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जाएं कहां तुम बिन-प्यार तुम्हारा इक दिन- ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Sunday, October 10, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

कल छुट्टी के दिन छुरा जाने का मौका मिला। रास्ते में हर तरफ हरियाली से दो-चार होने का मौका मिला। जब भी हम बाहर जाते हैं तो सोचते हैं कि काश शहरों भी ऐसी हरियाली होती तो कितना अच्छा होता।.... 
 
एक बार भारत यात्रा के दौरान एक कवि सम्मेलन में शिरकत कर रहा था. एक कवि महोदय ने गीत प्रस्तुत किया. उसकी धुन मुझे बहुत पसंद आई और कई दिनों तक जेहन में गुँजती रही. फिर उसी धार पर मिसरा लिया और रचा अपना गीत...
 
जिंदगी के भले दिन हैं कम ही तो क्या, हसरतें हों बड़ी और लगन चाहिए दिल की चाहत ही ख़्वाबों में ढलती सदा, ऐसे ख़्वाबों को धरती गगन चाहिए ठोकरों से भरा जिंदगी का सफर, है सिखाती हमें नित नए फलसफे यदि जीने की ताकत ...
 
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर तक आ पहुंचे नक्सली आतंक से निपटने में तो अपने राज्य की पुलिस में दम नहीं है। ऐसे में पुलिस वाले वाह-वाही लूटने के लिए ग्रामीणों को ही निशाना बनाने का काम कर रहे हैं। अब महासुमन्...
 
एक बात समझ में नहीं आती है की कुछ महिलाओ को दूसरे के जीवन में टाँग अड़ाने या दूसरों के घरों में ताका झाकी करने की आदत क्यों होती है | मैं तो बड़ी परेशान हुं एक ऐसी ही महिला से कुछ लोग उनको *नारीवादी* कहते ...
 
आजकल मन में भावनाऒं का सैलाव उठा है। जब बात झकझोड़ती है तो मन उद्वेलित हो जाता है। फिर भावनाओं का आवेग सारे बांध तोड़ उमड़ पड़ता है। जैसे सुनामी! प्राकृतिक आपदाओं में सुनामी अब बड़े पैमाने पर जान-माल की त...
 
माना चाहत की डोर बाँधी है तूने मुझसे मगर मैंने नहीं माना तेरी चाहत पूजती है मुझे माना मेरे जिक्र से बढ़ जाती हैं धडकनें माना पवित्र है तेरी चाहत माना नहीं है वासना का लेश इसमें माना मेरे ख्याल ही तेरी ध...
 
कॉमनवेल्थ खेलों में हॉकी के एक लीग मैच में भारत ने पाकिस्तान पर धमाकेदार जीत दर्ज की है. भारत ने पाकिस्तान को 4 के मुकाबले सात गोल से हराया. इस जीत के साथ ही भारत सेमीफाइनल में पहुंच गया है. दिल्ली का मे...
 
1910 में जर्मनी की एक ट्रेन में एक पन्‍द्रह-सोलह वर्ष का युवक बैंच के नीचे छिपा हुआ था। उसके पास टिकट नहीं था। वह घर से भाग खड़ा हुआ है। उसके पास पैसा भी नहीं है। फिर तो बाद में वह बहुत प्रसिद्ध आदमी हुआ औ...
 
यह सवाल है यहाँ आने वाले हर मेहमान से..तो अपने जवाबों को कमेंट्स बॉक्स में डालें अगर ''क्रूक''में इमरान हाशमी की जगह सन्नी देओल होते तो क्या होता? 
 
अभी कुछ दिन पहले एक कामिक्स पढ़ रहा था "वेताल/फैंटम" का.. उसमे उसने एक ट्रक के पहिये को जैक लगा कर उठा दिया, वहाँ खड़े बहुत सारे जंगली लोगों ने एक नयी कहावत कि शुरुवात कर दी "वेताल में सौ आदमियों जितना ब...
 
http://mohallalive.com/2010/10/10/vibha-rani-react-on-priyadarshini-mattu-case-verdict/comment-page-1/#comment-15027 जज साब, मैं प्रियदर्शिनी मट्टू। अभी आपके जेहन से निकली नहीं होऊंगी। अभी अभी तो आपने मेरी...
 
आज कल संसद सुनसान सी क्यों है, किसी भी मुद्दे से अनजान सी क्यों है ....................................................................? संसद का सत्र कब आरम्भ हो रहा है ..........................?
 
 
प्राचीन कहावत है कि लक्ष्‍मी और सरस्‍वती एक स्‍थान पर नहीं रह सकती, यानि कि एक ही व्‍यक्ति का ध्‍यान कला और ज्ञान के साथ साथ भौतिक तत्‍वों की ओर नहीं जा सकता , इसलिए प्राचीन काल में पैसे से किसी का स्‍तर न...
 
मुक्तिका: फिर ज़मीं पर..... संजीव 'सलिल' * फिर ज़मीं पर कहीं काफ़िर कहीं क़ादिर क्यों है? फिर ज़मीं पर कहीं नाफ़िर कहीं नादिर क्यों है? * फिर ज़मीं पर कहीं बे-घर कहीं बा-घर क्यों है? फिर ज़मीं पर कहीं नासि...
 
आज जीवन के समीकरण इतने बदल गए हैं कि वे कहां जाकर रुकेंगे कुछ पता नहीं । भागमभाग वाली जिंदगी में अपने घर पर ज्यादा समय नहीं दे पाते लेकिन जो भी समय देते हैं उसे बड़े ही कूल वातावरण में बिताने का प्रयास रहता...
 
बच्चों तक को मार रहें हैं,महिलाओं को जीन्स पहनने से मना कर रहे हैं,क्या इसे ही कहते हैं अन्याय के खिलाफ़ संघर्ष?जीं हां इस इलाके मे नक्सली यही सब कर रहे हैं और इसे वे अन्याय और व्यव्स्था के खिलाफ़ विचारधारा ...
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

3 comments:

वन्दना October 10, 2010 at 11:22 PM  

आज तो बहुत सुन्दर लिंक्स के साथ चौपाल सजाई है……………ाआभार।

मनोज कुमार October 11, 2010 at 12:21 AM  

कमाल है, सुबह की पोस्ट् को आपने चौपाल में शामिल् भी कर लिया! नमन है आपको और आपकी निष्ठा को! बहुत अच्छी प्रस्तुति।
या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
नवरात्र के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

दुर्नामी लहरें, को याद करते हैं वर्ल्ड डिजास्टर रिडक्शन डे पर , मनोज कुमार, “मनोज” पर!

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