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आज का ख्याल, डिजिटल मनमोहन के डिजिटल शत्रु- ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, July 31, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
 
छुट्टी का दिन है और काम बहुत ज्यादा है, इसलिए आज सीधे चर्चा करते हैं- 
 
मनमोहन सिंह जब से प्रधानमंत्री बने हैं। वे मीडिया और विशेषज्ञों की आलोचना में नहीं आते। उन्हें प्रधानमंत्री बने 6 साल से ज्यादा समय हो गया है। मीडिया में ममता बनर्जी,शरद पवार ,प्रफुल्ल पटेल ,डी..
 
अभी कुछ दिन पहले गाँव गई थी तो शाम के वक्त घूमते घूमते खेतों की तरफ निकल गई .वापस लौटते समय रास्ते में बहुत धुल उड़ रही थी क्योंकि मेरे साथ लौट रहे थे सारे चरवाहा अपने अपने पशुधन को लेकर और और वो धूल उड ...
 
घड़ी पर नज़र डाली, छः बजकर बीस मिनट, और मैने मोबाइल हाथों में लिया,मेसेज टाइप करने को कि I m ready और तभी घंटी बज उठी. सहेली का मिस्ड कॉल था. मोबाइल वहीँ रखा, क्यूंकि तेज बारिश हो रही थी. घर की चाबी उठाय...
 
सामाजिक मनोविज्ञान के कुशल चितेरे प्रेमचन्द [image: मेरा फोटो] हरीश प्रकाश गुप्त 'कोई घटना तब तक कहानी नहीं होती जब तक कि वह किसी मनोवैज्ञानिक सत्य को व्यक्त न करे।' इस कथन से उनकी कहानियों में आ...
 
हिंदी के परम पक्षधर को नमन...* *रा*जर्षि पुरूषोत्तम दास टंडन,भारत के महान स्वतन्त्रता सेनानी थे।उनका जन्म १ अगस्त १८८२ को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद मे हुआ। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका नि...
 
शरद कोकास कहते हैं- उदासी मन का एक्स रे होती है
कल शाम बारिश हो रही थी ... लगातार एक सुर में ... चारोँ ओर एक खामोशी सी छाई थी ... अचानक मोबाइल पर एक सन्देश आया .. कैसी बारिश है यह ..ऐसा लगता है जैसे कोई बिना आवाज़ रो रहा है । मन अच...
 
भाग 1 * *भाग 2 **से जारी ...* ** *मेरे प्रश्न का उत्तर मेरा ही एक दूसरा प्रश्न? प्रेम सचमुच ही ऐसे सराबोर कर देता है क्या कि मन बस प्रिय ही प्रिय, प्रियमय हो जाय? कितना रहस्यमय, बहुअर्थी उत्तर था वह! एक द...
 
क्या मंदिर-मस्जिद किसी इंसान की जान से बढ़कर हो सकते है? --- शाहनवाज़
हमेशा ही लोगो को मंदिर-मस्जिद, ज़ात-पात, हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर लडवाया जाता है. 90 के दशक अथवा उससे पहले लोग बहुत जल्दी बहकावे में आते थे, धीरे-धीरे जनता राजनैतिक दलों की चालों को समझने लगी, और फिर ऐसे रा...
 
ये हैं श्री राजीव तनेजा और ये हैं श्री पवन चन्दन * *आज ये दोनों उपस्थित हैं सितारों की महफ़िल में .....* *ब्लोगोत्सव-२०१० पर* *सितारों की महफ़िल में आज राजीव तनेजा* *सितारों की महफ़िल में आज पवन चन्दन* *क्य...
 
अखबारों ने कहा- "वह इतिहास की सबसे बड़ी रैली थी'' लायी गयी औरतों ने कहा- "प़ूडी के साथ जलेबी भी बासी थी'' वहां सब कुछ थे माइक थे, मंच थे मुद्दे और महंथ थे रंग-विरंगे शामियानों में एक ही रंग के नारे थे वे ब...
 
वन्दना कहती हैं-ज़िन्दगी का हिसाब -किताब
ज़िन्दगी के हिस्से होते रहे टुकड़ों में बँटती रही बच्चे की किलकारियों सा कब गुजर गया बचपन और एक हिस्सा ज़िन्दगी का ना जाने किन ख्वाबों में खो गया मोहब्बत ,कटुता भेदभाव,वैमनस्यता अपना- पराया तेरे- मे...
 
अमेरिकाके एक प्रायमरी स्कुलमें बच्चोके साथ हिलने मिलने गए । क्लासमें थोड़ी बातें बातें करने के बाद ओबामाने पूछा ,"किसीको कुछ पूछना है ?" जॉन नामके लड़के ने पूछा :१...अमेरिकाने इराक पर हमला क्यों किया ? २...जो ...
 
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 

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प्रेमचंद के साथ रफी को भी कर लो यादः- ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Friday, July 30, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

 
 
एक तरफ जहां आज मुंशी प्रेमचंद की जयंती है तो दूसरी तरफ महान गायक मो. रफी साहब की पुन्यतिथि है। हमने ब्लाग जगत में प्रेमचंद को याद करते कुछ ब्लागरों को देखा है, पर रफी साहब को किसी ने याद नहीं किया है। चलिए हम ही उनकी याद दिला देते हैं।
 
 
मनोज कुमार आज का सारा दिन हम मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर समर्पित कई पोस्ट इस ब्लॉग पर प्रस्तुत करेंगे! इसी श्रृंखला की प...
 
 
मुंशी प्रेमचन्द जयन्ती पर विशेष* मुंशी प्रेमचन्द एक अच्छे साहित्यकार थे उन्होनें हिन्दी,अंग्रेजी एवं उर्दू तीनों भाषाओँ में अच्छी रचनाएं प्रस्तुत की। उन्होंने अपनी रचनाओं में गरीबों क...
 
  *शून्य* !! विचारों की आँधी अगर शून्य हो जाए तो ? मन की उद्वेलना शून्य हो जाए तो ? या फिर भारत में नेताओं कि संख्या शून्य हो जाए … शून्यमय संसार में क्या होगा …शांति ? या फिर...
 
शुक्र है ! मेरे घर की दीवारें विश्वास के फौलाद से बनीं हैं, वर्ना ये कल के बच्चे बतकही के पत्थर फेंकने से बाज़ नहीं आते कितने मासूम हैं ये ! इतना भी नहीं समझते ! मेरा घर शीशे का नहीं है जो टूट जाएगा....!! 
राहुल महाजन एक बार फिर अपनी हरकतों की वजह से विवादों के बवंडर में फंस गये हैं। उनकी पत्नी डिंपी गांगुली ने मारपीट और गाली-गलौज करने का आरोप लगाते हुए उनका वरली स्थित घर छोड़ अपने पिता के यहां चली गई हैं। ...
 
यही सही: सप्तक: "मेरे जीवन में एक बड़ा विस्फोट था बेटी का मेरे जीवन में आना और उससे भी बड़ा उसके काफी अरसे बाद मां-बाबूजी की जीवन में वापसी इस प्रकार खत्म ह..." सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ 
टमाटर अब वे टमाटर नहीं रहे जो खुद होते थे लाल अब वे कर रहे हैं खरीदने वालों को लाल देखिए गिफ्ट करने का बन गए हैं माल सावन आया झूम के लेकर आया है सम्‍मान युवा कवि है कौन बतलाएगा अभी रहेगा मौन लिखावट...
 
आज फेसबुक पर विचरण करते हुए एक मित्र के फेसबुक एल्बम में एक विज्ञापन पट्ट का चित्र मिला जो यहाँ प्रस्तुत है आप भी इस विज्ञापन पट्ट को देखिये और सोचिये इसकी भाषा के बारें में मेरी शेखावाटी: ब्लोगिंग के दु...
 
