा कविता पढी तो अपनी यह पुरानी पोस्ट याद आ गयी * एक गांव के बाहर एक घना वट वृक्ष था। जिसकी जड़ों में एक दो फुटिया पत्थर खड़ा था। उसी पत्थर और पेड़ की जड़ के बीच एक श्वान परिवार मजे से रहता आ रहा...
 
संगीता स्वरुप ( गीत ) के ख्यालों के निशाँ
साहिल है मेरी सोच मन के सागर की तेरी यादों की रेत पर मेरे ख्यालों के निशाँ हैं उन नक़्शे पाँव पर जब मैंने अपनी चाहत को रखा तो हकीक़त की लहर ने मिटा दिए आ कर मेरी कल्पना के निशाँ ... ...
 
 
राजकुमार सोनी  बता रहे हैं- पुरानी खांसी
कहते हैं कि यह देश किसानों का देश है, लेकिन दुनिया के पेट को रोटी देने वाला किसान जिस तरह से भूखा रहता है। दाने-दाने को तरसता है, उसे देखकर नहीं लगता है कि वास्तव में यह देश किसानों का सम्मान करना भी जानत... 
 
नवीन प्रकाश बता रहे हैं- एंटी वायरस हटाने का औजार
ये आम समस्या है की आप किसी एंटी वायरस या एंटी स्पायवेयर को काटकर नया या अन्य एंटी वायरस प्रोग्राम अपने कंप्यूटर पर इन्स्टाल करना चाहते हैं पर आपका पुराना एंटी वायरस अन इंस्टाल ही नहीं होता इससे निपटने के ...
 
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे  
 
 
 
 
 
 
 
 

Read more...

अपने रुपये को मिला नया चेहरा, , एक नोट से क्या-क्या कमाल.-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Thursday, July 15, 2010

 
 सभी को नमस्कार करता है आपका राज


आज कल काम की अधिकता के बाद भी चर्चा करने का मोह छोड़ नहीं पाते हैं। आज रुपए की धूम दिख रही है ब्लागों में ऐसे में हमने भी उन पोस्टों को महत्व दिया है।......
 
दुनिया भर में अब भारतीय मुद्रा की भी अपनी अलग पहचान होगी। अभी तक यह सम्मान सिर्फ चार देशों की मुद्राओं को ही प्राप्त है। लेकिन अब सरकार ने भारतीय रुपये को पहचान देते हुए इसके लिए एक प्रतीक चिन्ह या 'सिंबल...
 
आज एक ई-मेल मिला...उसमें जापान की एक बेहद खूबसूरत कला से परिचय कराया गया है...आप अपनी आंखों से देखेंगे तो खुद वाह कर उठेंगे...इस कला का नाम है ओरिगेमी...जापान की पेपर फोल्डिंग की अद्भुत कला...इसमें कागज़ क...
 
अब रुपए को भी मिला उसका चेहरा* केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आईआईटी मुंबई के शोध छात्र डी उदय कुमार के डिजाइन को रुपए के प्रतीक के रूप में चुन लिया है. केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने गुरुवार को ह...
 
मैं एकाकी कहाँ ! जब भी मेरा मन उदास होता है अपने कमरे की प्लास्टर उखड़ी दीवारों पर बनी मेरे संगी साथियों की अनगिनत काल्पनिक आकृतियाँ मुझे हाथ पकड़ अपने साथ खीच ले जाती हैं, मेरे साथ ढेर सारी मीठी-मीठी बातें कर...
 
है कितनी कमजोर व्यवस्था * *जिसका ओर न छोर...व्यवस्था * *फ़ैल रहा है खूनी पंजा * *लगती आदमखोर व्यवस्था* *अब ग़रीब के मुँह से हाए* *छीन रही है कौर व्य...
 
खुशी का मौका, हमारे इंदिरा गांधी एयरपोर्ट का नया टर्मिनल खुल गया। दुनिया के सबसे बड़े दस एयरपोर्टों में शुमारी दर्ज की गयी। साफ सुथरा, हर नयी तकनिकी से लैस, दुनिया भर में हवाई अड्डों पर मिलने वाली सुविधाओं ...
 
