सस्ती कितनी जान हमारी बस्ती में , योग भूत-प्रेतों से जुड़ा है ?-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी
>> Monday, October 18, 2010
सभी को नमस्कार करता है आपका राज
चिली में खान में फंसे 33 खनिकों के उद्धार कार्य के व्यापक कवरेज को देखकर मेरे मन में सवाल उठा कि अहर्निश कारपोरेट घरानों का जयगान करने वाला ग्लोबल मीडिया,खासकर टेलीविजन चैनल अचानक दयालु और मानवीय हि...

नमस्कार, चलिए मेरे साथ लेट-लतीफ़ वार्ता पर, सबसे पहले चलते हैं वर्धा ब्लॉगर गोष्ठी एवं कार्यशाला का पोस्टमार्टम -1 पर जहां एम ज्ञान की एक पोस्ट लगी है मैं मूरख, तुम ज्ञानी पर, खुबसूरत बीबी हो तो विदेश मे...
लघुकथा अपेक्षा मनोज कुमार “आपकी तारीफ़?” “जी मैं पत्रकार! आप इन दिनों चर्चित और उभरते हुए कथाकार हैं, आपका इंटरव्यू लेने आया था।” “जी बैठिए।” “थैन्क्स!” “कहिए क्या लेंग...
प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 96 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है Dhamekh Stupa-Sarnath-Uttar Pradesh और इसके बारे मे संक...
एक पत्रकार आतंकवादी का साक्षात्कार लेने पहुंचा और बोला ‘भई, बड़ी मुश्किल से तुम्हें ढूंढा है अब इंटरव्यु के लिऐ मना नहीं करना बहुत दिन से कोई सनसनीखेज खबर नहीं मिली इसलिये नौकरी पर बन आई है, तुम मुझ पर रहम क...


इंसानों का चेहरा (1)* कल था दशानन का दहन लगना था नाभि में तीर अगन उठाए धनुश राम खड़े थे। कमर पर हाथ धरे हनुमान भी अड़े थे। दैत्य मुंह की खाए धरा पर पड़े थे। कुछ दशानन ऐसे भी जो इंसानी चेहरा लिए भीड़ म...
वैराग्य,सन्यास,के भगवा रंग को राजनीति के चलते आतंकी करार दे दिया।देश की युवा पीढ़ी "भगवा आतंकवाद" का शिकार हो रही है। गृहमंत्री पी.चिदंबरम ने देश के पुलिस प्रमुखों की बैठक में आतंकवाद को एक रंग दे दिया। वि...
दोस्तों, शौक ही नहीं इंसान जिज्ञासा भी कैपेसिटी के हिसाब से पालता है। आप उतने ही जिज्ञासु हो सकते हैं, जितना आपकी बुद्धि अफोर्ड करती है। यही जिज्ञासा आपको हर वक़्त बेचैन करती है। आप शोध-खोज में लग जाते हैं...
एक बार महात्मा गांधीजी से किसी ने प्रश्न किया की रामायण को सही माना जाए अथवा नहीं तो महात्माजी ने उस आदमी को यह उत्तर दिया - की जब रामायण की रचना की गई थी तो वे उस समय नहीं थे तब मैं कैसे कह दूं की वह सही ...
मैं तुम्हें अपनी विचारधारा से सहमत करवाने में उत्सुक नहीं हूं - मेरी कोई विचारधारा है भी नहीं। दूसरी बात, मेरा मानना है कि किसी को परिवरतित करने का प्रयत्न ही हिंसा है, यह उसकी निजता में, उसके अनूठेपन में...
कितने दिन छूटेंगे, जैसे मन से रगड़ खाकर आंखों का सूखा लोर छूटता है कितने दिन उड़ेंगे जैसे गाल छुआकर चिरई मनोहारी अपनी पांख मन की आंख खोलती है कितने दिन होगा कि नीले पीले कत्थई धानी सुर्ख़ लाल के बीच गुज़रत...
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
3 comments:
आज तो काफ़ी लिंक्स मिले……………सुन्दर चौपाल्।
आज की चौपाल फिर काफ़ी अच्छी जमी है। इसमें शामिल होकर अच्छा लगा।
Bahut sundar guldasta
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