 ये स्साला!…कम्प्यूटर भी गज़ब की चीज़ है ....गज़ब की क्या?..बिमारी है स्साला…बिमारी| एक बार इसकी लत पड गयी तो समझो कि..बन्दा गया काम से|कुछ होश ही नहीं रहता किसी बात का..ना काम-धन्धे... 
 
एक लम्बा अरसा हो गया तेरा दीदार किया था , एक मुद्दत तक मेरे दिलने तुझे चाहा था , उस बेकरारी में भी एक करार था .... वो हकीकत थी या सिर्फ मेरे मन का वहम था ??? पर जो भी था बड़ा ही लाजवाब था .... वो गली के नुक्...
 
 
 
 
  अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 

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छत्तीसगढ़ में राम, अब से रावण नहीं मरेगा-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Thursday, July 29, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

 
 
त्यौहारों का मौसम आ गया है। सावन के बाद अब लगातार त्यौहार की त्यौहार हैं। आने वाले समय में राम और रावण का भी त्यौहार आएगा, लेकिन हमारे ब्लाग जगत में अभी से राम-रावण की बातें हो रही हैं।.....
 
  द्वारा ग्राम चौपाल - 7 घंटे पहले पर पोस्ट किया गया
*छत्तीसगढ़ में राम* भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के बनवास काल में 10 वर्ष छत्तीसगढ़ में गुजारे हैं। यह निष्कर्ष “राम वनगमन मार्ग शोध दल” ने अंचल का दौरा कर तथा भगवान राम से सम्बंधित विभिन्न ग्रंथों यथ...
 
अब से रावण नहीं मरेगा कहते हैं, रावण व्यथित नहीं होता मैं, कैकसी-विश्वश्रवा पुत्र दसग्रीव सूर्पनखा सहोदर, मंदोदरी पति, लंकेश अपराधी हूँ , हाँ! मैं अपराधी हूँ... पर मात्र एक अक्षम्य अपराध सी...
 
इधर लगातार कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं जिनसे जनतंत्र के पक्षधरों का चिंतित होना स्वाभाविक है। अभी हाल में नई दिल्ली स्थित एक टीवी चैनल पर कतिपय लोगों ने इसलिए हमले किए हैं कि उसके द्वारा रिपोर्ट-वि...
 
मौलिक विज्ञान लेखन * ** * आसमान में कितने तारे ? विश्वमोहन तिवारी प्राक्कथन आज का युग विज्ञान और प्रौद्योगिकी का है। यदि हम चाहते हैं कि हमारा देश विश्व में सम्मान से रहे और समृद्ध रहे तब हमें...
 
भाग 1 से जारी ...* कोने मुझे शांत तपस्वियों से लगते हैं । सड़क से गली की राह दिखाता अन्धा मोड़ ऐसा कोना होता है जिसकी परवाह सभी करते हैं लेकिन वह निस्पृह, बस बना रहता है - कभी कभार किसी सवारी की छील छाल क...
 
 
सड़क किनारे झोपड़ी गरीब की … गहन अँधेरा रात का ……. पर उसे तो है रात भर जागना….. आज रात को जागना है उसे …. दाई से खबर सुनने को ….. आधी रात यूं बोली दाई …… गरीब तेरे घर लक्ष्मी आई , आधी रात बाद जगा बेटी की ...
 
नास्तिक हो जाने से अच्छा होता, मैँ नास्तिक ही होता। तुझे क्या पता, ईश्वर, मानव मन की पीड़ा और उस अहसास का जो एक आदमी के संपूर्ण जीवन मेँ संचित धारणाओँ के धराशायी होने पर उसके अंतर मेँ पैदा... मेरे हिंदी कव...
 
इत्तिफाक...एक अगस्त...फ्रेंडशिप डे...और हमारी IIMC का रियुनियन एक ही दिन...वक़्त बीता पता भी नहीं चला...पांच साल हो गए...२००५ में में पहला दिन था हमारा...आज...पांच साल बाद फिर से सारे लोग जुट रहे हैं... --...
 
मैं स्वतन्त्र लेखक-पत्रकार हूँ. संघर्ष मेरे जीवन का पाथेय-सा बन गया है, क्या करुँ. किसी तरह अपना छोटा-सा दफ्तर बनाया है. जिसका मालिक, चपरासी, मैसेंजर सबकुछ मै हूँ. मैंने अपने कार्यालय में प्रख्यात चिन्तक ...
 
आप भी एक टिप्‍पणी का दान किसी न किसी पोस्‍ट पर करते चलिए ओर अगर दानवीर कहलाना चाहते हैं तो किसी भी पोस्‍ट को टिप्‍पणी पाने से महरूम मत कीजिए।
 
महेन्द्र मिश्र की एक चिट्ठी मानसून के नाम...
एक चिट्ठी मानसून के नाम... प्रिय हे मानसून जी ... यहाँ हम सब धरती वासी अच्छी तरह से हैं और हम सभी आशा करते हैं की आप जहाँ भी होंगें अच्छी तरह से होंगें . हर वर्ष हम सभी गरमी के सीजन की समाप्ति के बाद से...
 
लिमटी खरे कहते हैं- कामन वेल्थ गेम्स का रास्ता काटते मणिशंकर
किसे ''शैतान'' बताने की जहमत उठा रहे हैं अय्यर? * ** *कांग्रेसी ही नहीं चाह रहे राष्ट्रमण्डल खेल की सफलता * *अय्यर उवाच: शैतान ही पैसे की बरबादी का कर सकते समर्थन * *रक्षात्मक मुद्रा में दिख रही का...
 
भाई आज एक तो पहले ही लेट हो चुके हैं. उस पर से यदि हम आप लोगों से बतियाने बैठ गए तो आप भी कहेंगें कि एक तो सुबह से चर्चा बाँचने को नही मिली, आधा दिन गुजर गया और अब आए हैं तो आते ही बातों मे... 
 
कोई जंगल बचा रहा है, कोई पहाड, कोई पेड तो कोई नदी, कोई लडकी तो कोई बच्चा. नहीं है किसी का ध्यान, छीजती इंसानियत पर. कोई आओ, बचाओ उसे. वह बच गई तो सब बच जाएंगे, पेड, पहाड,धरती, स्त्री, बच्चे, खेत- सबकुछ....
 
कल तक नम थीं सिर्फ आँखें आज दिल भी नम है. कोई मॉनसून आ पहुंचा है अब तक शायद तुम से टकराने के बाद ....
 
 
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 
 
 

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"नाचै कुदै बान्दरी और खीर मदारी खाय", सारी दुनिया गोल है -ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Wednesday, July 28, 2010

ब्लाग जगत में जिस तरह से लोग फर्जी नामों से ब्लागरों को परेशान करने का काम करते हैं, उससे लगता है कि ब्लाग जगत में रहने से क्या फायदा, फिर सोचते हैं कि ऐसे अनाम लोगों से डर गए तो क्या मतलब है। बहरहाल चलिए देखे आज किसन क्या लिखा है.....
 
 
सभी को नमस्कार करता है आपका राज

 
 
ब्लूमबर्ग बिसिनेस वीक पत्रिका में Advertising के बारे में एक लेख पढ़ रहा था, कुछ इस तरह से लिखा था - “companies are taking cues from African Americans, Hispanics, and Asians to develop menus and adve...
 
बन्दर* बडी अकड मे चश्मा वश्मा लगाके. और शूट बूट पहन कर, हाथ में छाता लिये हुये बडे तैश मे मदारी के केबिन मे घुस गया. मदारी अपने आफ़िस में बैठा अगला मजमा लगाने की प्लानिंग कर रहा था. डमरू पर घुग्घी कबूतर ...
 
आज, 29 जुलाई को उड़न तश्तरी वाले समीर लाल का जनमदिन है। बधाई व शुभकामनाएं [image: celebrate] आने वाले जनमदिन आदि की जानकारी, अपने ईमेल में प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें। अपने मोबाईल फोन पर SMS के...
 
