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टूटे घरौंदे, दिल्ली से गाँव तक -ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, October 30, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
अंदाज उनका कैसे बिन्दास हो गया महफिल में आम कलतक वो खास हो गया जिसे कैद में होना था संसद चले गए, क्या चाल सियासत की आभास हो गया रुकते ही कदम जिन्दगी मौत हो गयी प्रतिभा जो होश में थी क्यों आज सो गयी कल पीढ़ि...
 
छत्तीसगढ़ में राज्योत्सव ने नाम पर हर साल कामनवेल्थ जैसा भ्रष्टाचार किया जाता है, पर इसके खिलाफ बोलने वाला कोई नहीं है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने कभी इस तरफ ध्यान देने की जरूरत ही नहीं समझी। कारण साफ है 
 
आज देखिये समय पर समय निकल गया तो यू ट्यूब पर खोज कर किस्‍तों में देख पायें लगता है कि फिर आनंद उतना नहीं उठा पायेंगे। इसे सुन जायें भली बातों को अपनायें सबको बतलायें हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग में सार्थक करें और...
 
छत्तीसगढ़ राज्य वह दृश्य अभी भी आँखों से ओझल नहीं हो पाया है जब 31 अक्टूबर 2000 को घड़ी की सुई ने रात के 12 बजने का संकेत दिया तो चारों तरफ खुशी और उल्लास का वातावरण बन गया। लोग मस्ती में झूमते- नाचते एक ...
 
जब मन की गहनतम गहराई से फूटती व्याकुल, सुरीली, भावभीनी आवाज़ को हवा के पंखों पर सवार कर मैंने तुम्हारा नाम लेकर तुम्हें पुकारा था ! लेकिन मेरी वह पुकार वादियों में दूर दूर तक ध्वनित प्रतिध्वनित होकर 
 
मैं बाबा रामदेव को प्यार करता हूँ। मोहन भागवत को भी प्यार करता हूँ।मदर टेरेसा, सोनिया गांधी,मनमोहन सिंह,प्रकाश कारात को भी प्यार करता हूँ। वैसे ही हिन्दुस्तान के हिन्दुओं, ईसाईयों, सिखों,...
 
किसी ने तो पशु खाया आप ने क्या किया ??* *आज दिल ने कहा की एक और सच बात आप सब से सांझी की जाए |* *मेरा शहर उत्तरप्रदेश सीमा से लगता है|* *यहाँ से पशुओं को ले जाया जाता है अर्थार्त पशु तस्करी का बोर्डर ,* 
 
भाषा हो मौन की , एहसास हों ज़िंदगी के व्यवहार में थोड़ी गहराई लाइए भावनाएं हो जाएँ न कहीं दूषित इसलिए मुझे शब्द नहीं चाहिए . 
 
जन्म:1994 मौत:2010 मृत्यु का कारण:परिवार वालों के मुताबिक ऑनर किलिंग अर्थात दबंगों ने असमय गला घोंट कर मार डाला...
 
पिछले दस महीनों से कामनवेल्थ खेलों के "मास्कट" शेरा का रूप धरे सतीश बिदला खेलों के समापन के साथ ही बेरोजगार हो गए हैं। दुबले पतले, शर्मीले स्वभाव वाले बिदला कहते हैं कि शुरू में उन्हें कम्युनिकेशन प्रभाग 
 
नन्हें हांथों का कमाल …
दिवाली आई दिवाली आई , मेरी नन्हीं बिटिया अकुलाई , उसके नन्हें हांथों ने आंगन में देखो एक सुन...
 
मुझे याद है उस दिन मैं बहुत उदास था. परेशानियाँ थीं कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहीं थीं. रात हुई तो सोने की कोशिश की पर ऐसे में नींद कहां आती है. सुबह होने को आ रही थी. तीसरा पहर खत्म हुआ तो मैंने 
 
घर से ऑफिस के लिए जब निकलता है आदमी जाने कितनी चीजें भूलता है आदमी घर से ऑफिस तक के सफ़र में दिनचर्या बना लेता है आदमी कौन से जरूरी काम पहले करने हैं कौन सी फाइल पहले निपटानी है किसका लोन पास करना 
 
१९९७ में बुकर सम्मान विजेता , अरुंधती रॉय ने दिल्ली में एक सेमीनार में कहा की -- " काश्मीर को आज़ादी मिलनी चाहिए , भूखे-नंगे हिंदुस्तान से "। एक साहित्यकार और सामजिक कार्यकर्ता के इस प्रकार के गैरजिम्मेदारा...
 
सोचा आज कुछ निबंध विबंध लिखा जाय ..ऐसे ही बैठे ठाले ....कुछ फुरसत मिल गयी है तो उसका सदुपयोग किया जाय .अब निबंध लिखना है तो कुछ विषय उसय भी चाहिए ही ..दिमाग पर जोर डालने लगा ..कौन सा विषय चुनूं कौन सा छोडू..

पिछले दो महीनों में ज्ञान दर्पण के पाठकों में से छ: पाठकों के फोन आये जिन्होंने अपने न्यूज़ पोर्टल बनवाये थे ओर वे मुझसे से इन पोर्टल्स में और क्या जुड़वाया जा सकता है की सलाह चाह रहे थे | मैंने उन पोर्टल्...
 
मुझे उस पार…. नहीं जाना ………..क्योंकि इस पार …* *मैं तुम्हारी संगिनी हूँ ……..उस पार निस्संग जीवन है* *स्वागत के लिए ……………इस पार मैं सहधर्मिणी कहलाती हूँ ……..मातृत्व सुख से परिपूर्ण हूँ……………….. माता – पिता ह...
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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यह जीवन श्रृंगार प्रभु, जीवन के रास्ते कभी कठिन तो कभी सरल-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Friday, October 29, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
सबकी है सरकार प्रभु क्या सबको अधिकार प्रभु आमलोग जीते मुश्कल से इतना अत्याचार प्रभु साफ छवि लाजिम है जिनकी करते भ्रष्टाचार प्रभु मँहगाई, आतंकी डर से दिल्ली है लाचार प्रभु रिश्ते-नाते आज बने क्यों कच्चा-स...
 
कभी कभी कुछ लोगों से मिलता हूँ तो लगता है कि मैंने क्या मेहनत करी और क्या तिकडम ! लोग कितनी काम्प्लेक्स जीवन जी रहे होते हैं, शायद चिली की खदान में ६९ दिन फँसे लोगों से भी ज्यादा ! कुछ हफ्ते पहले ए...
 
एक ठो कुत्ता रहा। उसे चैन से बैठने की बीमारी नहीं थी। एक दिन सड़क पर बैलगाड़ी जाते देखा। बहुत धूप रही सो उसके नीचे चलने लगा। बड़ी राहत मिली। अब ताड़ गया तो हमेशा ऐसे ही करने लगा। कभी ये कभी वो... कुछ दिन...
 
राज्य के सर्वोच्च खेल पुरस्कार गुंडाधूर के लिए चुने गए अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मृणाल चौबे का कहना है कि उनके खेल को आज जो ऊंचाईंयों ङ्क्षमली हंै, वह सब मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा दी गई किट की बदौलत...
 
फ़ुरसत में... भ्रष्‍टाचार पर बतिया ही लूँ ! आज फ़ुरसत में भ्रष्‍टाचार पर कुछ बतियाने का मन बन गया। जब यह विषय मेरे मन में आया और अपने एक मित्र से कहा कि इस विषय पर अपने ब्लॉग ...
 
एक ब्लॉगर के रूप में अकसर पूछे जा सकने वाले प्रश्न और उनके संभावित सहायता उत्तर 1. मैं ब्लॉगर खाता कैसे बनाऊँ? 2. मैं ब्लॉगर ब्लॉग कैसे बनाऊँ? 3. मैं ब्लॉगर कैसे पोस्ट करूँ? 4. मैं तस्वीरे...
 
