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साहित्य के रंग में रंगे हैं ब्लाग-हम खोल रहे हैं इनका राज-ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Thursday, July 8, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

आज हमने भी अपने ब्लाग राजतंत्र में एक छोटी सी कविता लिखी है। अब जब हम ब्लाग चौपाल सजाने बैठे हैं तो देखा कि ब्लाग जगत भी बहुत ज्यादा कवितामय है। ऐसे में हमने कविता वाले ब्लाग के साथ साहित्य से जुड़ी पोस्टों का इस चर्चा में समावेश किया है, आशा है यह चर्चा सबके मन भाएगी। 
रात रूठती रही मिलन की दिवस विरह के मुस्काये, अनगाये रह गये गीत संध्या के केश बिखर आये ! शून्य ह्रदय, मंदिर के दीपक बिना स्नेह के सिसक उठे, चले गए जब देव, लाज तज प्रिय दर्शन को पलक उठे ! छंद प्यार के रहे ...
सभी को मन भाती है खुशबू फूलों की फिजा को महका देती है खुशबू फूलों की किसी से भेदभाव नहीं करती खुशबू फूलों की सभी को समान प्यार देती है खुशबू फूलों की 
(१)* *ब्लॉग लेखन से क्या जुड़े, नित उमड़त रहत विचार* *जब तब फुरसत पाइके, लिख डारत आखर चार* *(२)* *ड्यूटी के लिये निकल पड़े, पहुंचे रेल्वे स्टेशन * *गाड़ी की लेट लतीफ़ी, लावे दिमाग मे टेंशन* *(३)* *प्लेट फ़..

(१)- दरीचे खुले हवा के साथ आयी तेरी खुशुबू | (२)- कह भी तो दो कहना है जो,वर्ना रोना है क्या? (३)- उडी चिड़िया पंखों को फैलाकर दाना लेकर | 
अदम गोंडवी- घर में ठंडे चूल्हे पर अगर खाली पतीली है। बताओ कैसे लिख दूँ धूप फाल्गुन की नशीली है? भटकती है हमारे गाँव में गूँगी भिखारन-सी, सुबह से फरवरी बीमार पत्नी से भी पीली है।। बग़ावत के कमल खिलते हैं.. 
यह गीतालेख प्रवक्ता में भी प्रकाशित है. मुझे लगा, हो सकता है, कुछ पाठक वहां न पहुंचे हों, यही सोच कर अपने ब्लॉग में देने की गुस्ताखी कर रहा हूँ. ”गीतालेख”. यानी एक गीत मगर आलेख के साथ. गाय की व्यथा-कथा...
संस्‍कृति विभाग छत्‍तीसगढ़ की वेब साईट में पिछले कुछ महीनों से कुछ महत्‍वपूर्ण जानकारियॉं पुरातत्‍व एवं संस्‍कृति विभाग के उच्‍च अधिकारी व सिंहावलोकन ब्‍लॉग वाले आदरणीय बड़े भाई राहुल सिंह जी के 
ई-साहित्‍य और हिन्‍दी ब्‍लॉग : सार्थक अभिव्‍यक्ति का एक झरोखा - वशिनी शर्मा
हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत पर एक विहंगम दृष्टि वशिनी शर्मा की। घबराइये मत कि इतना बड़ा लेख है, जब आप इसे पढ़ेंगे तो आप सबके मन में हिन्‍दी ब्‍लॉग तरंगे हिलोरें लेंगी और यही इस लेख की सार्थकता है। आप इसे अवश्‍य पढ...
कल मैट्रो से कहीं जाना था। रास्ते में एक लडकी को देखा। नीचे जींस और ऊपर केवल आंखें ही नजर आ रही थी, सॉरी मेरा मतलब है, उसने दुपट्टे को इस तरह से लपेटा हुआ था कि केवल आंखें ही दिख रही थी। एकदम बुर्कापोश टाई...
मित्रों इन दिनों पोस्टर कविताएं कम ही लिखी जा रही है। पता नहीं ऐसा क्यों है लेकिन लगता है शायद लेखकों और कवियों ने मान लिया है कि अब जनता के बीच जाने की जरूरत नहीं रह गई है. कविता-कहानी को लेकर सारी ब... 
"ले अभाव का घाव ह्रदय का तेज मोम सा गला अश्रु बन ढला सुबह जो हुई सभी ने देख कहा --- शबनम है !" - सरस्वती प्रसाद *** ज़िन्दगी के दर्द ह्रदय से निकलकर बन जाते हैं कभी गीत, कभी कहानी, कोई नज़्म, कोई याद ....
ललित शर्मा बता रहे हैं- सुनिए--“कविता क्या, कविता क्यों ?” विषय पर व्याख्यान
 
राज्य की पहली वेब पत्रिका तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित, साहित्य, संस्कृति, विचार और भाषा की मासिक पोर्टल सृजनगाथा डॉट कॉम के चार वर्ष पूर्ण होने पर चौंथे सृजनगाथा व्याख्यानमाला का आयोजन 6 जुलाई, 2...
पानी का कुछ भी रंग नहीं होता पर जब पानी उतरता है तो बड़ों-बड़ों का रंग उतर जाता है। एक समय था जब पानीदार लोगों की इज्जत हुआ करती थी पर जमाने के फेर ने सबकुछ बदल कर रख दिया और आज पानीदार लोगों की कुछ भी पूछ न...

अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

7 comments:

Udan Tashtari July 8, 2010 at 8:39 PM  

बढ़िया रही चौपाल!

Sushil Gangwar July 8, 2010 at 10:05 PM  

हम सभी पत्रकारों , लेखको , ब्लागरो का अभिन्दन करते है जो हर दिन अपनी कलम से कुछ शव्द उकेरते है . शव्दों को मूल्य से नहीं आका जा सकता है . आप सभी पत्रकारों और लेखको का साक्षात्कार.कॉम के लिए सहयोग मिलना बड़ी बात है . पिछले ५ सालो से साक्षात्कार पत्रकारिता जगत में अपनी पहचान बनाने में कामयाव रहा है . साक्षात्कार की नयी योजना के अंतर्गत www.tahelka.co.in हिंदी -अंग्रेजी ब्लॉग लेखकों का एग्रिगेटर-अंग्रेजी आ चुका है . हम सभी लोगो के आभारी है जो नित्य प्रतिदिन www.tahelka.co.in से जुड़ रहे है . आपका सहयोग जरुरी है

संगीता स्वरुप ( गीत ) July 8, 2010 at 10:15 PM  

बढ़िया ब्लॉग चौपाल...अच्छे लिंक्स मिले ..आभार

girish pankaj July 8, 2010 at 10:20 PM  

राजकुमार, सभी जरुरी-बढ़िया-अच्छे लिंक्स मिले..अभिन्दन है..

शिवम् मिश्रा July 8, 2010 at 11:19 PM  

बढ़िया ब्लॉग चौपाल !

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