हताश न होना सफलता का मूल है और यही परम सुख है। उत्साह मनुष्य को कर्मो में प्रेरित करता है और उत्साह ही कर्म को सफल बनता है। - वाल्मी...
 
दफ्तर से समय से बहुत पहले ही निकल गया.. टी.नगर बस स्टैंड के पास के लिए, जहाँ मेरा एक मित्र किसी लौज में रहता है, किसी छोटे से दूकान से पकौड़े और जलेबी खरीदा और अपने मित्र के कमरे में ही बैठ कर उसे निपटाया.....
 
मानवता का सही चित्रण करती सशक्त कवितायें कहा। उनका सोचना है कि आदमी के बदलते चरित्र का सही चित्रण किया गया है। राजनीति कण कण में समा गई है और विलोम अर्थ ही शेष रह गये हैं। जाकिर अली रजनीश, मुकेश कुमार सिन्..

रात चुप है। पत्नी और बच्चे सो रहे हैं। सुकून है, जैसा आम घरों में आम तौर पर रहता ही है - एक निर्मल सहज बहती ज़िन्दगी। हर कोई अपनी भूमिका में निपुण, व्यवस्थित। जाने क्यों सूझा कि आज अठ्ठारह वर्षों के बाद त...
 
बस्‍तर हालात बत्‍तर, बदतर और बदतर ! हॉं आप सही पढ़ रहे हैं, भारत के छोटे से राज्‍य छत्‍तीसगढ़ के संपूर्ण बस्‍तर क्षेत्र में अब बारूदों की गंध छाई है। विष्‍फोट और गोलियों की आवाजें आम है, घोटुल सूना है, धन...
 
बंगलोर का मौसम आजकल बड़ा सुहाना हो रखा है. हलकी सी ठंढ पड़ती है और फुहारों वाली बारिश होती रहती है. सुबह सूरज भी बादल की कुनमुनी रजाई ढांप कर पड़े रहता है. ऐसे मौसम में सुबह उठना मुश्किल और नामुमकिन के बीच...
 
नई दिल्ली. यूपीए सरकार में पूर्व मंत्री रहे मणिशंकर अय्यर दिल्ली में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों से खासे नाराज दिख रहे हैं। अय्यर ने सवाल किया है कि कॉमनवेल्थ खेलों में ऐसा कौन सा खेल खेला जाएगा जो ख...
 
सबसे पहले तो यह स्पष्ट कर दूँ...कि अपने आलेख में ,समाज में व्याप्त किसी समस्या, कुरीतियों, भेदभाव का जिक्र अगर मैं करती हूँ तो व्यापक रूप में जो मेरी नज़रों से जो गुजरता है वही लिखती हूँ....अपवाद तो स...
 
प्रीती की दुनिया ! में अल्पना आंटी
बात है आज से तक़रीबन बारह साल पहले की.जब हम पटना में रहते थे... हम लोगों का एक किराये का मकान था पटना के कदमकुआं इलाके में...उस मोहल्ले में जिन्दगी कितनी बेफिक्र थी..कितनी हसीन....तीन फ़्लैट आसपास में थे......
 
मनोज कुमार बता रहे हैं- देसिल बयना - 40 : राजा राज को बेहाल रानी काज को बेहाल
देसिल बयना – 40 :: राजा राज को बेहाल रानी काज को बेहाल करण समस्तीपुरी पछिला हफ्ता तो हम एगो अजगुते (आश्चर्य) देखे। एक इडिअट बॉक्स में तीन इडिअट आ रहा था। अरे अमीर खान वाला फिलिम थ्री..

जातीय जनगणना के विरूद्घ विशाल मार्च* *नई दिल्ली, 27 जुलाई 2010 |* जनगणना में जाति को सम्मिलित करने के विरोध में "सबल भारत" द्वारा संचालित "मेरी जाति हिंदुस्तानी आंदोलन" ने आज एक विशाल मार्च का आयोजन ...
 
गुरूपूर्णिमा का दिन, मुहल्ले के सांई बाबा मंदिर में भंड़ारा का आयोजन । मंदिर बनवाने वाली महिला ही मुख्य आयोजक, उनके आदेशानुसार भंडारा चालू था । एक- दो घंटे तक मुहल्ले की भीड़ के साथ-साथ आसपास के ­झुग्गी-­झो...
 
 
 
  अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 
 
 
 

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मैं और मेरी तन्हाई., और कितने दिनों की है जुदाई-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Tuesday, July 27, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

बिजली की चल रही है आंख मिचौली
इसलिए सीधे चर्चा करते हैं हमजोली




साधना वैद्य पूछ रही हैं- कितनी दूर और चलना है  
कितनी दूर और चलना है ! पथ में ऊँचे गिरि रहने दो, मैं तुमसे आधार न लूँगी, सागर भी पथ रोके पर मैं नौका या पतवार न लूँगी, शीश झुका स्वीकार कर रही मुझे मिला जो एकाकीपन, किन्तु भूल कर भी करुणा की भीख नहीं लेगा म...
मैं और मेरी तन्हाई.. कब से फैले हैं .. मन-आंगन में.. बातें करते हैं .... * *क्यों तन्हाई तुम रोज़ चली आती हो.. मेरे आँगन में.. बिन बुलाये - -- मेहमान की तरह..!! रोज़ एक टीस लेकर आती हो.. मेरी...
सावन आ गया हमेशा की तरह पुरे एक साल बाद , हर बार की तरह अपनी खूबसूरती को समेटे ...पर फिर भी कहीं न कही एसा लगता है , कि हर बार कुछ कमी रह जाती है अब सावन भी पहले जैसा नहीं रहा है .शायद होगा भी पर मेरे गाँव...
ब्रह्म जानाति ब्राह्मण:* -- ब्राह्मण वह है जो ब्रह्म अर्थात ईश्वर या परम सत्य को जानता है, अतः ब्राह्मण का अर्थ है - "ईश्वर को जानने वाला " और जो वेद-पुराणों तथा अन्य महान पुस्तकों का ज्ञाता, पूजा-पाठ...
तीन दिनों की बारिश* प्रांत को जलमग्न किया किसान हुए कहीं खुश झुग्गी झोपडी के वासिंदों को क्यों तुने अर्धनग्न किया (२) मांग बहुत है पानी की है यह किसी से छुपा नही पर यह क्या! तीन दिनों से हो रही बा..

यमन देश के एक छोटे से प्रान्त में एक कहवाखाना हुआ करता था. रेत के टीलों में दूर देश के मुसाफिर जैसे पानी की गंध पा कर पहुँच जाते थे. एक छोटा सा चश्मा उस छोटी सी बस्ती को जन्नत बनाये रखता था. बस्ती से कुछ ...
क्या ५ रुपये के सिक्के आप की जान बचा सकते है ?? शायद ................. हाँ !! बता रहे है *कारगिल के योद्धा व परमवीर चक्र विजेता जोगेंद्र सिंह यादव| * *पूरी कहानी यहाँ है ! 
संजीव शर्मा कहते हैं- यदि महिलाएं डायन हैं तो पुरुष कुछ क्यों नहीं?
पिछले दिनों तमाम अख़बारों में एक दिल दहलाने देने वाली खबर पढ़ने को मिली.इसमें लिखा गया था कि देश में अभी भी महिलाओं को डायन बताकर मारा जा रहा है.दादी-नानी से सुनी कहानियों के मुताबिक डायन वह महिला होती है जो...
 