आज कुछ मौका मिला तो कम्प्यूटर खोलकर आप सबके साथ आ गया। कुछ ब्लॉग पर जाकर टिप्पणी भी की और इसी दौरान दिमाग ने अपना रंग दिखाना शुरू किया। बस टिप्पणी करना बंद और आ गये कुछ लिखने के लिए। इन दिनों अपने विधा...
 
"मैं यहां इस लिये नहीं हूं कि तुम मुझे समझ सको। मैं यहां इसलिये हूं
 
अनाज सड़ाने या फेंकने के बजाय गरीबों में बांटों : सुप्रीम कोर्ट* सुप्रीम कोर्ट ने एक बार केंद्र से कहा कि अतिरिक्त अनाज फौरन देश में भूखे और गरीबी रेखा से नीचे जीने वाले परिवारों को दिया जाए। कोर्ट ने कह...
 
अपनी हमउम्र टेलीविजन एंकर दोस्तों से जब भी बात होती है तो खुद अपने ही बारे में कहा करती है- मुझे पता है कि पांच-छ साल बाद हमें कौन पूछेगा? इसलिए सोचती हूं कि अभी जितना बेहतर कर सकूं( इस बेहतर में काम,पैस...
 
देविंदर शर्मा कुछ चौंकाने वाली छवियां मेरे मन में अब भी अंकित हैं. कोई 25 साल पहले मैं एक प्रमुख दैनिक में छपी खबर पढ़ रहा था, जिसमें लिखा था कि भारत में हर दिन करीब पांच हजार बच्चे मर जाते हैं. पिछले ...
 
पिछली पोस्ट में पेंटिंग का जिक्र था और कई लोगों ने सलाह दी...कि पेंटिंग को यूँ दरकिनार नहीं करना चाहिए.,उसे भी जारी रखूं. खैर मन में तो चलता ही रहता है कि 'हाँ ,पेंटिंग करनी है'. और पेंटिंग ने कई यादगार क...
 
कहते हैं कि दादा भाई नैरोजी के ड्रेन ऑफ वेल्थ सिद्धांत के प्रकाशन से पहले तक भारत के लोगों को नहीं मालूम था कि वे गुलाम हैं, जिसके कारण सालों-साल तक अंग्रेज भारत को अपना उपनिवेश बनाये रखने में कामयाब हुये...
 
सुबह सुबह बाहरी दरवाजे की हर आहट पर ध्यान रहता है , उधर घंटी बजी इधर बेटा दौड़ा , न्यूज पेपर आया होगा ? हर रोज यही सिलसिला ! आम तौर पर हेड लाइन्स देख , मज़मून भांपने की शैली में पेपर पढ़ना एक आदत निबाहने...
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 

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शर्म की पोशाक को वह छोड़ करके आ गया-सलमान यहां आकर छत्तीसगढ़ को खा गया-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Thursday, October 28, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
सलमान खान के छत्तीसगढ़ में किए गए सम्मान को लेकर राज्य में बवाल मच गया है। बवाल इसलिए मचा है क्योंकि सलमान की वजह से एक तरह से राज्य का अपमान हो गया है। राज्य का अपमान इस तरह से की राज्य के राज्यपाल और मुख...
 
महामहिम राज्य पाल दिनेश नंदन सहाय छत्तीसगढ राज्य का निर्माण 1 नवम्बर 1999 को हुआ, नए राज्य के उद्घाटन समारोह में मुझे भी शिरकत करने का मौका मिला। दिनेश नंदन सहाय जी को छत्तीसगढ का राज्यपाल बनाया गया था।...
 
चौखट पर खट कीजिए और झट से प्रवेश पाइये 
 
राम जन्मभूमि विवाद महज एक धार्मिक मसला नहीं है मगर पिछले दो दशकों से यह भारत के राजनीतिक मानसपटल पर काबिज है. इस फैसले को आप किस तरह देखते हैं?* इस फैसले का सार दो शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है: अपरा...
 
अरुंधती रॉय ने जो कश्मीर में या देश के अन्य हिस्सों में जाकर बयान दिए हैं, अवश्य ही वे देश के स्वाभिमान के लिए, देश की एकता के लिए और संप्रुभता के लिए उचित नहीं हैं, कभी कभी उनके विचारों से अपरिपक्वता...
 
अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा से पहले अमरीका ने कहा है कि भारत के उदय और महत्व को देखते हुए भविष्य में संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के किसी भी सुधार में भारत केन्द्र में होगा. ...
 
जा रे हंसा कागा देस मोरे बालम गए बिदेस। जो मोरे बालम उड़ना चाहें लेना पाँख लेस जो मोरे बालम रोना चाहें देना और कलेस। जा रे हंसा कागा देस। कागा देस की अजब रवायत मानुख बदलें भेस जो मोरे बालम सजना चा...
 
ओह उब गये हैं ... मन अब राम राम करने को चाहता हैं .... जय राम जी की ... विशेष सूचना : खास जनों को खास खबर : - बड्डे आए और निकल लिए ... 
 
शर्म की पोशाक को वह छोड़ करके आ गया
(ग़ज़ल ) * ** ** *शर्म की पोशाक को वह छोड़ करके आ गया * *वेबसी की **एक चादर ओढ़ करके आ गया । * ** *रक्त पीकर वह मनुज का कह रहा है शान से-* *रहगुजर में दो दिलों को जोड़ करके आ गया । * ** * गा रहे हैं गीत...
 
त्याग सूखी रोटी खाने में नहीं, आरज़ू को जीतने में है
त्याग यह नहीं है कि मोटे और सख्त कपड़े पहन लिए जायें और सूखी रोटी खायी जाये । त्याग तो यह है कि अपनी आरजू, इच्छा और ख्वाहिश को जीता जाये । 
 
खूबसूरती
मैने खुदा से पूछा कि खूबसूरती क्या है? तो वो बोले :::: खूबसूरत है वो लब जिन पर दूसरों के लिए एक दुआ है खूबसूरत है वो मुस्कान जो दूसरों की खुशी देख कर खिल जाए खूबसूरत है वो दिल जो किसी के दुख मे शामिल हो जाए...
 
एक इंसान ऐसा चाहिए : मनोज सिंह* * * रिश्तों में कुछ सीधी सरल सी उलझनें होनी चाहिए आदमी को जीना है गर तो एक अदद दुश्मन चाहिए मजा होश से जीने में है जानता हूँ मैं यह बात पर कभी साकी मिले तो दो घूंट पीनी चाहि...
 
तेरे प्यार में अभी तक मैं जहान ढ़ूढ़ता हूँ दीदार हो सका न क्यूँ निशान ढ़ूढ़ता हूँ जब मतलबी ये दुनिया रिश्तों से क्या है मतलब इन मतलबों से हटकर इन्सान ढ़ूढ़ता हूँ खोया है इश्क में सब आगे है और खोना खुद मिटा...
 
आहाह! आज छम्मकछल्लो को मज़ा आ गया. यह मज़े वह होश सम्भालने के बाद से ही लेती आ रही है. यह दीगर बात है कि अब वह होश खो बैठी है. आज वह कई बांस ऊपर उछल गई, जब उसे पता चला कि हमारा प्यारा, न्यारा, महान देश भ्रष्...
 
