गोलमाल है भाई सब गोलमाल है, भेडियों से सावधान..- ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी .,
>> Wednesday, September 22, 2010
सभी को नमस्कार करता है आपका राज
आज कुछ कहने और लिखने का मन नहीं है, सीधे चलते हैं चौपाल की तरफ....
सफ़ेद खरगोशो, भेडियों से सावधान...* *(ज़रूरी नहीं, कि ये साफ़ किया जाये कि भेडिये कौन है. * *मीडिया, धर्म या मज़हब और समाज के कुछ भेडिये...? बड़ा व्यापक है यह शब्द...खतरनाक है यह शब्द भेड़िया...* *देखा जाय त...
देश की प्रतिष्ठा को बचने वाले ठेकेदारों की नजरों में जरा सुनिए उनकी ही जुबानी राष्ट्रमंडल की कहानी- घटनाएं एवं विवाद - माननीय देश के ठेकेदारों की जुबान दिल्ली का...
सोनी टीवी में इंटरटेनमेंट के लिए कुछ भी करेगा नामक कार्यक्रम में हमारे राज्य छत्तीसगढ़ के जंपरों राजदीप सिंह हरगोत्रा, पूजा हरगोत्रा और प्रवीण शर्मा ने ऐसा जलवा दिखाया कि उनके इस खेल के सभी दीवाने हो गए।
निवेदन : - अफ़वाहों और बहेलियों (आज के नेताओं ) से बचें , अपनों को बचाएं , अपने देश को बचाएं । जय हिन्द *
सम्पादक तो सम्पादक ,रिपोर्टर को भी नहीं पता कि क्या पिछले दिन क्या खबर लगायी गयी थी और उसका क्या फोलो-अप जाना है. खबर बाप की और फोलो-अप बेटे का. जी हां ,प्रतिष्ठित 'राष्ट्रीय" दैनिक टाइम्स ओफ इंडिया का है य...
जाने क्यों लगता मित्रों, मैं कम्प्यूटर रोग से ग्रस्त हूँ खो न जाऊँ मैं भी इसमें इसके वायरस से त्रस्त हूँ पहले तो हर सुबह सवेरे चाय की अभिलाषा थी और मिले न लगता जैसे बहुत बड़ी निराशा थी अब नींद खुल...
नारी देह के बाजारीकरण पर सवालों के माध्यम से विचार-विमर्श
आमतौर पर हम समाज में घटने वाली घटनाओं को तो देखते हैं, पर उनके पीछे के कारणों को जानने का कभी प्रयास नहीं करते हैं. आज की नारी को बदलती सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था के चलते पहले की अपेक्षा बहुत सी... अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

तुम्हारे कोपभाजन से कोखभाजन तक सिसकती मर्यादा आहत हो जाती है जब बर्बरता की चरम सीमा को लाँघ जाते हैं अपने ही लहू के दुश्मन अपना ही लहू बहाते हैं फिर भी मुख पर ना मलाल लाते हैं तब सड़ांध भरे घुटते क...
इस ऋंखला में कवि अनिल करमेले की कविता. 12 सितंबर के दैनिक भास्कर अखबार(फीचर पेज) में छपी थी. वहां से साभार ले रही हूं दोस्तो के लिए. वो भी एक कवि की कविता. यहां स्त्री होने की विडम्बना देखिए..कितनी करुणा और ...
अविनाश वाचस्पति एक ऐसे सृजनधर्मी का नाम है जिसे हिंदी ब्लॉग जगत सर आँखों पर विठाता है । १४ दिसम्बर १९५८ में जन्में श्री अविनाश वाचस्पति ने सभी साहित्यिक विधाओं में लेखन किया है , परंतु व्यंग्य, कविता, बाल...
व्यावसायिक चिकित्सा पद्धति (Occupational Therapy ) एक चिकित्सा विधि है , जिससे सभी वाकिफ नहीं है और सच कहूं तो अभी तक मैं भी नहीं थी. हम जिस विषय के जानकर नहीं होते हैं तब अँधेरे में दूसरों कि सलाह पर भट...
कौन सा नव गान गाऊँ ! हैं सभी स्वर लय पुराने कौन सी नव गत बजाऊँ ! कौन सा नव गान गाऊँ ! श्याम अलकों में छिपाये चँद्रमुख वह रजनि आती, तारकों से माँग भर कर स्वप्न जीवन में सजाती, वह सुखी है,प्रिय,दुखी उर मै...
हिंदुओं का जो प्रसिद्ध गायत्री मंत्र है, इस संबंध में समझना होगा कि संस्कृत, अरबी जैसी पुरानी भाषाएं बड़ी काव्य-भाषाएं है। उनमें एक शब्द के अनेक अर्थ होते है। वे गणित की भाषाएं नहीं हे। इसलिए तो उनमें
पिछले सप्ताह मैंने कश्मीर के बारे में अपनी व्यथा की थी, उसी तारतम्य में ही ये लेख है ! ब्लॉग जगत में कई लेख लिखे गये विभिन्न पप्पुओं के असफल होने पर, शायद हम आपस में कीचड़ उछालते-उछालते असल के पप्पू को...
कल फिर मिलेंगे
4 comments:
काफ़ी अच्छे लिंक्स के साथ सुन्दर चौपाल सजाई है्।
बहुत सुन्दर चौपाल ! सभी लिंक्स बहुत सार्थक ! आभार !
बहुत सुंदर चर्चा, शुभकामनाएं.
रामराम.
Nice collection of posts
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