सावन शुरु हो गया है। इस मौसम में बादल, बिजली, फुहार-बौछार, धूप-छांव की आंख मिचौनी, इन सब को देख कर मुझे कुछ खास दिन, कुछ खास लोग बरबस याद आ जाते हैं। सावन में नदी, तालाब, पोखर, हरियाली, सब, बहुत-बहुत...
उस शहर की लडकियां..---------------->>>दीपक 'मशाल'
 
बड़ा जुझारू शहर है वो उसमें रहते हैं साहसी लोग जो नहीं डरते किसी तकलीफ से ऐसा नहीं कि वहाँ नहीं आते दैहिक दैविक और भौतिक ताप बेशक रामराज्य नहीं वहाँ पर लोग जिंदादिल हैं तभी तो उसकी जड़ें नहीं खोखला ...
मैं दर्द होता तो आपकी आंखों से बहकर अपना अस्तित्व समाप्त करना चाहता उस खारे आंसू की तरह जो देश दुनिया की फिक्र से दूर बच्चों की आंखों से निश्चल बहा करता है। मैं खुशी होता तो आपकी मुस्कुराहट के रूप में...
कविता संस्कृति का एक हिस्सा है और निरंतर कविता संस्कृति को बढ़ाने का भी काम करती है जिसका मनुष्य एक अहम हिस्सा है। इसलिए कह ले सकते हैं कि कविता सबसे पहले रचनाकार को बदलती है। कविता लिखने के बाद या लिखते हु...
हम अपनी समझदारी की धाक नासमझ दिल्लीवालों पर तो जमा ही सकते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स जैसा इंटरनेशनल मौका है। चाहें तो विदेशियों और खिलाड़ियों पर भी अपना रौब गालिब कर सकते हैं। किसने कहा है कि रौब गालिब करने के ल...
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 

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अब न रही धूप कड़ी-लगी है सावन की झड़ी- ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Monday, July 26, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
सावन आने के पहले से ही हमारे राज्य में ऐसी झड़ी लगी है कि बारिश रूकने का नाम नहीं ले रही है। वैसे बारिश को रूकना भी नहीं चाहिए। अगर बारिश रूकी तो अपने किसानों के चेहरों आयी रौनक गायब हो जाएगी। झड़ी ने अच्छी फसल की उम्मीद जगायी है। 
सावन की झड़ी* सावन की झड़ी आज भी दिन भर लगी रही ;अभी रात १२.२६ बजे जब मै यह पोस्ट लिख रहा हूँ , बारिस का क्रम जारी है . नदी नाले उफान पर है . शाम को महासमुंद से लौटते...
महेन्द्र मिश्र कहते हैं- आया सावन झूम के ...
कल गुरुपूर्णिमा का दिन था . सुबह उठते ही तरह तरह के कई प्रोग्राम बनाये पर सुबह से बारिश का जो सिलसिला शुरू हुआ तो वह रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी और मेरे अरमानों पर पानी फिर गया . २४ घंटों के दौरान शहर म..
जिस प्रकार पुरुष की कारगुजारी देखकर महिलाओं में ईर्ष्‍या उत्‍पन्‍न हो जाती है। वैसा ही कुछ चप्‍पलों के मन में चल रहा था। चप्‍पलों की आपस में कई बार चर्चा भी हो चुकी थी कि अपने कारनामों से तो अब तक कोई ना...
कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में इन दिनों रिफ्रेशर कोर्स चल रहा है और मुझे भी इसमें सहयोग करना करना था लेकिन किन्हीं अपरिहार्य कारणों से जा नहीं पाया हूँ। कई बार इस कार्यक्रम में भाग लेन..

निगाहों में रख लो और दिल में बसा लो मुझे हाथों की लकीरों में लिल्लाह सजा लो मुझे मैं डूबती जाती हूँ इक कुंद सी आवाज़ हूँ थामो तो मेरा हाथ बाहर तो निकालो मुझे वो धूल का ज़र्रा हूँ मैं बस यूँ ही पड़ी रहत...
मुझे लगता है सुपरमैन शुरू से ही कंफ्यूज है। पहले तो लगता था कि कंफ्यूज है लेकिन अब लगता है कि उस पर जानबूझकर इस प्रकार का द्वंद्व थोपा गया है। सुपरमैन खाली उड़ने वाला सुपरमैन नहीं है। मेरे सुपरमैनों में स्...
पालक खुद सोच समझकर शाला में प्रवेश दिलाएं, किसी शाला के लिए हमारी कोई जवाबदेही नहीं: पटले* * सिवनी। किस शाला में प्रवेश दिलाना है कौन सी शाला बच्चों के लिए अच्छा और स्वच्छ वातावरण देने में सक्षम है, कौन ..

हुसैन प्रसंग* " डबडबाती भाषा से बाहर आते हुए कुछ बातें " -* प्रभु जोशी* [image: image-rape-of-india] MF Husain's painting 'Rape of India' on Mumbai Blasts displayed in ‘London Art Gallery’ *मध्यप्र...
राम त्यागी बता रहे हैं- गुरु पूर्णिमा उत्सव का आनन्दकल ग्रॉसरी करने जाना था तो सोचा कि पास में ही साईं बाबा का मंदिर है, तो वहाँ भी घूम आयेंगे | वहाँ जाकर पता चला कि गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है और उसके उपलक्ष्य में एक रथ यात्रा भी निकाली जा रही है | न...
शेखर गुप्ता कुछ माह पहले ही मैंने अपने कॉलम में लिखा था कि पाकिस्तान का सत्ता तंत्र समय-समय पर गफलत में आ जाता है। उनके यहां कुछ ऐसे हालात बन जाते हैं कि सहसा वे अपनी ‘जीत’ को लेकर आश्वस्त हो जाते हैं। ले...
उसने टेबल से उठते हुए एक बड़ी पैग हलक में उतारी, प्लेट में कुछ शेष बच गए काजू के तुकडों को मुट्ठी में उठाते हुए बार से बाहर निकल गया। लडखडाते कदमों से बाहर खडे बाईक के इग्नीशन में चाबी डालते हुए वह ठिठक गय...
Top visitors countries 1 United States 2 India 3 Brazil 4 Indonesia 5 Mexico 6 Spain 7 Italy 8 United Kingdom 9 Germany *अन्य कुछ तथ्य ब्लागर के बारे में * Networth & Visitors [www.blogger.com] Data is es...
रवीन्द्र प्रभात कहते हैं- श्रेष्ठता का पैमाना :लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान
जिन्होंने अपने नन्हे मन में छिपी बड़ी इच्छाशक्ति के बल पर ब्लोगोत्सव को दिया एक बड़ा आकाश और संगीत की एक ऐसी जमीन जिसपर टिककर आज पूरा हिंदी चिट्ठाजगत सर उठाकर देखने को आतुर है आकाश के झिलमिल सितारों को .....
आज वक़्त नहीं था मेरे पास…सुबह से ही इधर-उधर भागता फिर रहा था मैं…सारे काम मुझे ही तो संभालने थे| मेहमानों का जमघट लग चुका था|उन्हीं की खातिरदारी में ही फंसा हुआ था|खूब रौनक-मेला लगा था....
क्या जानो आप की जुबान किसे कहते है ??? क्या जानो लब्जों को जो बेजुबान रहते है ??? क्या जानो उन सवालोंको जिसके कोई जवाब नहीं होते है ???? क्या जानो उन बंदगी को जो पत्थरसे टकराती है ???? क्या जानो उन आवाजोका ग...
 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