खामोशियों के किनारों से मौन की निशब्द बहती धारा में मुझे बहुत गहरे उतरना है और अंगार सी धधकती सीपियों से शीतल, सुमधुर, सुशांत शब्दों के माणिक मुक्ता चुन कर लाने हैं ! दर्द भरे स्वरों के आरोह अवरोह पर ...
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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परदेस में खिलती परंपरा-ब्रिटेन में दिवाली और छत्तीसगढ़ में राज्योत्सव-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Wednesday, October 27, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
अपनी माटी से दूर जा बसे हिन्दुस्तानी अपनी संस्कृति और परम्पराओं के बहुत करीब हैं। यह देखकर बहुत सुखद अनुभूति होती है की जहाँ भी भारतवासी रह रहे हैं अपने देश के तीज-त्योंहार और परम्पराओं को पूरे मन और मान...
छत्तीसगढ़ ओलंपिक के मिनी महाकुंभ के लिए रायपुर जिले के स्कूली शिक्षा विभाग ने १२ खेलों के लिए ४५ लाख के जम्बो बजट का प्रस्ताव बनाकर खेल विभाग को थमा दिया है। इसके पहले रायपुर के खेल विभाग ने २८ खेलों के लि...
अरुंधति राये* के खिलाफ कारवाई की अशंकायो के बढ़ते ही वैब मीडिया में इसके विरोध का स्वर भी तेज़ी से मुखर होने लगा है. विरोध और समर्थन की रेखा इस बार कुछ और गहरी हुई है. दोनों तरफ अपने अपने तर्क हैं जिनके ...
बचपन से ही मैं बाँये हाथ से लिखता था. लिखने से पहले ही खाना खाना सीख गया था, और खाता भी बांये हाथ से ही था. ऐसा भी नहीं था कि मुझे खाना और लिखना सिखाया ही बाँये हाथ से गया हो लेकिन बस जाने क्यूँ, मैं यह ...
समीक्षा*** आँच-41पर डॉ. जे.पी. तिवारी की कविता तन सावित्री मन नचिकेता हरीश प्रकाश गुप्त डॉ. जे.पी. तिवारी की कविता तन सावित्री मन नचिकेता हमें जाना है सुदूर.... इस महीतल के भीतर.. अतल-वितल गहराइयो...
अहमद *बुख़ारी द्वारा लखनऊ की प्रेस वार्ता में एक नागरिक-पत्रकार के ऊपर किये गए हमले के बाद कुछ बहुत ज़रूरी सवाल सर उठा रहे हैं। एक नहीं ये कई बार हुआ है की अहमद बुख़ारी व उनके परिवार ने देश के क़ानून को ...
गधा सम्मेलन के सफ़लता पूर्वक समापन पर गाल बजा बजा कर गाल दुखने लगे और सभी गधे अपने अपने धामों पर पहुँच कर अपने अपने हिसाब से तफरीह की रिपोर्ट पेश करने लगे, मेल मिलाप की फोटो लगाने लगे तो ताऊ धृतराष्ट्र महा...
दिवाली अभी दस दिन बाकी है लेकिन ब्रिटेन के भारतीयों ने दिवाली मना भी लिया .भारत देश के छत्तीसगढ़ प्रान्त में राज्योत्सव की धूम मची थी वहीं ब्रिटेन के एक गांव में करीब 40 हजार लोग बॉलीवुड संगीत, समोसे और भार...
ये सारे नेता गर्व महसूस कर रहे हैं , दबंग अभिनेता सलमान खान का सम्मान करते हुए , और सलमान हैं कि यहाँ इस उदघाटन के कार्यक्रम में बमुश्किल 5 मिनट रुके और वापस उड़ लिए अपने उद्योगपति दोस्त के साथ ।*छत्...
ए भटकती आत्मा!" अंसल प्लाजा में चलते हुए अचानक से पीछे से आवाज आई...जानती थी कि उसी की होगी...कुछ आवाजें कैसे वक्त की दहलीज पार कर एक झटके में वर्तमान में आ जाती हैं। इतने साल हो गए पर एक लम्हा ही लगा वाप...
व्यर्थ हृदय में ज्वार उमड़ता व्यर्थ नयन भर-भर आते हैं, पागल तुझको देख सिसकता पत्थर दिल मुसका जाते हैं ! युग-युग की प्यासी यह संसृति पिये करोड़ों आँसू बैठी, तेरे इन मानस मुक्तों की कीमत कौन लगा पाते हैं ! 
आज बहुत दिनों बाद लिखने का मौका मिला और जब मिला तो लगा कि क्यों न दिल कि बात करी जायें! नौकरी के कारण मुंबई आना पड़ा! पहली बार किसी शहर में इतने दिन रहा हूँ!! अभी भी दिल्ली दिल में ही हैं और दिल में ही रहे...
अभी सुबह ही भोपाल से लौटी हूँ। राष्‍ट्रीय नारी साहित्‍यकार सम्‍मेलन के एक सत्र में मुख्‍य वक्‍ता के रूप में मुझे भागीदारी निभानी थी। सम्‍मेलन सफलता पूर्वक सम्‍पन्‍न हुआ। इसके समाचार और कभी दूंगी लेकिन आज ज...
छत्तीसगढ़ का दूसरा बड़ा शहर बिलासपुर जहाँ प्रदेश का उच्च न्यायालय स्थित है औरं इस संस्कारधानी बिलासपुर को इसीलिये न्यायधानी बिलासपुर के रूप में भी जाना जाता है। बिलासपुर के आसपास रतनपुर, मल्हार, शिवरीनाराराय...
कौन कहता है कि मोहब्बत की किताब होती है ये तो दिल पर लिखी दिल की जुबान होती है मोहब्बत तूने कौन सी जुबान में कर ली यारा मोहब्बत तो हर जुबान में बेजुबान होती है मोहब्बत के ये कैसे खेल खेल लिए तुमने इस खेल...
ख़बरे कहती हैं की ? युवापीढ़ी बिगड़ गई है ! कितना आसां है किसी को दोष देना और इतना कहना की वो बिगड़ गया है हाथ पकड़ कर चलना तो उसने हमसे ही सिखा है घर मै रह कर ही तो कदम बढाना जाना है फिर उसका दोष पहल...
हुआ अरसा, कभी तो मिलो मेरे ख्यालातों के मोड़ पर, देखूँ, हैं कितना बदला तसब्बुर जो रखा ख्याबों में जोड़ कर है इल्म कि कुछ मुश्किल होगी पर खाली हाथ नहीं आना, इक्का-दुक्का ही सही - वो तीखी तकरार छिपा ...
  अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

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ये तो ले लेंगी देश की जान- अरुधंति से सावधान -ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Tuesday, October 26, 2010

 
 सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
क्या अरुधंति राय जैसी बाइयों से देश को सावधान रहने की आवश्यकता नहीं है? खुद को अतिबुद्धिजीवी मानने वाली अरुधंति का विचार देश को बांटने वाला है, और यह पहला अवसर भी नहीं है कि बाई ने ऐसा कहा हो। समय-समय पर अ...
 
निर्देशक जेनिफ़र लिंच द्वारा निर्देशित फिल्म -'हिस' में अभिनेत्री मल्लिका ने भारतीय संस्कारों को तिलांजलि दे दी है। पैसे और शोहरत के लिए पहले अपनी आत्मा को बेचा, फिर तन के कपड़ों को ।...
 
छत्तीसगढ़ सरकार ने सलमान के महज 10 मिनट के लिए ही लाखों रुपयों की बर्बादी कर दी। राज्योत्सव में बुलाए गए सलमान खान मंच पर बमुश्किल दस मिनट रहे और चले गए। सलमान तो आकर चले गए, पर उनके प्रशंसकों को उनके लिए ...
 
जो पीढ़ी इतिहास में हस्तक्षेप नहीं करती, इतिहास निश्चय ही उसका अनादर कर बैठता है। इसलिए इतिहास को प्रभावित करनेवाले गांधी, नेहरु और अम्बेदकर -सभी इतिहास की नवीन व्याख्या प्रस्तुत करते हुए इसकी धारा को मोड़न...
 
कविताओं में प्रतीक शब्दों में नए सूक्ष्म अर्थ भरता है  मनोज कुमार यर्थाथ के धरातल पर हम अगर चीजों को देखें तो लगता है कि हमारे संप्रेषण में एक जड़ता सी आ गई है। यदि हमारी अनुभूतियां, हमा...
 
उपयोगी लिंक्स की आज की कड़ी में पेश है ...पुराने तकनीकी के मास्साब :-) इ-पंडित जी के ब्लॉग से तकनीकी सहायता - ऑफिसटैब – माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में टैब इण्टरफेस लाने हेतु प्लगइन - गूगल ट्राँसलेट अब हिन...
 
