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हरी होगी अपनी धरा-तभी फूटेगा प्रदूषण का धड़ा -ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, July 17, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
हमारे राज्य की नई राजधानी को संवारने का काम शुरू हो गया है। इसको इस तरह से संवारा जा रहा है कि यहां पर हर तरफ हरियाली की चादर होगी। यहां एक ही दिन में कल एक लाख पौधे रोप कर नया इतिहास रचा गया। इसी के साथ नई राजधानी को देश में नंबर वन बनाने का संकल्प छत्तीसगढ़ की सरकार ने लिया है। बहरहाल आज रविवार है देखे कौन क्या लाया है अपने ब्लाग में.....
 
अशोक बजाज बता रहे हैं- प्रदूषण के खिलाफ जंग-- हरियर अभियान
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 20 कि. मी. दूर रायपुर में आज एक लाख पौधे रोप कर नया इतिहास रचा है। छत्तीसगढ़ के गर्वनर शेखरदत्त, मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह, उनके मंत्रीमंडल के सदस्य, जनप्रतिनि...
 
छत्तीसगढ़ की नई राजधानी को देश में नंबर वन बनाने का संकल्प छत्तीसगढ़ की सरकार ने लिया है। इस बारे में यह बात तब सामने आई जब वहां पर एक लाख पौधे लगाने का काम किया गया। हम इस कार्यक्रम का कवरेज करने गए थे। ...
 
शराब पीने के लिए बनाई जाती है लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि शराब पहनी भी जा सकती है | आज अंतरजाल पर भटकते हुए मैं josh18 के न्यूज़ पोर्टल पर 3 अप्रेल 2007 को छपी खबर पर पहुँच गया जहाँ पता चला कि आस्ट्रेलि...
 
 
साब जी अभी हाल में एक टूटी-फूटी रचना लिखी थी.. अब उसमे कुछ सुधार किया और गाने की गलती कर बैठा.. सोचा आपको भी सुना ही दूँ.. दिन अच्छा रहा होगा तो ख़राब हो जाएगा सुनने के बाद.. इस प्रयोग के लिए समीर सर का व...
 
इधर-उधर कि बात किये बिना मैं सीधे प्वाइंट पर मतलब कहानी पर आता हूँ.. एक धोबी के पास एक गधा और दो कुत्ते थे.. गधा गधामजूरी करता था और दोनों कुत्ते घर कि रखवाली.. गधा कपडे धोकर धोबी घाट ले जाता था, एक कुत्ता...
 
पीपली लाइव एक काल्‍पनिक कहानी है दो भाइयों की, जो किसान हैं। फिल्‍म की शुरुआत में कर्ज न चुकाने की वजह से वे अपनी जमीन खोने वाले हैं। इसी दौरान उन्‍हें पता चलता है एक सरकारी य... 
 
हम सबका जीवन विविधताओं से भरा हुआ है. अनुभव, स्थितियां सबके अनेक रंग हैं. दुःख है तो सुख भी है. दुःख आया है तो सुख की संभावना भी बनी हुई है. कई बार मै भी घबरा जाता हूँ, लेकिन मुझे अपनी ही पंक्तियाँ समझ...
 
धर्म डेस्क. उज्जैन* *आं*तकवाद यानि ऐसा वाद जिसे दिल और दिमाग से नहीं बल्कि बम और बंदूकों के दम पर फेलाया जाता है। धर्म कोई भी क्यों न हो वह आतंकवाद यानि कि दहशतगर्दी को इजाजत नहीं देता। किसी धर्म...
 
आ…लौट के आ जा मेरे मीत रे….तुझे मेरे गीत बुलाते हैं"… * “क्या बात तनेजा जी…आज बड़े खुश हो…मस्ती में खुशी के गीत गए जा रहे हैं?"… “कान पे झापड़ मारूंगा एक"… “काहे को?”… “मेरी ये रोनी सूरत आपको खुशी और हर्ष...
 
ज़ख्म-ए-ज़िन्दगी को भरम में बहला भी ना सके हंसी से खुद के घाव सहला भी ना सके ! रातों की तन्हाइयाँ जिन्दगी को चाटती गयी, खुद के शव पे आंसू बहा भी ना सके ! बिस्तर की चादर में लिपट खुद को कफ़...
 
शनिवार को हम फ़ुरसत में होते हैं। और इस ब्लॉग के लिए हमारे स्तंभ फ़ुरसत में के लिए कुछ लिखने की ज़िम्मेदारी भी होती है। तो आज सुबह-सुबह क्या लिखूं की उधेरबुन में डायरी के पन्ने पलटने लगा। सहसा अपनी लिखी ...
 
रशीम रवीजा पूछ रही हैं- कितने युग और लगेंगे इस मानसिकता को बदलने में??
कोई भी घटना जब अपने चरम पर पहुंचती है तभी अखबारों की सुर्खियाँ बनती है. > लेकिन उन सुर्ख़ियों तक पहुँचने की नीचे वाली पायदानों तक भी बहुत कुछ घटित > होता रहता है, समाज में. हम, अपनी रोजमर्रा की ज़िन...
 
अन्जू ने आम काटते वक्त सरोते से अंगुली ही कटवा ली। मम्मीजी अपने भतीजे की शादी में गई हैं, दो-तीन दिन में लौटेंगीं तो अन्जू ने खुद ही अचार डालना चाहा। अब हर पांच मिनट में अंगुली के दुखने की बात कहती है (श...
 
 
 
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 
 

11 comments:

ललित शर्मा July 17, 2010 at 8:28 PM  

राजकुमार भाई, तुस्सी वी ग्रेट हो जी।

अच्छी चर्चा

आभार

संगीता पुरी July 17, 2010 at 8:43 PM  

बढिया चौपाल लग जाता है यहां .. शुभकामनाएं !!

संगीता स्वरुप ( गीत ) July 18, 2010 at 12:57 AM  

उम्दा चौपाल...हमेशा की तरह

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa July 18, 2010 at 6:24 AM  
This comment has been removed by the author.
Gagan Sharma, Kuchh Alag sa July 18, 2010 at 6:30 AM  

हर बार इस मौसम में हरियाली की बात होती है। सुनने मे आता है लाखों-करोंड़ों पौधे लगाए गये। कुछ लगते भी हैं। पर फोटो वगैरह खिंचवा कर इतिश्री हो जाती है क्योंकि बाद मे कोई सुध नहीं लेता। लगाने में जैसा जोश दिखाया जाता है उसका दस प्रतिशत भी ख्याल रखने में खर्च होता तो आज हरे रंग के सिवाय और कोई रंग दिखाई नहीं देता। आप भी समझते ही हैं लगाने की आवक और संभालने की जावक का गणित.....

मनोज कुमार July 18, 2010 at 9:12 AM  

ढेर सारे लिंक्स।
अच्छी चौपाल। हमारी रचना को सम्मान देने के लिए आभार।

rashmi ravija July 18, 2010 at 9:27 AM  

अच्छी रही चर्चा...बहुत सारे लिंक्स मिले.
मेरी पोस्ट को शामिल करने का शुक्रिया...आज देखा,पहले भी कई बार, चर्चा में ,मेरी पोस्ट शामिल की गयी है ...बैक लिंक नहीं आया ,इसलिए पता नहीं चल पाया.
एक बार फिर से शुक्रिया

राजीव तनेजा July 30, 2010 at 12:14 PM  

बढ़िया लिंक्स...मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार

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