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शोषण की शिकार लड़कियों को सामने आना चाहिए, , कोई ये कैसे बताएं -ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Saturday, July 24, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज  
किसी परेशानी की वजह से कल हम चर्चा नहीं कर पाए। आज भी मन ठीक नहीं है, फिर भी सोचा चलो यार चर्चा कर लेते हैं, शायद इससे मन अच्छा हो जाए। लेकिन कहते हैं कि मन ही अच्छा न हो तो क्य़ा किया जा सकता है। खैर चलते हैं आज की चर्चा की तरफ....
राजतन्त्र  में शोषण की शिकार लड़कियों को सामने आना चाहिए
खेल जगत में ज्यादातर महिला खिलाडिय़ों का किसी न किसी रूप में यौन शोषण हो रहा है, यह बात जग जाहिर है। लेकिन यहां पर सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिन खिलाडिय़ों का यौन शोषण होता है उनमें से काफी कम खिलाड़ी ऐसी ह...
कोई ये कैसे बताएं की वो तनहा क्यों है ?????? एक फिल्म अर्थ की ये बेहतरीन ग़ज़ल है .......... तो शायद इस का जवाब देने की कोशिश की मैंने ............ तलाश एक हाथ की जो साथ दे उम्र भर के लिए वो प्यास जो अनबुझ ...
कभी कभी बैठे बैठे यूँ ही मन मे कई ख्याल आते रहते है . अब देखो आज खाना बना रही थी तो सोचा आस पास ही कितनी चीजे है जो सोचने को और समझने को मजबूर कर दे ,अगर हम सोचें तो ..पर अब सब मेरे जैसे निक्कमे और खाली त... 
सुबह की चाय तेरे हाथो से पीना भीगे बालो में उलझे मोतियों को तोडना चादर को फेंक तेरे आँचल को ओढ़ना मीठी शरारत से तेरे हाथ को मोड़ना हर दिन तेरी मुस्कान के साथ शुरू करना चाहता हूँ * 
ज्‍योतिष के पक्ष्‍ा और विपक्ष में तर्कों की कमी नहीं , पर किसी का यह तर्क देना कि हम भविष्‍य को अनिश्चित ही देखना चाहते हैं , इसलिए ज्‍योतिष के अध्‍ययन की कोई आवश्‍यकता नहीं , सबसे बेकार का तर्क है। यदि आप...
आज, 25 जुलाई को - घुघूती बासूती - नारी ब्लॉग की सूत्रधार रचना सिंह का जनमदिन है। बधाई व शुभकामनाएं आने वाले जनमदिन आदि की जानकारी, अपने ईमेल में प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें। अपने मोबाईल...
ॐ* *बंदऊँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥* *अमिअ मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू॥* आज गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सभी गुरुओं को प्रणाम करता हूं जिनके मार्गदर्शन एंव कृपा से इस मुकाम ...
जहां पांव में पायल और माथे पे बिंदिया...इट्स हैप्पन्ड ओनली इन इंडिया...वाकई कुछ चीज़ें सिर्फ भारत में ही हो सकती हैं...जो यहां हो सकता है, वो और कहीं नहीं हो सकता...विश्वास नहीं होता तो देख लीजिए अपनी आंखो...
देश की जनगणना में जाति को शामिल करना/न करना का विवाद अपने अलग रंग में है। आये दिन बुद्धिजीवी इसको लेकर प्रदर्शन, धरना आदि में व्यस्त रह रहे हैं। बैठे बिठाये एक मुद्दा मिल गया है। (चित्र गूगल छवियों से ...
बडे दुख का विषय है कि अभिभावक अपने पाल्यों की प्राथमिक शिक्षा के प्रति सतर्क नहीं है।इसे अक्षर ज्ञान के अतिरिक्त और कुछ नहीं माना जाता जबकि सारी इमारत इसी नीव पर आधारित होती है।किस कक्षा को पढाती हो ,क्या ...
वेदिका कहती हैं- जब भी दिल को कोई बात अखर जाती है ...!
हर बार तुम्हारी गली नजर आती है > जब भी दिल को कोई बात अखर जाती है ...! > कोई अनजाने ही कुछ कह जाये तो भी कोई कह के कुछ रह भी जाये तो भी कोई कुछ न बोले पर शक्ल बना ले > हर बात पे अब तो साँस बिखर ... 
भारत यूं ही सोने की चिड़िया नहीं कहलाता था। उस समय राज्य की तरफ से कामगारों को पूरी सुरक्षा तथा उनकी मेहनत का पूरा मुआवजा दिया जाता था। खासकर किसानों को हारी-बिमारी या प्राकृतिक आपदा में भी राजा से पूरा संर...
ललित शर्मा बता रहे हैं- नक्सल हिंसा,लोकतंत्र एवं मीडिया पर राष्ट्रीय परिचर्चा कल रायपुर में
साधना न्युज चैनल की स्थापना के दो वर्ष पूर्ण होने पर नक्सल हिंसा, लोकतंत्र एवं मीडिया विषय पर एक राष्ट्रीय परिचर्चा का आयोजन कल 25/07/2010 को न्यु सर्किट हाऊस के सभागार रायपुर में किया जा रहा है। इस आयोजन...
मनोज कुमार कहते हैं- धारासार धरा पर
(१.) अंबुद, अंबुधर, अब्र, अभ्र, घटा, घन, घनश्याम, जलद, जलधर, जीमूत, तोयद, तोयद्गर, धाराधर, नीरद, नीरधर, पयोद, पयोधर, पर्जन्य, बादल, बदरी, बदली, बलाहक, मेघ, वारिद, वारिधर।* *(२.) बादलों का समूह : कादंब..

रशमी रवीजा कहती हैं- ज़िन्दगी की कड़ी धूप और कांच के शामियाने
अक्सर देखने में आता है, कि लोग कहते हैं 'नई पीढ़ी नहीं जानती प्रेम किस चिड़िया का नाम है, 'प्रेम' को एक टाइम-पास या खेल की तरह लेती है', 'अपने वायदे पर कायम नहीं रहती वगैरह..वगैरह.पर कई बार मुझे लगता है, ...
पानी बरसा धरती में खिल उठीं कोपलें और मिट गयीं धरती में सब पड़ी दरारें पेड़ो पर फिर पत्ते झूमे आँखों में छाई हरियाली कोयल ने छेड़ी है फिर से वही पुरानी कूक निराली मन य...
  अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे

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ये है 50वीं चौपाल-जिसमें है लिंक्स का महाजाल-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Thursday, July 22, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज
हम 50वीं ब्लाग चौपाल में चाहते थे कि 50 लिंक्स देने की कोशिश करें, लेकिन यह संभव नहीं हो सका। फिर भी हमने करीब 36 पोस्ट के लिंक्स दिए हैं। आशा है हमारे ब्लागर मित्रों को पसंद आएंगे। जब हमने चौपाल सजाने का आगाज किया था तो पहले दिन भी 36 पोस्ट के लिंक्स दिए थे। हमने अब तक अपनी चौपाल में किस भी तरह का भेदभाव नहीं किया है और पूरी तरह से गुटबाजी से अलग रहते हुए हर ब्लाग को शामिल किया है, शायद यही वजह है कि कुछ लोगों को यह बात रास नहीं आ रही है, लेकिन हमने जो काम शुरू किया है, उसे जारी रखेंगे कभी तो सबके समझ में यह बात आएगी कि गुटबाजी में कुछ नहीं रखा है, जो मजा साथ मिलकर सबके साथ चलने में है, वह मजा चंद लोगों के साथ गुटबाजी में चलने में नहीं है।

