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समीरलाल के साथ ट्रेन में लंबा सफर-ऐसा लगा हम चंद्रलोक पर आ पहुंचे हों- ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, December 11, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

 
 
हम करीब 15 दिनों से बाहर थे। दिल्ली पहुंचे तो एक बार सोचा कि चलो यार यहां के ब्लागरों को फोन किया जाए और कम से कम अजय कुमार झा और राजीव तनेजा से मिल लिया जाए। फिर इरादा बदल दिया और सीधे पकड़ ली रायपुर जाने...
 
लगता है कि अमेरिका में कुछ लोगों के मन में अभी भी जाति और नस्ल का बहुत बड़ा प्रभाव है तभी वे अपने को बहुत सभ्य बताने के बावजूद भी ऐसी हरकतें करने से नहीं चूकते हैं. ताज़ा घटना में जिस तरह से भारत ...
 
आज पानीपत में कवि -सम्मेलन हैं. आज के संयोजकीय तनाव से उबर कर कल से नार्मल हो जाऊंगा. इसके बाद भी कुछ दिन छुट्टी रहेगी १६ से १९ माँ वैष्णो देवी के दर्शनार्थ यात्रा पर रहूँगा पानीपत सांस्कृतिक मंच के टोले...
 
हमारे साहित्यकार यह मानकर चल रहे हैं अमरीकी नव्य उदार आर्थिक नीतियां बाजार,अर्थव्यवस्था, राजनीति आदि को प्रभावित कर रही हैं लेकिन हिन्दीसाहित्य और साहित्यकार उनसे अछूता है। असल में यह उनका भ्रम है। इन दिन...
 
प्रिय ब्लॉगर मित्रो , प्रणाम !! आज एक खुशखबरी मिली है ... खुशदीप भाई के माध्यम से ... लीजिये आप भी जान लीजिये ... *भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 29 नवंबर 2010 को अपने पत्र के ज़रिए ऐसी सूचना...
 
कह के जाने में हमेशा लौट आने का भाव छुपा होता है. अनिश्चितता होती है. उम्मीद होती है कि कोई रोक लेगा. कोई, महज़ दुनियादारी निभाने के लिए ही समझाएगा कि मत जाओ...जैसे कि मुझे बड़ा मालूम है कि जाना कहाँ है. आ...
 
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने 12 दिसम्बर को अपनी सरकार की दूसरी पारी के दो वर्ष पूर्ण होने के साथ ही अपनी सत्ता के सात वर्ष पूर्ण कर लिए .उन्होंने १२ दिसंबर २००८ को पहली बार मुख्यमंत्री पद की...
 
दुलहन सी दिखी दिल्ली -एक और दिल्ली संस्मरण!अब आगे .... कामनवेल्थ के पहले हम जब भी दिल्ली एअरपोर्ट पर उतरे हैं ,वही परम्परागत तरीके से सीढ़ी का आकर यान से जुड़ने और फिर सीढ़ी से उतर कर फेरी बस पर बैठ एअरपोर्ट...
 
जी हां , अब तो मुझे लगने लगा है कि पिछले कुछ वर्षों से वर्षांत पर यकायक ब्लॉगर मिलनों की जो सिलसिला सा बनता जा रहा है वो अब धीरे धीरे एक परंपरा का रूप लेता जा रहा है । मित्र ब्लॉगर्स के आने के बहाने , तो...
 
वो कहता था ...........
वो कहता था वो कभी झूठ नही बोलता किसी को धोखा नही देता वादे निभाना है उसकी आदत इश्क को मानता है इबादत वो कहता था मेरा इन्तजार करना मुझपे ऐतबार करना मै बसता हूँ तेरे दिल में मुझे कभी बेघर ना करन...
 