समर्पण: उन हरामखोरों(स्त्रीलिंग सम्मिलित समझें) को जो विरुद्ध वीणा वादन के असाध्य रोगी हैं। कभी राग नक्सली, कभी राग आतंकवादी, कभी राग ज़िहादी, कभी राग अलगाववादी, कभी राग छिनरई और कुछ नहीं तो राग कश्मीरी ह...
 
 ऑक्टोपस यानी " पॉल बाबा " का कल रात अचानक निधन हो गया . फुटबॉल वर्ल्ड कप के विभिन्न मैचों की सही भविष्यवाणी कर सुर्खियों में आने वाले जर्मनी के ऑक्टोपस पॉल अब नहीं रहे . अपनी सही भविष्यवाणियों के चल...
 
"मैं यहां तुम्हारे मुखौटे को नष्ट करने के लिये और तुम्हें तुम्हारी निजता लौटाने के लिये हूं। मैं तुम पर कोई धर्म नहीं लाद रहा। मैं तुम्हें यहां पूर्णतया निर्भार कर देने के लिये हूं - बिना किसी धर्म, बिना क...
 
अपना तकिया,अपना बिस्तर अपनी दीवारें...और अपना खाली-खाली सा कमरा...जिसने पूरे चौबीस साल तक उसकी हंसी-ख़ुशी-गम -आँसू सब देखे थे. उसके ग़मज़दा होने पर कभी पुचकार कर अंक में भर लेता , कभी शिकायत करता ,इतना...
 
बीते लम्हों की ही तो ये बात है ! फुर्सत के पलों की ही तो ये रात है ! जब चाँद के पहलु मै हम बेठे रहते थे ! उसे निहारते -२ ही न हम थकते थे ! कितनी हसीन लगती थी वो चांदनी रात ! जब खामोश रात मै उसकी चांदनी 
 
कुछ गूंगी और कुछ बहरी तस्वीरें
दहाये हुए देस का दर्द-69 यह कौन-सी जगह है, यह कैसा दयार है ? किसका निजाम है यह, यहां किसकी हुकूमत है ? इन चित्रों को देखकर आपके मन में भी ये सवाल उठ सकते हैं। जिनके जवाब हैं- यह पूर्वोत्तर बिहार के ...
 
करते हो क्यूँ न पहल तौबा-तौबा ।
*दो गज़लें* *(एक)* *है अचंभित हवा ये पहल देखकर * *ताश के जो बने हैं महल देखकर । * ** *कंपकंपी सी हुई और शहर रो पडा-* *इस जमाने का रद्दोबदल देखकर । * ** *मैंने समझा शहर में तबाही हुई-* *अपने बेटों की आँखें ...
 
जब आसमाँ के चाँद से पहले मेरा चाँद आ जाता है फिर और क्या हसरत रही बाकी हर हसरत को पंख मिल जाते हैं परवाज़ बेलगाम हो जाती है जब मोहब्बत रुहानी होती है तब बिना कहे बात होती है मेरा चाँद बिना बोले सब सुनता है औ...
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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दिल सबका खिल जाए-जब आत्मिक मिलन हो जाए-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Monday, October 25, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
 
यूँ तो करती हूँ हर साल करवाचौथ का व्रत तुम्हारी लम्बी उम्र की दुआएँ करने का रिवाज़ मैं भी निभाती हूँ हर सुहागिन की तरह मगर फिर भी कहीं एक कमी लगती है एक कसक सी रह जाती है कोई अदृश्य रेखा बीच में ...
 
चवन्नी जानेमन-अठन्नी दिलरूबा बेचारा दो का नोट बीमार पड़ गया बीमार पड़ गया डॉक्टर आ गया डाक्टर आ गया, सुई लगा गया सुई थी गलत ,बेचारा मर गया बेचारा मर गया, भूत बन गया भूत बन गया, सबको खा गया सबको खा गया, ...
 
नमस्कार, आज ब्लॉग वार्ता पर सिर्फ़ कुछ लिंक ताऊ पहेली - 97 (Amar Singh Palace/--Amar Mahal Museum , Jammu ) विजेता : श्री प्रकाश गोविंदप्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी...
 
दुनिया का दौरा करके हम अभी लौट रहे हैं। इस दौरे में हमें एक क्षण का भी आराम नहीं मिला। यह दौरा जरूरी था। इराक में युध्द के लगभग निश्चित खतरे तथा अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संकट के गहराने के बीच 24 और 2...
 
 
लघुकथा वसुधैव कुटुम्बकम् सत्येन्द्र झा [image: images (4)] एक पत्रिका के प्रकाशन की योजना बन रही थी। प्रकाशक और सम्पादक विचार-विमर्श कर रहे थे। "राजनितिक चर्चा कौन लिखेगा?" "मेरा छोटा पुत्र। उसे राज...
 
प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 97 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है Amar Singh Palace/--Amar Mahal Museum , Jammu और इसके ब...
 
अक्तूबर इस साल का सबसे लंबा महीना होगा. इसी महीने दुनिया के बहुत सारे देश अपनी अपनी घड़ियां एक घंटा पीछे करेंगे.हर साल अक्टूबर के आखिरी रविवार को समय पीछे होता है और मार्च में फिर से घड़ियां घ...
 
पढ़ने के लिए शीर्षक पर क्लिक कीजिए संजो लीजिए और पढ़ जाइये व्‍यंग्‍य यात्रा और गगनांचल के संपादक श्री प्रेम जनमेजय को प्रदान किए जा रहे आचार्य निरंजननाथ सम्‍मान की विस्‍तृत जानकारी इन्‍हीं पन्‍नों पर पढ़...
 
नईदुनिया में प्रकाशित मेरा व्यंग्य क्या खाक मने दिवाली पढ़िये व्यंग्यलोक पर। आपकी प्रतिक्रिया, आलोचना समालोचना का इंतज़ार रहेगा। *प्रमोद ताम्बट* भोपाल www.vyangya.blog.co.in http://vyangyalok.blogspot.com व...
 
जब एक पुरुष की नौकरी विदेश में लगती है , तो उसकी पत्नी अपनी नौकरी , अपना करियर , अपनी महत्वाकांक्षाएं त्यागकर और स्वजनों का मोह छोड़कर , अपने पति के साथ विदेश आ जाती है। एक स्त्री के इस निर्णय के पीछे उसको...
 
उपरी बाहय जगत की चमक को देखकर कभी कभी ईमानदार मन भी बेईमानी करने को उतारू हो जाता है तो समझ लेना चाहिए की व्यक्ति का सर्वनाश निकट ही है . बेईमानी से रुपये और पैसा कमाना बड़ी बात नहीं है पर मनुष्य को बेईमा...
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 

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दिल की हिफ़ाजत मैं करने लगा हूँ..., पता पूछते हैं लोग -ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Sunday, October 24, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
बस ऐसे ही, दो रोज पहले एक मंच के लिए गीत गुनगुनाया तो सोचा सुनाता चलूँ, शायद पसंद आ जाये. [image: sadsam] जब से बसाया तुझे अपने दिल में, दिल की हिफ़ाजत मैं करने लगा हूँ... नहीं कोई मेरा, दुश्मन जह...
 
पता पूछते हैं लोग [image: photo Gyan] ज्ञानचंद मर्मज्ञ पानी में मछलियों का पता पूछते हैं लोग, आंसू से सिसकियों का पता पूछते हैं लोग ! बारूद के ईमान पर है इतना भरोसा, माचिस की त...
 
छत्तीसगढ में जलावायु परिवर्तन के प्रति चेतना जगाने के लिए रायपुर जिले के समस्त स्कूलों में कार्यक्रम किए गए। अशोक बजाज जी के नेतृत्व में इस कार्यक्रम को अच्छा प्रतिसाद मिला। कार्यक्रम के लिए पहल IASRD के अ...
 
