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दिल-तोड़ने से पहले थोडा इंतज़ार कीजिये, प्यार की नैया तो पार लग ही जाती है-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Tuesday, July 20, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

 
 
प्यार गर है एक सजा तो 
कविता में है बहुत मजा 
तभी तो आज फिर से 
ब्लाग जगत कविता से है सजा
 
 
यूँ बैठे बैठे न आप, आहें हजार लीजिये इश्क है गर आपको तो इज़हार कीजिये करवटों में गुजरेंगे, जागती रातें कितनी ख्याबों में आकार ही हमे बेक़रार कीजिये दबाने से नहीं हासिल, इश्क को मंजिल किसी रोज़ तो दिल क...
 
तुझे देख कर ही दिल बहक जाता है पूरी बोतल का नशा चढ़ जाता है शराब में भी कहा वो बात है तुम्हारे होठों में दिखती प्यास है फिर क्यों तुम्हारा मन उदास है आज तो हम तुम्हारे ही पास हैं करो लो आज मन की मुरा...
 
फिर एकदम नई ग़ज़ल, अपने चहेते सुधी ब्लागर और अच्छे पाठकों के नाम...* *बातें बड़ी भली करता है लेकिन वह इनसान भी हो* *क्या मालूम देवता बाहर भीतर इक शैतान भी हो* * * *इस दुनिया में भले जनों की अब गुंजाइश मु...
 
सिक्को की खनखनाहट सी हँसी मेरी ………….. कंधो पर झूलती दो चोटियों सी मस्ती मेरी ……. तार पर गीली चुनर सुखा दी हो किसी ने ,, उस में से गुजर कर आने वाली ठंडी हवा सी खुशबू मेरी …… ओस की बूंदों ने जमावड़ा लगाया हो ...
 
 
बेमौसम आँधी चलें, दुनिया है बेहाल ।* *गीतों के दिन लद गये,गायब सुर और ताल ।।* *नानक, सूर, कबीर के , छन्द हो गये दूर ।* *कर्णभेद संगीत का , युग है अब भरपूर । । * *रामराज का स्वप्न अब, लगता है इतिहास ।* ..

राम त्यागी कहते हैं- होली और फटा हुआ पैंट - कुछ यादें …
बात बहुत पुरानी है , करीब २० साल पुरानी तो होगी, मेरे बचपन का एक बहुत ही मजाकिया लम्हा !! हमारे गाँव के थोड़े से ही दूरी पर मेरे मामा का गाँव है, जहाँ पर होली अपने पूरे रंग में मनाई जाती है, एक अलग ...
 
बहुत साल तक मंजिल दर मंजिल मिले तो क्या मिले ??? बस थोडा बिछड़ भी लेते तो कोई और बात होती ..... तुमसे बात करना तो एक बहाना था उसमे एक आह सुनाई देती तो कोई और बात होती ..... हज़ार इम्तिहान ले रहा है ये जहाँ हम...
 
प्रतिभा कुशवाहा बतला रही हैं कि ब्‍लॉग जगत से उनका परिचय कैसे हुआ ? उनकी पढि़ए, फिर अपनी कहिए 
 
माय डियर राजकुमार! साहित्यकार शरद कोकाश जी, राजकुमार सोनी जी को जब ऐसा संबोधित करते हैं तब उन दोनों के बीच की आत्मीयता पढ़ने व सुनने वालों को भी सुकून देती है कि आज इस द्वंद भरे जीवन में व्यक्तियों के बीच ...
 
पिछले कुछ दिनों के दौरान न्यूज़ चैनलों पर आई खबरों से शुरुआत करते हैं: • क्या आप डबलरोटी की जगह पाँव रोटी खा रहे हैं? • ज़हरीले ढूध से बनी चाय पी रहे हैं आप? • आप की लौकी में ज़हर है? • खोवा और प...
 
आज* बहुत दिनों के बाद वक़्त मिला है कुछ लिखने का... वक़्त क्या .... समझ लीजिये मूड... बना है. इस दौरान सिर्फ पढ़ा है... और खूब पढ़ा है... लिखा भी है... वक़्त की कमी तो है ही... पर वो कहते हैं ना कि वक़्त...
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 

4 comments:

pranav July 20, 2010 at 8:13 PM  

उम्दा चर्चा की आपने

संगीता स्वरुप ( गीत ) July 20, 2010 at 9:31 PM  

बहुत बढ़िया चौपाल...

वन्दना July 21, 2010 at 3:59 AM  

बहुत ही सुन्दर चर्चा।

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