अब तेरा क्या होगा रे पीलिया -दे घुमा के-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी
>> Friday, January 7, 2011
सभी को नमस्कार करता है आपका राज
हूं... कितने ब्लागर थे? सरदार एक ब्लागर एक ब्लागर ... और तुम साले इतनी बार फर्जी आईडी बनाने के बाद भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सके। इसकी सजा मिलेगी.. बराबर मिलेगी बोलो कितनी गोली है इसके अंदर सरदार छह गोली......
प्रथम प्यार का, प्रथम पत्र है * *लिखता, निज मृगनयनी को * *उमड़ रहे, जो भाव ह्रदय में * *अर्पित , प्रणय संगिनी को ,* *इस आशा के साथ, कि समझें भाषा प्रेमालाप की ! * ***प्रेयसि पहली बारलिख रहा,चिट्ठी तुमक...
आईना देखते डरने लगा हूँ, कहीं नीचे मासूमियत झाँकती है। उतारने को बड़प्पन का मुलम्मा उसे घिसता हूँ साफ तौलिये से। मुँह नहीं धोता मेरे भीतर पानी मर गया है।
नया शहर अनजान डगर , उस पर यह अंधरी रात , कहां जाएं कैसे ढूड़ें , एक छोटी सी छत , सर छुपाने के लिए , फुटपाथ पर कुछ लोग , और जलता अलाव , थे व्यस्त किसी बहस में , वहां पहुंच मैं ठिठक गया , खड़े क्यूँ हो रास्ता ना...
नहीं नहीं, मेरा किसी से झगड़ा नहीं हुआ है...जो मुझे कहना पड़ रहा है, *दे घुमा के....*अरे भाई ये तो इंडिया का थीम सॉन्ग हैं आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2011 के लिए...जिसका खुमार छाने में अब सिर्फ 50 दिन बचे है...
युवा कहानीकार (और मेरे साथी) गौरव सोलंकी को राजस्थान पत्रिका ने इस कहानी के लिए **विशेष सम्मान** दिया है....क्या इत्तेफाक है कि कुछ दिन पहले ही उनकी कहानियों को मेरे ब्लॉग पर डालने के लिए हम दोनों ने समीक...
छत्तीसगढ सरकार ने राज्य में चिकित्सकों की भारी कमी के मद्देनजर उनके भर्ती नियमों को शिथिल कर दिया है। मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की कल रात यहां हुई बैठक में इस आशय के प्रस्ता...
पीलिया
जनवरी के वे खास दिन चल रहे थे जब सुबह, दुपहर, शाम,रात सब ठंढ के मोमजामें में लिपटे ठिठुर रहे होते हैं और जगह जगह अलाव पीलिया जैसी बीमार सूरत लिये बुझे बुझे से नज़र आते हैं जिन्हें तापते ऐसा लगता है जैसे स... अच्छा तो हम </a> चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

एक अरब से ऊपर लोग...... अरुणोदय से ले कर कन्याकुंवारी......... तिरंगे का वजूद बढता रहे... संसद में ‘निरीह’ सांसदों को बचाते.... बन्दूक ताने वो ..... बचाते रहे इनको ...... गोली दागते रहे उनपर - मरते दम तक ज...
रक्त, खून, लहू, रुधिर कितने नाम हैं इस जीवनदायी तरल के, जो जन्म से लेकर मृत्यु प्रयंत हमारे शरीर में अनवरत दौड़ता रहकर हमें जिन्दगी प्रदान करता रहता है। फिर भी हम इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते {डाक्टरों क...
हमें जीने मे क्यूँ होती है आसानी, बताते हैं... हम अपने घर मे, अब कुछ और, वीरानी सजाते हैं... खुदा, जिस दिन से तेरे नाम पर, जलते शहर देखे... जलाते अब नही बाती, तुम्हे पानी चढ़ाते हैं... हमें डर है की वो मिट...
The best time to awaken both body and spirit is in the early morning. We are fresh, in solitude, and the vibrations of the world are at their calmest. It is not surprising that you will find all exper...
आह! दर्द आज बहुत रुला रहा है ..........क्यूँ? क्या कारण है नहीं जान पा रही मगर कुछ तो है जो कहीं तो घटित हो रहा है मगर ह्रदय इतना व्याकुल क्यूँ हो रहा है ? कौन सा इसका सामान छीन रहा है जो इसका आसमां इसे
ओ री !! बता ना तू नया साल कैसे मनाएगी ?* *आदमी के संग पिकनिक मनाएगी.....* *कि बच्चों को कुछ अच्छी बातें सिखाएगी...!!* *ऐ री !! बता ना कैसे तू नया साल मनाएगी ?* *पता भी है तुझे कि ये धरती ऐसी क्यों हो ग...
कल फिर मिलेंगे
3 comments:
bhut bhtrin chrcha ka guldstaa he lekin aaj men pichhe rh gya jnab kyonki men bimari ke kaarn der se kaam pr aaya hun . akhtar khan akela kota rajsthan
बहुत अच्छा लगा चौपाल में आ कर |बधाई ,और आभार मेरी रचना के लिए |
आशा
एक से एक शानदार लिंक्स लगाये हैं…………आभार्।
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