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बस इतना अधिकार मुझे दो , बैठूँ या कि जाऊँ मैं हार ! - ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Wednesday, November 17, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
अपने ब्लाग जगत के बादशाह उडऩ तश्तरी यानी समीर लाल ने तो छत्तीसगढ़ आने का अपना वादा पूरा नहीं किया है, लेकिन उनकी टीम जरूर आसमान से छत्तीसगढ़ की जमीं पर कल उतने वाली है। यह टीम छत्तीसगढ़ में एक सप्ताह तक रह...
देश में हर एक से आगे निकलने की होड़ में व्यवसायिक कम्पनियाँ आम तौर पर यह भूल जाती हैं की वे किस तरह से अनजाने में ही देश के कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं. इस कड़ी में सबसे ताज़ा मामला दूर संचार कंपनियों के म...
मन की आंखें
मन ने सोचा खोली आंखें , देखा अपने आस पास , था कुछ विशिष्ट इन आंखों में , कल्पना ने उड़ान भरी लेअनुमति इन आंखों से , दूर जाती एक पगडंडी तक , जो खो जाती घने जंगल में | हें अनगिनत निशान उस पर , है दस्तावेज उन क़द...
आज तुम बहुत याद आये क्युं ? नहीं जानती शायद तुमने पुकारा मुझे तेरी हर सदा पहुँच रही है मन के आँगन तक और मैं भीग रही हूँ अपने ही खींचे दायरे की लक्ष्मण रेखा में जानती हूँ तड़प उधर भी कम नहीं कितना त...
बैठूँ या कि जाऊँ मैं हार ! ले समस्त अंतर का प्यार आई हूँ मैं तेरे द्वार, सुन्दर भाव कुसुम सुकुमार करने भेंट अश्रु का हार, खोल खोल ओ रे करुणामय अपनी करुण कुटी का द्वार ! बैठूँ या कि जाऊँ मैं हार ! इस जीवन...
"धूल, धुआं, कचरा, गन्दगी, बदबू मिलकर पर्यावरण को दूषित कर रहे हैं पर्यावरण का साफ़-सुथरा रहना मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।" आचार्य उदय 
दिल्ली का लक्ष्मी नगर, श्मशान बन गया * (1) ढह गई पांच मंजिलों की इमारत सैकडों घायल हैं, दर्जनों ने दे डाली अपनी शहादत या अल्लाह, या ख़ुदा ! क्या कमी रह गई थी? क्या कर न पाए थे ये पूरी तेरी इबादत ? (२)...
सत्ताधीशो की लूट का पुराना सिद्धांत बाँटो और राज करो अब पुराना पड़ चुका है, आज की लूट के सत्ताधीशो और सिद्धान्तकारों का नया नियम है एकजूट हो और बाँटो, unite and devide ! यह देश , संसाधनों और आम आदमी की लूट...
नहीं चाहता साथ तुम्हारे नाचूँ, गाऊँ, झूमूँ, घूमूँ नहीं चाहता तुमको देखूँ, छूँलूँ, कसलूँ या फिर चूमूँ नहीं चाहता तुम अपना जीवन दो या फिर प्यार मुझे दो अंत समय चंदन बन जाऊँ बस इतना अधिकार मुझे दो 
एक दिलरुबा शहर ने कांच की बोतल में भर के सदाएं भेजी हैं गुनगुनी ठंढ है, जानां चले आओ इश्क के मौसम ने खुशबुओं में डुबो के आने की अदाएं भेजी हैं वादा है बारिश का, जानां चले आओ रूठे हुए स्वेटर ने कट्टी भी त...
मुझको तो ना जाने कैसा गुमान रहता है उसके इंतज़ार में भी, इत्मिनान रहता है और उसने छत पे टहलना छोड़ा है जबसे उसके शहर का हर शख्स परेशान रहता है खलिश किसी रिश्ते में आ गयी जब यारों ज़ख्म भर भी जाए म...
मित्रों, कई बार कहीं ऐसी कविता या कुछ पंक्तियाँ मिल जाती है कि आपके दिल को छू जाती है. आप उसको इग्नोर नहीं कर सकते..... कुछ सोचने पर मजबूर करती है : *कित्ता आसान है – किसी के एड्रेस बुक में स्थान पाना, पर...
जिंदगी जीना भी एक कला
इक दिन जिंदगी से................ मैने शिकायत जो ये की ........ तो उसने भी हंसके हमसे ये कह दिया ? कोंन कहता है जिंदगी हंसी नहीं होती एक बार आजमा के तो देखो तुम हो न जाये हमसे मोहबत तो कहना एक बार हमारी गल...
आभासी खिडकी बचपन में एक चुटकला सुना था, लोग रेल यात्रा कर रहे थे। एक व्यक्ति खडा हुआ और खिडकी खोलदी, थोडी ही देर में दूसरा उठा और उसने खिडकी बंद कर दी। पहले को यह बंद करना नागवार गुजरा और उठ कर पुनः खोलदी।...
खेलभांठा स्कूल मे ओपन स्कूल प्रभारी द्वारा 125 का फार्म 800 मे बेचे जाने की शिकायत के बाद प्रशासन व्दारा नायब तहसीलदार आफिस मे फार्म वितरण करने व्यवस्था की गई । जहा पर 300 फार्म के लिए 2हजार आवेदकों की लाइ...
मै तो हर समय खूबसूरत समय मे जीती हूँ ख्वाब मे नही जीती हूँ हकीकत के धरातल पर समय से लड्ती हूँ और समय को अपने पल्लू मे बाँध लेती हूँ
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

6 comments:

अशोक बजाज November 17, 2010 at 7:17 PM  

बहुत बढ़िया चौपाल .

संगीता स्वरुप ( गीत ) November 17, 2010 at 8:30 PM  

बहुत सारे लिंक्स मिले ..आभार

आशीष मिश्रा November 17, 2010 at 8:56 PM  

सुंदर चौपाल सजाने के लिये आभार

डॉ॰ मोनिका शर्मा November 17, 2010 at 10:49 PM  

सुंदर चौपाल .....बढ़िया लिंक्स मिले...आभार

वन्दना November 17, 2010 at 11:39 PM  

काफ़ी पोस्ट पढीं……………सुन्दर लिंक्स्…………सार्थक चौपाल ।

Sadhana Vaid November 19, 2010 at 8:32 AM  

बहुत ही शानदार और सार्थक चौपाल ! 'उन्मना' को इसमें शामिल करने के लिये आपकी आभारी हूँ !

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