लघुकथा के लिए काम्बोज जी को चंडीगढ़ में सम्मानित किया गया ये हमारे लिए बड़े गर्व की बात है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं, मेरे कुँअर परिवार की ओर से काम्बोज जी को हार्दिक बधाई... *23 अक्तुबर चंडीगढ़ *1-...
 
उत्तरी कैरोलिना से सुप्रसिद्ध साहित्यकार आदरणीया डॉ.सुधा ओम ढींगरा जी के सौजन्य से ये रिपोर्ट प्राप्त हुई.. सोचा आप सब साथियों से साझा कर लिया जाए.. भारतीय संस्कृति और सभ्यता के प्रसार का सम्माननीया डॉक्...
 
ब्रह्मांड में कहीं छिपी हुई एक अनजानी दुनिया, जिसका अभी तक पता नहीं है. ये अब तक साइंस फिक्शन लिखने वालों के काम की चीजें रही हैं. लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद हैं कि अगले साल तक इस सिलसिले म..
 
अपनी बहुत सुना लिए, आज दो दूसरों की (मुझे बहुत बहुत पसन्द हैं): *बुद्धिनाथ मिश्र * एक बार जाल और फेंक रे मछेरे जाने किस मछली में बंधन की चाह हो.... ........ रेत के घरौंदों में सीप के बसेरे इस अंधेर में क...
 
ईर्ष्या एक घातक मानसिक रोग है, इसका उदाहण ब्लॉग-जगत में भी मौजूद है। अब मुझसे ईर्ष्या करने वाले एक अत्यंत बुद्धिजीवी ब्लोगर ने मेरे ही नाम की एक फर्जी 'ZEAL '- ID बनायीं है । जिससे वो हर एक ब्लॉग पर जाकर म...
 
अब से आँखों के आगे पसरे मंज़रों को झुठलाना होगा, कानों को चीरती अप्रिय आवाजों को भुलाना होगा, मन पर पड़ी अवसाद की शिलाओं को सरकाना होगा, दुखों के तराने ज़माने को नहीं भाते कंठ में जोश का स्वर भर कोई मनभाव...
 
 उत्तर प्रदेश में इन दिनों पंचायत चुनावों की धूम है .आज आख़िरी चरण के मतदान के लिए पोलिंग पार्टियां रवाना हो गयी हैं -कल मतदान है .हम सरकारी मुलाजिमों की हालत हलकान है ..पिछले डेढ़ माह से हम निर्वाचन आयोग के...
 
चंद्रपुर चंद्रहासिनी देवी के समक्ष बलि दिए जाने का पुरजोर विरोध फिर हुआ। बरसों से चली आ रही बलि प्रथा की खिलाफत कुछ वर्षों से होने लगी है। नवरात्री में देवी के समक्ष पशु बलि धार्मिक परंपरा और आस्था से जुडी...
 
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त की उपस्थिति में आज रायपुर के पुलिस परेड मैदान में भारतीय सेना के जवानों ने जमीन से लेकर आसमान तक साहसिक और रोमांचकारी कारनामों का प्रदर्शन किया। छत्तीसग... 
 
आज के दौर में वर्चुअल वर्ल्ड में आई नजदीकियों की हकीकत....... पूरी पोस्ट कृपया यहाँ पढ़ें
 
सैन फ्रांसिस्को*.इंटरनेट सर्च इंजन गूगल इंक. ने मान लिया है कि उसकी ‘स्ट्रीट व्यू’ कारों ने दुनियाभर में हजारों लोगों के निजी आंकड़े जमा कर लिए हैं। इनमें लोगों के पूरे ई-मेल तथा उनके पासवर्ड भी शामिल ...
 
२१ वीं सदी की नारी है हाँ , चैट कर लेती है तो क्या हुआ ? बहुत खरपतवार मिलती है उखाड़ना भी जानती है मगर फिर लगता है बिना खरपतवार के भी आनंद नहीं आता इसलिए साथ- साथ अच्छी फसल के उसे भी झेल लेती है २१ व..
 
 
 
  अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 

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आओ करवाए छुट्टी में ब्लागों की सैर-पढ़कर ब्लाग आप भी बना जाओ शेर-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, October 23, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
हमारी कोशिश रहती है कि हम अपनी इस चौपाल में ज्यादा से ज्यादा नए ब्लागों को शामिल कर सके। हमें जब भी समय मिलता है तो हम किसी भी नए ब्लाग में जाकर उसके समर्थक बनते हैं ताकि उस ब्लाग की पोस्ट हम देख सकें और उसे चौपाल में शामिल कर सके। जो मित्र चाहते हैं कि उनके ब्लागों को भी चौपाल में स्थान मिले तो अपने ब्लाग के लिंक दे ताकि हम उनके ब्लागों को भी चौपाल में शामिल कर सके। 
भारतीय काव्यशास्त्र-लक्षणा
भारतीय काव्यशास्त्र-लक्षणा आचार्य परशुराम राय शुद्धा लक्षणा और गौणी लक्षणा के लिए भेदक रेखा आचार्य मम्मट 'उपचार' को मानते हैं। यहाँ 'उपचार' का अर्थ है - *अत्यन्त भिन्न दो पदार्थों में अत्यन्त सादृश्य...
हमारे ब्लागों को मिलाकर कब की 2000 पोस्ट पूरी हो गई है और हमें पता भी नहीं चला। कल रात को कुछ समय मिला तो सोचा कि चलो देखते हैं हम कहां तक पहुंचे तो ब्लागों की पोस्ट जोडऩे पर मालूम हुआ कि 2000 पोस्ट कब की ...
प्रिय ब्लॉगर मित्रो, प्रणाम ! भारतीय शोधकर्ता हरि कृष्णा प्रसाद वेमुरू को भारत में इलेक्टॉनिक वोटिंग मशीन [ईवीएम] में खामी का दावा करने पर भले ही जेल जाना पड़ा लेकिन अमेरिका में इसके लिए उन्हें एक प्रतिष्...
नमस्कार मित्रों! मै मनोज कुमार एक बार फिर हाज़िर हूं रविवासरीय (२४.१०.२०१०) चर्चा के साथ। आज के मेरे चुने हुए पांच पोस्ट लेकर। आज की बात मैं उस्ताद जी की बात से शुरु करना चहता हूं। पहले उनको नमन तो कर लूं...
*चमारिन बाई को मिला पहला यू.आई.डी. कार्ड* देश के हर व्यक्ति का अब अलग पहचान नंबर होगा जिसे यू . आई . डी . नाम दिया गया है .यह अनोखी राष्ट्रीय परियोजना है,जो नेशनल आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा ..