 
हिन्दुस्तान का दर्द में- महगाई की मार पड़ी जब...यार बहुत मै रोया था..
आफ सेंचुरी पूरी कर गया॥ कभी नहीं कुछ खोया था॥ महगाई की मार पड़ी तो॥ यार बहुत मै रोया था॥ प्यारा पोता हाथ कर बैठा॥ बाबा काजू खाना है॥ आज हमें सारंगी लाओ॥ आज ही हमें बजाना है॥ सारा खाता छान डाला॥ पेटी...
 
 
रवीन्द्र प्रभात कहते हैं- श्रेष्ठता का पैमाना : लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान
एक ऐसी लेखिका जो अपनी मातृ भाषा जितनी अच्छी जानती हैं , उतना ही उनका अँग्रेज़ी और रूसी भाषा पर समानाधिकार है . बचपन में अपने इंजीनियर पिता के साथ होली के साहित्यिक टाइटिल बनाने वाली आज खुद ही बहुत अच्छी कव...
 
वीरेंद्र सेंगर की कलम से केंद्र सरकार के कई मंत्रियों के बीच टकराहट बढ़ी है। मंत्रियों की इस कार्यशैली से पीएमओ खुश नहीं हैं। यह जरूर है कि वह हस्तक्षेप तभी करता है, जब बात काफी बढ़ जाती है और सरकार की फज...
 
घर की देहरी पार कर भी ले मन की देहरी ना लाँघ पाया कभी तेरे मन की दहलीज पर अपने मन की बन्दनवार सजाई मगर फिर भी सूक्ष्म, अनवरत बहते विचारों को मथ ना पाया कभी ना जाने कौन सा सतत प्रवाह रोकता रहा बढ़न...
 
 
चार पांच सालों से धुँआधार ब्लागिंग पर नतीजा खालिस ही याने हासिल आई शून्य ही है . आज बहुत दिनों बाद याद आया की भाई चिट्ठाजगत का मेरा बिल्ला नंबर क्या है तो पाया है की वही ढांक के पांत वाला हिसाब है ... ...
 
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

Read more...

"एक शहर जो हर शहर में बसता है" और बिहार, आपकी कसम हम बिहार में ताजमहल बना देंगे.....- ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Wednesday, July 14, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

और सीधे खोलता है ब्लाग की पोस्टों का राज 
पीडी कहते हैं- "एक शहर जो हर शहर में बसता है" और बिहार
2003 में पहली बार घर से बाहर पाँव रखा और दिल्ली कि और निकल पड़ा.. मुनिरका में अपना आसरा बनाया.. हर शहर में एक ही शहर बसता है.. मैंने पाया कि हर शहर में एक ही जैसे मोहल्ले, विद्यार्थियों और बैचलर के रहने के ...
शादी से पहले.....* पतिः देर किस बात की है। पत्नीः क्या तुम चाहते हो मैं चली जाऊँ? पतिः नहीं, ऐसा तो मैं सोच भी नहीं सकता। पत्नीः क्या तुम मुझे प्यार करते हो? पतिः अवश्य! एक नहीं अनेकों बार!! पत्नीः...
अब महिलाएं बिशप भी बन सकेंगी। चर्च आफ इंग्लैंड ने यह फैसला सुनाया है। इस फैसले से ब्रिटेन के परंपरावादी खेमे में निराशा और नाराजगी का माहौल है। दुनिया भर की महिलाओँ के लिए यह सुकून की खबर है। सेवा के सारे ...
आज हमारा समाज विभिन्न जातियों में, वर्गों में बंटा हुआ है. समाज बना कैसे? जाती बनी कैसे? सभी जानते हैं. वर्ण व्यवस्था अभी की नहीं है, सदियों पुरानी है. चार आश्रम, चार वर्ण कौन नहीं जानता. वर्ण व्यवस्था क...
खो चुकी हूँ आज अपने आपका अपनत्व री सखि ! आज प्राणों में कसक है, ह्रदय में पीड़ा घनेरी, नयन वारिद उमड़ आये, भर निराशा की अँधेरी, धुल चुके अरमान सारे जल चुका है ममत्व री सखि ! खो चुकी हूँ आज अपने आपका अपनत्व ...
 
