...वश में नहीं-क्या यही मोहब्बत होती है ? -ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी
>> Sunday, December 12, 2010
सभी को नमस्कार करता है आपका राज
भोपाल में चुनाव सुधारों पर बोलते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज पाटिल ने राज्य सभा की आवश्यकता पर जो प्रश्न चिन्ह लगाया उस पर गहन विचार किये जाने की आवश्यकता है. यह सही है की भारत जैसे विशाल देश को...
वो आते हैं कुछ देर बतियाते हैं अपनी सुनाते हैं और चले जाते हैं क्या यही मोहब्बत होती है ? अपनी बेचैनियाँ बयां कर जाते हैं दर्द की सारी तहरीर सुना जाते हैं मगर हाल-ए-दिल ना जान पाते हैं क्या यही ...
करीब ११ वीं-१२ वीं शताब्दी में हालामण रियासत की धूमली नामक नगरी का राजा भाण जेठवा था | उसके राज्य में एक अमरा नाम का गरीब चारण निवास करता था | अमरा के एक २० वर्षीय उजळी नाम की अविवाहित कन्या थी | उस ज़माने..
दिसम्बर 2010 के अंतिम सप्ताह में जो वर्ष का भी अंतिम ही है सप्ताह पर गर्म भी हो न कि सर्दी ही उसका धर्म हो सपरिवार भ्रमण-प्रदर्शन का कार्यक्रम बना रहा हूं स्थल सुझाएं जहां पर दिल्ली की भयानक ठं...
*कोई कोई कविता बस आंसूओं के साथ झर-झर बह जाती है.... और शायद दर्द का कुछ हिस्सा भी अपने साथ ले जाती है... उंगली पकड़ के बचपन की मस्त दुनिया में ले जाती है... जैसे मेरी जड़ों में से कुछ मट्टी मेरे हाथ में द...
मुझे खुशियों के संदेशों के भीतर दबी दर्द की इबारतों को पढ़ना और उस दर्द में छिपी अनकही व्यथा कथा को गुनना आता है ! मुझे आँसुओं के गहरे समंदर में उतर सब्र की सीपियों से मिथ्या मुस्कुराहट के नकली मुक्त...
छत्तीसगढ़ के वन मंत्री विक्रम उसेंदी ने बुधवार को कहा कि राज्य में तीन प्रोजेक्ट टाइगर अभयारण्यों में 50 फीसदी से ज्यादा पद रिक्त पड़े है। विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के सौरभ सिंह के सवाल पर लिखित जवाब म...
जिस पोस्ट को मैं स्नेह और प्यार की पोस्ट मान रहा था , उसका उद्देश्य काफी हद तक कुछ गलतफहमियों के कारण खराब हो गया ! खैर सब कुछ अपने हाथ में नहीं होता ! * *महफूज़ ने मैसेज के जरिये कहा है कि मुझे दुःख है ...
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाने तथा अपने पिता को दिया वादा पूरा करने के लिए शराब निर्माता एक कंपनी का ब्रांड एंबेसडर बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ऐसा बताया जा रहा है कि...
सिल गए हैं बोलना अब भी नहीं सुनना कैसे हो? बोलना तब भी नहीं था जब अधखुले होते थे मैं सुन लेता था बहुत कुछ बस आँखों से। तुम कहती थी- एक कान से सुन दूसरे से निकाल देते हो - तुमसे कु...
कोई खिलौना ही दिल तोड़ दे तो क्या कीजिए.... कोई अपना ही बेगाना हो जाए तो क्या कीजिए.... दिया साथ तो हमने अंगारों पर चल कर.. अगर रास्ता ही लंबा हो जाए तो क्या कीजिए.... मेरे दोस्त, ये मय साकी ओ मयखाना.... स...
हम सभी कहीं न कहीं पूर्वाग्रहों से ग्रस्त होते हैं, लेकिन शायद ही कोई स्वयं को पूर्वाग्रहों से ग्रस्त मानना चाहता हो । किसी को अपनी जाति का बायस है, किसी को रंग-रूप का, किसी को शिक्षा का तो किसी को अपनी उम...
युवराज पाराशर ज्यादातर लिखने-पढनेवाले लोंग छोटे शहरो से ही आते हैं...और बड़े गर्व से कहते हैं...'मैं तो छोटे शहर का हूँ' या किसी की तारीफ़ में भी कहते हैं..'उसके अंदर एक छोटे शहर का आदमी है'. मैं भी यह जुमल...
झील ने मनाही दी है अपने पास बैठने की " से लेकर " झील ने मनाही दी है अपने बारे में सोचने की " तक बहुत कुछ घटित हो चुका है । प्रेम में सोचने पर भी प्रतिबन्ध..? ऐसा तो कभी देखा न था ..और उस पर संस्कारों की...
मेरे जीवन के दो सबसे अनमोल घंटे...खुशदीप
*हमने देखी है, उन आंखों की महकती खुशबू,* * * *हाथ से छूके इसे, रिश्तों का इल्जाम ना दो,* * * *सिर्फ एहसास है ये, रूह से इसे महसूस करो...* आज गाने की ये पंक्तियां *सतीश सक्सेना* भाई की पोस्ट पर एक कमेंट के...

नीरा यादव और एक आई ऐ एस को जेल के निहितार्थ..... १। एक अच्छा चिन्ह है-- कदाचरण के विरोध में , हम कह सकते हैं कि क़ानून के हाथ बहुत लम्बे होते हैं , हमारे देश में लोकतंत्र पुष्ट होरहा है, अभी न्याय जीवित है...
बातों के लच्छे , गालों के डिम्पल , ओर शरारत चेहरे पार , किसे खोजती आंखें तेरी , लिए मुस्कान अधरों पर , कहीं दूर बरगद के नीचे, मृगनयनी बैठी आंखें मीचे , करती इन्तजार हर पल तेरा , चोंक जाती हर आहट पर , आंखें फ...
कल फिर मिलेंगे
4 comments:
आज तो बहुत सारे लिंक्स मिले …………बहुत बढिया चौपाल्।
अच्छी चर्चा और लिंक्स के लिए बधाई |मेरी कविता के लिए बहुत आभार
आशा
बहुत अच्छी चौपाल राजकुमार जी ! सभी लिंक्स के लिये धन्यवाद एवं आभार ! मेरी रचना के चयन के लिये एक बार फिर से शुक्रिया !
चित्रों के कारण इस मंच की चर्चा अलग-सी प्रतीत होती है और अच्छा लगता है। भाषा,शिक्षा और रोज़गार ब्लॉग की पोस्ट के लिए बहुत-बहुत आभार।
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