मुझे बाबा रामदेव अच्छे लगते हैं। वे इच्छाओं को जगाते हैं आम आदमी में जीने की ललक पैदा करते हैं। भारत जैसे दमित समाज में इच्छाओं को जगाना ही सामाजिक जागरण है। जो लोग कल तक अपने शरीर की उपेक्षा करते ...
अग्रोहा गणराज्य के संस्थापक महाराजा अग्रसेन की गौरव गाथा आज भी कही जाती है। पाँच हजार वर्ष पूर्व एक ऐसा राजा हुआ जिसके राज्य में लोकतंत्र था। दुनिया में असंख्य राजा हुए उनमें महाराजा अग्रसेन ने जो मिसाल का...
मैं यहां तुम्हें कोई सिद्धांत देने के लिये नहीं हूं। सिद्धांत तुम्हें आश्वस्त करता है। मैं तुम्हें भविष्य के लिये कोई वादा देने के लिये नहीं हूं -भविष्य का वादा तुम्हें सुरक्षा में ले जाता है। मैं यहां तुम्...
(1) पसीना टेबल पर टपकता है। खेत में टपकता है। फर्श पर टपकता है। दिन भर काम करते थक जाता है - बिस्तर में रिसता है। (2) पसीना निकलता निर्गन्ध है । हवा, इत्र, फुलेल, साबुन बिगाड़ देते हैं आदत। कुछ भी क...
आधुनिक परिवेश में,आज के चकाचौंध की इस दुनिया में फैशन के नाम पर सावन के महिनें में, गणेश प्रतिमा स्थापना या नवरात्रि में दुर्गा प्रतिमा स्थापना, दशहरा के नाम पर लाखों-करोड़ों रूपये खर्च कर दिये जाते हैं । 
भूल जाओ भाव बस सामने देखे चलो दिखी दूर अंधड़ हेराये के लंगड़ अपनी बिन पालों वाली नाव? डगराये डोलती अभी डूबी नहीं है तुम ऊबे हाथ झाड़ रहे हो, या जाने अंधारे संझा की मोहब्‍बत नहाये गहीन ज़ि‍रह अपने उता...
अगर आप माइक्रोसोफ्ट ऑफिस प्रोग्राम्स का मुफ्त विकल्प तलाश रहे हैं तो वो ही OpenOffice हो सकता है इस उपयोगी प्रोग्राम पैक का नवीनतम संस्करण OpenOffice.org 3.3.0 RC2 अब उपलब्ध है आपके लिए । इसमें आप लगभग ...
सन्दर्भ के लिए यहाँ मैं हिन्दी विकीपीडिया में हिन्दी और सम्बंधित तकनीकी मुद्दों पर आधारित उपलब्ध आलेखों का लिंक दे रहा हूँ | • *हिन्दी कम्प्यूटिंग* • *हिन्दी टाइपिंग* • *हिन्दी चिट्ठाकारी* • *हिन्दी औ...
अब ना वह भीड़-भाड़ और ना गहमा-गहमी, * *हर शान्ति है और है सन्नाटा* *(दैनिक हरिभूमि के आज [23 अक्तूबर] के संस्करण में प्रष्ट न. 4 पर मेरा व्यंग्य)* दिल्ली वापिस आए तो सर चकरा गया। पहले-पहल तो लगा ही नहीं क...
इन दिनों पूरे देश ही नहीं छत्तीसगढ़ में जिसे देखो वही गुटखा-शराब के खिलाफत में उतर आया है। साधु संतों की बात करें या समाज सेवियों की सभी गुटखा-शराब के पीछे पड़ गए हैं। उन्हें लगता है कि ये आने वाले पीढिय़ों क...
आज हम सागर किनारे आये हैं कुच्छ उसकी और कुच्छ अपनी सुनाने लाये हैं ! किसको फुर्सत है इस भरी दुनिया मै , इसलिए सिर्फ तन्हाई ही साथ लाये हैं ! जानते है...
चाँद तश्तरी दूध भरा तालाब डूब जाए यूँ ..... ================ चाँद दुल्हन शर्माती है रातोंमें अकेली यूँ ही .... ================ चाँद कंगन पहन कर खुश पागल रात ..... ================= बिंदिया चाँद सजा गयी चेहर...
आज शनिवार को एक अंतराल के बाद आप सबके लिए फिर से चर्चा लेकर हाज़िर हूँ. जैसी चर्चा आज मैं करना चाहता हूँ उसकी मांग एक लम्बे समय से कुछ पाठक करते आ रहे हैं, यानी एकल चर्चा.. किसी एक ही रचनाकार की विभिन्न पो...
सदियों पहले मुगलों ने भारत पर आक्रमण किया और कई वर्षों तक हमारे ऊपर राज किया। फिर अंग्रेज आये और उन्होंने हमें लूटना शुरू किया । हम गरीब तो थे ही , कायर भी निकले। गुलामी में जकड़े रहना शायद हमें सुकून देता...
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

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शेयर बाजार पर ग्रहों का प्रभाव, दूध मत पीयो, सब्जी मत खाओ -ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Friday, October 22, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
प्राचीन काल से ही अज्ञानता जैसे शब्‍द से मानव जाति को सख्‍त नफरत रही है। शायद इसी कारण प्रकृति के उलझे हुए रहस्‍यों को न जान पाना उसके लिए एक भयंकर चुनौती बनी रही और उसने प्रकृति के सारी रहस्‍यों को सुलझान...
 
ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का” जब इस गीत को सुनता हूँ तो मुझे हाथ में रायफ़ल लिए सीमाओं की रक्षा करते जवान याद आ जाते हैं। वैसे भी मेरा लगाव सदा से सेना के साथ रहा है क्योंकि मेरे परिवार...
 
कब मिले , कैसे मिले याद नहीं मगर आज भी ऐसा लगता है जैसे युगों से एक दूसरे को जानते हैं ............तुम , तुम्हारी बातें और तुम्हारी नज़र का जादू , सब मिलकर किसी को भी मदहोश करने के लिए काफी होता था और फिर म...
 
फ़ुरसत में ... सबसे बड़ा प्रतिनायक/खलनायक मनोज कुमार आज फ़ुरसत में हूं। मन में रह-रह कर ख़्याल आता है कि अगर किसी एक सबसे बड़े खलनायक का नाम लेने को कहा जाए तो सबसे पहले किसका नाम आ...
 
बाबा रामदेव फिनोमिना मध्यवर्गीय घरों में घुस आया है। बाबा के सिखाए योगासन के अलावा उनकी बनाई वस्तुओं का भी बड़े पैमाने पर घरों में सेवन हो रहा है। देशी बाजार की उन्नति के लिहाज से यह अच्छा है। बाबा र...
 
प्रिय ब्लॉगर मित्रो , प्रणाम ! एक दिन नारद जी वाल्मीकि जी के आश्रम में पहुंच गए। उन्होंने महर्षि से प्रश्न किया कि वेदों में कहा गया है कि मनुष्य बनो। पर समझ नहीं आता कि वेदों को पढ़ने वाला मनुष्य ही होत..


हर बार घर से वापस आने का समय अजीब उहापोह लिए होता रहा है, इस बार भी कुछ अलग नहीं.. अंतर सिर्फ इतना की हर बार एक-दो दिन पहले ही सारे सामान तैयार रखता था आखिर में होने वाली हड़बड़ी से बचने के लिए, मगर अबकी स...
 
मेरे प्रेरणा श्रोत और जर्मनी के एकीकरण की २० वीं वर्षगाँठ
मैं मेट्रो ट्रेन के स्टेशन पर अपने प्रोग्रामिंग वाली चिंतन मुद्रा में खडा था और तभी एक छड़ी ने हलके से मेरे पैर को छुआ, और जैसे मेरे दार्शनिक भावों को एक तरंग सी दे दी. छड़ी वाला इंसान उस भीडभाड वाले ...
 
सहकारी आंदोलन का विस्तार* - छत्तीसगढ़ राज्य का गठन सहकारिता के लिए वरदान सिद्ध हुआ है। इन 10 वर्षों में सहकारी आंदोलन के स्वरूप में काफी विस्तार हुआ है। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से फ...
 
बहुत दिनों से एक बात दिमाग में कौंधती रही है कि किसी भी शादी में वर-वधु दोनो ही पक्ष बेहद खुश रहते हैं । खुशी-खुशी शादी होती है । सर्वाधिक खुशी माँ-बाप को होती है । खुशी का यह शायद अतिरेक का सा होता है जो...
 
राजधानी में पिछले दिनों संपन्‍न राष्‍ट्रमंडल खेलों के दौरान ऑस्‍ट्रेलियाई एथलीटों ने खेल गांव में न सिर्फ तोड़फोड़ की थी बल्कि एक करोड़ रुपये का सामान भी उठा कर ले गए। भारत की जमीन पर टेस्‍ट सीरीज में ऑस...
 
कल आयकर विभाग ने आमंत्रित किया था.राजभाषा मास के दौरान कुछ प्रतियोगिताए हुई थीं. उनका पुरस्कार बाँटना था. वहां पहली बार मेरी मुलाकात मुख्य आयकर आयुक्त श्री जैन से हुई. वे अभी-अभी हैदराबाद से रायपुर पदस्थ ...
 