नवभारत टाइम्स के १४-७-२०१० के अंक पर भी नज़र डालें। शेफील्ड और वारविक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों नें जो दावा किया है वह कितना सच है ? लंदन । पहले अंडा आया या मुर्गी ? यह प्रश्न हजारों वर्षों से लोगों को 
वन विभाग का अमला भले ही यह बात मानने को तैयार नहीं होगा लेकिन हकीकत यही है कि छत्तीसगढ़ के जंगलों में जंगली भैंसों का दिखना कम हो गया है। वन विभाग की उदासीनता, अवैध शिकार और जंगलों की अवैध कटाई के कारण यह.....
कल एक ट्रक सड़क में धसा तो आज मुखर्जी नगर में एक स्कूली बस के पहिये जमीन में धस गए...जिसे करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद निकला गया... इन दोनों ही घटनाओं में कोई हताहत तो नहीं हुआ--- लेकिन ये हादसे विकास क...
'कितना कमजोर है गुब्बारा * *चाँद साँसों में फूल जाता है* *जरा सा आसमां क्या मिला* *अपनी औक...
(जनगणना से जात हटाओ) रविवार को उपवास और धरना देश भर में फैले अपने सभी साथियों से मैं अनुरोध करता हूं कि आप कृपया रविवार (18 जुलाई 2010) को अपने शहर या गांव में सार्वजनिक उपवास और धरने का आयोजन करें| य...
तू पागल है उसे ऐसा मै हर बार कहता हूँ मगर फिर भी न जाने क्यूँ मुझी से प्यार करता है मुझे देखे इसी हसरत से छत पे रोज आता है वहां आकर न जाने क्यूँ वो नजरें भी चुराता है वो ज़माने याद है मुझको वो नखरे याद...
11 जुलाई को ललित शर्मा जी ने एक पोस्‍ट लगायी थी , जिसमें एक चित्र दिखाकर पूछा था कि *हमने इस तारे की फ़ोटो ली, आप देख कर बताईए कि
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 

Read more...

बच्चे हैं या बाप रे बाप.., डांटा तो बच्चे छलांग लगा देंगे या फिर.-ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Tuesday, July 13, 2010

 
 सभी को नमस्कार करता है आपका राज

आज ब्लाग चर्चा करने बैठे तो देखा कि बच्चों पर बहुत कुछ लिखा गया है, ऐसे में हमने सोचा कि आज की चर्चा में इसी को महत्व दिया जाए। हमारी कोशिश रहती है कि कम से कम दो ऐसी पोस्ट हों जिसका विषय एक जैसा हो ते उसे मिलाकर शुरुआत की जाए। चलिए देखे कौन क्या लिखता है....


स्पाइडरमैन...* *सारे घर के बदल डालूंगा..*. *चॉकलेट की बच्ची तू छिपी है कहां...* *छलकाए जाम, आइए आपकी आंखों के नाम..
 
पता नहीं ये मेरा दिल है या कोई सच जो मुझे कुछ बता रहा है एक पुल नाज़ुक से दिल का बेरहमी से जला कर आई हूँ तुम्हारे पास... मगर यहाँ कुछ पराये से साए क्यूँ नज़र आते हैं जिन्हें तुम अपना नहीं कहते हो.......
 
अफगानिस्तान के तालिबान आतंकी गिरोह ने अमेरिका से लड़ने के लिए बंदरों को आतंकी प्रशिक्षण देना आरंभ कर दिया है। इस तरह की रिपोर्ट चीन,अमेरिका और ब्रिटिश मीडिया में छपी हैं। कुछ पत्रकारों ने बंदरो...
 