महानदी के तट पर विशाल भीड़ दम साधे खड़ी थी, उन्नत माथे पर त्रिपुण्ड लगाए एक दर्जन पंडितो नें वेद व उपनिषदों के मंत्र व श्लोक की गांठ बांधे उस प्रखर युवा से प्रश्न पर प्रश्न कर रहे थे और वह अविकल भाव से सं...
विकासशील(विनाशशील*) देश करने लगते हैं नक़ल विकसित देशों की संस्कृति की मसलन नाईट पार्टी, डेटिंग, जश्न का जोश सुरा सुंदरी के संग हर रोज होता है कुछ न कुछ 'डे' मदर्स डे, फादर्स डे वैगर...
आपने देखा यह चित्र इसमें आप कुछ तलाशिए तलाशेंगे आप आपको मानेंगे हम वैसे नहीं है यह कोई जंग फिर भी इसमें दिखलाई देते हैं ब्‍लॉगिंग के रंग। 
आज, 23 जुलाई को धर्म और अध्यात्म के आलोक स्तम्भ, Albelakhatri.com, स्वर्णिम गुजरात वाले अलबेला खत्री का जन्मदिन है। बधाई व शुभकामनाएं आने वाले जनमदिन आदि की जानकारी, अपने ईमेल में प्राप्त करने के लिए यह...
कल अजित जी की एक पोस्ट पढ़ी थी ... http://ajit09.blogspot.com/2010/07/blog-post_21.html ..जिसमें उन्होंने चिंता व्यक्त की थी कि 'अपने देश भारत से क्यों लोग नफ़रत करते हैं....' तो सबसे पहले तो मैं अजित जी स...
अजित गुप्ता* जी ने अपनी पोस्ट पर बड़ा ज्वलंत मुद्दा उठाया- पता नहीं हम अपने देश भारत से नफरत क्‍यों करते हैं? ...बड़ी सार्थक बहस हुई...एक से बढ़ कर एक विचार कमेंट्स के ज़रिए सामने आए...अजित जी ने भारत की ...
तमिल व्याकरण में किसी भी प्रश्न पूछने के लिए अंत में 'आ' का प्रयोग किया जाता है.. जैसे 'पुरंजिदा' का मतलब 'समझ गए?' होता है.. ठीक इसी तरह अंग्रेजी के शब्दों को भी लोग तमिल व्याकरण में ढाल कर लोग उच्चारण कर...
इस बार ‘परचम’ पटना ने लहराया है। यहां विधायिका खुलकर बेशर्मी पर उतर आई। यहां तक कि विधानसभा के माननीय स्पीकर पर चप्पल फेंकी गई। कई ‘माननीयों’ को घसीट-घसीटकर मार्शलों को विधानभवन से बाहर करना पड़ा क्योंकि ...
भारत में रेडियो के बढ़ते कदम* आज प्रसारण दिवस है। देश के लिए नई उपलब्धियों का तथा रेडियों श्रोताओं के लिए यह खुशी का दिन है। 83 वर्ष पूर्व 23 जुलाई 1927 को भारत में रेडियो का पहला प्रसारण बम्बई से हुआ। दु...
आज भारत और श्रीलंका की क्रिकेट टीम के बीच पहले टेस्ट मैच का अंतिम दिन था। जैसा कि कल के हालात और रनों को देखकर अंदाज हो गया था, अन्त में परिणाम भी वैसा ही निकला। भारतीय क्रिकेट टीम को हाराना था सो हारी,.

आप की शुभकामनाएं साथ हैं* *क्या हुआ गर कुछ बलाएँ साथ है.* *हारने का अर्थ यह भी जानिए* *जीत की संभावनाएं साथ है* *इस अँधेरे को फतह कर लेंगे हम* *रौशनी की कुछ कथाएँ साथ है.* *आप की शुभकामनाएं साथ हैं
अनिल पुसदकर बता रहे हैं- प्रभाष परंपरा की रचनात्मक पहल शुरू!
कल रात उस जमात पर लिखने बैठा जिसने कुछ सालों पहले पूरे देश में गणेश जी को दूध पिला दिया था .इनके दुष्प्रचार तंत्र का यह सबसे रोचक उदाहरण रहा है. तभी दो जानकारी मिली .उस पोस्ट को रोक दिया है. पता चला कि..

अभी कुछ ही दिनों पहले आपने अखबारों व ब्लॉग जगत में पढ़ा होगा कि एक वृद्ध जोड़ा लोकी का रस पीने के कारण मृत्यु को प्राप्त हो गया | आखिर ऐसे कौनसे कारण है कि हमें आज प्रदूषित खाद्य पदार्थ सेवन करने को बाध्य हो...
आंच पर आरज़ू * -- करण समस्तीपुरी पिछले सप्ताह इस ब्लॉग पर श्री मनोज कुमार जी ने *'फुर्सत मे' एक ग़ज़ल लिखी थी, आरजू। *पाठकों ने बेपनाह गौर-तबज्जो की, भरपूर सराहा... । ग़ज़ल की रवानगी ने मुझे भी कुछ लिखने की ...
श्रीलंका ने आज बड़े शालीन ढंग से बड़बोले धोनी को जवाब दिया जब उन्होंने टेस्ट क्रिकेट की रैंकिंग में पहली पायदान पर काबिज भारत की टीम को दस विकटों से कारारी हार का मजा चखाया। क्रिकेट को, शालीनता जिसकी पहचान र...
पूजा कहती हैं- हमेशा के लिए अधूरा हो जाना
किसी से प्यार करने पर हमेशा के लिए अधूरा हो जाना पड़ता है नहीं वापस मिलता है बहुत कुछ... अच्छी तरह कमरा बुहार कर आने के बाद भी सब कुछ कहाँ वापस आ पाता है छूट ही जाती हैं कुछ किताबें, और उनके पन्नो पर लिखा ह...
एक ऐसा गज़लकार जिनकी ग़ज़लों का सबसे बड़ा आकर्षण प्रभावोत्पादकता है . पढ़ने वाले को यह महसूस होता है कि यह उन्ही की दिली बातों का वर्णन है। एक ऐसा गज़लकार जिनकी ग़ज़लों के शिल्प और कथ्य में गज़ब का तारतम्य होता ...
रूलाना हर किसी को आता हसना किसी किसी को आता है रुलाके जो मना ले वो सच्चा यार है और जो रुला के खुद भी आसू बहा दे वो तुम्हारा प्यार है शेर किस का है पता नहीं 
लिमटी खरे कहते हैं- आखिर क्या मजबूरी है, ममता बहुत जरूरी है
देश की कीमत पर कांग्रेस निभा रही है गठबंधन धर्म!* ** * * *पश्चिम बंगाल से बाहर निकलिए ममता जी* *आप पूरे भारत गणराज्य की रेल मंत्री हैं ममता जी* * * *आखिर ममता को मंत्रीमण्डल से बाहर का रास्ता क्यों नह..

अभी कुछ दिन पहले ही एक पोस्ट लिखी थी कि जब 1 रु प्रतिदिन से भी कम में जब एंटी वायरस उपलब्ध हैं तो वायरस का खतरा मोल लेना उचित नहीं है । यही बात हम ब्लोगर्स पर भी लागू होती है जब 350 से 500 रु में अपने डोम...
बचपन से लेकर आज तक खाने को लेकर मेरे मन में कभी पसंद-नापसंद का द्वंद्व नहीं रहा। इसका एक बड़ा कारण तो यह रहा कि छुटपन में ही मेरी राय बन चुकी थी कि खाने को लेकर पसंद-नापसंद बुर्जुआ मानसिकता की अभिव्यक्ति है...
ज़िन्दगी व्यर्थ वक्त की बर्बादी नतीजा---शून्य अगर किसी एक को भी अपना ना बना पाया या किसी का बन ना पाया मानव! व्यर्थ भूभार ही बना अगर कोई एक कर्म ना किया ऐसा जिसे याद रखा जा सके पूजा का ढोंग तेरा ...
आज सुनिए मेरी पसन्द का यह गीत! * *इसको स्वर भर कर गाया है - * *सुश्री मिथिलेश आर्या ने!* *(यह गीत मेरा लिखा हुआ नहीं है।) * *गीत के बोल हैं-* *"जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया….* * * *जीवन खतम हुआ तो जीने ...
एक विख्यात कवि महोदय कविता छोड़कर कभी कभी व्यंग्य लिखते थे . आज अच्छे मूड में वे अपनी कविता लिखने जा रहे थे तो वहां बच्चों की फौज हल्ला मचाने आ गई तो उनका लिखने का मूड खराब हो गया . उन्होंने जोरों से चिल्..