शक- एक ऐसी कीटनाशक दवा, जिसके प्रयोग से- कीटों के साथ-साथ फसल भी समूल नष्ट . 
 
श्री ललित शर्मा जी आपका परिचय भारत के प्रसिद्ध चित्रकार एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व डॉ. डी. डी. सोनी जी से करवाने जा रहे हैं । इन्होने चित्रकला के क्षेत्र मे नए सोपान गढे हैं तथा अपनी जीवन यात्रा...
 
निगम अफसर एन .एस . राठौर के पास से  एंटी करप्सन को मिले बेहिसाब सम्प्पति . रायपुर दुर्ग बिलासपुर में जमीन जायदाद .
 
महंगाई कम करने का तो सरकार में दम नहीं है, लेकिन महंगाई बढऩे के दोष से अपने को बचाने के लिए सरकार तरह तरह के बहाने बनाने में जरूर उस्ताद है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया की बात सरकार माने...
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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देखते हैं कब तलक तुम हमको झेले जाओगे-अब कोई मोड़ तेरी राह तक नहीं मुड़ता-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Thursday, October 21, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
देखते हैं कब तलक तुम हमको झेले जाओगे मना करते रहेंगे फिर भी अपनी पेले जाओगे चीर उतरा द्रोपदी का कान्हा तो आया नहीं हार सब बैठे हो फिर भी खेल खेले
 
शिव स्वरोदय - शरीर में स्थित नाडियां आचार्य परशुरामराय प्रस्तुत अंक में शरीर में स्थित नाडियों के विषय में शिवस्वरोदय में वर्णित तथ्य दिए जा रहे हैं। *देहमध्ये ****स्थिता ****नाड्यो बहुरूपाः सुविस्तरात्...
 
कुछ भक्तजनों द्वारा आसमान में हमको अनगिनत संदेश भेजे गये. और बताया गया कि आजकल ब्लागाव्रत मे घोर अव्यस्था फ़ैली हुई है. एक अखण्ड ब्लागाव्रत की अवधारणा को कुछ तुच्छ मानसिकता वाले स्वयं भू क्षत्रपों ने खंडित...
 
दुनिया की जन्मदाता हैं औरत हजारो वर्ष पुराने इतिहास की गाथा हैं औरत जिस पर खड़े है हम ,वो धरती माता हैं औरत अबला कहा जाता हैं ,वही चंडिका हैं औरत इस जग में दुखिया का नाम है औरत चारो धामो का धाम है औरत भारत क...
 
इस अस्‍पष्‍ट वीडियो में जो आज राजधानी दिल्‍ली में बनाया गया है, आपने किन्‍हीं दो ब्‍लॉगरों को पहचानना है

याद करूँ बचपन को जब जब बेड़ी लगती पाँव में। जो कुछ मैंने शहर में देखा वो दिखते हैं गाँव में।। घूँघट में सिमटी दुल्हन अब बीते दिन की बात है। जीन्स पेंट, मोबाइल, टी०वी०, गाड़ी भी सौगात है। मन की बातें, अपना स...
 
कॉमन वेल्थ खेल ख़त्म..पुलिस ओर अपराधियों का खेल शुरू...रोहिणी सेक्टर 18 में दिन दहाड़े में रोड के एक फ्लेट को चोरों ने बनाया निशाना...दरवाजे का लोक तोड़कर करीब 7 लाख की चोरी...एयर होस्टेस, मंत्रालय ओर ...
 
साहब....'शार्टकट' में ''साब जी'' भी. हमारे यहाँ ये शब्द व्यंग्य में भी कहा जाता है. बहुत पहले एक फ़िल्मी गीत लोकप्रिय हुआ था-''साला मैं तो साहब बन गया, साहब बनके कैसा तन गया''. साहब बन कर अक्सर लोग तन जाते...
 
अब चुप रहना कायरता मानी जाती है,* *क्रोधित स्वर की शक्ति पहचानी जाती है।" इस लिंक पर जरुर जाए * 
 
बस स्टैंड में एक बस काफी देर से खड़ी थी तो झल्लाकर एक यात्री ने ड्राईवर से पूछ लिया - अरे भाई यह खटारा कब रवाना होगी ? ड्राईवर ने यात्री को उत्तर दिया - जब इस खटारा में कचरा पूरी तरह से भर जायेगा . 
 
पिछले सप्ताह एक के बाद एक तीन निकट सम्बन्धियों के मृत्यु समाचार से मन बेहद व्यथित है. कभी घर कभी बाहर की दौड़-भाग के बीच दिन-रात कैसे गुजर रहे हैं, कुछ पता नहीं चलता. मन में दुनिया भर की बातें घर करने लगत...
 
अब मंजिलों ने रास्ते बदल लिए हैं तुम्हारे मोड़ पर कभी मिलेंगे ही नहीं जो राह में बिखरे पड़े थे निशाँ सफ़र के वो भी अब दिखेंगे नहीं मोहब्बत के ज़ख्मो को सुखाना सीख लिया अब रोज आँच पर धीमे धीमे पकाती...
 
 
 
 
  अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 

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नजरों का यकीं, भूल गया था- ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Wednesday, October 20, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
कमरे में खड़ा खिड़की के बाहर देख रहा हूँ एकटक. वो नहीं दिखता जो बाहर है. नजर बस टिकी है लेकिन दिख वो रहा है जो मन में है. एक उड़ान मन की. विचारों की. कुछ उधेड़बुन तो कुछ धुंधली तस्वीरें हल्के भूरे रंग की. रं...
 
यह ग्राम चौपाल का शतकीय आलेख है, इस शतक को बनाने में हमें 150 दिन लगे। इस अवधि में 100 पोस्ट, 150 दिन,37 समर्थक, 741 टिप्पणियां प्राप्त हुई। वैसे तो ब्लॉग हमारा बहुत दिनों से तैयार था लेकिन पहली पोस्ट ...
 
सुना न कवि अब करुणा गान ! वितरित करता है कण-कण में अमर सत्य, वेदना महान् कवि यह तेरा करुणा गान ! यदि संसृति के वज्र प्रहारों से तेरा उर क्षत-विक्षत है, फिर भी मन की अस्थिरता क्या नहीं तुझे कुछ भी अवगत है ? ...
 
ब्‍लॉग जगत में सबसे अधिक बहस वाला मुद्दा हमारे धर्मग्रंथ बने हुए हैं। इनके पक्ष और विपक्ष में हमेशा तर्कों का खेल चलता रहता है। ताज्‍जुब तो इस बात का है कि न तो किसी के तर्क काटने योग्‍य होते , और न ही सहज...
 
मेरी एक पोस्ट "प्लीज़ रिंग द बेल" पर काफी अच्छा विमर्श हुआ और करीब करीब हर पहलू से समस्या को देखने की कोशिश की सभी ने. जिनलोगों ने विमर्श में भाग नहीं भी लिया उनलोगों ने भी दुसरो को यह पोस्ट पढने को रेकमे...
 
छत्तीसगढ़ के तमाम समाज के लोगो ने आज छत्तीसगढ़ बुनकर संघ की जमीन पर बालकृष्ण अग्रवाल का कब्ज़ा हटाने की मांग को लेकर रैली व् आमसभा की साथ ही यंहा से शराब दुकान हटाने की मांग भी की .समाज प्रमुखों ने इस दौरान स..

श्वेत-श्याम यादें/Vintage me :)
आज फिल्म देख रही थी, 'जाने भी दो यारों'...फिल्म के बारे में कभी बाद में कहूँगी...आज एक ऐसी चीज़ के बारे में जो मुझे बेहद पसंदीदा थी...अचानक याद आई..श्वेत श्याम फोटोग्राफी/black&white photography. कॉलेज मे...
 
प्रेम दीवाने जो भए भक्तिमती सहजोबाई * प्रसिद्ध संत कवि चरणदास की शिष्या भक्तिमती सहजोबाई का जन्म 25 जुलाई 1725 ई. को दिल्ली के परीक्षितपुर नामक स्थान में हुआ था। इनके पिता का नाम हरिप्रसाद और ...
 