मन बेचैन है बेहद्।पता नही कल अख़बार की सुर्खियां क्या होगी?शाम ढलते ही खबर मिली की बस्तर मे आधा दर्ज़न जगहों पर पुलिस और नक्सलियों के बीच फ़ायरिंग शुरू है।अब भला बताईये ये भी भला कोई खबर है,कि फ़लाना जवान मारे...
 
ओ अध्यापक, अब तुम्हारे दिन चले गये। अरे जब बच्चों को जन्मने वाले माता-पिता की कोई औकात नहीं रही तो मास्टर की क्या बिसात? चुपचाप स्कूल में आओ, पढ़ाओ और अपने घर जाओ। बच्चे स्कूल में क्या कर रहे हैं, पढ़ रहे है...
 
बिना किसी भूमिका के फिर एक बिल्कुल नई ग़ज़ल. मैं जो कहना चाहता हूँ, शेर तो कह रहे है. शुभकामनाएं चाहिए, दुवाओं में याद करते रहें, बस....* पद क्या पाया मद है भाई वैसे बौना कद है भाई हँसना भूल गया बेचारा ...
 
साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा शताब्दी की कालजयी कहानियों का चयन किया गया है। चयनित कहानियां किताब घर प्रकाशन से ४ खण्डों में प्रकाशित हुई है। विगत सौ वर्षों से कथा लेखकों में छत्तीसगढ़ के गांव लिमतरा से ...
 
तुम्हारा साथ पाने की उद्विग्नता ... हड्डियों के ढांचे से चिपके मांस में छिपी रक्त धमनियों को उकसा देती है . चाहतें परछाइयाँ बन कर पीछा नहीं छोडती... मानो तिल की तरह शरीर पर पड कर या..

दिल रोता है में- अस्मत दो, तो ही छोड़ेंगे तुम्हारे बाप को'
महिला से प्राप्त जानकारी के अनुसार उसका पति किसी प्रकरण में पिछले डेढ़ साल से जेल में बंद है शुक्रवार को उक्त महिला के भाई को पुलिस बिजली बिल न देने के कारण घर से उठाकर ले गई थी जिसके संबंध में वह महिला अप...
 
हिंदी ब्लॉगजगत के पास एक ऐसी उत्कृष्ट लेखिका हैं , जिनकी कथा-कहानियों में परिस्थितियों से उत्पन्न विविध प्रकार के भौन्जालों के बीच विवशताभरी छटपटाहट का खुला दस्तावेज सम सम्मुख आता है , साथ ही जन-समुदाय के ...
 
मनोज कुमार के खुली आँखों के सपने
 
प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पन्त ने कविता की परिभाषा देते हुए कहा है, *"कविता परिपूर्ण क्षणों की वाणी है।"* मतलब कविता काप्रस्फुटन तब तक नहीं हो पाता जब तक कि आपके मनः-मष्तिष्क का विचार-घट पु...
 
पहली कहानी काफी पुरानी है। सबने पढी-सुनी होगी। एक राजकुमारी को उसकी सौतेली माँ बहुत तंग करती थी। एक दिन हैरान परेशान राजकुमारी अपने बागीचे में घूम रही थी कि उसे वहां एक मेढक दिखाए पड़ा। मेढक ने राजकुमारी से...
 

*जब आपके घर कोई खास मेहमान आए और आपने उनसे पूछा ‘क्या लेंगें ?’ और मेहमान ने कहा कि ‘कुछ नहीं’ तो आप लगते हैं झुंझलाने कि आखिर कहां से लाउं ‘कुछ नहीं’ .... आखिरकार अब इस समस्या का भी हल मिल ही गया...आप खुद...
 
प्रिय बन्‍धु संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या का तीसरा अभ्‍यास आज प्रकाशित किया है इसका लिंक नीचे दे रहा हूँ । संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या - तृतीय: अभ्‍यास: आपलोगों की संस्‍कृत में श्रद्धा यूँ ही बनी रहे इ...
 
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 

Read more...

  © Blogger template Webnolia by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP