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वे चुप क्यों हैं जिनको आती है भाषा ?, भावनाओं को समझो! - ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, September 11, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
नेट की आंख मिचौली चल रही है, इससे पहले ही इसकी आंखें बंद हो जाए क्यों न हम चौपाल सजा जाए.....
राजू रंजन प्रसाद कहते हैं- वे चुप क्यों हैं जिनको आती है भाषा ?
मृणाल वल्लरी* का लेख लाल क्रांति के सपने की कालिमा मैंने दो बार पढ़ा-पहले*मोहल्ला * पर और पुनः इसे *जनसत्ता* में। कहना होगा कि इस लेख में मुझे ऐसा कुछ लगा जिससे कह सकता हूं कि दो बार पढ़ने में लगा मेरा 
स्पॉट फिक्सिंग कांड के बाद पूरी दुनिया में पाक खिलाड़ियों पर थू-थू हो रही है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि पाकिस्तान के बाद इंग्लैंड में भी बाढ़ की नौबत आ गई है! खुद पाकिस्तान में जो इलाके बाढ़ से बच गए थे व...
छत्तीसगढ़ की राजधानी में इन दिनों राजस्थान पत्रिका के आगमन को लेकर एक तरह के अखबार वार चल रहा है। इस अखबार वार में वे सारे अखबार कूद पड़े हैं जो अपने को नंबर वन समझते हैं। वास्तव में यह एक दुखद बात है कि आ...
धीरे-धीरे हमारे चेहरे भी एकाकार होने लगे थे.. जैसे मेरा अस्तित्व तुममे या तुम्हारा अस्तित्व मुझमे डाल्यूट होता जा रहा हो किसी केमिकल की तरह.. धीरे-धीरे हमारे द्वारा प्रयोग में लाये जाने वाले शब्द भी सिमट क...
बच्चों के नाम ख़त.. * प्यारे बच्चों , जयहिंद यह पत्र मई ऐसे समय में लिख रहा हूँ जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी ) से चिंतित है . मनुष्य स्वभाव-गत कारणों से जल...
हे राम, ये वे दो शब्द हैं जिनका उच्चारण महात्मा गाँधी ने अपने प्राण त्यागते समय किया था। हालांकि कुछ उपद्रवी तत्वों ने बाद में अपना शोध एवं खोज ज्ञान दिखाते हुए बताया कि महात्मा गाँधी ने हे राम नहीं कहा 
होठों पर जिह्वा पर छाले, टेर टेर कर हम तो हारे, सब लौटे पर वो ना लौटे, ऐसे छूटे छूटने वाले। भीड़ भरी लंबी सड़कों पर, दूर तलक नज़रें हैं जातीं, सब मिलते बस तुम ना मिलते, हूक भरी रह जाती छाती लाखों लाखों मान...
अंजनी बाबू का गुस्सा और विरोध नाजायज है,वे माओवाद के समर्थक हैं यह तो तय है। हम मान भी लें कि माओवादियों पर शीलहरण का आरोप पुलिसिया बयान है और कई पत्रकार पुलिस के हवाले से ऐसा लिख रहे हैं। स...
अन्ना की- कवि की नायिका तू अति सुन्दर
अधर सुन्दर** **वदन सुन्दर** **नयन सुन्दर** **हँसी सुन्दर** **ह्रदय सुन्दर** **गमन सुन्दर** **कवि की नायिका तू** **अति सुन्दर** **————————** **वचन सुन्दर** **चरिता सुन्दर** **वसन सुन्दर** **करवट सुन्दर** *...
आज *सतीश पंचम* ने टिप्पणियों का आप्शन बंद कर दिया .बीते दिनों एक धुंआधार ब्लॉगर मोहतरमा ने टिप्पणी के दरवाजे धडाम से बंद कर लिए -मनुहार करने वालों की कतार में मैं भी था ....बहरहाल वे मान गयीं ..जैसे मान...
गणेश चतुर्थी .....पुरुकिया , टिकिया , ...और मां की यादें ....
मेल में अचानक ..गणेश चतुर्थी का एक बधाई संदेश पाकर चौंका ..क्योंकि ..हर तरफ़ ईद की ही चर्चा था । वैसे भी सरकारी महकमे में अक्सर उन त्यौहारों पर ज्यादा कनसेन्ट्रेट करने की परंपरा रही है जिसका परोक्ष या...
नमस्‍कार महोदय पिछले कई महीनों से ब्‍लाग जगत पर संस्‍कृत के उत्‍थान के लिये पूरी तरह से समर्पित होने पर भी संस्‍कृत का कोई विशेष प्रभाव नहीं दिखा । अत: संस्‍कृत के शीघ्र और सम्‍यक प्रचार और प्रसार के ल...
आजादी के पहले देश के वाशिंदों के लक्ष्य, भावनाएं, इच्छाएं करीब-करीब एक जैसे ही थे। एक ही उद्देश्य था अंग्रेजों को निकाल बाहर करना। पर विभाजन के बाद दोनों पड़ोसी फिर कभी एकमत ना हो पाए। कहते हैं कि खेल दिलों...
शैफाली ने पूछा , " अच्छा बताओ ये सब कैसे हुआ. १५ दिन में ही इतना सब कैसे बदल गया. कौन सा ऐसा चमत्कार हुआ कि तुम्हारे लेखन में इतनी उत्कृष्टता आ गयी "? तब मैंने कहा --------------- अब आगे 
मुझे जब से आप लोगों की संगत मिली है और जैसे-जैसे दुनियादारी की समझ बढ़ी है तभी से अपने दिमाग के न्‍यूरोन्‍स से बहुत सचेत रहती हूँ। कमबख्‍त कब बगावत कर दें? अच्‍छी खासी किसी की पोस्‍ट पढ़ रही होती हूँ कि य...
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 

9 comments:

ajit gupta September 11, 2010 at 7:25 PM  

ब्‍लाब चौपाल सजाने के लिए बधाई। आभार।

Rahul Singh September 11, 2010 at 7:47 PM  

मैं यहां सिंहावलोकन के गणेश की तलाश में आया था, राजू रंजन और मृणाल वल्‍लरी मिले, आना सार्थक हुआ.

अशोक बजाज September 11, 2010 at 8:20 PM  

आज की बेहतरीन ब्लागचौपाल के लिए बधाई .

वन्दना September 12, 2010 at 2:34 AM  

hamesha ki tarah sundar chaupal.

PD September 12, 2010 at 5:05 AM  

धन्यवाद मुझे यहाँ शामिल करने के लिए..

Udan Tashtari September 12, 2010 at 8:18 AM  

बढ़िया सजी चौपाल!

ali September 12, 2010 at 8:45 AM  

बढ़िया लिंक्स !

ana October 16, 2010 at 1:17 AM  

chaupalme mujhe sthan dene ke liye dhanyavad.....badhiya chaupal

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