परिणति
गोधूली की बेला में सुख दुख के पलड़े में कलुषित विचारों का गुरुत्व देख रही हूँ मैं. क्या किया रे मन तूने ... सदा अपनी उम्मीदों की पूर्णता के लिए तटस्थ रहा, प्रलाप करता रहा अपनी खुशी पाने के लिए. लेक...
 
मिली हवाओं में उड़ने की ये सज़ा यारो। कि मैं जमीं के रिश्तों से गया कट यारो। देख परफ्यूम , आई-पोड सजे मालों को, जी चमेली की गंध से गया हट यारो। मस्त रेस्त्रां के वो सिज़लर औ विदेशी डिश में, भूला चौके की वो भ...
 
"गुरू हमेशा एक मित्र होता है लेकिन उसकी मित्रता में बिलकुल अलग सी सुगंध होती है। इसमें मित्रता कम मित्रत्व अधिक होता है। करुणा इसका आंतरिक हिस्सा होती है। वह तुम्हें प्रेम करता है क्योंकि और कुछ वह कर नहीं...
 
पुलिस की बढती लापरवाही की वजह से दो लड़कियों को छोडनी पड़ी पढाई ----मामला उत्तरी दिल्ली के बुरारी थाने का है जहाँ कुछ मनचलों के छेड़ छाड़ से परेशान दो लड़कियों को अपनी पढाई ही छोडनी पड़ गयी ---कोर्ट के निर्...
 
आखिर कब सुधरेंगे हम ?
बड़े शर्म की बात है कि आए दिन सचेत करते रहने के बाद भी हम लोगों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है । इसी का प्रत्यक्ष प्रमाण बयां कर रही है आज नई दुनिया अखबार में ”आस्था का कचरा” नाम से प्रकाशित फोटो ।यूं तो...
 
दोस्तों, आप सबके द्वारा कहानी और कवितायेँ पसंद करने के लिए बहुत आभारी हूँ ...............आज उसी भाव की एक दूसरी कविता लगा रही हूँ ..........उम्मीद है ये भी आपकी कसौटी पर खरी उतरेगी ................... ल...
 
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 

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"भौं भौं खों खों का गेम-कांग्रेस का काला चेहरा-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Tuesday, October 19, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
नमस्कार मित्रों! आज बुधवार है और हर बुधवार को चर्चा मंच पर चर्चा करने की जिम्मेदारी मेरी है! इसलिए मैं लेकर आया हूँ कुछ ब्लॉग-पोस्टों के शीर्षकों को! शायद आप इसके लिए तैयार होंगें। आपके अन्तर्मन से मुझे सु...
 
कांग्रेसियों का काला चहेरा एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजधानी में तब सामने आया जब कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने अपने ही केन्द्रीय मंत्री नारायण सामी के चेहरे पर कालिख लगाने का काम किया। इस मामले के बाद आरोप-प्र...
 
भाजपा नेताओं से संबंध, गुटबाजी चरम पर, पैसा कमाना उद्देश्य  कमजोर नेतृत्व गुटबाजी और पार्टी में दलालों की सक्रियता ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बदतर स्थिति में ला खड़ा किया है। हालत यह है कि कांग्रेस के नेत...
 
 
यह तो लय है जी लय की जय है जी तुक अच्‍छी लगती है बेतुकों के शहर में बातें होती हैं बेतुकी तुक मिल जाती है यह तो लय है जी लय की जय है जी मन को भाती है तुक देती है अच्‍छा लुक रूक जल्‍दी से रूक टिप्‍पणी दे ..

कार्टून के माध्यम से कुछ कहने की कोशिश की है.. दीपक 'मशाल' 
 
देसिल बयना – 52 चोर के अर्जन सब कोई खाए, चोर अकेला फांसी जाए ! कवि कोकिल विद्यापति के लेखिनी की बानगी, "देसिल बयना सब जन मिट्ठा !"* दोस्तों हर जगह की अपनी कुछ मान्यताएं, कुछ रीति-रिवाज, कुछ संस्कार और क...
 
क्या पत्रकार का असहाय होना जुर्म है? : आज ना जाने क्यों अपने पत्रकार और ईमानदार होने पर पहली बार शर्म आ रही है। आज दिल चाह रहा है कि अपने सीनियर्स जिन्होंने हमको ईमानदार रहने के लिए शिक्षा दी उन पर मुकदम...
 
हिन्दी के उत्थान के नाम पर सार्वजनिक तौर पर जो कुछ हो रहा है उसकी सामाजिक समीक्षा की सख्त जरूरत है। हिन्दी के नाम पर सरकारी स्तर पर बहुत सारे अपव्यय और अगंभीर अकादमिक कार्य हो रहे हैं। इनमें दो संस...
 
कैरिबियाई देश त्रिनिडैड एंड टुबैगो की भारतीय मूल की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर ने बीबीसी हिंदी के राजेश प्रियदर्शी के साथ एक विशेष इंटरव्यू में भारत के साथ अपने भावनात्मक संबंधों पर विस्तार से बात की...
 
मित्रों, एक लम्बे अंतराल के बाद आप सब से मुखातिब हूँ. इस बीच कुछ समय के लिए जननी और जन्मभूमि की चरण-रज लेने हेतु भारतवर्ष गया. अपने इस यात्रा में हमने अजंता-एल्लोरा और देवगिरी दुर्ग (दौलताबाद) की भव्य वि...
 
सबकी अपनी-अपनी मंजिल होती है. पूरा जीवन उसे पाने की यात्रा है. किसी को धन चाहिए, किसी को भवन चाहिए. किसी को यौवन चाहिए. किसी को अधिकार, किसी को अनेक लोगों काप्यार..तरह-तरह कि मंजिलें हैं. मुझे दूसरों की म...
 
यह एक चुराया हुआ शीर्षक है जिसे एक सम्मानित टिप्पणीकार की एक टिप्पणी से मैंने उड़ाया है. वैसे सम्मानित टिप्पणीकार ज्यादातर एक ही चिट्ठे पर अपने विचार पुष्प बिखेरते पाए जाते हैं. मुझे क्या ,मगर बात अब बर्दा...
 
अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा में हाल में सम्पन्न हिन्दी ब्लॉगर संगोष्ठी पर बहुत कुछ कहा सुना जा चुका है। कतिपय व्यक्तिगत कारणों से मैं वहाँ जा नहीं पाया जिसका मुझे हमेशा दु:ख रहेगा। प्रयाग के...
 
मुद्दों की भीङ में मुद्दे की तलाश
लोग मुझसे पूछते है अक्सर लिखना क्यूँ छोङ दिया...मेरा जवाब एक सा ही रहता है...मन नहीं करता...बस। पर फिर ये सवाल बार बार ज़हन में आता है कि क्या सच में केवल यहीं कारण है मेरे न लिखने का? लेखन न केवल मेरे प...
 
"लोग मुझसे पूछते हैं, "पूरा विश्व आपके विरोध में क्यों है?" विश्व मेरे विरोध में नहीं, मैं संसारविरोधी हूं, क्योंकि मैने सत्य को चुना है। और मैं वही कहूंगा जो पूर्णतःमेरा अनुभव है।मैं किसी भी तरह का समझौता...
 
आज से १९ साल पहले मेरे जन्मदाता ने मुझे छोड़ा था और उसके ठीक ७० दिन बाद मेरे इस पिता (ससुर ) ने जो धर्मपिता भी होते हैं. आदमी को याद तो किया जाता है लेकिन कुछ ऐसे लोग होते हैं कि ...
 
दोस्तों, आप सबके द्वारा कहानी को इतना पसंद करने के लिए आप सबकी तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ . कई दोस्तों ने कहा कि कहानी आगे बढाइये या कहानी में लम्बी कहानी का कथानक है मगर कभी- कभी कुछ अंत हमारे हाथ में ...
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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