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ये तो ले लेंगी देश की जान- अरुधंति से सावधान -ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Tuesday, October 26, 2010

 
 सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
क्या अरुधंति राय जैसी बाइयों से देश को सावधान रहने की आवश्यकता नहीं है? खुद को अतिबुद्धिजीवी मानने वाली अरुधंति का विचार देश को बांटने वाला है, और यह पहला अवसर भी नहीं है कि बाई ने ऐसा कहा हो। समय-समय पर अ...
 
निर्देशक जेनिफ़र लिंच द्वारा निर्देशित फिल्म -'हिस' में अभिनेत्री मल्लिका ने भारतीय संस्कारों को तिलांजलि दे दी है। पैसे और शोहरत के लिए पहले अपनी आत्मा को बेचा, फिर तन के कपड़ों को ।...
 
छत्तीसगढ़ सरकार ने सलमान के महज 10 मिनट के लिए ही लाखों रुपयों की बर्बादी कर दी। राज्योत्सव में बुलाए गए सलमान खान मंच पर बमुश्किल दस मिनट रहे और चले गए। सलमान तो आकर चले गए, पर उनके प्रशंसकों को उनके लिए ...
 
जो पीढ़ी इतिहास में हस्तक्षेप नहीं करती, इतिहास निश्चय ही उसका अनादर कर बैठता है। इसलिए इतिहास को प्रभावित करनेवाले गांधी, नेहरु और अम्बेदकर -सभी इतिहास की नवीन व्याख्या प्रस्तुत करते हुए इसकी धारा को मोड़न...
 
कविताओं में प्रतीक शब्दों में नए सूक्ष्म अर्थ भरता है  मनोज कुमार यर्थाथ के धरातल पर हम अगर चीजों को देखें तो लगता है कि हमारे संप्रेषण में एक जड़ता सी आ गई है। यदि हमारी अनुभूतियां, हमा...
 
उपयोगी लिंक्स की आज की कड़ी में पेश है ...पुराने तकनीकी के मास्साब :-) इ-पंडित जी के ब्लॉग से तकनीकी सहायता - ऑफिसटैब – माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में टैब इण्टरफेस लाने हेतु प्लगइन - गूगल ट्राँसलेट अब हिन...
 
समर्पण: उन हरामखोरों(स्त्रीलिंग सम्मिलित समझें) को जो विरुद्ध वीणा वादन के असाध्य रोगी हैं। कभी राग नक्सली, कभी राग आतंकवादी, कभी राग ज़िहादी, कभी राग अलगाववादी, कभी राग छिनरई और कुछ नहीं तो राग कश्मीरी ह...
 
 ऑक्टोपस यानी " पॉल बाबा " का कल रात अचानक निधन हो गया . फुटबॉल वर्ल्ड कप के विभिन्न मैचों की सही भविष्यवाणी कर सुर्खियों में आने वाले जर्मनी के ऑक्टोपस पॉल अब नहीं रहे . अपनी सही भविष्यवाणियों के चल...
 
"मैं यहां तुम्हारे मुखौटे को नष्ट करने के लिये और तुम्हें तुम्हारी निजता लौटाने के लिये हूं। मैं तुम पर कोई धर्म नहीं लाद रहा। मैं तुम्हें यहां पूर्णतया निर्भार कर देने के लिये हूं - बिना किसी धर्म, बिना क...
 
अपना तकिया,अपना बिस्तर अपनी दीवारें...और अपना खाली-खाली सा कमरा...जिसने पूरे चौबीस साल तक उसकी हंसी-ख़ुशी-गम -आँसू सब देखे थे. उसके ग़मज़दा होने पर कभी पुचकार कर अंक में भर लेता , कभी शिकायत करता ,इतना...
 
बीते लम्हों की ही तो ये बात है ! फुर्सत के पलों की ही तो ये रात है ! जब चाँद के पहलु मै हम बेठे रहते थे ! उसे निहारते -२ ही न हम थकते थे ! कितनी हसीन लगती थी वो चांदनी रात ! जब खामोश रात मै उसकी चांदनी 
 
कुछ गूंगी और कुछ बहरी तस्वीरें
दहाये हुए देस का दर्द-69 यह कौन-सी जगह है, यह कैसा दयार है ? किसका निजाम है यह, यहां किसकी हुकूमत है ? इन चित्रों को देखकर आपके मन में भी ये सवाल उठ सकते हैं। जिनके जवाब हैं- यह पूर्वोत्तर बिहार के ...
 
करते हो क्यूँ न पहल तौबा-तौबा ।
*दो गज़लें* *(एक)* *है अचंभित हवा ये पहल देखकर * *ताश के जो बने हैं महल देखकर । * ** *कंपकंपी सी हुई और शहर रो पडा-* *इस जमाने का रद्दोबदल देखकर । * ** *मैंने समझा शहर में तबाही हुई-* *अपने बेटों की आँखें ...
 
जब आसमाँ के चाँद से पहले मेरा चाँद आ जाता है फिर और क्या हसरत रही बाकी हर हसरत को पंख मिल जाते हैं परवाज़ बेलगाम हो जाती है जब मोहब्बत रुहानी होती है तब बिना कहे बात होती है मेरा चाँद बिना बोले सब सुनता है औ...
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

4 comments:

shikha varshney October 26, 2010 at 9:06 PM  

बेहतरीन लिंक्स मिले आभार.

वन्दना October 26, 2010 at 10:55 PM  

शानदार लिंक्स के साथ सार्थक चर्चा।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ October 26, 2010 at 11:26 PM  

आपकी बातें विचारणीय हैं श्रीमान।

संगीता स्वरुप ( गीत ) October 28, 2010 at 3:21 AM  

अच्छी चौपाल सजाई है ...

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