*पेश ए खिदमत है "अमन के पैग़ाम पे सितारों की तरह चमकें की तेरहवीं पेशकश **अजय कुमार झा* मुझे शब्दों , गज़लों , शेरों की कोई पहचान नहीं है ..मैं सच कहूं तो जानता भी नहीं लिखना ...मगर जब आपने कहा...
 
हवाई जहाज को दुनिया और ख़ासकर शहर बड़े खूबसूरत नजर आते हैं सपाट चमचमाती सड़कों से उड़ना रुई के गोलों जैसे सफेद बादलों के पार जाना हर समय चमचमाते हुए हवाई अड्डों पर उतरना या खड़े रहना दरअसल असली दुनिया क्या होती..

एक हैं मि. खेलू (राजीव शुक्ला)जब क्रिकेट से मन भरता है तो इन्हें देश याद आता है अर्धनारीश्वर (पत्रकार/ नेता) की भूमिका निभाने वाले ये जनाब कहते हैं जब छःछः जाँच चल रहा है तो जेपीसी की मांग विपक्ष क्यों कर ...
 
एक बार मेरे अनुरोध पर तुम चलो मयखाने में फिर देखना ....... क्या मजा आता है, पीने और पिलाने में । वहां ना कोई साजिश ना कोई भेदभाव ना कोई नफरत की दीवार जितनी पीयेंगे उतना खुमार ,उतना प्यार । .. इ...
 
हम एक धार्मिक देश के वाशिंदे हैं। हम बहुत भीरू हैं। इसी भीरुता के कारण हम अपने बचाव के लिए तरह-तरह के टोने-टोटके करते रहते हैं। हमें जिससे डर लगता है हम उसकी पूजा करना शुरु कर देते हैं। हमने अपनी रक्षा के ...
 
हाईकोर्ट के नोटिस के बाद राज्य शासन ने अपने जवाब में बताया है कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की परीक्षा में विकलांगों को उम्र सीमा में 10 साल की छूट दी जा रही है। शासन के इस जवाब के बाद कोर्ट ने याच...
 
बड़े-बूढे़ कहते हैं कि कलियुग चल रहा है। लेकिन मुझे लगने लगा है कि हम सतयुग की दहलीज पर खड़े हैं। आपको विश्वास नहीं होता न? कैसे होगा? जब चारों तरफ घनी अँधेरी रात हो, तब कोई खिली-खिली सुबह की बात कैसे कर स...
 
पिछले भाग का शेष................................................................ तत्वों के असंतुलन से बहुत सारी परेशानियाँ आती है जैसे बाढ़, भूकंप आदि | इस तरह विपत्तियों से हमारे शरीर की ऊर्जा भी प्रभाव...
 
तुम्हारी सादगी ने , सदाचरण ने , मुझे जीना सिखाया है मधुर स्वरों ने , गाना सिखाया है , गुनगुनाना सिखाया है , पहले कभी गीतों की , नई धुन न बन पाती थी , वही स्वर वही राग , दोहराता था बार बार , आरोह अवरोह स्वरों...
 
एपिसोड नंबर 6 बच्चे का 1 महीने तक का होना सूत्रधार-1 रेडियो धारावाहिक रचना के 5 एपिसोड़ आप सुन चुके हैं जिसमें रचना कि कहानी उसकी किशोरावस्था से शुरू हुई थी, और पिछले एपिसोड में वह एक स्वस्थ शिशु कि मा...
 
धुल भरी आंधी आयी है॥ कुछ दिन के लिए मै सो गया हूँ॥ टूट पड़े गम बदली॥ सादे कपडे में भीग चुका हूँ॥ अच्छे दिन फिर आ जायेगे॥ मै भी लिखूगा हर पल को॥ लेकिन आया जो पल है ये॥ इस पल से मै ऊब चुका हूँ... 
 
एक हंस मानसरोवर के दर्शन करने के लिए तैयारी कर रहा था तो उसके पडोसी कौए ने हंस से कहा - भाई तुम मानसरोवर के दर्शन करने जा रहे हो मैं भी तुम्हारे साथ मानसरोवर के दर्शन करना चाहता हूँ . हंस ने कौए को काफी सम...
 