तुम मेरे जजमान हो॥ मै शमशान का पंडा॥ लाशें यहाँ हमेशा आती॥ यही कर्म मेरा धंधा॥ जवान बेटो की अर्थियो पर॥ माँ बाप के आंसुओ की बूँद होती ॥ पत्थर दिल भी पिघल जाता है॥ जब विधवाए बिलख के रोटी है॥ फिर भी उनको ठगता...
मुझको तेरा ख्याल आता है------------- शाहनवाज़
जब भी चाँद आसमाँ में आता है तेरा चेहरा चुरा के लाता है जब कोई गीत नया लिखता हूँ मुझको तेरा ख्याल आता है भँवरे मद-मस्त हो कर चलते हैं फूल तेरी तरह मुस्काता है क्योंकि यह कारनाम ऐ हमदम यहाँ बस आपको ही आता...
कभी बरसते बरसातमें उसका चेहरा नज़र आया , कभी काले बादलोंमें उसका पयगाम नज़र आया , कभी अपनोंकी भीड़के बीचमें भी वो झांकता नज़र आया , कभी उदास बैठे एक कोने में हम बैठे थे तन्हासे हम बालोंको सहलाते हमारे गमको बांट..

जब तक कोई शख्स 'अल्लाह हो ! अल्लाह हो ! हे भगवान ! हे भगवान !' चिल्लाता है, निश्चय जानो, उसे ईश्वर नहीं मिला, क्योंकि जो उसे पा लेता है वह खामोश हो जाता है -स्वामी रामकृष्ण परमहंस 
 यह व्यावसायिकता और सेलैबिलिटी का ज़माना है -खुद को जितना बेंच सको तो बेंच! सब कुछ, ईमान उमान भी बेंच बांच कर खुद की पोजीशन बुलंद करो नहीं तो मूषक स्पर्धा में पीछे रह जाओगे -कलयुग का यही उद्घोष वाक्य है. इस ...
आज कल फोटो सैशन का जमाना है और देखिये मैंने भी बहुत से फोटो खींचे हैं ! ज़रा देखिये मेरी फोटोग्राफी और फोटो पर क्लिक करके पहचानियेगा और बताइयेगा ...किसका फोटो (लेख) कैसा लगा.... कुछ नाज़ुक लम्हो...
प्रिय ब्लॉगर मित्रो प्रणाम ! कैसे है आप सब ? लीजिये मैं फिर से हाज़िर हूँ आप सब के लिए एक और ब्लॉग वार्ता ले कर अपने इस ब्लॉग 4वार्ता के मंच से ! आशा है आप सब को यह ब्लॉग वार्ता पसंद आएगी ! आपका शिवम् मि...
चर्चाकार-पं.डी.के.शर्मा “वत्स” सुना है कि इन्सानों के जैसे ही उल्लूओं की भी अनेक प्रजातियाँ होती हैं. इन प्रजातियों में कुछ उल्लू छोटे कद के व छोटे से...
अनूप शुक्ला की चर्चा- गुलामी जेहन की बड़ी मुश्किल से जाती है
कुछ पोस्टों के अंश 1. गुलामी जिस्म की रहती है जंजीर कटने तक गुलामी जेहन की बड़ी मुश्किल से जाती है | वसीम बरेलवी धीरू सिंह के ब्लॉग दरबार में 2. मतलब यही कि इस नियमन-प्रबंधन के पीछे आखिरकार कि...
हर महिने की तरह इस बार भी ब्लाँग आँफ द मंथ के पुरस्कारो कि घोषणा कर दि गयी है । ब्लाँगर साथियो को उत्साहित करने के लिये पिछले साल सुरु किये गये इस पुरस्कार के अन्तर्गत महिने के सर्वश्रेठ ब्लाँग को चुनकर उन...

 अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
.

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यौन शोषण का धंधा- समाज को कर रहा है गंदा-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Wednesday, July 21, 2010


 सभी को नमस्कार करता है आपका राज
 
खेल जगत को यौन शोषण से गंदा करने की जो खबर आयी है, वह कम से कम हमारे लिए चौकाने वाली नहीं है क्योंकि हमें मालूम है कि यह खेल बरसों से खेल जगत में चल रहा है। हम खुद सालों से इस पर लिखते रहे हैं। ब्लाग जगत में भी इस खेल पर लेखन की गूंज है। .....
 
ये लो! एक और पुरुष ने महिला का यौन शोषण किया। आपको सुनकर अचम्भा नहीं लगा? लगना चाहिए क्योंकि किसी भी पुरुष के लिए कितना आसान है किसी भी महिला का यौन शोषण करना। (चित्र गूगल छवियों से साभार) बात हॉकी की...
 
भारतीय हाकी टीम के कोच एमके कौशिक के यौन शोषण के मामले ने एक बार फिऱ से इस दिशा में लिखने के लिए मजबूर कर दिया है कि अपने राज्य में भी लगातार खिलाड़ियों का यौन शोषण होते रहा है। छत्तीसगढ़ में लगातार महिला ..

कब तक तुम अपने अस्तित्व को पिता या भाई पति या पुत्र के साँचे में ढालने के लिये काटती छाँटती और तराशती रहोगी ? तुम मोम की गुड़िया तो नहीं ! कब तक तुम तुम्हारे अपने लिये औरों के द्वारा लिये गए फैसलों ...
 
दानवीर लाहावती एंव दुकलहीन बाई बनी प्रेरणा श्रोत भारत में दान देने की परम्परा आदिकाल से चली आ रही है। राजा हरिश्चंद्र से लेकर भामाशाह तक की कथा हम लोग नित्य पढ़ते-सुनते है। जिन्होने देश-धर्म के लिए सर्...
 
इंडियन आइडल (Indian Idol)-शुरू से ही यह रियलिटी शो मेरा पसन्दीदा टीवी कार्यक्रम रहा है. उसके बाद दूसरा नम्बर आता है बिग बौस (Big Boss) का. हालांकि ये दोनो ही कार्यक्रम विदेशी टी वी चैनलों की नकल ही हैं परं...
 
चूरा मुर-मुर... दही खट्टा.... ! करण समस्तीपुरी पछिला महीना चमकी मौसी किरिया (कसम) देके बोलाई थी। कहिस कि रगेदन के ब्याह में परीच्छा का बहाना कर के नही...
 
हाइड़ पार्क लंदन का प्राचीन और ऐतिहासिक पार्क है। यहां पहले घना जंगल हुआ करता था। जिसमें जंगली जानवरों का बसेरा था। कालांतर में यह शाही परिवार का शिकारगाह बन गया। हेनरी अष्टम के समय से ही इसका रख-रखाव होने ...
 
वीरेंद्र सेंगर की टिप्पड़ी देखें बात-बेबात पर 
 
संगीता स्वरुप ( गीत ) द्वारा
 
मैं पिछले साल सीरिया की यात्रा पर गई थी। 10 दिन वहां रही और वहां के समाज को करीब से देखा समझा. खासतौर से औरतो को। ब्लाग के पुराने पोस्ट देखे तो वहां के समाज पर मैंने कई पोस्ट लिखे मिल जाएंगे। आज फिर ...
 

देश मैं महेगाई आसमान छू रही हैं ...हजारों लोग भारत मैं भूखे सो रहे हैं .गरीबों को दो वक्त कि रोटी हासिल नही हो पा रही हैं ...हजारों लोग भूखे पेट सो रहे हैं ..भूख से किसान आत्महत्याए कर रहे हैं ...द...
 
कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स के अवसर पर चूहे से चैट 
 
मै भ्रष्टाचारी का चोला हूँ॥ जो घर घर पूजा जाता हूँ॥ बाए हाथ से घूंस हूँ लेता॥ राज़ की बात बताता हूँ॥ दस लाख कतली देते है॥ पांच लाख तक चोर॥ अगर बात आगे बढ़ जाती... मच जाता है शोर॥ खड़े खड़े लोगो की बाते॥ अपने का...
 
