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दिल से दिल मिलाओ-ब्लाग जगत के गुटबाजी भगाओ-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, October 16, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
क्यों है मन में अविश्वास भरा 
मित्रों पर भरोसा करके तो देखो जरा 

ब्लागरों से एक अपील.. मन का रावण मार कर आज के दिन एक होने का संकल्प लें..... इसी उम्मीद के साथ आज की चौपाल का आगाज करते हैं..
 
आज विजयदशमी का पर्व है। इस अवसर पर हम पूरे ब्लाग बिरादरी के मित्रों से एक आग्रह करना चाहते हैं कि ब्लाग जगत से गुटबाजी को लात मारते हुए मन के रावण को समाप्त करके सभी एक परिवार की तरह रहने का संकल्प लें। वै...
 
रावण की लंका में, रहना नहीं है ; रावण की तरह , मरना नहीं है ; अहंकार के सागर में , बहना नहीं है ; है तो सोने की लंका मगर , जहाँ भाईचारे का गहना नहीं है ; रावण की लंका में, रहना नहीं है ; राम का देश बड़...
 
दशहरा..... इस दिन बुराइयों का प्रतीक रावन मरता है. और भी कुछ असुर मरेंगे. इनको मरना ही चाहिए. समाज की खुशहाली के लिये ज़रूरी है इनकी मौतें. मैं ही क्या, बहुत-से लोग इस बारे में लिखेंगे. पिछले दो दशक से इस...
 
कल अहले सुबह बात बेबात कैसे शुरू हुई कुछ याद नहीं है.. मगर बात विकास के साथ हो रही थी और विषय श्रवण कुमार से सम्बंधित.. श्रवण कुमार कैसे थे अथवा उसके माता-पिता कैसे थे, उनकी मृत्यु कैसे हुई, इत्यादी.. मुझे...
 
आज भारत में अनेक हिन्दी-उर्दू कवियों और लेखकों ने भारत में सत्ता और संस्कृति उद्योग के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया...
 
एक समय था जब गाँव-गाँव में रामलीला की जाती थी। जिसमें गाँव के लोग बढ-चढ कर हिस्सा लेते थे। छोटे-बड़े सभी लोग राम लीला के पात्र बनते थे और लगातार 11 दिनों तक राम लीला का आयोजन होता था। शाम 6 बजे से ही सभी अ...
 
काव्यशास्त्र वाच्यार्थ और लक्षणा आचार्य परशुराम राय [image: image] आज के अंक का प्रतिपाद्य विषय वाचक और लक्ष्यक शब्दों के भेदोपभेद हैं। आचार्य मम्मट ने वाचक शब्द की निम्नलिखित लक्षण (परिभाषा) की है- ...
 
यह मेरी एक पुरानी कविता है.. अहल्या गौतम ऋषि की पत्नी थी, वह अति-सुन्दर थी, उसकी सुन्दरता पर देवराज इन्द्र तक मोहित थे... गौतम ऋषि प्रातःकाल सूर्योदय से पहले ही उठ जाया करते थे और पूजा इत्यादि में संलग्...
 
पता नहीं कब और कैसे नारी को अबला कहा और माना जाने लगा. वह भी उस देश में जहाँ माँ दुर्गा की पूजा की जाती है. माँ दुर्गा - साक्षात् शक्ति का प्रतीक. असंख्य राक्षसों का संहार करने वाली मात...
 
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार सागर मन्थन से प्राप्त चौदह रत्न ये हैं :- 1. रम्भा 2. विष 3. कौस्तुभ मणि 4. लक्ष्मी 5. मदिरा 6. ऐरावत 7. कल्पवृक्ष 8. शंख 9. अश्व 10. कामधेनु 11....
 
आप जानते ही होंगे डीएलए को बात बेबात को साखी को जानते हैं आप डॉ. सुभाष राय जी को वे आगरा छोड़ गए हैं लखनऊ पहुंच गए हैं जनसंदेश टाइम्‍स में संभाला है संपादक का कार्यभार भार अभी ज्‍यादा है कम ज्‍यादा नहीं ज्‍...
 
भाई, माल साथ बैठा है, आंखे सेक रहा हूँ...
बहुत दिनों बाद कल डीटीसी बस में जाना हुआ। मेट्रो की सहूलियत ने तो डीटीसी बस का सफर ही भुला दिया था, पर कल बस में जाना ज़रूरत भी थी और मजबूरी भी...हां, तो मैं एक खाली डीटीसी बस की विंडो सीट पर बैठ गई। बस ...
 
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा:** प्रकीर्तिताः"* * "**माँ सिद्धिदात्री" आप सबके कारज सिद्ध करें. बहुत बहुत शुभकामनाओं सहित......* *करते हैं उपासना "शक्ति" की, * *होती है परीक्षा "भक्ति" की* *नवरात्रि रख नित...
 
पुलिस को फोन कर खुद को ख़त्म किया...मामला भारत नगर थाना क्षेत्र की वजीर पुर जे जे कोलोनी का है...करीब 22 वर्षीय युवक रोहित गुप्ता का अपने घर में झगडा क्या हुआ उसने ख्कुद को ख़त्म करने का फैसला कर लिया ...
 
इस सप्‍ताह संस्‍कृतजालपुटसंग्राहक संस्‍कृतं भारतस्‍य जीवनम् पर प्रस्‍तुत किये गये लेख ।। संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या का वर्तमान काल के पूर्ण वाक्यों को बनाने का तरीका वर्तमान कालस्‍य कृतानां क्रियाणां वा...
 
भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। दशहरा अथवा विजयादशमी राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथव...
 
मैं यहां किसी की भविष्यवाणी को सत्य सिद्ध करने के लिये नहीं हूं। और ऐसा मैं क्यों करूं?...मैं यहां केवल अपने लिये हूं। मैं कोई मसीहा नहीं और न ही मैं यहां किसी को पाप-मुक्त करने के लिये हूं। मुझे यहां कोई...
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

5 comments:

ललित शर्मा October 16, 2010 at 9:36 PM  


सुंदर चौपाल सजाई है
विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

दशहरा में चलें गाँव की ओर-प्यासा पनघट

डॉ. मोनिका शर्मा October 16, 2010 at 10:33 PM  

अच्छी सजी है आज की चौपाल ....दशहरे की शुभकामनायें

मनोज कुमार October 16, 2010 at 10:41 PM  

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोsस्तु ते॥
विजयादशमी के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

काव्यशास्त्र

mahendra verma October 16, 2010 at 11:14 PM  

चौपाल में रंग-बिरंगे फूल खिले हैं, सुंदर प्रस्तुति...दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं।

अशोक बजाज October 18, 2010 at 11:08 AM  

बहुत अच्छे लिंक्स ,बहुत अच्छी प्रस्तुति ,बहुत अच्छी भावनाएं .धन्यवाद

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