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आशा, उलझन !, उफ़ तेरी अदा जिंदगी !!!, और समय ठहर गया!, ज़िंदगी के श्वेत पन्नों को न काला कीजिये- ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Sunday, September 19, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज  
समय है कम इसलिए सीधे चौपाल संजाते हैं हम
आशा जाने कितनी रातों को छुप छुप कर, हम भी रोये हैं जीवन में हमने भी अपने बबूल से दिन ढोए हैं फूलों का कभी साथ न पाया काँटों में जखम पिरोये हैं जाने कैसे कितने घाव इन्हीं आँखों से धोए हैं ट...
लगातार बरसती ही जा रही सावन की घटाएं हैं , जो बिखरा पडा, नही मालूम वो प्रकृति की रौद्र लटाएं है या फिर सौम्य छटाएं हैं । मगर इतना तो अह्सास हो ही रहा है कि जिन्दगी बौरा गई है, जीवन की हार्ड-डिस्क...
रवीन्द्र प्रभात कहते हैं- ज़िंदगी के श्वेत पन्नों को न काला कीजिये
ग़ज़ल * ज़िंदगी के श्वेत पन्नों को न काला कीजिये आस्तिनों में संभलकर सांप पाला कीजिये। चंद शोहरत के लिए ईमान अपना बेचकर - हादसों के साथ खुद को मत उछाला कीजिये। रोशनी परछाईयों में क़ैद हो जाये अगर - आत्म...
एक ज़माने में ईश्वर से जो चीज़ें मांगा करता था, आज वो सब मेरी चौखट पर लाइन लगाए खड़ी हैं। कभी मेल तो कभी एसएमएस से दिन में ऐसे सैंकड़ों सुहावने प्रस्ताव मिलते हैं। लगता है कि ईश्वर ने मेरा केस मोबाइल और इं..

पत्रकार एवं मीडिया विश्वेषक संजय द्विवेदी की पुस्तक “मीडियाः नया दौर, नई चुनौतियां” का लोकार्पण समारोह 22 सितंबर, 2010 भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सभागृह...
गुलदस्ता………………चर्चा मंच-283
 दोस्तों, स्वागत है इस फूलों के गुलदस्ते के साथ ................जिसमे अलग -अलग रंग और किस्म के फूल सजे हैं ..........हर फूल की गंध जुदा है ..........कोई चमेली है तो कोई गुलाब, कोई रात की रानी है तो कोई 
और समय ठहर गया! मर्मज्ञ’ बनारस की रसमयी धरती के सपूत श्री ज्ञानचंद मर्मज्ञ समकालीन कविता में एक अमूल्य हस्ताक्षर के रूप में उभरे हैं। जन्म से भारतीय, शिक्षा से अभियंता, र...
प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 92 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है छतरपुर मंदिर /छत्तरपुर स्थित श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपी...
सर्वप्रथम तो अपने सभी उन शुभेच्छुओं का आभार जिन्होंने हमारे जन्मदिन पर हमें किसी भी रूप में अपनी शुभकामनाएँ हम तक पहुँचाईं। इनमें हमारे परिवारीजनों के साथ-साथ हमारे मित्र, हमारे नगर के कुछ परिचित, ब्लॉग ...
रायपुर। मारीशस के राष्ट्रपति श्री अनिरूद्ध जगन्नाथ ने कहा कि छत्तीसगढ़, भारत की साहित्यिक संस्था सृजन सम्मान द्वारा विश्वभर में हिन्दी के प्रचार-प्रसार, साहित्यकारों का सम्मान एवं हिन्दी की जो सेवा की जा ...
मुक्तिका:: कहीं निगाह... संजीव 'सलिल' * कदम तले जिन्हें दिल रौंद मुस्कुराना है. उन्ही के कदमों में ही जा गिरा जमाना है कहीं निगाह स...
संगीता पुरी कहती हैं- शक्तिशाली ग्रह लाखों किमी तक की दूरी को प्रभावित कर सकते हैं !!
ग्रहों और नक्षत्रों का प्रभाव पृथ्‍वी के जड चेतन पर पड सकता है , इसे लेकर लोगों के मन में बडा संशय बना होता है। इतने दिनों से ज्‍योतिष के अध्‍ययन के बाद पृथ्‍वी में घटनेवाली घटनाओं का ग्रहों से संबंध और ग...
रिश्तों का आगाज़ से अंजाम तक का सफ़र जिंदगी सुबह से दोपहर के दोराहे पर ठहरती जिंदगी दोपहरसे सांज तक सरकती रहती जिंदगी थक कर रात की आगोशमें सो जाती जिंदगी ...... हर पल नए रंग लाती जिंदगी कभी आंसू कभी हँसी के ...
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
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5 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) September 19, 2010 at 10:45 PM  

बहुत अच्छी चौपाल ..बढ़िया लिंक्स मिले

वन्दना September 19, 2010 at 11:55 PM  

आज तो काफ़ी अच्छे लिंक्स के साथ बहुत सुन्दर चौपाल सजाई है।

अनामिका की सदायें ...... September 20, 2010 at 10:06 AM  

अच्छे लिंक्स.शुक्रिया.

ताऊ रामपुरिया September 22, 2010 at 7:47 AM  

बहुत विस्तृत चर्चा, आभार.

रामराम

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