 
 
 
 
 
  अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे
 
 
 

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दिल-तोड़ने से पहले थोडा इंतज़ार कीजिये, प्यार की नैया तो पार लग ही जाती है-ब्लाग चौपाल- राजकुमार ग्वालानी

>> Tuesday, July 20, 2010

सभी को नमस्कार करता है आपका राज

 
 
प्यार गर है एक सजा तो 
कविता में है बहुत मजा 
तभी तो आज फिर से 
ब्लाग जगत कविता से है सजा
 
 
यूँ बैठे बैठे न आप, आहें हजार लीजिये इश्क है गर आपको तो इज़हार कीजिये करवटों में गुजरेंगे, जागती रातें कितनी ख्याबों में आकार ही हमे बेक़रार कीजिये दबाने से नहीं हासिल, इश्क को मंजिल किसी रोज़ तो दिल क...
 
तुझे देख कर ही दिल बहक जाता है पूरी बोतल का नशा चढ़ जाता है शराब में भी कहा वो बात है तुम्हारे होठों में दिखती प्यास है फिर क्यों तुम्हारा मन उदास है आज तो हम तुम्हारे ही पास हैं करो लो आज मन की मुरा...
 
फिर एकदम नई ग़ज़ल, अपने चहेते सुधी ब्लागर और अच्छे पाठकों के नाम...* *बातें बड़ी भली करता है लेकिन वह इनसान भी हो* *क्या मालूम देवता बाहर भीतर इक शैतान भी हो* * * *इस दुनिया में भले जनों की अब गुंजाइश मु...
 
सिक्को की खनखनाहट सी हँसी मेरी ………….. कंधो पर झूलती दो चोटियों सी मस्ती मेरी ……. तार पर गीली चुनर सुखा दी हो किसी ने ,, उस में से गुजर कर आने वाली ठंडी हवा सी खुशबू मेरी …… ओस की बूंदों ने जमावड़ा लगाया हो ...
 
 
बेमौसम आँधी चलें, दुनिया है बेहाल ।* *गीतों के दिन लद गये,गायब सुर और ताल ।।* *नानक, सूर, कबीर के , छन्द हो गये दूर ।* *कर्णभेद संगीत का , युग है अब भरपूर । । * *रामराज का स्वप्न अब, लगता है इतिहास ।* ..

राम त्यागी कहते हैं- होली और फटा हुआ पैंट - कुछ यादें …
बात बहुत पुरानी है , करीब २० साल पुरानी तो होगी, मेरे बचपन का एक बहुत ही मजाकिया लम्हा !! हमारे गाँव के थोड़े से ही दूरी पर मेरे मामा का गाँव है, जहाँ पर होली अपने पूरे रंग में मनाई जाती है, एक अलग ...
 
बहुत साल तक मंजिल दर मंजिल मिले तो क्या मिले ??? बस थोडा बिछड़ भी लेते तो कोई और बात होती ..... तुमसे बात करना तो एक बहाना था उसमे एक आह सुनाई देती तो कोई और बात होती ..... हज़ार इम्तिहान ले रहा है ये जहाँ हम...
 
प्रतिभा कुशवाहा बतला रही हैं कि ब्‍लॉग जगत से उनका परिचय कैसे हुआ ? उनकी पढि़ए, फिर अपनी कहिए 
 
माय डियर राजकुमार! साहित्यकार शरद कोकाश जी, राजकुमार सोनी जी को जब ऐसा संबोधित करते हैं तब उन दोनों के बीच की आत्मीयता पढ़ने व सुनने वालों को भी सुकून देती है कि आज इस द्वंद भरे जीवन में व्यक्तियों के बीच ...
 
पिछले कुछ दिनों के दौरान न्यूज़ चैनलों पर आई खबरों से शुरुआत करते हैं: • क्या आप डबलरोटी की जगह पाँव रोटी खा रहे हैं? • ज़हरीले ढूध से बनी चाय पी रहे हैं आप? • आप की लौकी में ज़हर है? • खोवा और प...
 
आज* बहुत दिनों के बाद वक़्त मिला है कुछ लिखने का... वक़्त क्या .... समझ लीजिये मूड... बना है. इस दौरान सिर्फ पढ़ा है... और खूब पढ़ा है... लिखा भी है... वक़्त की कमी तो है ही... पर वो कहते हैं ना कि वक़्त...
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 
 
 
 

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तू भी मान उड़न तश्तरी का अभियान-तभी बचेगी सबकी जान- ब्लाग चौपाल राजकुमार ग्वालानी

>> Monday, July 19, 2010

  सभी को नमस्कार करता है आपका राज

आज इस बात की बहुत जरूरत है कि पर्यावरण को सुरिक्षत रखा जाए। इसके लिए पेड़ लगाने होंगे। अपने राज्य छत्तीसगढ़ में तो इसका आगाज हो चुका है, अब सभी को इसके बारे में सोचना चाहिए। ...
 
 
परसों ज्ञात हुआ कि पत्रिका सोपानStep के जुलाई २०१० के अंक में नारदवाणी कॉलम में, जिसे भाई अविनाश वाचस्पति जी नियमित लिख रहे हैं, में एक आलेख छपा, जिसका शीर्षक था ’ जुलाई भी बन गयी जून,सखी री आया न मानसून’...
 
निष्कपट निश्छल चेहरा * **हिलते हैं, ओष्ठ अधर दोनों न बोल पाते हुए भी *अपनी प्यारी सूरत औ **आँखों के भावों ..
 
पल क्षणों में क्षण घंटों में और घंटे दिन-रात में परिणित होते जाते हैं और समय अबाध गति से बीतते जाता है। काल का पहिया ज्यों-ज्यों घूमता है उम्र तिल-तिल करके घटते जाता है। शैशवकाल लड़कपन में लड़कपन किशोरावस्था..

एक ठेकेदार ने जबलपुर में विभाग के कर्मचारियों की सुरक्षा की चिंता किये वगैर एक विद्युत ट्रांसफारमर पोल क्रमांक - पी. ८ ई पर कुंए के ऊपर डी.पी. खड़ी कर कुंए के ऊपर २०० के.व्ही.ए० का ट्रांसफारमर लगा दिया है 
 
क्या करूँ मेरी कल्पना की उड़ान तो मुक्त आकाश में बहुत ऊँचाई तक उड़ना चाहती है लेकिन मेरे पंखों में इतनी ताकत ही नहीं है और मैं सिर्फ पंख फड़फड़ा कर ही रह जाती हूँ ! क्या करूँ मेरे ह्रदय में सम्वेदनाओं का...
 
तू सामने हो तो दिल बहक जाता है ! तेरे हाथ में परिंदा भी हो तो दिल जल जाता है ! तेरे होटों के रस को महसूस करने से ही मुझ पर मदहोशी तारी होती है ! 
 
मूलवासी* (लघुकथा) -- सत्येन्द्र झा [image: J0145810] "आपका नाम ?" "संतोष।" "पिता का नाम ?" "जी आत्मबल" "घर का पता ?" "घर नहीं है, साहब ! किराए के मकान में रहता हूँ। पता उसी दिन बदल ज...
 
प्राचीन काल से ही हमारे पूरे देश में लोक कथाओं, गीतों, पहेलियों तथा लोकोक्तियों इत्यादि द्वारा गूढ से गूढ बातों को सरलता से समझाने की परंपरा रही है। खासकर कथा-कहानियां सदा से रोचक, भावप्रद तथा शिक्षापूर्ण ...
 
मै प्रेम नगर की rअहने वाली॥ प्रेम की प्रेम दीवानी हूँ,। वह तो मेरा प्रेम दीवाना॥ मै उसकी घरवाली हूँ॥ सात साल पर बात हुयी थी॥ तेरह साल में हुयी मुलाक़ात॥ सोलह साल की भइल उमारिया॥ सूझे लाग उल्का पात॥ ..

जो लोग रंगकर्म से जुड़े हैं वे इस बात को बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि नाटक में अभिनय के लिये स्त्री पात्र जुटाना कितना कठिन काम है । निर्देशक को बहुत नाक रगड़नी पड़ती है तब कहीं जाकर नाटक में काम करने के लि...
 
अच्छा तो हम चलते हैं
कल फिर मिलेंगे 
 
 
 

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