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गरीबी गरीब की किस्मत है या समाज की ज़रुरत?-बढ़ी मानव तस्करी ; छत्तीसगढ़ एक बड़ा बाजार-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Sunday, December 5, 2010

 
 
हो गया दिल का गुलशन आबाद।। छा गई खूशियां दिल के आंगन में महकने लगी कलियां मन मधुबन में।। चाहत के अरमान मचलने लगे दिल में दिल करने लगा मिलने की फरियाद।। आज आ गई फिर तुम याद हो गया दिल का गुलशन आबाद।। दूरिय...
 
इस बार पूरे उत्तर भारत में अधिक बरसात होने और अभी से यूरोप में बहुत ठण्ड पड़ने से भारत भर के पक्षी विहारों में प्रवासी पक्षियों के कलरव गूंजने लगे हैं और पक्षी प्रेमियों के लिए इससे बड़ी और कोई खबर हो भी नह...
 
पेश ए खिदमत है "अमन के पैग़ाम पे सितारों की तरह चमकें की दसवीं पेशकश अमित शर्मा जी, जो इस ब्लॉगजगत मैं तार्रुफ़ के मुहताज नहीं.. [image: blog-2]*ये दो भाव पुष्प अर्पण कर रहा हूँ , अगर अगर आप सबक...
 
मुझे नहीं, वो मेरी लेखनी पसंद करती है. मुझे तो वो कभी मिली ही नहीं और ये भी नहीं जानता कि कभी मिलेगी भी या नहीं? बस जितना जानती है मुझे, वो मेरे लेखन से ही. कभी ईमेल से थोड़ी बात चीत या कभी चैट पर हाय हैल...
 
*पत्रिका* के रायपुर संस्करण ने अपने सोमवार 06 दिसम्बर 2010 के अंक में *संजीत कुमार *की चौंकाने वाली खबर प्रकाशित की है , यह खबर शर्मनाक और चिंताजनक भी है । पत्रिका बताता है कि महिलाओं की तस्करी करने वालों...
 
समाज में कई बुराइयां हैं, जिनमें से गरीबी भी एक है, मगर इसे एक आम इंसान ने शायद स्वीकार लिया है. तभी तो जब कोई बलात्कार होता है, या क़त्ल होता है तो काफी शोर मचता है, गुनाहगार को सज़ा मिले ना मिले ये और ब...
 
-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’*** *कहाँ चले गए हैं गिद्ध ?*** *बड़े-बूढ़े चिन्तित हैं*** *हर गाँव के -*** *त्रेता में भी थे गिद्ध**,* *द्वापर में भी थे *** *और कलियुग में भी थे*** *कुछ बरस पहले भी थे ।*** ...
 
दे जाता है इन शामों को सागर कौन... चुपके से आया आंखों से बाहर कौन? भूख न होती, प्यास न लगती इंसा को रोज़ दलाली करने जाता दफ्तर कौन? उम्र निकल गई कुछ कहने की कसक लिए, कर देती है जाने मुझ पर जंतर कौन? स...
 
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आया है। विवि के अनुसंधान विभाग से लेकर निर्माण कराने वाले एसपीपी कार्यालय (अधीक्षक भौतिक संयंत्र) में साढ़े तीन करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमि...
 
कोटा से देवली तक फॉर लेन सडक यहाँ करीब दस हजार पेड़ों को काट कर बनाई जायेगी , इस फॉर लेन निर्माण में सडकों के चारों तरफ करीब दस हजार ऐसे पेढ़ हें जो वर्षों से स्थानीयलोगों के लियें वरदान बने हें लेकिन यह पे...
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 

2 comments:

वन्दना December 5, 2010 at 11:39 PM  

बेहद सुन्दर और सार्थक लिंक्स के साथ सजाई है चौपाल्।

Asha December 5, 2010 at 11:53 PM  

अच्छी सजी ब्लॉग चौपाल |साधुवाद
आशा|

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