ऊष्मा कभी देह की कभी साँसों की कभी बातों की कभी नातों की कभी भावो की तो कभी शुष्क मौसमों की बंजर भूमि में उगते कुछ सवालों की....... झुलसा जाती है हर नेह को हर गेह को हर देह को और बचे रह जाते हैं राख़ क...
 
आज कल महिलाओ पर तेजाब फेंकने की घटनाओं में काफी तेजी आई है | इसको देखते हुए केंद्र सरकार ने इसके खिलाफ सख्त कदम उठाने का विचार किया और गृह मंत्रालय ने इसके लिए भारतीय दंड सहिंता में संशोधन लाने का प्रस्ताव...
 
वह जो ३० वर्षीया लड़की हाथ में कॉफ़ी का मग लिए किसी बड़े कारपोरेट हाउस के दफ्तर की बालकनी की रेलिंग से टिकी है बेफिक्री से वास्तव में नहीं है उतनी बेफिक्र जितनी रही है दिख . भय की कई कई परतें मस्ति...
 
नाराज़गी जितनी दिल में रखी जाए, उतनी ही भारी हो जाती है
हम सभी कभी न कभी किसी न किसी पे नाराज़ हुए होंगे. पर कभी कभी ये गुस्सा हमारी ज़िन्दगी में, हमारे दिलों में, हमारे रिश्तों में या हमारे नज़रिए में रह जाता है. कभी रिश्ते खराब करता है कभी सेहत. यहाँ यही...\
देश में कोन जज कितना भर्स्ट हे और कोन कितना ईमानदार हे , यह पब्लिक हे सब जानती हे अंदर क्या हे बाहर क्या हे सब जानती हे जी हना यह किसी फ़िल्मी गाने की लाइन या डायलोग नहीं हे बलके देश की सुप्रीम कोर्ट की टिप...
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

10 comments:

Arvind Mishra December 11, 2010 at 7:59 PM  

संकलन और मुझे भी याद कर लेने के लिए आभार !

Sadhana Vaid December 11, 2010 at 8:49 PM  

आपका चयन सदैव बहुत अच्छा होता है ! इतनी सुन्दर चौपाल के लिये धन्यवाद !

Asha December 11, 2010 at 9:46 PM  

ब्लॉग चौपाल में आज मेरी रचना शामिल करने के लिए आभारी हूँ |हर बार कई तरह यह चौपाल भी अच्छा सजा है ,बधाई
आशा

महेन्द्र मिश्र December 11, 2010 at 10:12 PM  

बहुत बढ़िया रोचक वार्ता सजाई हैं ...काफी लिंक मिले ....

अविनाश वाचस्पति December 11, 2010 at 10:42 PM  

समीर लाल जी ट्रेन में
मजाक खूब कर लेते हैं
वे तो सदा तश्‍तरी
कटोरी चम्‍मच में
चलते हैं
अविनाश मूर्ख है

वन्दना December 11, 2010 at 11:29 PM  

हमेशा की तरह शानदार लिंक्स के साथ सजी चौपाल्………बधाई।

Kajal Kumar December 12, 2010 at 1:55 AM  

हम्म कुछ बढ़िया पोस्टों की जानकारी के लिए आभार

karishna December 12, 2010 at 5:47 AM  

टोटली बकवास चर्चा

अविनाश वाचस्पति December 12, 2010 at 4:46 PM  

ट्रेन की पोस्‍ट देखकर
हमें भी आया ख्‍याल है
जा रहा है पुराना साल
और आ रहा नया साल है
इनके साथ ही कुछ ताल मिलाएं
दिसम्‍बर के आखिरी महीने में जहां गर्मी रहती है वहां सपरिवार घूमने आना चाहता हूं

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