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यादों की बयार चली-सात समुंदर पार आती गली-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Wednesday, October 6, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
कल से नवरात्रि का पर्व आने वाला है, इसकी तैयारी हर तरफ चल रही है। आज श्राद का अंतिम दिन है। सभी अपने पितरों को याद करेंगे। आप भी याद करें उनको जिनके कर्म से हम इस दुनिया में हैं।.... 
 
 
 
सब कहते कि वो गली मेरे घर आकर खत्म हो जाती है. मैने इसे कभी नहीं माना. मेरे लिए वो गली मेरे घर से शुरु होती थी. लोग कहते कि गली का आखिरी मकान मेरा है और उसके बाद गली बन्द हो जाती है. मेरा हमेशा मानना र...
 
उस दिन अपनी एक डॉक्टर मित्र संजना के यहाँ किसी काम से गयी थी ! संजना अपने क्लीनिक में मरीजों को देख रही थी ! मुझे हाथ के संकेत से अपने पास ही बैठा लिया ! सामने की दोनों कुर्सियों पर एक अति क्षीणकाय और ज...
 
आप सोच रहे होंगे कि हम कोई पहेली तो नहीं बूझ रहे हैं। यह पहेली तो नहीं है, लेकिन पहेली से कम भी नहीं है। कल बहुत दिनों बाद जब चिट्ठा जगत की वापसी हुई तो इस वापसी में कुछ गड़बडिय़ों थीं, लेकन आज जब सुबह चिट्...
 
सोते में आदमी कई मर्तबा घबरायेगा, मूंदे आंख कई सारे हिसाब करेगा, चौंककर खुद को सोता तकेगा कि यह क्‍या शख़्स है समय उमस की कैसी रात है, भूंकते कुत्‍तों के लहराते नातों में आख़ि‍र क्‍या सोचता वह गीली नींद ...
 
अरुणाचल में मिली दुर्लभ भाषा [image: कोरो बोलने वाला अरुणाचल का एक आदिवासी परिवार] (तस्वीर: एपी/क्रिस रेनियर) शोधकर्ताओं ने भारत के सुदूर इलाक़े में एक ऐसी भाषा का पता लगाया है, जिसका वैज्ञानिकों को पत...
 
आज घड़ी-घड़ी रह-रह कर मेरे दिल में ये अजब-गजब सा सवाल उमड़ रहा है कि जो कुछ हुआ....क्या वो सही हुआ?…अगर सही नहीं हुआ तो फिर सही क्यों नहीँ हुआ? या फिर अगर यही सही था तो फिर…यही सही क्यो...
 
छत्‍तीसगढ़ राज्‍य के भव्‍य स्‍थापना समारोह की तैयारियों के बीच समाचार पत्रों के द्वारा राज्‍य के थीम सांग के संबंध में समाचार जब प्रकाशित हुए तो छत्‍तीसगढ़ के संस्‍कृतिधर्मी मनीषियों को खुशी के साथ ही बेहद...
 
बीना जी और बलराम जी : आप सब हैं मेरी शक्ति : आओ ब्‍लॉगरों पहचानो, मैं हूं कौन, पर डॉन नहीं हूं
 
लूटिए चिन्तन-सुख निभृत निर्जन में आने न दीजिए वृथा विकल्प मन में अति अधिक अभिरुचि रखिए न धन में कभी कुफल भी चखिए जीवन में लूटिए चिन्तन सुख निभृत निर्जन में। -नागार्जुन 
 
*आंद्रे जिम **कॉस्टिन नोवोस्लो****** **भौतिक शास्त्र ( फ़िजिक्स) का वर्ष 2010 का नोबल पुरष्कार रशिया मूल के दो युवा वैज्ञानिकों आंद्रे जिम और कॉस्टिन नोवोस्लो को संयुक्त रूप से प्रदान कि**या गया है ।** 
 
भाव चेहरे पर लिखा जो लब से वो कहते नहीं है खुशी और गम जहां में अश्क यूँ बहते नहीं हो भले छत एक फिर भी दूरियाँ बढ़ती गयी आज अपने वो बने जो साथ में रहते नहीं जब तलक है जोर अपना होश की बातें कहाँ होश आने पर य...
 
मोहन की लीला निराली छत्तीसगढ़ियों की है लाचारी संस्कृति विभाग फिर दलाली खाने सक्रिय  भटगांव उपचुनाव निपटते ही प्रदेश सरकार ने एक बार फिर लुटोत्सव बनाम रायोत्सव की तैयारी में करोड़ों रुपए फूंकने की योजना बना ली...
 
आज रोटी बनाते -बनाते तुम्हारे ख्याल ने आकर पुकारा और हाथ बेलन पर ही रुक गया और ख्याल मुझसे आकर उलझ गया मुझे अपने साथ उडा ले चला जहाँ तुम्हारा साथ था हाथ में हाथ था सपनो का महल था बगीचे में झूला पड़ा  
 
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे .
 
 
 
 
 
 
 
 
 

7 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) October 6, 2010 at 9:35 PM  

अच्छे लिंक्स मिले आभार

वन्दना October 7, 2010 at 12:40 AM  

काफ़ी बढिया लिंक्स के साथ सार्थक चर्चा………आभार्।

Sadhana Vaid October 7, 2010 at 1:05 AM  

सार्थक लिंक्स के साथ बहुत अच्छी चौपाल ! बधाई एवं आभार !

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ October 7, 2010 at 2:58 AM  

राजकुमार जी, इस सार्थक चर्चा के लिए बधाई स्वीकारें।

राजीव तनेजा October 10, 2010 at 9:43 AM  

बढ़िया लिंक्स...मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए धन्यवाद

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